tell the fault in Hindi Women Focused by कमल चोपड़ा books and stories PDF | दोष बताओ

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दोष बताओ

​दोष बताओ
कमल चोपड़ा

​पति के माथे पर बल पड़ गये थे, "महिलाएँ तो हमारे ऑफिस में भी हैं। छेड़ना तो दूर उनसे मजाक करने की भी हिम्मत कोई नहीं कर सकता। जो ज्यादा चालू हो... चालाक बने या नखरे-वखरे स्टाइल-वटाइल मारे, उसे तो कोई भी छेड़ने की हिम्मत कर सकता है। तूने भी ज्यादा ही उससे हँस-बोलकर स्टाइल से बातें-वातें की होंगी, तभी उसकी हिम्मत हुई होगी वर्ना तो..."

​भौंचक्क रह गयी थी वह, "उल्टा मेरा ही कसूर बता रहे हैं आप तो? उस गन्दे कीड़े ने मुझे छेड़ा है। वह अक्सर मुझ पर फब्ती-फिकरे कसता रहता है। ऑफिस रिकॉर्ड से मेरा मोबाइल नम्बर पता कर मुझे अश्लील मैसेज भेजता है। बॉस का पी.ए. है तो मैं क्या करूँ? कब तक बर्दाश्त करती रहूँ? आज उसने मेरा हाथ पकड़ने की कोशिश की। छुट्टी का वक्त था। सभी लोग जा चुके थे। वर्ना मैं तो हंगामा कर देती। बड़ी मुश्किल से बच पाई। आप तो मुझे ही कसूरवार?"

​पीछे खड़ी सुन रही सास भी कड़कड़ाने लगी, "औरत को औरत की तरह रहना चाहिए। मर्द तो सब एक जैसे ही होते हैं। ज्यादा बन-ठन के फैशन-वैशन करके जाने की क्या जरूरत है? अपनी इज्जत अपने हाथ ही तो होती है।"

​ससुरजी भी आगे आकर झींकने लगे, "सभी ऑफिसों का यही हाल है। लोग भी सब जगह एक जैसे होते हैं। अपनी सेफ्टी का तो खुद ही ध्यान रखना चाहिए। अपनी इज्जत अपने हाथ में होती है।" ननद ने भी कड़कड़ाना शुरू कर दिया, "यह तो आपको भी पता है कि घर की मजबूरियाँ ऐसी हैं कि काम के लिए निकलना पड़ रहा है। पहले ही घर में इतनी तो परेशानियाँ हैं। क्या जरूरी है कि ऑफिस के टेंशन घर लाकर घरभर की टेंशन और बढ़ाई जाये...? कोई बात हो तो इग्नोर कर देना चाहिए।"

​चीख उठना चाहती थी वह, मेरा क्या कसूर है? एक गन्दा कीड़ा रोज मुझे छेड़ता है। अश्लील मैसेज भेजता है और आज उसने मेरा हाथ पकड़ लिया यह क्या मामूली बात है? अपनी प्रॉब्लम अपनों से नहीं कहूँ तो किससे कहूँ? मैंने तो यह सोचा था ये बात सुनकर इनका खून खौल उठेगा और गन्दे कीड़े के खिलाफ कुछ करेंगे पर ये तो... पर वह बोली कुछ नहीं। चुप लगा गयी।

​पर वह चुप नहीं रहेगी। चुप रहने का मतलब गन्दे कीड़े को बढ़ावा देना होगा। उसकी हिम्मत और बढ़ जायेगी। आज उसने हाथ पकड़ा है कल...?

​अगले दिन ऑफिस पहुँचकर वह चुपचाप अपने काम में जुट गयी। उसने पंजाबी सूट पहना हुआ था और चुन्नी को अच्छी तरह गले के आसपास लपेटा हुआ था। उसके साथ काम करनेवाली महिला कर्मचारियों ने उससे पूछा कि आज इतनी चुप क्यों है? उसने बिना झिझक पूरी बात बता दी। सुनकर वे चुप लगा गयीं। हैरान थी वह, उन सब चेहरों पर गुस्सा कम और डर बहुत अधिक था।

​उनसे कोई उम्मीद न देखकर उसने पूरा मामला बॉस के आगे रखने का निश्चय किया। उसे उनसे उम्मीद थी, क्योंकि उनकी बॉस मिसेज शर्मा स्वयं भी एक स्त्री हैं, इसलिए वे अवश्य ही शिकायत पर कड़ा एक्शन लेंगी और उसके साथ न्याय करेंगी।

​मैडम शर्मा के सामने पहुँचकर उसकी जुबान तालू से चिपक गयी और गला सूखने लगा। मैडम को पूछना पड़ा, "कुछ कहना चाहती हो?" अटकते-झिझकते हुए उसने अपनी शिकायत मैडम के आगे रख दी। सुनकर मैडम पूर्ववत् सहज बनी रहीं जैसे कुछ हुआ ही न हो। फिर किशनलाल उर्फ गन्दे कीड़े को बुलाकर उससे पूछा, "यहाँ ऑफिस में क्या यह सब करने आते हो?"

