My life is you in Hindi Love Stories by ziya books and stories PDF | मेरी जिंदगी है तू

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मेरी जिंदगी है तू

भाग 1: पहली मुलाकात
मुंबई की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में आराध्या शर्मा एक सफल फैशन डिज़ाइनर थी। उसकी ज़िन्दगी परफेक्ट थी - अपना बुटीक, अपना अपार्टमेंट, और सबसे बढ़कर अपनी आज़ादी। तीस साल की उम्र में वह वहाँ पहुँच चुकी थी जहाँ पहुँचने का उसने सपना देखा था। लेकिन प्यार? वह एक ऐसा शब्द था जिसे आराध्या ने अपनी डिक्शनरी से बहुत पहले निकाल दिया था।
"आराध्या, तुम्हारी उम्र हो रही है। कब तक अकेले रहोगी?" उसकी माँ रेखा शर्मा हर हफ्ते यही सवाल पूछती थीं।
"माँ, please! मैं अकेली नहीं हूँ। मेरे पास मेरा काम है, मेरे दोस्त हैं, और सबसे ज़रूरी - मेरी शांति है," आराध्या हर बार यही जवाब देती।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था।
वह एक ठंडी नवंबर की शाम थी। आराध्या अपने नए कलेक्शन के लिए फैब्रिक खरीदने कोलाबा मार्केट गई थी। भीड़ में धक्का-मुक्की, दुकानदारों की आवाज़ें, और उस ठंडी हवा में मसालों की खुशबू - मुंबई का असली रूप यही था।
"भैया, यह साड़ी दिखाइए ना," आराध्या एक दुकान पर रुकी।
ठीक उसी वक़्त, उसके पीछे से कोई टकराया। आराध्या का बैग नीचे गिर गया और उसका सामान चारों तरफ बिखर गया।
"I'm so sorry!" एक गहरी आवाज़ ने कहा।
आराध्या ने गुस्से से पलटकर देखा। सामने एक लंबा, सुंदर आदमी खड़ा था, जो घबराहट में उसका सामान उठाने में मदद कर रहा था। काले बाल, तीखे नैन-नक्श, और वह आँखें - जिनमें एक अजीब सा दर्द छुपा था।
"देखकर नहीं चल सकते?" आराध्या ने कहा।
"मैंने माफ़ी माँगी ना," वह आदमी बोला, उसका बैग उठाते हुए।
उनकी नज़रें मिलीं। एक सेकंड के लिए समय थम सा गया। आराध्या ने झटके से अपनी नज़रें हटाईं और बैग लेकर वहाँ से चली गई।
"अजीब आदमी," उसने मन में सोचा।
लेकिन वह नहीं जानती थी कि यह उनकी पहली मुलाकात थी, आखिरी नहीं।
भाग 2: बार-बार मिलना
अगले हफ्ते, आराध्या को एक बड़े कॉर्पोरेट क्लाइंट से मीटिंग का बुलावा आया। वह खुशी-खुशी अपने बेस्ट डिज़ाइन्स के साथ ऑफिस पहुँची। रिसेप्शनिस्ट ने उसे कॉन्फ्रेंस रूम की तरफ भेजा।
दरवाज़ा खोलते ही आराध्या अपनी जगह पर जम गई। टेबल के उस पार, ब्लैक सूट में वही आदमी बैठा था - मार्केट वाला आदमी।
"आप?" दोनों ने एक साथ कहा।
"Miss शर्मा, please बैठिए। मैं विवान मल्होत्रा हूँ, मल्होत्रा ग्रुप का CEO," उसने प्रोफेशनल लहज़े में कहा।
