बगावत के सुर
एपिसोड 6: नई जड़ें, पुराने कांटेनई शुरुआत की कसौटी
दरभंगा की शामें अब शांत हो चुकी थीं। स्टेशन प्रोजेक्ट पर काम जोर-शोर से चल रहा था, और पृथ्वी राठौर हर सुबह साइट पर पहुँचते ही सनाया को एक मैसेज भेजते: "आज भी सब ठीक। तुम बस मुस्कुराती रहो।"
सनाया अब हवेली छोड़ चुकी थी। एक छोटे से फ्लैट में शिफ्ट हो गई, जहाँ वो दिन-रात अपने पिता के केस की फाइलें देखती। भानु प्रताप जेल में था, लेकिन कोर्ट में अपील की खबरें आ रही थीं। सनाया का दिल भारी था—पिता का अपराधी बनना उसकी जीत नहीं, हार लग रही थी।
एक शाम पृथ्वी उसके फ्लैट पर पहुँचा। उसके हाथ में एक छोटा सा गिफ्ट पैकेट था। "ये ले, पुराने दिनों की याद।" अंदर था वही पुराना रुमाल, धोया-सा साफ। सनाया की आँखें नम हो गईं। दोनों बालकनी में बैठे, चाय पीते हुए पुरानी बातें करने लगे। पृथ्वी ने कहा, "सनाया, अब हमारा वक्त है। स्टेशन बनेगा, और हम... शायद साथ में कुछ नया शुरू करें।"छिपा खतरा
लेकिन शांति ज्यादा दिन नहीं टिकी। अगले हफ्ते, सनाया को एक अनजान नंबर से कॉल आया। आवाज भारी थी: "ठाकुर साहब का बदला होगा। तूने गद्दारी की, अब तेरी जिंदगी जल जाएगी।" सनाया ने पृथ्वी को बताया, लेकिन वो चिंता मत करो बोला। पर अंदर ही अंदर सतर्क हो गया।
उधर, जेल से भानु प्रताप के पुराने साथी कालिया बाहर आ चुका था। वो गुप्त मीटिंग्स कर रहा था—भानु प्रताप के बचे-खुचे गुर्गों के साथ। प्लान था साफ: स्टेशन साइट पर ब्लास्ट, और सनाया को अगवा करके पृथ्वी को तोड़ना। कालिया ने सनाया के फ्लैट के बाहर निगरानी लगाई। "ठाकुर साहब की बेटी भूल गई है कि खून पानी नहीं होता।"प्यार की परीक्षा
एक रात, सनाया को बाहर से शोर सुनाई दिया। दरवाजा खटखटाया तो कालिया के दो आदमी अंदर घुसने को तैयार। सनाया ने चीख मारी और पृथ्वी को फोन किया। पृथ्वी अपनी जिप से दौड़ा चला आया। गोलीबारी हुई—पृथ्वी ने एक को गोली मारी, दूसरे को पकड़ लिया। लेकिन कालिया भाग निकला।
अस्पताल में पृथ्वी का कंधा पट्टी में लिपटा था। सनाया उसके पास बैठी रो रही थी। "ये सब मेरी वजह से... पापा के लोग मुझे माफ नहीं करेंगे।"
पृथ्वी ने उसका हाथ थामा। "सनाया, तेरी वजह से ही तो मैं जिंदा हूँ। तूने मुझे बचाया था मैदान में, आज मैंने तुझे। ये जंग खत्म नहीं हुई, लेकिन हम साथ हैं—ये हमारी ताकत है।" दोनों ने पहली बार होंठों को छुआ। वो चुंबन पुरानी दुश्मनी को मिटाने वाला था।अंतिम रहस्य
अगले दिन, पृथ्वी को एक पुरानी डायरी मिली—भानु प्रताप के तहखाने से, जो सनाया ने पहले छिपाई थी। उसमें लिखा था: "राजवीर राठौर की मौत हादसा नहीं, मेरी साजिश थी।" पृथ्वी स्तब्ध। सनाया ने पढ़ा तो काँप गई। "पापा ने... तुम्हारे बाप को मारा?"
पृथ्वी ने डायरी बंद की। "अब सच सबके सामने आएगा। लेकिन पहले कालिया को पकड़ना है। सनाया, तू मेरे साथ है न?"
सनाया ने सिर हिलाया। दरभंगा की रातों में अब बगावत के सुर फिर गूँजने वाले थे—लेकिन इस बार न्याय के। स्टेशन की नींव के साथ, उनकी नई जिंदगी की भी।
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