His Arranged Bride in Hindi Love Stories by ziya books and stories PDF | His Arranged Bride

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His Arranged Bride

भाग -1

शादी की शहनाइयाँ पूरे घर में गूँज रही थीं, लेकिन अनाया के दिल में सन्नाटा पसरा हुआ था। लाल जोड़े में सजी वह दर्पण के सामने बैठी थी, पर उसकी आँखों में दुल्हन की चमक नहीं, बल्कि उलझन और डर था।
आज उसकी शादी थी… एक ऐसे आदमी से जिसे उसने सिर्फ दो बार देखा था।
नाम था — आर्यन मल्होत्रा।
दिल्ली के सबसे बड़े बिज़नेस घरानों में से एक का वारिस। सख्त, शांत और बेहद रहस्यमयी। लोगों के बीच उसकी छवि एक ऐसे आदमी की थी जो भावनाओं से दूर रहता है और जिसे सिर्फ अपने काम से मतलब होता है।
अनाया ने धीरे से अपने हाथों की मेहंदी को देखा। उस पर आर्यन का नाम छिपा था, लेकिन उसके दिल में सवाल था — क्या इस नाम में कभी अपनापन होगा?
दरवाज़ा खुला। उसकी माँ अंदर आईं।
“बेटा, बारात पहुँच गई,” माँ ने मुस्कुराने की कोशिश की।
अनाया ने हल्की मुस्कान दी, मगर दिल और भारी हो गया।
यह शादी उसकी पसंद से नहीं, बल्कि परिवार की मजबूरी से हो रही थी। उसके पिता का बिज़नेस डूबने की कगार पर था, और मल्होत्रा परिवार ने मदद की शर्त पर यह रिश्ता रखा था।
अनाया ने विरोध किया था… मगर पिता की झुकी आँखें देखकर चुप हो गई।
उधर, बारात के बीच खड़ा आर्यन बिल्कुल अलग दुनिया में था। उसके चेहरे पर न खुशी थी, न उत्साह। बस एक ठंडा, स्थिर भाव।
उसका दोस्त कबीर पास आया।
“भाई, तेरी शादी है… थोड़ा खुश तो दिख।”
आर्यन ने बिना मुस्कुराए कहा, “यह शादी एक समझौता है, कबीर। बस एक डील।”
कबीर ने गहरी साँस ली। वह जानता था, आर्यन के दिल में पुरानी चोटें थीं, जिनकी वजह से वह रिश्तों पर भरोसा नहीं करता।
मंडप सजा था। अनाया को लाया गया। उसकी नज़र पहली बार आर्यन से मिली।
गहरी, ठंडी, मगर अजीब तरह से आकर्षक आँखें।
कुछ पल के लिए समय रुक सा गया।
आर्यन ने भी उसे देखा। वह उम्मीद कर रहा था कि लड़की भी बाकी लोगों की तरह उसके पैसे और रुतबे से प्रभावित होगी… मगर उसकी आँखों में बस बेचैनी थी।
पंडित मंत्र पढ़ रहे थे। फेरे शुरू हुए।
हर फेरे के साथ अनाया को लग रहा था कि वह अपनी पुरानी जिंदगी से दूर होती जा रही है।
सातवाँ फेरा खत्म हुआ।
अब वह मिस अनाया शर्मा से मिसेज अनाया मल्होत्रा बन चुकी थी।
शादी के बाद, रात को मल्होत्रा मेंशन पहुँचे।
विशाल हवेली, ऊँची दीवारें, और अंदर सन्नाटा।
अनाया ने सोचा था घर में खुशियाँ होंगी, मगर यहाँ सब कुछ ठंडा और औपचारिक था।
आर्यन उसे कमरे तक छोड़कर मुड़ने लगा।
अनाया ने हिम्मत करके पूछा, “क्या… आप कुछ कहना नहीं चाहेंगे?”
आर्यन रुका, फिर बोला,