आराध्या समझ गई कि यह वही कंपनी थी जो अपने कर्मचारियों के लिए डिज़ाइनर यूनिफॉर्म चाहती थी - एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट।
"जी, मुझे पता है," आराध्या ने अपना कंपोज़र संभालते हुए कहा।
मीटिंग प्रोफेशनल रही, लेकिन दोनों के बीच एक अजीब सी टेंशन थी। विवान की नज़रें बार-बार आराध्या की तरफ जाती थीं, और आराध्या को यह महसूस हो रहा था।
"तो Miss शर्मा, हम अगले महीने से यह प्रोजेक्ट शुरू कर सकते हैं। लेकिन मुझे हर हफ्ते अपडेट चाहिए," विवान ने कहा।
"बिल्कुल, Mr. मल्होत्रा," आराध्या ने जवाब दिया।
जब आराध्या जाने लगी, विवान ने कहा, "और हाँ, मार्केट में फिर से माफ़ी। वह दिन मेरा अच्छा नहीं था।"
आराध्या ने सिर्फ एक छोटी सी स्माइल दी और चली गई।
लेकिन उसके दिमाग़ में विवान की वह उदास आँखें घूम रही थीं। "उसकी आँखों में इतना दर्द क्यों है?" उसने सोचा।
भाग 3: धीरे-धीरे करीब आना
अगले कुछ हफ्तों में, आराध्या और विवान की मीटिंग्स रेगुलर हो गईं। हर गुरुवार, आराध्या अपने नए डिज़ाइन लेकर विवान के ऑफिस जाती। धीरे-धीरे, उनकी बातचीत सिर्फ काम तक सीमित नहीं रही।
"आप कॉफी लेंगी?" विवान ने एक दिन पूछा।
"जी हाँ, धन्यवाद," आराध्या ने कहा।
विवान ने खुद उठकर कॉफी बनाई और आराध्या के सामने रखी।
"आप खुद कॉफी बनाते हैं?" आराध्या ने हैरानी से पूछा।
"हाँ, कुछ काम मुझे खुद करना पसंद है। बाकी सब तो लोग कर ही देते हैं," विवान ने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा।
यह पहली बार था जब आराध्या ने उसे मुस्कुराते देखा। उसकी मुस्कान में एक अलग ही मासूमियत थी।
"आप हमेशा इतने सीरियस क्यों रहते हैं?" आराध्या ने बिना सोचे-समझे पूछ लिया।
विवान की मुस्कान गायब हो गई। "ज़िन्दगी ने सीरियस बना दिया," उसने धीरे से कहा।
आराध्या को अपने सवाल पर पछतावा हुआ। "I'm sorry, मुझे यह नहीं पूछना चाहिए था।"
"कोई बात नहीं। वैसे आपकी ज़िन्दगी कैसी है? आप हमेशा इतनी confident और happy कैसे रहती हैं?" विवान ने पूछा।
"क्योंकि मैंने अपनी खुशी दूसरों पर depend नहीं होने दी। मैं अकेले भी खुश रह सकती हूँ," आराध्या ने कहा।
"वाह! यह तो बहुत बड़ी बात है। काश मैं भी यह सीख पाता," विवान ने गहरी साँस लेते हुए कहा।
उस दिन के बाद, दोनों के बीच एक अलग ही रिश्ता बनने लगा - दोस्ती का, समझ का।
भाग 4: विवान का अतीत
एक महीना बीत गया। आराध्या और विवान अब अच्छे दोस्त बन चुके थे। वे अक्सर काम के बाद कॉफी पीने जाते या बस बैठकर बातें करते।
एक दिन, आराध्या ने हिम्मत करके पूछ ही लिया, "विवान, आप हमेशा उदास क्यों रहते हैं? अगर बताना चाहें तो..."
