रात का माहौल शांत था, लेकिन अयान के दिल में हलचल चल रही थी। जब उसकी फैमिली ने शिज़ा के घर बात करने की हाँ कर दी, तो अयान के मन में खुशी भी थी और थोड़ी घबराहट भी। वह अपने कमरे में लेटा सोच रहा था, “शिज़ा के घरवाले क्या सोचेंगे? शिज़ा खुश होगी या चौंक जाएगी?”
उसके माता-पिता ने जब कहा था, “अगर तुम्हारा प्यार सच्चा है, तो हम तुम्हारे साथ हैं,” तब से उसका हौसला बढ़ गया था। फिर भी अंदर से वह थोड़ा नर्वस था। उसने खुद को समझाया, “मैं अपने प्यार को लेकर सीरियस हूँ, शिज़ा मुझे समझेगी।”
दूसरी तरफ, शिज़ा भी अपने कमरे में बेचैन थी। रात के खाने पर उसके माता-पिता अयान की तारीफ कर रहे थे, जिससे वह और उलझ गई। उसका दिल कह रहा था, “अयान अच्छा लाइफ पार्टनर हो सकता है,” लेकिन दिमाग बार-बार पूछ रहा था, “क्या मैं अपने सपनों और करियर के साथ यह रिश्ता संभाल पाऊंगी?”
पूरी रात शिज़ा को नींद नहीं आई। वह बिस्तर पर लेटे-लेटे अयान के बारे में सोचती रही। उसकी मुस्कान, उसका ख्याल रखना—सब याद आता रहा। “क्या मैं अपने सपनों के लिए इसे नजरअंदाज कर दूँ? लेकिन अयान के साथ मैं खुद को पूरा महसूस करती हूँ,” वह सोचती रही।
अगले दिन कॉलेज में अयान बहुत पक्का लग रहा था। उसने लाइब्रेरी के एक शांत कोने में शिज़ा को देखा। वह थोड़ी थकी हुई लग रही थी, लेकिन फिर भी उतनी ही प्यारी थी। अयान उसके पास गया और बोला,
“शिज़ा, मुझे तुमसे एक जरूरी बात करनी है।”
शिज़ा ने थोड़ा झिझकते हुए कहा, “हाँ, बोलो।”
अयान ने उसका हाथ पकड़कर कहा,
“शिज़ा, मैंने अपनी फैमिली को हमारे बारे में सब बता दिया है। वे तुमसे मिलने के लिए तैयार हैं। वे तुम्हारे घर बात करने आना चाहते हैं।”
शिज़ा यह सुनकर चौंक गई। उसने धीरे से अपना हाथ छुड़ाते हुए कहा,
“अयान, क्या तुम्हें नहीं लगता कि यह सब बहुत जल्दी हो रहा है? मैं अभी तक पूरी तरह से तैयार नहीं हूँ। मेरे सपने हैं, मेरी जिम्मेदारियां हैं... मैं कैसे संभालूँगी?”
अयान ने प्यार से उसकी आँखों में देखते हुए कहा,
“शिज़ा, मैं तुम्हारे सपनों के खिलाफ नहीं हूँ। मैं तो तुम्हारे साथ हूँ, ताकि तुम अपने सपने पूरे कर सको। तुम्हारे बिना मेरी जिंदगी अधूरी लगेगी।”
शिज़ा ने गहरी सांस ली और कुछ देर चुप रही। उसका दिल और दिमाग अभी भी उलझे हुए थे।
अयान ने फिर धीरे से कहा,
“मैं तुम्हें मजबूर नहीं करूँगा। तुम आराम से सोचो। बस इतना बताओ कि अगर मेरे माता-पिता तुम्हारे घर आएँ, तो तुम्हें कोई परेशानी तो नहीं होगी?”
शिज़ा ने थोड़ा सोचकर कहा,
“अभी मैं कुछ तय नहीं कर सकती। अगर वे आएँगे, तो मैं अपने माता-पिता के साथ बैठूँगी, लेकिन फैसला बाद में करूँगी।”
अयान के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई। उसने कहा,
“बस इतना ही काफी है अभी। मैं तुम्हारे फैसले का इंतजार करूँगा।”
उस रात अयान ने घर जाकर सब कुछ अपने माता-पिता को बता दिया। उसके पिता ने कहा,
“तुम्हारा प्यार सच्चा लगता है। हम शिज़ा के घर जरूर बात करने जाएँगे।”
उसकी माँ ने पूछा,
“लेकिन अगर शिज़ा या उसका परिवार मना कर दे, तो क्या तुम उसका फैसला मान लोगे?”
अयान ने थोड़ी देर सोचा और कहा,
“मैं उसकी खुशी में ही अपनी खुशी ढूँढ लूँगा।”
लेकिन अंदर से वह सोच रहा था, “अगर उसने मना कर दिया तो?” फिर उसने खुद को समझाया, “नहीं, शिज़ा मना नहीं करेगी।”
उधर शिज़ा के घर में भी शांति थी। उसके माता-पिता अब भी अयान की तारीफ कर रहे थे। शिज़ा अपने कमरे में गई और अपने दिल और दिमाग की उलझन को लिखने लगी।
“मुझे अयान पसंद है, लेकिन अगर मैंने अपने करियर से समझौता कर लिया, तो क्या मैं खुश रह पाऊँगी?”
वह रात उसके लिए बहुत मुश्किल थी। आँखें बंद करने पर भी उसे अयान का चेहरा ही दिखता रहा। वह सोचती रही, “मैं अपने घरवालों से क्या कहूँगी?”
अयान भी उस रात चैन से नहीं सो पाया। वह सोचता रहा,
“वह हाँ बोलेगी… मुझे भरोसा है। मैं उसके सपनों को कभी टूटने नहीं दूँगा।”
दोनों तरफ खामोशी थी, लेकिन दिल के किसी कोने में एक छोटी सी उम्मीद भी थी। शायद यही उम्मीद एक दिन उनके रिश्ते को रोशनी देगी। ✨
----
अच्छा लगा हो तो Follow कर लेना 💕