शीर्षक: अंधेर रात
Part 2 — दरवाज़े के उस पार
काँच के दरवाज़े पर बनी वह भीगी हथेली कुछ सेकंड तक स्थिर रही। आयुष की साँसें इतनी तेज चल रही थीं कि उसे खुद अपनी धड़कनें सुनाई दे रही थीं। कमरे में अंधेरा था, सिर्फ फोन की फ्लैशलाइट काँपते हाथों में हिल रही थी। बाहर बारिश और तेज हो चुकी थी।
हथेली धीरे-धीरे काँच से हट गई। उसके हटते ही पानी की लकीरों के बीच वही नाम चमक उठा—
AYUSH
आयुष दो कदम पीछे हट गया। उसके पैरों से टेबल टकराई और कुर्सी गिर पड़ी। आवाज़ पूरे कमरे में गूँज गई। वह कुछ सेकंड वहीं खड़ा रहा, जैसे शरीर ने जवाब दे दिया हो।
तभी फोन फिर वाइब्रेट हुआ।
स्क्रीन पर वही अकाउंट चमक रहा था—
@AndherRaat
मैसेज आया—
“दरवाज़ा खोलो… मैं भीग रही हूँ।”
आयुष ने काँपते हुए बालकनी के बाहर झाँका। वहाँ कोई नहीं था। सिर्फ रेलिंग से गिरता पानी और नीचे धुँधली पार्किंग। तेरहवीं मंज़िल की ऊँचाई से नीचे सब धब्बों जैसा दिख रहा था।
उसने तुरंत परदा बंद किया और फोन पर लिखा—
“तू कौन है?”
Seen.
कुछ सेकंड बाद जवाब आया—
“जिसे तुमने अकेला छोड़ा था।”
आयुष के हाथ सुन्न पड़ गए। दिल की धड़कनें मानो थम सी गई, उसके दिमाग में वही नाम घूम गया—नंदिनी।
छह महीने पहले दोनों का झगड़ा हुआ था। नंदिनी रोते हुए उसके फ्लैट से निकली थी। बाहर भी ऐसी ही बारिश थी। आयुष ने पीछे से सिर्फ इतना कहा था—
“ड्रामा बंद करो।”
उस रात के बाद वह कभी नहीं मिली।
पुलिस ने आयुष से भी पूछताछ की थी, मगर कोई सबूत नहीं मिला। धीरे-धीरे मामला ठंडा पड़ गया… पर आयुष के अंदर डर नहीं, सिर्फ अपराधबोध बचा था।
और आज… वही रात जैसे लौट आई थी।
तभी कमरे का मुख्य दरवाज़ा टक…टक…टक… करने लगा।
आयुष जम गया।
तीन बार दस्तक हुई। फिर सन्नाटा।
वह धीरे-धीरे आगे बढ़ा। दरवाज़े की आँख से बाहर झाँका। कॉरिडोर खाली था। लंबी सफेद लाइटें जल रही थीं। कोई इंसान नहीं।
वह पीछे मुड़ा ही था कि फिर दस्तक हुई—इस बार ज़ोर से।
धड़ाम! धड़ाम! धड़ाम!
जैसे कोई मुट्ठियों से नहीं, पूरे शरीर से दरवाज़ा मार रहा हो।
आयुष डर के मारे पीछे हट गया।
फोन फिर चमका—
“मत खोलना। वो मैं नहीं हूँ।”
आयुष की रूह काँप गई।
अगर बाहर नंदिनी है… तो मैसेज कौन भेज रहा है?
दस्तक अचानक बंद हो गई।
कुछ सेकंड बाद दरवाज़े के नीचे की पतली दरार से पानी अंदर आने लगा।
आयुष झुककर देखने लगा। पानी नहीं था… गाढ़ा लाल रंग था।
उसने घबराकर पीछे छलांग लगाई।
फोन स्क्रीन फिर चमकी—
Video Received
उसने वीडियो खोला।
वीडियो में उसी फ्लैट का कॉरिडोर दिख रहा था। कैमरा उसके दरवाज़े के बाहर रखा था। टाइम स्टैम्प लाइव था… मतलब यह अभी रिकॉर्ड हो रहा था।
स्क्रीन पर उसका दरवाज़ा दिख रहा था।
धीरे-धीरे कैमरा बाएँ मुड़ा।
कॉरिडोर के कोने में कोई लड़की खड़ी थी। बाल चेहरे पर, कपड़े भीगे हुए, सिर झुका हुआ।
आयुष ने डरते हुए दरवाज़े की आँख से बाहर देखा।
कॉरिडोर खाली था।
उसने फिर वीडियो देखा। लड़की अब कैमरे के और पास आ चुकी थी।
उसने चेहरा ऊपर उठाया।
वो नंदिनी थी।
लेकिन उसकी आँखें पूरी काली थीं।
वीडियो में वह मुस्कुराई… और फुसफुसाई—
“पीछे देखो…”
आयुष के हाथ से फोन गिर गया।
कमरे के अंदर… उसके पीछे… किसी के भीगे कदमों की आवाज़ आ रही थी।
छप… छप… छप…
To be continued…