मौत का दस्तकबनारस की उस रात में गंगा के घाटों पर सन्नाटा नहीं, बल्कि एक अजीब सी बेचैनी थी। शाम की आरती के बाद जो शांति छा जानी चाहिए थी, वह आज कहीं खो गई थी। मणिकर्णिका घाट पर जलती चिताओं की लपटें हवा के साथ ऐसे नाच रही थीं, मानो वे किसी अनहोनी का संकेत दे रही हों।
आर्यन अपनी काली रॉयल एनफील्ड को घाट की ढलान पर खड़ा करके नीचे उतरा। उसने अपने जैकेट की चेन ऊपर तक चढ़ाई और एक गहरी सांस ली। उसके चेहरे पर चोट का एक पुराना निशान था, जो उसकी आंखों की गहराई को और ज्यादा रहस्यमयी बना देता था। वह कोई साधारण लड़का नहीं था, लेकिन यह बात वह खुद भी पूरी तरह नहीं जानता था।
अचानक, उसके कान में एक फुसफुसाहट गूंजी।
"समय आ गया है, आर्यन... जाग जाओ!"
आर्यन ठिठक गया। उसके आसपास कोई नहीं था। सिर्फ जलती हुई चिताएं और दूर कहीं बजता हुआ एक डमरू। उसने अपने मोबाइल की स्क्रीन देखी—रात के ठीक 12:00 बज रहे थे।
"कौन है?" उसने चिल्लाकर पूछा, लेकिन उसकी आवाज गंगा की लहरों में कहीं खो गई।
तभी उसकी नजर घाट की सीढ़ियों पर बैठी एक आकृति पर पड़ी। एक अघोरी, जिसका पूरा शरीर भस्म से ढका था, उसे एकटक देख रहा था। अघोरी की आंखें अंगारे की तरह लाल थीं। जैसे ही आर्यन ने उसकी ओर कदम बढ़ाया, अघोरी जोर-जोर से हंसने लगा।
"तू आ गया? मौत की दहलीज पर खड़ा होकर तू जीवन की तलाश कर रहा है? भाग जा छोरे! आज की रात शिकार शिकारी का होगा और रक्षक ही भक्षक बनेगा!" अघोरी ने अपनी भारी आवाज में कहा।
आर्यन के दिमाग में नसें फटने लगी थीं। उसे धुंधली यादें आने लगीं—एक पुरानी हवेली, खून से सना हुआ एक पत्थर, और एक औरत की चीख। वह घुटनों के बल बैठ गया और अपना सिर पकड़ लिया। वह इन यादों से पीछा छुड़ाने बनारस आया था, लेकिन यहाँ तो यादें हकीकत बनकर उसका गला घोंटने लगी थीं।
अचानक, एक ठंडी हवा का झोंका आया और घाट पर मौजूद सारी लाइटें एक साथ गुल हो गईं। पूरा इलाका घुप अंधेरे में डूब गया। आर्यन ने फुर्ती से अपनी जेब से टॉर्च निकाली, लेकिन जैसे ही उसने रोशनी की, उसका खून जम गया।
सामने अघोरी गायब था। उसकी जगह जमीन पर खून से एक बड़ा सा 'त्रिकोण' बना हुआ था, जिसके बीच में आर्यन का ही नाम लिखा था।
अभी वह संभल पाता कि पीछे से किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा। आर्यन ने तेजी से पीछे मुड़कर पंच मारना चाहा, लेकिन उसका हाथ हवा में ही पकड़ लिया गया। पकड़ने वाले की ताकत इंसान जैसी नहीं थी।
सामने एक साये जैसा आदमी खड़ा था, जिसकी शक्ल दिखाई नहीं दे रही थी। उस साये ने बड़ी धीमी और डरावनी आवाज में कहा, "वो चाबी कहाँ है, आर्यन? जो तुम्हारे सीने के अंदर धड़क रही है?"
आर्यन ने हकलाते हुए कहा, "कैसी... कैसी चाबी? तुम कौन हो?"
उस साये ने आर्यन को हवा में ऐसे उठा लिया जैसे वह कागज का कोई टुकड़ा हो। आर्यन का दम घुटने लगा। उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर अपनी जेब से एक छोटा सा 'रुद्राक्ष' निकाला और उस साये के चेहरे पर दे मारा। एक जोरदार धमाका हुआ और वह साया धुएं में बदल गया।
आर्यन जमीन पर गिरा और हांफने लगा। उसकी शर्ट का बटन टूट गया था और उसके गले में लटका हुआ एक लॉकेट चमक रहा था। वह लॉकेट कोई साधारण गहना नहीं था, वह एक प्राचीन यंत्र की तरह लग रहा था जो अब धीरे-धीरे गर्म हो रहा था।
वह तुरंत उठा और अपनी बाइक की तरफ भागा। उसे यहाँ से निकलना था। उसे शहर छोड़ना था। लेकिन जैसे ही उसने बाइक स्टार्ट की और हेडलाइट जलाई, उसने देखा कि सड़क के बीचों-बीच वही अघोरी खड़ा था, लेकिन इस बार वह मर चुका था। उसकी गर्दन मुड़ी हुई थी और उसकी पीठ पर खंजर से कुछ उकेरा गया था।
आर्यन ने हिम्मत जुटाकर पास जाकर देखा। अघोरी की पीठ पर खून से लिखा था:
"अगला नंबर तुम्हारा है।"
आर्यन की रूह कांप गई। उसे महसूस हुआ कि उसकी जेब में रखा उसका फोन वाइब्रेट हो रहा है। उसने फोन निकाला। एक अनजान नंबर से मैसेज आया था। मैसेज में उसकी खुद की एक फोटो थी, जो बस अभी 2 सेकंड पहले खींची गई थी। फोटो में आर्यन अपनी बाइक पर बैठा था और उसके ठीक पीछे वही साया हाथ में खंजर लिए खड़ा था।
आर्यन ने पीछे मुड़कर देखा, लेकिन वहां कोई नहीं था।
तभी उसके लॉकेट से एक हल्की सी नीली रोशनी निकली और एक औरत की आवाज उसके दिमाग में गूंजी, "भागो मत आर्यन, लड़ो। तुम ही वो आख़िरी उम्मीद हो जिसके लिए सदियों से इंतजार हो रहा है।"
आर्यन ने पसीने से लथपथ होकर अपनी बाइक की रेस दी और बनारस की गलियों में गायब हो गया। उसे नहीं पता था कि वह मौत से दूर भाग रहा है या सीधे उसकी बाहों में जा रहा है।
अंधेरे में एक हाथ उठा और उसने अघोरी की लाश पर गिरे हुए उस रुद्राक्ष को उठा लिया। एक रहस्यमयी मुस्कान गूंजी।
"खेल तो अब शुरू हुआ है..."