मंच पर उद्घाटन फिर शुरू। मंत्री ने रिबन काटा। पहली ट्रेन सीटी बजा कर आई। पृथ्वी-सनाया ने प्लेटफॉर्म पर खड़े होकर तालियाँ सुनीं। शहर ने जश्न मनाया। शाम को घर लौटे। सनाया ने कहा, "सब खत्म। अब हमारा बच्चा आएगा—स्टेशन की तरह मजबूत, प्यार से भरा।" पृथ्वी हँसा, गले लगाया। "हाँ, बेटा हो या बेटी—राठौर-ठाकुर का वारिस। बगावत के सुर हमेशा के लिए शांत।"एपिलॉग: नई सुबह
महीनों बाद स्टेशन चहल-पहल से गुलजार। पृथ्वी स्टेशन मैनेजर, सनाया सोशल वर्कर—गरीबों के लिए ट्रेन टिकट स्कीम चला रही। विक्रम पार्टनर, शादीशुदा। रमेश प्रमोशन पा चुका। एक शाम बालकनी में सनाया बोली, "याद है वो पुराना रुमाल? हमारी कहानी का पहला पन्ना।" पृथ्वी ने गहरा चुंबन दिया। "अब किताब पूरी हो गई। बगावत के सुर प्यार के गीत बन गए।" दूर ट्रेन की सीटी गूँजी—नई यात्राओं, नई उम्मीदों की। दरभंगा बदला, जिंदगियाँ बदलीं।
बगावत के सुर
नई पीढ़ी, पुरानी छायादरभंगा का नया रेलवे स्टेशन अब शहर का दिल बन चुका था। ट्रेनें आ-जा रही, यात्री हँसते-खेलते। पृथ्वी राठौर स्टेशन मैनेजर के रूप में व्यस्त, सनाया सोशल वर्कर। विक्रम उनका पार्टनर, रमेश सिक्योरिटी हेड। शादी को नौ महीने हो चुके—सनाया का पेट अब दिख रहा। "हमारा बेटा आएगा, पृथ्वी। नाम रखेंगे आरव—नई शुरुआत।" पृथ्वी मुस्कुराया, "हाँ, लेकिन सावधान रहना। डॉक्टर ने आराम कहा।" जिंदगी शांत लग रही, लेकिन एक पत्र ने सब हिला दिया। भानु प्रताप की जेल से: "मेरा असली वारिस बाहर। स्टेशन को नेमत न समझना।"नया खतरा
एक सुबह स्टेशन पर हादसा। सिग्नल फेल, दो ट्रेनें करीब से बच गईं। जांच में हैकिंग का पता चला। पृथ्वी ने मीटिंग बुलाई। "कौन? भानु प्रताप मरा नहीं!" विक्रम बोला, "जेल से चिट्ठी याद? उनका 'असली वारिस'। मेरी मौसी का बेटा—रुद्र। बचपन से गायब। पापा ने छिपाया था।" सनाया चौंकी, "रुद्र? मैंने सुना था—गंगा में बहा दिया।" रमेश ने रिपोर्ट दिखाई, "संदिग्ध आईपी स्टेशन के पास। रुद्र ठाकुर, मुंबई से।"रुद्र की फाइल खुली। 28 साल का, हैकर, भानु प्रताप का गुप्त बेटा। माँ की मौत के बाद अंडरवर्ल्ड में। प्लान: स्टेशन को कंट्रोल कर ब्लैकमेल, बदला। रुद्र का मैसेज आया पृथ्वी के फोन पर: "भाई साहब, स्टेशन मेरा। सनाया दीदी का बच्चा खतरे में।"सनाया पर हमला
सनाया अस्पताल चेकअप से लौट रही। अचानक बाइक सवार करीब आया—रुद्र का आदमी। सनाया के ड्राइवर को धक्का, कार साइड हो गई। आदमी उतरा, चाकू लहराया। "रुद्र भैया का पैगाम—स्टेशन बंद करो!" सनाया ने कार का हॉर्न मारा, चीखी। तभी विक्रम पहुँचा—ट्रैकिंग से। लाठी से हमलावर को भगाया। सनाया काँप रही, "बच्चा... सुरक्षित?" विक्रम गले लगाया, "हाँ दीदी। रुद्र पागल है। मैं संभालूँगा।"पृथ्वी घर पहुँचा। "ये रुद्र भानु का क्लोन है। प्लान बनाते हैं।" रमेश ने साइबर एक्सपर्ट बुलाया। ट्रैकिंग से रुद्र का ठिकाना—पुरानी हवेली। रात को रेड। पृथ्वी, विक्रम, रमेश घुसे। रुद्र लैपटॉप पर। "आ गये राठौर? स्टेशन का सिस्टम मेरा!" गोली चली। झड़प मची। विक्रम ने रुद्र को पकड़ा। "भाई, रुको! पापा की गलतियाँ दोहरा मत। हम परिवार।" रुद्र टूटा, "माँ मरी पापा के डर से। बदला लेना था।"उद्घाटन का जश्न
स्टेशन सेफ। रुद्र ने सरेंडर किया, काउंसलिंग में। सनाया का बच्चा पैदा हुआ—आरव। अस्पताल में पृथ्वी बोला, "हमारी नई पीढ़ी। बगावत खत्म।" महीनों बाद स्टेशन पर फैमिली गेट-टुगेदर। विक्रम रुद्र को लाया—सुधर चुका। रमेश ताली बजा रहा। सनाया ने कहा, "पुरानी छाया मिट गई। अब सुर प्यार के।" पृथ्वी ने चुंबन दिया। ट्रेन सीटी बजी—भविष्य की।लेकिन रुद्र ने फुसफुसाया, "एक राज बाकी..." (सीजन 3 के लिए?)