विवान चुप रहा। फिर धीरे-धीरे बोलना शुरू किया।
"मेरी शादी हुई थी तीन साल पहले। निशा से। वह बहुत प्यारी थी, हंसमुख थी। हमारी लॉव मैरिज थी। मैं सोचता था कि हम हमेशा साथ रहेंगे।"
विवान रुका, उसकी आँखों में आँसू आ गए।
"लेकिन शादी के एक साल बाद ही... एक कार एक्सीडेंट में... वह मुझे छोड़कर चली गई। उस दिन के बाद से मेरी ज़िन्दगी में सिर्फ अँधेरा है। मैं काम में खुद को इतना busy रखता हूँ कि उसकी याद ना आए।"
आराध्या के दिल में दर्द हुआ। उसने बिना सोचे विवान का हाथ अपने हाथ में ले लिया।
"I'm so sorry, विवान। मुझे नहीं पता था," आराध्या ने धीरे से कहा।
"कोई बात नहीं। आपसे बात करके अच्छा लगा। बहुत दिनों बाद किसी से अपना दर्द शेयर किया," विवान ने कहा।
उस दिन के बाद, दोनों और करीब आ गए। आराध्या को लगने लगा था कि विवान को उसकी ज़रूरत है, और शायद... शायद उसे भी विवान की ज़रूरत है।
भाग 5: आराध्या की दुविधा
दिसंबर का महीना शुरू हो गया था। मुंबई में ठंड बढ़ने लगी थी। आराध्या और विवान अब लगभग हर दिन मिलते थे। कभी काम के बहाने, कभी बिना किसी बहाने के।
एक शाम, आराध्या अपनी बेस्ट फ्रेंड नेहा के साथ कॉफी पी रही थी।
"तो बता, यह विवान कौन है जिसके बारे में तू इतना सोचती रहती है?" नेहा ने शरारत से पूछा।
"कुछ नहीं यार, बस एक क्लाइंट है," आराध्या ने कहा।
"झूठ मत बोल! तेरी आँखें सब कुछ बता रही हैं। तू उससे प्यार करने लगी है ना?" नेहा ने कहा।
"नहीं! मैंने तय किया था कि मुझे प्यार-व्यार में नहीं पड़ना," आराध्या ने विरोध किया।
"लेकिन दिल किसी की सुनता है भला? और अगर तुझे उससे प्यार हो भी गया है तो क्या बुरा है? वह अच्छा इंसान लगता है," नेहा ने कहा।
आराध्या चुप हो गई। क्या सच में उसे विवान से प्यार हो गया था? वह नहीं चाहती थी यह मानना, लेकिन उसका दिल कुछ और ही कह रहा था।
उस रात, आराध्या को नींद नहीं आई। वह सोचती रही - "क्या मैं सच में विवान से प्यार करने लगी हूँ? लेकिन वह अभी भी अपनी पत्नी को याद करता है। मेरे लिए उसके दिल में जगह है भी या नहीं?"
भाग 6: प्यार का एहसास
क्रिसमस का दिन था। मुंबई की सड़कों पर सजावट हो रही थी। आराध्या ने अपना दिन फैमिली के साथ बिताने का प्लान बनाया था, लेकिन विवान का फोन आ गया।
"आराध्या, क्या आप आज शाम फ्री हैं? मुझे आपसे कुछ ज़रूरी बात करनी है," विवान ने कहा।
"हाँ, बताइए कहाँ मिलना है?" आराध्या ने पूछा।
"मरीन ड्राइव पर, शाम छह बजे," विवान ने कहा।
आराध्या ने हामी भर दी। उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा। "क्या कहना चाहता है वह?"
शाम को, मरीन ड्राइव पर समंदर की लहरें टकरा रही थीं। क्रिसमस की रोशनी से पूरा रास्ता जगमगा रहा था। विवान पहले से ही वहाँ था, समंदर की तरफ देखते हुए।
"हाय," आराध्या ने पहुँचकर कहा।
"हाय," विवान ने मुड़कर कहा। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी।
दोनों कुछ देर चुपचाप खड़े रहे, बस समंदर की आवाज़ सुनते हुए।
"आराध्या, पिछले कुछ महीनों में आपने मेरी ज़िन्दगी बदल दी है," विवान ने धीरे से कहा।
आराध्या ने उसकी तरफ देखा।