​एकाएक किशनलाल हकलाने लगा, "नहीं-नहीं मैडम, मैंने इनका हाथ नहीं पकड़ा। एकदम झूठ बोल रही हैं।"

​मुस्कराते हुए मैडम ने कहा, "अभी तो मैंने कहा भी नहीं कि तुमने इनका हाथ पकड़ा है? या कि कुछ और शिकायत करने आयी हैं।"

​बोलती बन्द हो गयी किशनलाल की। मैडम ने आगे कहा, "ज्यादा चालाक बनने की कोशिश मत करो। जाओ, अपने काम में ध्यान दो। आज के बाद तुम्हारी कोई शिकायत नहीं आनी चाहिए।"

​हैरान थी वह कि मैडम ने उसे मामूली वार्निंग देकर छोड़ दिया और बात खत्म कर दी। मैडम थोड़ी देर सीरियस बनी रहीं। फिर बोलीं, "तुम एक औरत हो और वह एक मर्द। उसका तो कुछ बिगड़ेगा नहीं, तुम जरूर बदनाम हो जाओगी... उस आदमी का फिर कब कैसे दिमाग घूम जाये और वह फिर इससे भी बड़ी कोई वारदात कर बैठे, कोई पता नहीं? हम तुम्हारी सुरक्षा की गारन्टी नहीं ले सकते। हम नहीं चाहते तुम्हारे साथ हमारे ऑफिस की भी बदनामी हो। इसलिए क्षमा करो!"

​मैडम ने एक लिफाफे में कुछ नोट रखकर उसकी ओर बढ़ाते हुए कहा, "यह लो अपना आज तक का हिसाब और दूसरी जगह नौकरी ढूँढ़ लो!"

​चीख पड़ी वह, "मुझे बर्खास्त करके आप उल्टा मुझे ही दण्ड दे रही हो? जिसने जुर्म किया उसे कुछ नहीं? महिला होकर भी...? ये न्याय है आपका?"

​बाहर आयी तो उसका खून खौल रहा था। गुस्से के मारे हाथ-पाँव काँप रहे थे। घरवाले तो पहले ही मुझे बात आगे बढ़ाने से मना कर रहे थे। बर्खास्तगी का सुनेंगे तो सब कहेंगे... इसीने कोई गलत हरकत की होगी। यही दोषी होगी तभी तो इसे नौकरी से हटाया गया? मायके में मेरे भाइयों को बात पता लगेगी तो क्या कहेंगे? ...लेकिन मैं बेकसूर हूँ!

​पुलिस की शरण में जाने के सिवाय अब उसके पास कोई रास्ता नहीं था।

​थाने तक पहुँचने में उसे बहुत हिम्मत जुटानी पड़ी। थानेदार ने ध्यान से उसकी बात सुनी फिर कहा, "देखो मैडम, आपके मामले में कोई बड़ा गुनाह तो हुआ नहीं है मेरा मतलब रेप-वेप...! फिर भी छेड़खानी का मामला तो बनता ही है। आप चाहें तो हम मामला दर्ज करके कार्रवाई शुरू कर देंगे। प्रमाण के रूप में मोबाइल के मैसेज हैं ही... आगे कोर्ट आपको न्याय दे या परेशानी, तारीखें और बदनामी, ये आप जानें या आपका वकील। आप मामला दर्ज करवाना ही चाहती हैं तो पूरी बात एक बयान के रूप में एक सादे कागज पर कल लिखकर ले आओ। हम तुरन्त कार्रवाई शुरू कर देंगे। बाकी इंसानियत और एक बड़े भाई की हैसियत से मैं तो सलाह दूँगा कि आप ठण्डे दिमाग से सोच लो आप क्या चाहती हो?"

​उसका दिमाग अभी ठण्डा नहीं हुआ था, बल्कि और गर्म हो गया था। वहाँ से वह सीधे महिला संगठन की अध्यक्ष मीनाक्षी मेहराजी के घर जा पहुँची। पूरी बात सुनकर मीनाक्षीजी ने कहा, "देखो बेटा, हमारे महिला संगठन की तो मीडिया के लोग पहले ही आलोचना कर रहे हैं कि हम लोग छोटी-छोटी बातों को लेकर हंगामा कर देते हैं। तुम्हारे मामले में भी कोई बहुत बड़ा क्राइम तो हुआ नहीं है इसलिए...।"

​चीख उठी वह, "तो क्या मैं तबतक इन्तजार करूँ जबतक मेरे साथ कोई बड़ी वारदात न हो जाये। रेप के बाद मेरा मर्डर हो जाये तब मैं आपके पास आऊँ? अब तो मेरे पास सिर्फ एक ही रास्ता बचता है कि जैसे ही ऑफिस से निकलकर वह गन्दा कीड़ा सड़क पर आये मैं अपनी जूती उतारकर उस गन्दे कमीने कीड़े को मारने लगूँ। इसे देखकर वहाँ से गुजरनेवाले लोग खड़े होकर तमाशा देखेंगे और कुछ तो उसे पीटने भी लगेंगे।"

​मुस्कुराते हुए मीनाक्षीजी ने कहा, "ठीक है उस वक्त तो वह शख्स पिट लेगा लेकिन बाद में मौका पाकर वह तुमसे बदला लेगा तो...? क्या पता इससे भी बड़ा कोई क्राइम कर बैठे? उसकी कोई मामूली-सी भी हरकत ज़िन्दगीभर के लिए तुम्हें बदनाम या शर्मसार कर सकती है...अपनी इज्जत अपने हाथ में होती है।"

​लापरवाही से उठकर बाहर जाते हुए उसने कहा—हूँह जबतक मेरा आत्मविश्वास और मेरी जूती मेरे साथ है, तबतक मैं ये बर्दाश्त करके चुप नहीं बैठ सकती। मुझे समझ नहीं आता, आप सब लोग उस गन्दे कीड़े के पक्ष में ही क्यों हैं? उसका साथ क्यों दे रहे हैं? मेरा दोष बताओ? कोई मुझे सजा दे रहा है तो कोई नसीहत? मेरी इज्जत मेरे हाथ में है कहाँ?