The beloved wife of two husbands - 6 in Hindi Love Stories by Sonam Brijwasi books and stories PDF | दो पतियों की लाडली पत्नी - 6

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 6

पहली बार तीनों की धड़कनें एक साथ

कमरे में हल्की रोशनी है। Shreya बीच में खड़ी है। करन उसके पीछे आकर उसकी कमर पर हाथ रखता है। कबीर सामने खड़ा होकर उसके चेहरे को हल्के से छूता है।
Shreya की सांसें भारी हैं।
दोनों ओर से महसूस होने वाला प्यार उसे कमजोर भी बना रहा है और पिघला भी रहा है।

कबीर: (धीरे से) बोला - 
डरो मत… हम यहीं हैं।

करन: (उसकी गर्दन पर हल्का स्पर्श करते हुए) बोला - 
बस दिल की सुनो… बाकी हम संभाल लेंगे।

Shreya आँखें बंद कर लेती है। एक हाथ से करन की उंगलियाँ पकड़ती है… दूसरे से कबीर की शर्ट।
तीनों पहली बार एक ही धड़कन महसूस करते हैं।
एक पल… जो आगे आने वाली सब नज़दीकियों का दरवाज़ा खोल देता है।

तीनों अभी-अभी उस नज़दीकी वाले पल से बाहर आए हैं। हवा में हल्की धीमी-धीमी सी गर्माहट है। Shreya थोड़ा शरमा गई है और पलंग के कोने पर बैठ जाती है। करन और कबीर उसे देखकर मुस्कुराते हैं—एक मासूम, प्यारी मुस्कान।
कबीर धीरे से पास आता है

कबीर बोला - 
अरे… डरो मत। हम लोग कोई जबरदस्ती थोड़ी कर रहे हैं। बस… जैसे तुम आराम महसूस करो वैसा ही।

Shreya उसकी तरफ देखती है, आँखें बड़ी बड़ी—डरी नहीं, बस बेहद भावुक।
करन उसके बगल में बैठता है

करन बोला - 
तुम जो भी हो… जैसी भी हो… हम दोनों के लिए वैसी ही perfect है।
हम पर ज़रूरी नहीं… तुम दिल पर भरोसा करो। बस सच्चाई से रहना। बाकी सब अपने-आप ठीक होगा।

Shreya का गला रुंध जाता है। वह चुपचाप करन के कंधे पर सिर रख देती है। करन उसे बहुत हल्के से थाम लेता है—जैसे कहीं टूट न जाए।
कबीर सामने से उसके बाल कान के पीछे करता है

कबीर बोला - 
तुम्हे पता है shreya…
हम दोनों तुम्हारे लिए लड़ नहीं सकते।
क्योंकि तुम दोनों की हो… और हमेशा रहोगी।

श्रेया की पलकों पर आंसू चमकते हैं, मगर मुस्कान भी आ जाती है।
तीनों की पहली सुकून वाली झप्पी
कबीर, करन और शरेया धीरे-धीरे एक ही ग्रुप-हग में आ जाते हैं।
पहली बार… तीनों को लगता है, ये रिश्ता असंभव नहीं है।
थोड़ा अलग है… पर गलत नहीं।
इसमें प्यार है, सच्चाई है और एक अजीब सा सुकून है।

शरेया धीरे से फुसफुसाती है—
मैं… आप दोनों को छोड़ नहीं पाऊंगी। 
कभी नहीं ।

दोनों एक साथ जवाब देते हैं—
और हम भी कभी नहीं।

तीनों एक-दूसरे से हल्के-हल्के लगकर बैठ जाते हैं।
दिल शांत है… और रिश्ता पहली बार मजबूत feel हो रहा है।

 सुबह का घर, रसोई में हँसी-मज़ाक

श्रेया रसोई में खड़ी है। बाल खुले हुए, माथे पर पसीने की हल्की बूंदें, और हाथ में चमचा।
दूसरी तरफ करन और कबीर दरवाजे से टेक लगाकर उसे चुपचाप देख रहे हैं।

कबीर (शरारती अंदाज़ में) बोला - 
करन भैया… लगता है आज फिर हमें नाश्ते में emotional love-dose मिलेगा।

करन (मुस्कुराते हुए) बोला - 
Hmm… क्योंकि हमारी बीबी तो बड़ी caring निकली।

Shreya मुड़ती है, दोनों को घूरती है।

श्रेया बोली - 
अच्छा? तो मत खाना!
मैं अपने लिए परांठे बनती हूं - दोनों भूखे ही जाइए office...

कबीर तुरन्त दौड़ता है उसकी तरफ।

कबीर बोला - 
अरे रे babu sorry!
हमें भूखा नही रहना।
और तुम्हारा गुस्सा तो बिलकुल sweet dish जैसा है।

Shreya हँस देती है और कबीर उसके गाल पर हल्के से हाथ रख देता है।
तीनों टेबल पर बैठे हैं। करन shreya की प्लेट में सब्जी डाल रहा है, कबीर रोटी तोड़ कर दे रहा है।

करन बोला - 
तुम खुद कम खाती हो, पहले हम दोनों को खिला देती हो।

Shreya (नर्म आवाज़ में) बोली - 
प्यार करती हूं आप दोनों से।
इसलिए care करती हूं।

कबीर spoon घुमाते-घुमाते उसे देखता है—प्यारी, मासूम, बिल्कुल उनकी।

कबीर बोला - 
वैसे एक बात बताऊं?
तुम जब care करती हो ना...
दिल करता है तुम्हे पकड़ के झप्पी दे दूं।