"निशा के जाने के बाद, मैंने सोचा था कि मैं फिर कभी खुश नहीं रह पाऊँगा। लेकिन आपके साथ वक़्त बिताकर, मुझे फिर से जीने का मतलब समझ आया। आप मुझे ज़िन्दगी में वापस ला रही हैं," विवान ने कहा।
आराध्या का दिल तेज़ी से धड़कने लगा।
"मुझे नहीं पता कि यह कहना सही है या नहीं, लेकिन... मुझे लगता है कि मैं आपसे... प्यार करने लगा हूँ," विवान ने आखिरकार कह दिया।
आराध्या सदमे में थी। वह कुछ बोल नहीं पा रही थी।
"मुझे पता है यह आपके लिए अचानक है। मुझे जवाब की जल्दी नहीं है। बस मैं अपने दिल की बात आपसे share करना चाहता था," विवान ने कहा।
आराध्या की आँखों में आँसू आ गए। "विवान... मैं... मुझे वक़्त चाहिए सोचने के लिए।"
"मैं समझता हूँ। आप जितना वक़्त चाहें ले सकती हैं," विवान ने कहा।
वह रात आराध्या के लिए बहुत लंबी थी। उसका दिल विवान के लिए धड़क रहा था, लेकिन उसका दिमाग़ डर से भरा था।
भाग 7: फैसला
अगले कुछ दिन आराध्या ने विवान से बात नहीं की। वह अपने आप में उलझी रही। एक तरफ उसका दिल विवान के लिए धड़क रहा था, दूसरी तरफ उसका डर था - रिश्तों का डर, hurt होने का डर।
नए साल की शाम थी। आराध्या अपने अपार्टमेंट में अकेली बैठी थी। बाहर पटाखों की आवाज़ें आ रही थीं, लोग celebrate कर रहे थे।
तभी उसकी माँ का फोन आया।
"आराध्या, नया साल मुबारक हो बेटा। कैसी हो तू?" माँ ने कहा।
"ठीक हूँ माँ," आराध्या ने कहा, लेकिन उसकी आवाज़ में उदासी थी।
"क्या हुआ? तू उदास लग रही है," माँ ने पूछा।
और फिर आराध्या ने सब कुछ बता दिया - विवान के बारे में, उसके proposal के बारे में, अपने डर के बारे में।
"बेटा, ज़िन्दगी में सबसे बड़ी गलती यह है कि हम खुद को प्यार करने से रोक लें। तूने हमेशा अकेले रहने को अपनी ताकत बनाया, लेकिन असली ताकत तो यह है कि तू किसी को अपनी ज़िन्दगी में आने दे। प्यार करना कमज़ोरी नहीं है बेटा, बल्कि सबसे बड़ी हिम्मत है," माँ ने समझाया।
"लेकिन माँ, अगर मुझे hurt हुआ तो?" आराध्या ने पूछा।
"तो तू संभाल लेगी। तू मेरी बेटी है, मज़बूत है। लेकिन अगर तूने प्यार को खुद से दूर रखा, तो ज़िन्दगी भर पछताएगी," माँ ने कहा।
फोन रखने के बाद, आराध्या को सब कुछ साफ हो गया। उसे विवान से प्यार था, और अब वह इस प्यार से भागना नहीं चाहती थी।
उसने तुरंत विवान को फोन किया।
"हैलो?" विवान ने उठाया।
"विवान, मुझसे मिलो। अभी। मरीन ड्राइव पर," आराध्या ने कहा।
"ठीक है, मैं आ रहा हूँ," विवान ने कहा।
भाग 8: मेरी ज़िन्दगी है तू
मरीन ड्राइव पर नए साल का celebration चल रहा था। लोग खुश थे, गाने बज रहे थे, पटाखे फूट रहे थे।
विवान वहाँ पहुँचा। आराध्या पहले से ही वहाँ खड़ी थी, समंदर की तरफ देखते हुए।
"आराध्या," विवान ने पुकारा।
आराध्या ने पलटकर उसे देखा। उसकी आँखों में आँसू थे।
"विवान, मैं डर गई थी। प्यार से डर गई थी। मैंने हमेशा सोचा कि अकेले रहना ही बेहतर है। लेकिन आपने मुझे सिखाया कि प्यार में कमज़ोरी नहीं, ताकत है," आराध्या ने कहा।
विवान उसके करीब आया।
"मुझे आपसे प्यार है विवान। बहुत ज़्यादा प्यार है। और मैं अब अपने इस प्यार से नहीं भागना चाहती," आराध्या ने कहा।
