Majburi ka Souda - 2 in Hindi Thriller by Abantika books and stories PDF | मजबूरी का सौदा: एक अनकही शर्त - 2

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मजबूरी का सौदा: एक अनकही शर्त - 2

अध्याय 2: आधी रात का राज़


​स्टोर रूम की खिड़की से आती ठंडी हवा अंजलि के बदन में सिहरन पैदा कर रही थी। बाहर बारिश तेज़ हो चुकी थी, लेकिन बंगले के अंदर से आती उन चीखों ने अंजलि का खून सुखा दिया था।
​"नहीं! मुझे छोड़ दो! रुद्र... तुम ऐसा नहीं कर सकते!"— किसी औरत की दबी हुई आवाज़ आई और फिर एक जोरदार धमाका हुआ, जैसे कोई कीमती गुलदस्ता दीवार पर दे मारा गया हो।
​अंजलि से अब और इंतज़ार नहीं हुआ। रुद्र ने उसे अंदर आने से मना किया था, लेकिन किसी की जान खतरे में हो तो वह चुप कैसे रहती? उसने दबे पाँव स्टोर रूम का दरवाज़ा खोला और भीगते हुए बंगले के पिछले दरवाज़े से अंदर दाखिल हो गई।
​अंदर का नज़ारा बाहर से बिल्कुल अलग था। चारों तरफ सन्नाटा था, लेकिन सीढ़ियों के पास खून जैसी दिखने वाली लाल शराब बिखरी हुई थी। सानिया के कदम ऊपर की मंजिल की ओर बढ़े, जहाँ से रोशनी आ रही थी।
​रुद्र के कमरे का दरवाज़ा थोड़ा खुला था। अंजलि ने अपनी सांसें रोक लीं और दरार से अंदर झाँका।
​कमरे के अंदर का नज़ारा देखकर उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। रुद्र वहाँ अकेला नहीं था। कमरे के बीचों-बीच एक बड़ी सी पेंटिंग रखी थी, जो फटी हुई थी। रुद्र ज़मीन पर बैठा था, उसके हाथ से खून बह रहा था और उसके सामने एक व्हीलचेयर पर एक लड़की बैठी थी, जिसकी शक्ल हुबहू अंजलि से मिलती थी!
​वह लड़की बेजान आँखों से सामने देख रही थी, जैसे वह ज़िंदा तो हो पर उसके अंदर रूह न हो।
​"देखो अंजलि! मैं इसे ले आया। बिल्कुल तुम्हारी तरह," रुद्र उस बेजान लड़की से बात कर रहा था, लेकिन उसकी नज़रें अंजलि की तरफ नहीं, बल्कि उस लड़की की तरफ थीं।
​अंजलि का गला सूख गया। 'तो क्या रुद्र ने मुझे मेरी काबिलियत के लिए नहीं, बल्कि इस हमशक्ल लड़की की वजह से यहाँ बुलाया है? कौन है यह लड़की? और रुद्र इसके साथ क्या कर रहा है?'
​तभी अचानक रुद्र की नज़र कमरे के दरवाज़े पर पड़ी। उसने देखा कि अंजलि वहां खड़ी है और उसने उसकी 'पहली शर्त' तोड़ दी है।
​रुद्र की आँखें गुस्से से लाल हो गईं। वह बिजली की फुर्ती से उठा और दरवाज़े की तरफ लपका। अंजलि भागने ही वाली थी कि रुद्र ने उसका हाथ पकड़कर उसे दीवार से सटा दिया।
​उसकी पकड़ इतनी मज़बूत थी कि अंजलि की सिसकी निकल गई।
​"मैंने कहा था न... सूरज ढलने के बाद इस बंगले में मत दिखना!" रुद्र की आवाज़ किसी घायल शेर की तरह थी। "अब तुमने जो देखा है, उसकी कीमत तुम्हें अपनी आज़ादी खोकर चुकानी पड़ेगी।"
​उसने अंजलि को धक्का दिया और कमरे का दरवाज़ा बाहर से लॉक कर दिया। अंजलि अब उस रहस्यमयी लड़की के साथ उस कमरे में कैद थी।


लेखिका का नोट :
​"रुद्र उस हमशक्ल लड़की को क्या बुला रहा था? क्या अंजलि इस कैद से निकल पाएगी? और वह लड़की कौन है जो अंजलि जैसी दिखती है? सस्पेंस गहरा होता जा रहा है! अगले भाग के लिए मुझे फॉलो करना न भूलें।"


जारी है....
बने रहिए...

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