Arrenge Marriage in Hindi Love Stories by ziya books and stories PDF | Arrenge Marriage

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Arrenge Marriage

भाग -1 : मेरा हावी ठहरा हुआ पति

बारिश की हल्की बूँदें खिड़की के शीशे पर गिर रही थीं, और अवनि अपने कमरे के कोने में बैठी छत को देख रही थी। उसके मन में तूफ़ान चल रहा था। आज उसके जीवन का सबसे बड़ा फैसला होने वाला था—उसकी शादी।
लेकिन यह शादी उसकी पसंद से नहीं, परिवार की पसंद से तय हुई थी।
“अवनि, बेटा नीचे आओ, लड़के वाले आए हैं,” माँ की आवाज़ आई।
उसने गहरी साँस ली। उसके हाथ ठंडे हो रहे थे। उसने आईने में खुद को देखा—लाल साड़ी, हल्का मेकअप, माथे पर बिंदी… सब कुछ परफेक्ट था, सिवाय उसके दिल के।
वह नीचे आई तो ड्रॉइंग रूम में एक दबदबे वाला माहौल था। सबकी नजरें उसी पर टिक गईं।
सोफे पर बैठा आदमी बाकी सब से अलग लग रहा था। काले सूट में, शांत लेकिन खतरनाक आत्मविश्वास लिए हुए। उसकी आँखें गहरी थीं—जैसे किसी का भी मन पढ़ सकती हों।
“ये हैं आर्यन मल्होत्रा,” पापा ने कहा।
आर्यन शहर के सबसे बड़े बिज़नेस परिवार से था। पैसे, पावर और प्रतिष्ठा—सब कुछ उसके पास था।
अवनि ने सिर झुका लिया।
“हैलो,” आर्यन ने कहा, उसकी आवाज़ गहरी और स्थिर थी।
अवनि ने हल्के से नमस्ते किया।
कुछ औपचारिक बातें हुईं, फिर दोनों को अकेले बात करने के लिए छोड़ दिया गया।
कमरे में सन्नाटा छा गया।
आर्यन ने उसे गौर से देखा। अवनि को महसूस हुआ जैसे वह उसे पूरी तरह पढ़ रहा हो।
“आप इस शादी के लिए तैयार हैं?” उसने सीधा सवाल किया।
अवनि चौंक गई। उसने उम्मीद नहीं की थी कि वह इतना सीधे पूछेगा।
“मुझे… परिवार की खुशी चाहिए,” उसने धीमे से कहा।
आर्यन हल्का सा मुस्कुराया।
“तो मतलब, आप मना नहीं करेंगी।”
उसके शब्द सवाल नहीं, बयान थे।
अवनि को उसकी बातों में एक अजीब सा नियंत्रण महसूस हुआ। जैसे हर चीज़ उसके हिसाब से ही होगी।
“और आप?” अवनि ने हिम्मत कर पूछा।
“मैं जो चाहता हूँ, उसे हासिल करता हूँ,” आर्यन ने शांत स्वर में कहा।
कमरे में अजीब सा तनाव भर गया।
कुछ ही दिनों में रिश्ता पक्का हो गया।
शादी का दिन
घर में रोशनी, संगीत और खुशियों का माहौल था, लेकिन अवनि के अंदर बेचैनी थी।
उसने आर्यन को कुछ ही बार देखा था, लेकिन हर बार उसे लगता कि वह आदमी खतरनाक रूप से शांत है।
मंडप में बैठते समय जब आर्यन ने उसकी तरफ देखा, तो उसकी नजरों में एक अजीब अधिकार था।
जैसे वह कह रहा हो—अब तुम मेरी हो।
सात फेरे खत्म हुए। अवनि मल्होत्रा परिवार की बहू बन गई।
पहली रात
मल्होत्रा मेंशन किसी महल से कम नहीं था।
कमरा फूलों से सजा हुआ था। अवनि बिस्तर के किनारे बैठी थी, हाथ काँप रहे थे।
दरवाज़ा खुला।
आर्यन अंदर आया।
उसने कोट उतारा, टाई ढीली की और बिना कुछ बोले उसकी तरफ बढ़ा।
अवनि का दिल तेजी से धड़कने लगा।