“देखो, यह शादी सिर्फ परिवारों के लिए हुई है। मैं तुम्हारी जिंदगी में दखल नहीं दूँगा… और तुम मेरी जिंदगी में मत देना।”
उसके शब्द ठंडे थे।
अनाया की आँखें भर आईं, मगर उसने आँसू गिरने नहीं दिए।
आर्यन चला गया।
उस रात, अनाया अकेली कमरे में बैठी रही।
उसे लगा था शादी के बाद सब ठीक हो जाएगा… मगर यहाँ तो शुरुआत ही दूरी से हुई।
अगली सुबह।
अनाया जल्दी उठकर नीचे आई। उसने सोचा, कम से कम घरवालों का दिल जीतने की कोशिश करेगी।
रसोई में काम करने लगी।
सास, मालिनी मल्होत्रा, ने हैरानी से पूछा, “तुम्हें जरूरत नहीं है ये सब करने की।”
अनाया ने मुस्कुराकर कहा, “घर की बहू हूँ… कोशिश तो कर सकती हूँ।”
मालिनी जी के चेहरे पर पहली बार हल्की मुस्कान आई।
तभी आर्यन अंदर आया।
उसने अनाया को किचन में देखा, मगर कुछ नहीं बोला।
बस चुपचाप कॉफी ली और ऑफिस चला गया।
अनाया को लगा जैसे वह घर में मौजूद ही नहीं।
दिन बीतने लगे।
आर्यन देर रात घर आता, बिना बात किए सो जाता।
अनाया अकेलेपन से घुटने लगी।
एक रात वह छत पर खड़ी थी। ठंडी हवा चल रही थी।
अचानक पीछे से आवाज आई, “ठंड लग जाएगी।”
वह मुड़ी। आर्यन था।
“नींद नहीं आ रही?” उसने पूछा।
अनाया ने धीमे से कहा, “नई जगह है… आदत नहीं।”
कुछ पल चुप्पी रही।
फिर अनाया ने पूछ लिया, “आपने शादी के लिए हाँ क्यों कहा?”
आर्यन की आँखें अचानक सख्त हो गईं।
“क्योंकि यह जरूरी था,” उसने छोटा सा जवाब दिया।
“आपको मजबूर किया गया?”
आर्यन ने कुछ नहीं कहा। बस चला गया।
लेकिन उस रात अनाया ने उसकी आँखों में दर्द देखा।
पहली बार।
कुछ दिनों बाद।
अनाया को पता चला कि आर्यन की पुरानी मंगेतर ने उसे धोखा दिया था, और उसी हादसे ने उसे बदल दिया।
अब वह किसी पर भरोसा नहीं करता।
उसे लगा, शायद इसलिए वह इतना दूर रहता है।
उसने तय किया — वह उसे बदलने की कोशिश नहीं करेगी… बस उसके साथ खड़ी रहेगी।
एक शाम, आर्यन ऑफिस से लौटा तो घर में अजीब सन्नाटा था।
पूछने पर नौकर ने बताया, “मैडम की तबीयत खराब है।”
आर्यन पहली बार सीधे अनाया के कमरे में गया।
वह तेज बुखार में थी।
उसने डॉक्टर बुलाया।
रात भर उसके पास बैठा रहा।
सुबह जब अनाया की आँख खुली, उसने आर्यन को वहीं सोते देखा।
उसका दिल हल्का सा मुस्कुरा उठा।
क्या यह परवाह थी?
या बस जिम्मेदारी?
उसी समय आर्यन की आँख खुली।
दोनों की नज़रें मिलीं।
कुछ पल चुप्पी रही।
फिर आर्यन ने धीरे से कहा,
“अपना ख्याल रखा करो।”
यह पहली बार था जब उसके शब्दों में सख्ती नहीं थी।
अनाया के दिल में उम्मीद की हल्की किरण जगी।
लेकिन उसे नहीं पता था…
कि उनकी जिंदगी में तूफान अभी बाकी था।
क्योंकि कोई ऐसा शख्स वापस आने वाला था…
जो उनकी इस नई बनी जिंदगी को तोड़ सकता था।


भाग 1 समाप्त।