विवान की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। उसने आराध्या को अपनी बाहों में भर लिया।
"थैंक यू, आराध्या। थैंक यू मेरी ज़िन्दगी में वापस आने के लिए," विवान ने फुसफुसाते हुए कहा।
ठीक उसी वक़्त, घड़ी में बारह बज गए। पूरे मरीन ड्राइव पर पटाखे छूटने लगे। लोग "हैप्पी न्यू ईयर" चिल्लाने लगे।
विवान और आराध्या ने एक-दूसरे की आँखों में देखा। धीरे-धीरे विवान ने आराध्या के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसके माथे पर प्यार से किस किया।
"हैप्पी न्यू ईयर, माई लव," विवान ने कहा।
"हैप्पी न्यू ईयर," आराध्या ने मुस्कुराते हुए कहा।
वह रात दोनों के लिए ख़ास थी। एक नई शुरुआत की रात। प्यार की रात।
भाग 9: नया सफर
अगले कुछ महीने आराध्या और विवान के लिए सपनों जैसे थे। वे हर वीकेंड साथ बिताते। कभी मूवी देखने जाते, कभी डिनर पर, कभी बस समंदर किनारे बैठकर बातें करते।
विवान धीरे-धीरे अपने अतीत से बाहर आ रहा था। आराध्या ने उसे समझाया कि निशा को याद रखना गलत नहीं है, लेकिन अपनी ज़िन्दगी को रोक देना गलत है।
"निशा चाहती होगी कि तुम खुश रहो, विवान। वह नहीं चाहती होगी कि तुम अपनी पूरी ज़िन्दगी उसके गम में बिता दो," आराध्या ने एक दिन कहा।
विवान ने उसे गले लगा लिया। "तुम सच में एक एंजल हो, आराध्या। मुझे नहीं पता तुम्हारे बिना मैं क्या करता।"
एक दिन, विवान ने आराध्या को अपने फैमिली से मिलवाया। उसकी माँ श्वेता मल्होत्रा और पिता राजेश मल्होत्रा बहुत अच्छे लोग थे।
"बेटा, बहुत खूबसूरत हो तुम। और सबसे बड़ी बात, तुमने मेरे बेटे को फिर से ज़िंदा कर दिया," श्वेता ने आराध्या को गले लगाते हुए कहा।
"आंटी, विवान ने भी मुझे प्यार करना सिखाया। हम दोनों ने एक-दूसरे को बदला है," आराध्या ने कहा।
वह दिन बहुत खूबसूरत था। दोनों परिवार एक-दूसरे से मिले और सबने आराध्या और विवान के रिश्ते को अपनी blessing दी।
भाग 10: पहली परेशानी
लेकिन हर खूबसूरत कहानी में कुछ मुश्किलें भी आती हैं।
एक दिन, आराध्या के बुटीक में एक महिला आई। वह करीब पैंतीस साल की थी, बहुत सुंदर और elegant।
"आप आराध्या शर्मा हैं?" उस महिला ने पूछा।
"जी हाँ, आप?" आराध्या ने कहा।
"मैं पूजा हूँ। निशा की बहन," उस महिला ने कहा।
आराध्या चौंक गई। निशा की बहन? यहाँ क्यों आई?
"Please बैठिए। कैसे आना हुआ?" आराध्या ने पूछा।
"मुझे पता चला कि आप और विवान साथ हैं। मैं बस यह कहने आई हूँ कि please विवान का ख़याल रखिएगा। वह बहुत अच्छा इंसान है। मेरी बहन को खोने के बाद वह टूट गया था। आपने उसे फिर से जोड़ा है, इसके लिए शुक्रिया," पूजा ने आँखों में आँसू लिए कहा।
आराध्या का गला भर आया। "मैं उसका पूरा ख़याल रखूँगी, promise।"
"लेकिन एक बात का ध्यान रखिएगा - विवान बहुत sensitive है। छोटी-छोटी बातों पर hurt हो जाता है। please उसे कभी अकेला मत छोड़िएगा," पूजा ने कहा।
"मैं नहीं छोड़ूँगी," आराध्या ने वादा किया।
पूजा चली गई, लेकिन आराध्या के मन में एक डर बैठ गया। क्या वह सच में विवान को वह सब दे पाएगी जो उसे चाहिए?