वह उसके सामने आकर रुका।
“डरो मत,” उसने कहा, लेकिन उसकी आवाज़ में आदेश था, दिलासा नहीं।
अवनि ने पहली बार उसकी आँखों में सीधा देखा।
वह आदमी उसे डराता भी था और अजीब तरह से सुरक्षित भी महसूस कराता था।
“मैं तुम्हें समय दूँगा,” आर्यन बोला, “लेकिन एक बात समझ लो… मेरी जिंदगी में जो आता है, वह मेरा होता है।”
उसने उसके माथे से गिरती लट हटाई।
अवनि की सांसें अटक गईं।
वह पीछे हट गया।
“आराम करो,” कहकर वह सोफे पर जाकर लेट गया।
अवनि पूरी रात सो नहीं पाई।
अगली सुबह
अवनि नीचे आई तो पूरा परिवार मौजूद था।
आर्यन पहले से तैयार बैठा था।
उसकी माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब घर की जिम्मेदारी तुम्हारी है।”
अवनि ने सिर हिलाया।
नाश्ते के दौरान उसने देखा कि घर में सब आर्यन से थोड़ा डरते हैं।
नौकर, परिवार के लोग—सब उसकी बात बिना सवाल मानते थे।
ऑफिस जाते समय उसने कहा, “शाम को तैयार रहना।”
“क्यों?” अवनि ने पूछा।
“मेरे साथ पार्टी में चलना है।”
वह बिना जवाब सुने निकल गया।
अवनि को एहसास हुआ—इस शादी में फैसले वह नहीं लेगी।
पार्टी की रात
पार्टी में सबकी नजरें उन पर थीं।
“आर्यन, तुम्हारी पत्नी बहुत खूबसूरत है,” किसी ने कहा।
आर्यन ने हल्के से अवनि की कमर पर हाथ रखा।
उसकी पकड़ मजबूत थी—जैसे चेतावनी हो।
पूरी रात अवनि ने महसूस किया कि वह उसे अपने करीब रख रहा था।
जब एक आदमी उससे ज्यादा बात करने लगा, तो आर्यन अचानक बीच में आ गया।
“मुझे अपनी पत्नी चाहिए,” उसने ठंडे स्वर में कहा।
घर लौटते समय कार में सन्नाटा था।
“तुम्हें दूसरों से इतना घुलने-मिलने की जरूरत नहीं,” आर्यन बोला।
अवनि ने हैरानी से देखा, “मैं बस बात कर रही थी।”
आर्यन ने गाड़ी रोकी।
उसकी तरफ मुड़कर बोला, “मुझे पसंद नहीं कि कोई और तुम्हें उस तरह देखे।”
उसकी आँखों में जलन थी।
पहली बार अवनि को एहसास हुआ—आर्यन उसे खोने से डरता है।
लेकिन यह डर प्यार था या अधिकार?
उसी रात
अवनि बालकनी में खड़ी थी।
आर्यन पीछे आकर रुका।
“तुम खुश नहीं हो,” उसने कहा।
“मैं समझने की कोशिश कर रही हूँ,” अवनि बोली।
आर्यन कुछ पल चुप रहा।
“मैं बुरा आदमी नहीं हूँ… बस जो मेरा है, उसे खोना नहीं चाहता।”
उसकी आवाज़ पहली बार नरम थी।
अवनि का दिल थोड़ा पिघला।
लेकिन उसी पल नीचे से गोली चलने की आवाज आई।
दोनों चौंक गए।
गार्ड भागते हुए अंदर आए।
“सर, किसी ने आप पर हमला करने की कोशिश की।”
अवनि का चेहरा सफेद पड़ गया।
आर्यन ने उसे अपनी तरफ खींच लिया।
“अब समझ आई,” उसने धीमे से कहा, “मेरी दुनिया कितनी खतरनाक है?”
अवनि का दिल जोर से धड़क रहा था।
उसे पहली बार महसूस हुआ—उसकी शादी सिर्फ एक अमीर आदमी से नहीं, बल्कि खतरों से भी हुई है।
और यह तो बस शुरुआत थी…


भाग 1 समाप्त


(आगे — दुश्मनों की साजिश, आर्यन का असली अतीत, और अवनि का बदलता दिल…)