The RajaSaab - Full Story in Hindi Film Reviews by suraj books and stories PDF | The RajaSaab - Full Story

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The RajaSaab - Full Story

Prabhas की सबसे रहस्यमयी हॉरर-कॉमेडी फिल्म

क्या आपने कभी सोचा है…
अगर कोई बूढ़ी औरत, जिसकी याददाश्त धीरे-धीरे खत्म हो रही हो, वो हर रात एक ही बात कहे —
“वो ज़िंदा है… वो उस हवेली में फंसा हुआ है…”
तो क्या आप उसे बीमारी समझेंगे?
या फिर उस डरावने सच को ढूंढने की हिम्मत करेंगे?

आज की इस वीडियो में हम जानेंगे राजा साब की पूरी कहानी —
जहाँ हंसी और डर, लालच और परिवार, और जिंदा इंसान और मरी हुई आत्माएं आमने-सामने टकराती हैं।

राजा और उसकी दादी – कहानी की इमोशनल जड़
राजा एक बेफिक्र और मस्तमौला लड़का है, जो अपनी दादी गंगम्मा के साथ रहता है। दादी अल्ज़ाइमर की मरीज हैं और अक्सर अपने पति कनकराजू को याद करती रहती हैं, जो सालों पहले रहस्यमय तरीके से गायब हो गए थे। दादी को बार-बार सपनों में एक पुरानी हवेली दिखाई देती है और वो राजा से कहती हैं कि उसके दादा वहीं फंसे हुए हैं। राजा शुरू में इसे बीमारी मानता है, लेकिन दादी की आंखों में छिपा डर और भरोसा उसे सोचने पर मजबूर कर देता है।

एक फैसला, जो ज़िंदगी बदल देता है
दादी की बातों को हल्के में लेना राजा के बस की बात नहीं होती। वह तय करता है कि चाहे जो हो जाए, वह उस हवेली को ढूंढेगा। यही एक फैसला राजा की आरामदायक ज़िंदगी को डर, रहस्य और खतरों से भरी दुनिया में ले जाता है। वह शहर से दूर, सुनसान इलाके में खड़ी उस पुरानी हवेली तक पहुंचता है, जो बाहर से ही बता देती है कि इसके अंदर कुछ बहुत गलत है।

हवेली, जहाँ डर और हंसी साथ चलते हैं
जैसे ही राजा हवेली के अंदर कदम रखता है, अजीब घटनाएं शुरू हो जाती हैं। दरवाज़े अपने-आप खुलते हैं, अंधेरे में परछाइयाँ हिलती हैं और दीवारों से आवाज़ें आती हैं। लेकिन राजा के साथ मौजूद लोग इन डरावने पलों को मज़ाक में बदल देते हैं। यहीं से फिल्म का हॉरर-कॉमेडी एंगल शुरू होता है, जहाँ डर के साथ हंसी भी चलती रहती है।

हवेली का छुपा हुआ सच
हवेली के अंदर राजा को पुराने कागज़, तस्वीरें और निशान मिलते हैं, जो उसके दादा कनकराजू के अतीत की परतें खोलते हैं। कभी यह आदमी बहुत अमीर और ताकतवर था, लेकिन उसे और चाहिए था — ज्यादा पैसा, ज्यादा ताकत, ज्यादा नाम। इसी लालच में उसने काली शक्तियों और तांत्रिक क्रियाओं का सहारा लिया और अपनी आत्मा तक दांव पर लगा दी।

आत्माएं, जो बदला नहीं… मुक्ति चाहती हैं
राजा को धीरे-धीरे समझ आता है कि हवेली में जो आत्माएं हैं, वो बुरी नहीं हैं। वे उन लोगों की आत्माएं हैं, जिन्हें कनकराजू की गलतियों की कीमत चुकानी पड़ी। ये आत्माएं बदला नहीं, बल्कि आज़ादी चाहती हैं। दादी को जो सपने आते हैं, वो असल में इन्हीं आत्माओं और दादा की आत्मा के संदेश हैं।

राजा का असली ट्रांसफॉर्मेशन
अब तक राजा सिर्फ़ मज़ाक उड़ाने वाला लड़का था, लेकिन अब वह जिम्मेदारी समझने लगता है। वह तय करता है कि वह अपने दादा की गलतियों को सुधारेगा, चाहे इसके लिए उसे अपनी जान ही क्यों न दांव पर लगानी पड़े। यही वो मोड़ है, जहाँ राजा एक लड़के से राजा साब बनता है।

संजय दत्त का खतरनाक और इमोशनल रोल
संजय दत्त का किरदार कभी एक घमंडी इंसान तो कभी एक डरावनी आत्मा के रूप में सामने आता है। उनका रोल यह दिखाता है कि लालच इंसान को धीरे-धीरे अंदर से खोखला कर देता है और अंत में वह खुद अपनी बनाई हुई जेल में फंस जाता है।

क्लाइमैक्स – डर, इमोशन और सच्चाई की टक्कर
फिल्म का आखिरी हिस्सा पूरी तरह हॉरर और इमोशन से भरा है। राजा काली शक्तियों का सामना करता है, आत्माओं को मुक्त करने की कोशिश करता है और अपने दादा को उसकी गलतियों का एहसास कराता है। दादा को समझ आता है कि दौलत और ताकत सब कुछ नहीं होती। सच्चा सुकून माफी और प्रायश्चित में है।

दादी का सीन – सबसे इमोशनल पल

फिल्म का सबसे भावुक पल तब आता है, जब दादी को कुछ पलों के लिए सब कुछ याद आ जाता है। वह अपने पति की मौजूदगी महसूस करती हैं और शांति से मुस्कुरा देती हैं। यह सीन साबित करता है कि याददाश्त भले चली जाए, लेकिन प्यार कभी नहीं जाता।

Ending और Part 2 का इशारा

हवेली का श्राप खत्म हो जाता है, आत्माएं मुक्त हो जाती हैं और राजा अपनी दादी के साथ नई शुरुआत करता है। लेकिन अंत में एक छोटा-सा संकेत दिया जाता है कि कहानी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, जिससे Part 2 की उम्मीद जगती है।

🎯 Final Message

राजा साब हमें सिखाती है कि
👉 लालच इंसान को राक्षस बना देता है
👉 परिवार के लिए लिया गया एक फैसला पूरी ज़िंदगी बदल सकता है
👉 और हर आत्मा बदला नहीं, बस शांति चाहती है