भाग 11: मिसअंडरस्टैंडिंग
कुछ हफ्तों बाद, आराध्या के बुटीक में बहुत काम बढ़ गया। एक इंटरनेशनल क्लाइंट ने बड़ा ऑर्डर दिया था और डेडलाइन बहुत टाइट थी। आराध्या दिन-रात काम में लगी रही।
विवान को भी अपनी कंपनी में एक बड़ा डील close करना था। दोनों ही बहुत busy हो गए।
पहले तो वे रोज़ बात करते थे, लेकिन अब कई-कई दिन बीत जाते बिना बात किए।
एक दिन, विवान ने आराध्या को डिनर पर बुलाया।
"आराध्या, हम आजकल बिल्कुल भी साथ time नहीं बिता पा रहे," विवान ने उदासी से कहा।
"I know, विवान। लेकिन यह temporary phase है। जल्दी ही सब normal हो जाएगा," आराध्या ने कहा।
"लेकिन आजकल तुम मुझसे properly बात भी नहीं करतीं। क्या तुम्हें मुझसे बोरियत हो गई है?" विवान ने पूछा।
"क्या? नहीं विवान! ऐसा बिल्कुल नहीं है। मैं बस थोड़ा busy हूँ," आराध्या ने कहा।
"हर बार यही बहाना - busy, busy, busy! शायद तुम्हारे लिए तुम्हारा काम मुझसे ज़्यादा important है," विवान ने गुस्से में कहा।
"विवान, यह unfair है। तुम भी तो busy रहते हो," आराध्या ने कहा।
"लेकिन मैं तुम्हारे लिए वक़्त निकालता हूँ! तुम नहीं निकाल सकतीं?" विवान ने कहा।
दोनों के बीच पहली बार ऐसी बहस हुई। आराध्या upset होकर वहाँ से चली गई।
उस रात दोनों ने एक-दूसरे से बात नहीं की।
भाग 12: टूटन
अगले कुछ दिन बहुत मुश्किल थे। विवान और आराध्या ने एक-दूसरे से बात नहीं की। दोनों अपनी-अपनी ego में थे।
आराध्या अपने काम में खुद को busy रखने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मन नहीं लग रहा था। वह विवान को बहुत miss कर रही थी।
विवान भी ऑफिस में बैठा अपनी फोटो देख रहा था। उसे अपने गुस्से पर पछतावा हो रहा था।
"मैंने उससे ऐसा क्यों कहा? वह तो सच में busy थी," विवान ने सोचा।
लेकिन दोनों में से किसी ने पहला कदम नहीं उठाया।
एक दिन, नेहा आराध्या के घर आई।
"यार, तू पागल हो गई है क्या? विवान जैसा लड़का मिला है और तू ego में बैठी है?" नेहा ने डाँटा।
"लेकिन उसने मुझ पर यह इल्ज़ाम कैसे लगाया कि मेरे लिए काम ज़्यादा important है?" आराध्या ने कहा।
"अरे, वह तुझसे प्यार करता है इसलिए possessive है। उसे डर है कि कहीं तू उसे छोड़ न दे। तू समझ क्यों नहीं रही?" नेहा ने समझाया।
आराध्या को अपनी गलती का एहसास हुआ। "तुम सही कह रही हो, नेहा। मुझे विवान से बात करनी चाहिए।"
"हाँ, जा और अभी बात कर," नेहा ने कहा।
आराध्या ने तुरंत विवान को फोन किया, लेकिन उसने नहीं उठाया।
"शायद वह अभी भी गुस्से में है," आराध्या ने सोचा।
उसने decide किया कि वह विवान के घर जाएगी और directly बात करेगी।
भाग 13: मिलन
आराध्या विवान के अपार्टमेंट पहुँची। उसने दरवाज़े की bell बजाई। कोई जवाब नहीं आया। उसने फिर से बजाई।
तभी विवान ने दरवाज़ा खोला। उसकी आँखें लाल थीं, जैसे उसने रोया हो।
"आराध्या?" विवान ने हैरानी से कहा।
"मुझे तुमसे बात करनी है," आराध्या ने कहा।
विवान ने उसे अंदर आने दिया।
दोनों लिविंग रूम में बैठे। कुछ देर तक सन्नाटा रहा।
फिर आराध्या ने बोलना शुरू किया, "विवान, I'm sorry। मुझे पता है मैं तुम्हें वक़्त नहीं दे पा रही थी। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि तुम मेरे लिए important नहीं हो। तुम मेरी ज़िन्दगी हो।"
