Mere Ishq me Shamil Ruhaniyat he - 67 in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | मेरे इश्क में शामिल रुमानियत है एपिसोड 67

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मेरे इश्क में शामिल रुमानियत है एपिसोड 67


एपिसोड 67 — “तुमसे दूर होकर भी… तुम्हारी धड़कनों में हूँ”


अयान की बाइक की रफ्तार उस रात सड़क की खामोशी को चीरती चली जा रही थी। हवा उसके चेहरे से टकरा रही थी, पर दिल के अंदर कुछ और ही तूफान मचा था। नूर को खोने का डर… सच्चाई के सामने आने का तनाव… और ये एहसास कि वह नूर से कितना ज्यादा प्यार करने लगा है।


पर दूसरी तरफ…

नूर उस वक्त अपनी खिड़की के पास बैठी थी। फोन बार-बार देखकर भी वह कॉल नहीं कर रही थी। बस अपने दिल को समझा रही थी— “शायद अयान को समय चाहिए… शायद वो ठीक होगा…”


लेकिन दिल कहाँ मानता है।

धड़कनें तो उसी के नाम दर्ज थीं।


❖ रात गहराई… और दर्द गहरा


लगभग डेढ़ घंटे बाद अयान की बाइक मोहल्ले की गली में मुड़ी। वह सीधे नूर के घर के पास नहीं रुक सकता था, इसलिए उसने गली के कोने में बाइक खड़ी की और पैदल उसके घर की तरफ बढ़ा।


उसके कदम भारी थे… जैसे हर कदम एक सवाल उठा रहा हो—


“क्या नूर मुझसे नाराज़ होगी?”

“क्या वो मुझसे बातें करना बंद कर देगी?”

“क्या वो दूर चली जाएगी?”


इन खयालों ने उसे अंदर से तोड़ रखा था।


नूर ऊपर अपनी खिड़की पर बैठी थी। जैसे ही अयान पास आया… उसने उसे देख लिया।

दिल धक से रह गया।


वह धीरे से उठी, खिड़की बंद की… और नीचे आ गई।


❖ दरवाज़ा खुलता है… और दो नज़रें टकराती हैं


अयान ने हिम्मत करके बेल दबाई।


दरवाज़ा नूर ने ही खोला।


उसकी आँखें लाल थीं… पर आँसुओं को उसने मजबूती से रोक रखा था।


दोनों कुछ पल तक बस एक-दूसरे को देखते रहे।


“नूर… मैं—”

अयान की आवाज़ भारी थी।


नूर ने धीमे से कहा,

“अंदर आओ।”


वह बिना कुछ पूछे उसे लेकर अपने कमरे में चली गई। दरवाज़ा बंद हुआ और कमरे में सिर्फ दो ही लोग थे—

एक, जिसे समझाना था…

दूसरा, जिसे समझना था।


❖ “तुम मुझे बताना क्यों नहीं चाहते?”


नूर ने उसके सामने आकर पूछा,

“अयान… मुझसे छुपा क्यों रहे थे? क्या मैं तुम्हारे किसी काम नहीं आ सकती थी?”


अयान ने उसके हाथ पकड़ लिए।


“नूर… मैंने कभी तुमसे दूर जाने के लिए कुछ नहीं किया। बस… कुछ चीज़ें ऐसी हैं जिन्हें मैं अभी नहीं बता सकता। लेकिन इससे ये मत समझना कि मैं तुम्हें अपनी जिंदगी से दूर कर रहा हूँ।”


नूर की आँखें भर आईं।


“तो फिर डर किस बात का? अगर मुझसे प्यार है, तो भरोसा क्यों नहीं?”


