सियोल की ऊँची इमारतों के बीच एक नाम था, जिसे हर कोई जानता था—
कांग ताए-ह्युन।
तीस साल की उम्र में हान्युल ग्रुप का CEO।
दौलत, ताक़त, रुतबा—सब कुछ था उसके पास।
पर एक चीज़ नहीं थी—अपनी ज़िंदगी पर हक़।
“अगर इस साल शादी नहीं की,” उसके दादाजी ने सख़्त आवाज़ में कहा,
“तो CEO की कुर्सी भूल जाओ।”
ताए-ह्युन के चेहरे पर कोई भाव नहीं आया।
उसने बहुत पहले सीख लिया था—
भावनाएँ कमज़ोरी होती हैं।
उसके लिए शादी भी एक डील थी।
और तभी उसकी ज़िंदगी में आई—
हान जी-वू।
जी-वू किसी अमीर घर से नहीं थी।
वह एक फ्रीलांस ट्रांसलेटर थी,
जो अपने बीमार छोटे भाई के इलाज के लिए हर दिन ज़िंदगी से लड़ रही थी।
जब उसे एक “बिज़नेस मीटिंग” के लिए बुलाया गया,
तो उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि उसकी किस्मत पलटने वाली है।
ताए-ह्युन ने सीधे कहा,
“मुझे एक पत्नी चाहिए।
और तुम्हें पैसों की ज़रूरत है।
यह एक कॉन्ट्रैक्ट मैरिज होगी।”
जी-वू स्तब्ध रह गई।
“आप मज़ाक कर रहे हैं?”
“नहीं,” वह शांत स्वर में बोला।
“यह पूरी तरह कानूनी होगा। एक साल के लिए।”
शर्तें साफ़ थीं—
एक साल की शादी
कोई प्यार नहीं
सिर्फ़ दिखावे की पत्नी
एक तय रकम
शादी खत्म होते ही अलग रास्ते
जी-वू ने काग़ज़ों को देखा।
उसके हाथ काँप रहे थे।
“यह शादी नहीं… सौदा है,” उसने कहा।
ताए-ह्युन बोला,
“कम से कम झूठ नहीं है।”
कुछ पल की चुप्पी के बाद—
जी-वू ने साइन कर दिया।
क्योंकि मजबूरी कभी-कभी आत्मसम्मान से ज़्यादा भारी हो जाती है।
उनकी शादी ने सियोल के हाई-सोसाइटी में तहलका मचा दिया।
एक आम लड़की—
और इतना बड़ा CEO?
पेंटहाउस में जी-वू का स्वागत ठंडे सन्नाटे ने किया।
अलग कमरे।
नपी-तुली मुस्कानें।
तय समय पर साथ दिखना।
शुरू में वे सिर्फ़ पति-पत्नी दिखते थे।
असल में अजनबी थे।
लेकिन धीरे-धीरे—
जी-वू रात को खाना बना देती,
जब ताए-ह्युन काम में खुद को भूल जाता।
ताए-ह्युन बिना कुछ कहे
उसके कंधों पर शॉल डाल देता,
जब वह देर रात काम करते-करते सो जाती।
एक रात जी-वू ने पूछा,
“आपने शादी के लिए मुझे ही क्यों चुना?”
ताए-ह्युन ने कहा,
“क्योंकि यह शादी खत्म होनी तय है।”
जी-वू हल्की-सी मुस्कान के साथ बोली,
“यानी सबसे सुरक्षित रिश्ता।”
उस रात, ताए-ह्युन सो नहीं पाया।
मुश्किलें तब शुरू हुईं,
जब मीडिया ने जी-वू के अतीत को उछालना शुरू किया।
बोर्ड मीटिंग्स में फुसफुसाहटें—
“यह तो बस अस्थायी पत्नी है।”
अस्थायी।
वह शब्द जी-वू के दिल में चुभ गया।
वह धीरे-धीरे दूर होने लगी।
ताए-ह्युन ने पहली बार बेचैनी महसूस की।
“तुम बदल गई हो,” उसने कहा।
जी-वू की आँखें भर आईं।
“क्योंकि यह शादी कभी असली थी ही नहीं।”
पहली बार, ताए-ह्युन की आवाज़ ऊँची हुई—
“तो फिर दर्द क्यों होता है?”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
क्योंकि अब दोनों सच जान चुके थे।
जी-वू ने एक दिन अचानक घर छोड़ दिया।
टेबल पर कॉन्ट्रैक्ट रखा था,
और एक चिट्ठी—
“मैंने आपकी पत्नी बनने का समझौता किया था।
अकेले प्यार करने का नहीं।”
खाली पेंटहाउस में खड़े ताए-ह्युन को पहली बार लगा—
दौलत किसी काम की नहीं।
उसने कॉन्ट्रैक्ट फाड़ दिया।
और वह किया,
जो CEO कांग ताए-ह्युन कभी नहीं करता था—
वह किसी के पीछे भागा।
अस्पताल में,
जहाँ जी-वू अपने भाई के पास बैठी थी,
ताए-ह्युन ने कहा—
“अब कोई समझौता नहीं।
ना CEO, ना कॉन्ट्रैक्ट।
बस मैं… और तुम।”
जी-वू ने सिर हिला दिया।
“आपको प्यार नहीं हुआ।
आप बस अकेले नहीं रहना चाहते।”
ताए-ह्युन उसके सामने घुटनों पर बैठ गया।
“मैं गलत था,” उसकी आवाज़ काँप रही थी।
“प्यार कमज़ोरी नहीं है।
वही इकलौती चीज़ है, जो बची रही।”
उसने कंपनी छोड़ने का ऐलान कर दिया।
सबके सामने।
बिना शर्त।
अंत
उन्होंने अपनी शादी दोबारा लिखी।
ना कोई शर्त।
ना कोई समयसीमा।
ना कोई भागने का रास्ता।
सिर्फ़ दो लोग—
जो हर दिन एक-दूसरे को चुनते हैं।
काग़ज़ों से शुरू हुई यह शादी
आख़िरकार
दिल से लिखी गई।
— समाप्त — 💍❤️