विवान की आँखों में आँसू आ गए।
"मुझे भी sorry बोलना चाहिए। मैंने तुम पर गलत इल्ज़ाम लगाया। मुझे पता है तुम बहुत मेहनत करती हो। मैं बस... मुझे डर लगता है कि कहीं तुम मुझे छोड़कर न चली जाओ," विवान ने कहा।
आराध्या ने विवान का हाथ अपने हाथ में लिया।
"विवान, मैं तुम्हें कभी नहीं छोड़ूँगी। Never। तुम मेरी ज़िन्दगी हो। मेरा सब कुछ हो। और हाँ, मैं busy रहती हूँ, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं तुम्हें प्यार नहीं करती। मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ," आराध्या ने कहा।
विवान ने आराध्या को अपनी बाहों में भर लिया।
"I love you too, आराध्या। बहुत ज़्यादा," विवान ने कहा।
दोनों ने एक-दूसरे को कसकर गले लगाया। उस पल, उन्हें लगा कि दुनिया में सिर्फ वे दो ही हैं।
"Promise करो कि हम फिर कभी ऐसे नहीं लड़ेंगे?" आराध्या ने कहा।
"Promise करता हूँ। और हाँ, अगर कभी कोई मिसअंडरस्टैंडिंग हो, तो हम बात करके सुलझाएँगे," विवान ने कहा।
"Deal," आराध्या ने मुस्कुराते हुए कहा।
वह रात दोनों ने साथ बिताई, एक-दूसरे की बाहों में।
भाग 14: शादी की तैयारी
कुछ महीने और बीत गए। आराध्या और विवान का रिश्ता और मजबूत हो गया था। उन्होंने एक-दूसरे को पूरी तरह से समझ लिया था।
एक शाम, विवान ने आराध्या को एक रोमांटिक डिनर पर ले जाया। उसने पूरा रेस्टोरेंट बुक किया था। मोमबत्तियाँ जल रही थीं, सॉफ्ट म्यूज़िक बज रहा था।
"यह सब क्या है?" आराध्या ने हैरानी से पूछा।
"बस, तुम्हारे लिए," विवान ने मुस्कुराते हुए कहा।
डिनर के बाद, विवान ने अचानक आराध्या के सामने घुटने टेक दिए।
"विवान! यह क्या कर रहे हो?" आराध्या चौंक गई।
विवान ने अपनी जेब से एक छोटा सा बॉक्स निकाला और खोला। उसमें एक खूबसूरत diamond ring थी।
"आराध्या शर्मा, तुमने मुझे ज़िन्दगी दी, प्यार दिया, और सबसे बढ़कर अपना आप दिया। क्या तुम मेरी wife बनोगी? Will you marry me?" विवान ने पूछा।
आराध्या की आँखों में खुशी के आँसू आ गए।
"Yes! Yes! Hundred times yes!" आराध्या ने कहा।
विवान ने उसकी उंगली में ring पहनाई और उठकर उसे गले लगा लिया। पूरा रेस्टोरेंट तालियाँ बजाने लगा।
अगले कुछ महीने शादी की तैयारियों में बीते। दोनों फैमिलीज़ ने मिलकर सब कुछ प्लान किया। आराध्या ने अपनी शादी के लिए खुद एक खूबसूरत lehenga डिज़ाइन किया।
भाग 15: शादी का दिन
फरवरी का महीना था। मुंबई के एक लग्ज़री होटल में आराध्या और विवान की शादी होनी थी।
शादी से एक रात पहले, आराध्या अपनी माँ के साथ बैठी थी।
"माँ, मुझे नर्वस लग रहा है," आराध्या ने कहा।
"यह तो होना ही है बेटा। लेकिन तुझे पता है ना कि विवान तुझसे कितना प्यार करता है? वह तेरा पूरा ख़याल रखेगा," माँ ने कहा।
"हाँ माँ, मुझे पता है। मैं बहुत lucky हूँ कि मुझे विवान मिला," आराध्या ने मुस्कुराते हुए कहा।
शादी का दिन आ गया। आराध्या अपने red lehenga में बेहद खूबसूरत लग रही थी। उसके बाल, मेकअप, jewelry - सब कुछ परफेक्ट था।
जब वह mandap की तरफ बढ़ी, तो विवान ने उसे देखा। वह अपनी जगह पर जम गया। उसकी आँखों में आँसू आ गए।