अयान ने गहरी साँस ली।


वह उसके बहुत पास आया… इतना कि नूर का दिल तेजी से धड़कने लगा।


“भरोसा है नूर… सबसे ज़्यादा तुम पर ही है। बस डर इस बात का है कि कहीं मेरी वजह से तुम्हें कुछ हो न जाए।”


नूर का दिल पिघल गया।


उसने अयान का चेहरा अपने हाथों से पकड़ लिया।


“अयान… मैं तुम्हारी हूँ। तुम्हारा दर्द भी… तुम्हारी मुश्किलें भी। मुझसे कुछ भी मत छुपाओ।”


अयान ने हल्के से उसकी उंगलियों को चूमा।


“मैं वादा करता हूँ नूर… तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगा।”


❖ दिल के टूटे हुए हिस्से जुड़ते हैं


कुछ सेकंड की खामोशी के बाद नूर ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा और बैठने को कहा।


“पहले ये बताओ… तुम इतने परेशान क्यों थे? तुम्हें देखकर लग रहा था जैसे तुम अंदर से टूट चुके हो।”


अयान ने अपनी नज़रें नीचे कर लीं।


“मेरे अतीत से जुड़ी कुछ बातें हैं… कुछ लोग हैं जिनसे मैं दूर भाग रहा हूँ। लेकिन वो लोग मुझे वापस अपनी दुनिया में खींचना चाहते हैं। और मैं… उस गंदगी से तुम तक कोई साया भी नहीं आने देना चाहता।”


नूर ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा,


“तुम अकेले नहीं हो अयान। चाहे तुम्हारा अतीत कितना भी अंधेरा हो… मैं तुम्हारे साथ हूँ।”


अयान मुस्कुराया, पर वो मुस्कान दर्द से भरी थी।


“मैं तुमसे लड़ाई नहीं चाहता था नूर… लेकिन हालात ऐसे हो गए कि मैं खुद पर काबू नहीं रख पाया।”


नूर ने प्यार से कहा,

“मैं तुमसे नाराज़ नहीं हूँ… बस तुम्हारे लिए डर गई थी।”


❖ एक कदम नूर का… एक कदम अयान का


नूर ने धीरे-धीरे अपना सिर अयान के कंधे पर रख दिया।


अयान ने उसकी कमर पर हाथ रखा और उसे अपने पास खींच लिया।


उस पल दोनों के बीच की सारी दूरी मिट चुकी थी।


“नूर…”

अयान ने फुसफुसाकर कहा,

“तुम्हारे बिना मैं अधूरा हूँ।”


नूर की साँसे लड़खड़ाईं।


“तो फिर… दूर मत जाया करो।”


दोनों कुछ देर तक उसी तरह बैठे रहे।

कमरे में हल्का अंधेरा था… लेकिन उनके दिलों में रोशनी भर गई थी।


अयान ने प्यार से नूर के सिर पर हाथ फेरा और बोला,

“अब मैं कहीं नहीं जाने वाला। जब तक तुम मेरे साथ हो… मुझे कोई डर नहीं।”


नूर मुस्कुराई।

“और तुम जब तक मेरे साथ हो… मुझे भी कोई डर नहीं।”


❖ कहानी का मोड़… अंधेरा अभी बाकी है


जब अयान वापस जाने लगा, नूर उसे गेट तक छोड़ने आई।


जाते वक्त अयान मुड़ा और बोला,

“नूर… कल शाम मैं तुम्हें कहीं लेकर जाना चाहता हूँ। कुछ खास बात करनी है।”


नूर का दिल धड़का।

“क्या बात?”


अयान ने हल्की मुस्कान दी —

“कल बताऊँगा।”


वह मुड़कर चला गया।


नूर उसे जाते हुए देखती रही…

लेकिन उसकी आँखों में एक सवाल था—


“क्या ये खास बात… हमारे रिश्ते को

बदल देगी?”


और दूसरी तरफ…

अयान के दिमाग में सिर्फ एक वाक्य घूम रहा था—


“नूर को सच्चाई बताने का वक्त आ गया है…”



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**❖ एपिसोड 67 समाप्त