कहते ही कबीर उठकर जोर से श्रेया को गले लगा लेता है।
Shreya खिलखिलाकर हंस पड़ती है।

खाने के बाद - 
करन quietly shreya के पीछे खड़ा होता है और उसके बाल ठीक करता है।

करन (धीमे से) बोला - 
तुम्हारे बाल इतने लंबे हैं।
घर घर में घूमते रहते हैं।
कभी कभी सोचता हूं इनके मजे में मैं पड़के गिर ना जाऊं।

Shreya लाल हो जाती है और करन की तरफ हल्की सी चपत लगाती है।

श्रेया बोली - 
आप भी ना करण जी...
तीनों साथ हँसते हैं।
यह अब घर नहीं, एक छोटा-सा संसार लगने लगा है—
जहाँ
care है
प्यार है
मस्ती है
और सबसे ज़्यादा… तीन दिलों की सच्चाई है।

Shreya मन-ही-मन सोचती है—
कैसे दोनों से ही इतना प्यार हो गया मुझे?
शायद यही मेरा सच है।

दोपहर, घर का हॉल

Shreya सोफ़े पर दुबकी हुई बैठी है। चेहरा पीला, आंखों के नीचे dark circles और कमजोरी।
वह अपने घुटनों को पकड़कर झुकी हुई है।
पेट में दर्द… शरीर भारी… मूड चिड़चिड़ा।
पर बोल नहीं पा रही।
किचन में करन और कबीर कुछ काम कर रहे हैं।

कबीर (आवाज़ देते हुए) बोला - 
Shreyaaa… चाय बना दूं?
या कुछ और खाना है ?

श्रेया गुस्से में हल्की सी झुंझलाहट दिखाते हुए बोलती है—
Please Kabir ji!
बस… थोड़ा शांत रहने दीजिए मुझे !

कबीर चौंक जाता है। वह आमतौर पर ऐसे नहीं बोलती।
करन तुरंत उसके पास आता है, उसकी चाल धीमी, चिंतित।
वो श्रेया की side में बैठ जाता है। और उसका एक हाथ अपने हाथ में ले लेता है ।

Karan बोला - 
Shreya… क्या हुआ?
तबियत खराब लग रही है ।

श्रेया सिर झुकाकर बस “hmm” कर देती है, बोल नहीं पाती।

Karan (धीमे सुर में) बोला - 
दर्द हो रहा है?
पेट में?

श्रेया हल्का सा सिर हिला देती है… हां।
आँखों में आँसू आ जाते हैं, पर वह मुंह फेर लेती है।
कबीर भागता हुआ आता है, उसके हाथ में पानी का गिलास।

Kabir बोला - 
अरे भैया, इसका चहरा देखो…बिल्कुल सफेद हो रहा है !
Shreya… कुछ तो बताओ हमें!

Shreya फिर चिड़चिड़ाकर बोलती है—
कुछ नहीं हुआ है मुझे…बस मुझे अकेला छोड़ दो आप दोनों।
मैं थक गई हूं!

कहते-कहते उसकी आँखें भर आती हैं।
करन कुछ सेकेंड चुप रहता है… फिर बड़ी नरमी से उसे देखता है।

Karan (बहुत धीमे) बोला - 
Shreya…
Periods आए हैं क्या?

Shreya का चेहरा लाल हो जाता है।
वह झट से मुंह नीचे कर लेती है, आँखें भर जाती हैं।
वह धीरे से सिर हिला देती है—हाँ।

कबीर पहले तो एकदम awkward हो जाता है… कान तक लाल… फिर गंभीर हो जाता है।

Kabir (धीरे से) बोला - 
अरे…तो ये बात थी।
तुमने पहले क्यों नहीं बताया?
हम कोई aliens थोड़ी ना हैं shreya...

Karan उसके पास बैठ जाता है।

Karan बोला - 
Listen… periods कोई शर्म की बात तो नहीं है।
तुम हम दोनों की पत्नी हो… problems share नहीं करोगी तो हम लोग कैसे care करेंगे?

Shreya की आंखों से आंसू टपक जाते हैं।

Shreya (टूटे स्वर में) बोली - 
मैं… कैसे बोलती?
घर में कोई औरत नहीं…।
दो - दो पति है…।
I felt so awkward…

Kabir तुरंत टिश्यू लाकर उसके आँसू पोंछता है।

Kabir बोला - 
अरे पगली!
हम लोग modern engineers हैं…।
ऐसी चीजें समझते हैं…।
तुम बस बोल दिया करो… हम दोनों line में खड़े रहेंगे मदद करने!

Shreya बीच में ही थोड़ा मुस्कुरा देती है।
करन उसके पैरों के पास बैठकर हीटिंग पैड लगाता है।
कबीर किचन में भागकर गुड़ वाली चाय और dark chocolate लाता है।

Karan बोला - 
ये heating pad रख लो… दर्द कम होगा।

Kabir बोला - 
ये chocolate खा लो… mood भी ठीक हो जाएगा और energy भी।

Shreya दोनों की तरफ देखती है—थोड़ी शर्म, थोड़ा प्यार, थोड़ा सुकून।

श्रेया धीरे से बोलती है—
आप दोनों…
इतनी care क्यों करते हो मेरी?

दोनों एक साथ मुस्कुराते हैं—

Karan & Kabir (एक साथ) बोले - 
क्योंकि हम तुमसे प्यार करते हैं।

Shreya की आँखों में पहली बार दर्द की जगह सुरक्षित होने का अहसास भर जाता है।