"इतनी खूबसूरत लग रही हो तुम," विवान ने फुसफुसाते हुए कहा जब आराध्या उसके पास बैठी।
"तुम भी बहुत handsome लग रहे हो," आराध्या ने शरमाते हुए कहा।
पंडित जी ने शादी की रस्में शुरू कीं। फेरे, वर्मला, सिंदूर - सब कुछ बेहद खूबसूरत था।
जब विवान ने आराध्या के maang में सिंदूर भरा, तो उसने धीरे से कहा, "अब तुम हमेशा के लिए मेरी हो गई।"
"और तुम मेरे," आराध्या ने मुस्कुराते हुए कहा।
शादी के बाद reception था। सारे friends और family ने celebrate किया। डांस, खाना, हँसी-मज़ाक - सब कुछ perfect था।
रात में, जब सब चले गए, विवान और आराध्या अपने होटल रूम में थे।
"Mrs. मल्होत्रा, कैसा लग रहा है?" विवान ने पूछा।
"बेहद खूबसूरत, Mr. मल्होत्रा," आराध्या ने कहा।
दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया।
"थैंक यू, आराध्या। मेरी ज़िन्दगी में आने के लिए," विवान ने कहा।
"नहीं विवान, थैंक यू तुम्हारा। तुमने मुझे प्यार करना सिखाया, किसी पर भरोसा करना सिखाया," आराध्या ने कहा।
"मैं हमेशा तुम्हारा साथ दूँगा, हर खुशी में, हर गम में," विवान ने वादा किया।
"और मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगी। तुम मेरी ज़िन्दगी हो," आराध्या ने कहा।
और इस तरह, दो अधूरे लोग मिलकर एक पूरी कहानी बन गए। एक ऐसी कहानी जिसमें प्यार था, भरोसा था, और सबसे बढ़कर - एक-दूसरे के लिए respect और care था।
एपिलॉग: कुछ साल बाद
तीन साल बाद...
आराध्या और विवान अब एक खूबसूरत घर में रहते थे। आराध्या का बुटीक और भी बड़ा हो गया था, और विवान की कंपनी भी grow कर रही थी।
लेकिन सबसे बड़ी खुशी यह थी कि अब उनके घर में एक नन्हे मेहमान की किलकारियाँ गूँजती थीं - उनकी बेटी आयरा।
"पापा, देखो मैंने क्या बनाया!" दो साल की आयरा अपनी drawing लेकर विवान के पास दौड़ी।
"वाह! बहुत खूबसूरत है बेटा," विवान ने उसे गोद में उठाते हुए कहा।
आराध्या किचन से बाहर आई, चाय के कप लिए।
"आयरा, मम्मा के पास आओ," आराध्या ने कहा।
आयरा आराध्या के पास भागी। आराध्या ने उसे प्यार से गले लगाया।
विवान ने आराध्या की तरफ देखा और मुस्कुराया।
"क्या हुआ?" आराध्या ने पूछा।
"कुछ नहीं, बस सोच रहा था कि मैं कितना lucky हूँ। तुम और आयरा - तुम दोनों मेरी पूरी दुनिया हो," विवान ने कहा।
"और तुम हमारे," आराध्या ने कहा।
उस शाम, तीनों ने साथ बैठकर डिनर किया, हँसे, बातें कीं। यह एक परफेक्ट फैमिली थी - एक ऐसी फैमिली जो प्यार, भरोसे, और एक-दूसरे के support पर बनी थी।
आराध्या ने कभी नहीं सोचा था कि वह इतनी खुश रह सकती है। और विवान ने भी कभी नहीं सोचा था कि निशा के जाने के बाद वह फिर से प्यार कर पाएगा।
लेकिन ज़िन्दगी ने उन्हें एक-दूसरे का साथ दिया, और उन्होंने इस साथ को पूरे दिल से अपनाया।
क्योंकि कभी-कभी, सबसे खूबसूरत प्यार की कहानियाँ वहाँ से शुरू होती हैं जहाँ हम सोचते हैं कि सब कुछ खत्म हो गया है।
आराध्या और विवान की कहानी यही सिखाती है - कि प्यार करना हिम्मत है, भरोसा करना ताकत है, और किसी को अपनी ज़िन्दगी में जगह देना सबसे बड़ा तोहफा है जो हम खुद को दे सकते हैं।
"मेरी ज़िन्दगी है तू..." विवान ने आराध्या के कान में फुसफुसाया।
"और तुम मेरी," आराध्या ने मुस्कुराते हुए कहा।
समाप्त