Mere Ishq me Shamil Ruhaniyat he - 63 in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | मेरे इश्क में शामिल रुमानियत है एपिसोड 63

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मेरे इश्क में शामिल रुमानियत है एपिसोड 63

कहानी — “मेरे इश्क़ में शामिल रुमानियत है”

🌙 एपिसोड 63



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🌑 1. अयान का सबसे खतरनाक इम्तिहान


छह रूहानियाँ…

सब एक-सी।

सबका चेहरा वही, आवाज़ वही, आँसू वही।


पर अयान का दिल जानता था—

सच्ची रूहानी कहाँ है।


लेकिन मायाजाल में

दिल भी धोखा खा सकता था।


ज़ारा हवा में तैरती हुई बोली—

“चलो अयान…

अगर मोहब्बत इतनी गहरी है

तो पहचान कर दिखाओ।”


अयान ने एक गहरी साँस ली।

उसकी उँगलियाँ काँप रही थीं

पर आँखें नहीं।


सबसे पहली रूहानी उसकी ओर बढ़ी—

“अयान… मैं हूँ… मुझे लेकर चलो…”

आवाज़ में दर्द था

पर उसमें वो मिठास नहीं थी

जो रूहानी अपने नाम में भी रखती थी।


अयान ने उसे तुरंत पहचान लिया—

“तुम नहीं हो।”


दूसरी रूहानी रोई—

“अयान, तुम मुझे ऐसे कैसे ठुकरा सकते हो?”

लेकिन वो आँसू…

बहुत आसान थे।

रूहानी गहरी भावनाओं को छिपाना जानती थी।


“तुम भी नहीं।”


ज़ारा मुस्कुराई—

“वाह… दो को पहचान लिया।

और अगर तीसरी गलत निकली…

तो तुम्हारा वजूद यहीं कैद हो जाएगा।”


हवा और ठंडी हो गई।

दूर से रूहों की चीखें आने लगीं।

अयान का दिल तेज़ धड़कने लगा

लेकिन उसने खुद को संभाला।



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🌑 2. रूहानी की अनोखी निशानी


तीसरी रूहानी उसके बिल्कुल पास आ गई।

उसकी आँखों में वही नर्म चमक थी…

पर अयान ने महसूस किया

उसकी कलाई पर एक चोट का निशान था

जो असली रूहानी की कभी नहीं था।


“नहीं… यह भी नहीं।”


तीसरी रूहानी बिखरकर धुएँ में बदल गई।


अब तीन बची थीं।


ज़ारा ने हवा में घूमते हुए कहा—

“अयान…

प्यार और पागलपन के बीच सिर्फ़ एक धड़कन का फर्क होता है।

कहीं तुम पागल तो नहीं हो रहे?”


अयान ने उसकी बात अनसुनी कर दी।


वो चौथी रूहानी के सामने रुका।

वो शांत थी।

आवाज़ नहीं निकाल रही थी।

बस उसे देख रही थी।


अयान का सीना भारी हुआ—

रूहानी जब डरती है, तब भी बोलती है…

खामोश कभी नहीं रहती।


“तुम भी छलावा हो।”

वो भी धुएँ में उड़ गई।


अब पाँचवीं और छठीं रूहानी बची थीं।


ज़ारा की आँखों में अब सच्चा डर था—

क्योंकि अयान मायाजाल को बहुत आसानी से भेद रहा था।


वह फुसफुसाई—

“अब इन्हें पहचानकर दिखाओ…

ये दोनों असली जैसी हैं।”



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🌑 3. दिल की आवाज़


अयान पाँचवीं रूहानी के पास गया।

उसने काँपते हाथ बढ़ाए—

और उसके चेहरे को छूने ही वाला था

कि अचानक हवा में हल्का-सा कंपन हुआ।


उसने तुरंत हाथ पीछे खींच लिया।

उसका माथा सिकुड़ गया।


“रूहानी कभी मेरे छूने पर काँपती नहीं…

वो मेरे हाथ पकड़ लेती है।

डरते हुए भी।”


पाँचवीं रूह बिखर गई—


बस एक ही बची थी।

छठी।


वो खड़ी थी…

बिल्कुल शांत।

लेकिन उसकी आँखों में

उसी तरह का तूफ़ान था

जिसे अयान ने दर्जनों बार महसूस किया था।


रूहानी की आँखें बोलती थीं…

और ये वही आँसू थे

जो सिर्फ़ वही बहाती थी।


अयान एक कदम आगे बढ़ा—

उसकी धड़कनें भारी हो गईं।


“अगर… तुम भी छलावा हुई

तो मैं टूट जाऊँगा,”

उसने धीरे-से कहा।


रूहानी ने आँखें बंद कर लीं।

और फुसफुसाई—

“अयान… तुम टूटो तो मैं भी टूट जाऊँगी।”


उस एक वाक्य ने

मायाजाल की सारी दीवारें गिरा दीं।


यही तो थी रूहानी।

यही उसकी आवाज़…

यही उसकी रूह।


अयान ने बिना एक पल खोए

उसे अपनी बाहों में खींच लिया।


वो काँप रही थी।

लेकिन अयान ने उसे कसकर पकड़ लिया—

“मैं आ गया हूँ, रूहानी…

अब कोई तुम्हें मुझसे दूर नहीं करेगा।”


रूहानी रो पड़ी।

“अयान… मैं बहुत डर गई थी।

ज़ारा ने कहा था कि तुम मुझे भूल जाओगे…”


अयान ने उसके माथे को चूमते हुए कहा—

“मैं तुम्हें भूलना तो दूर…

तुम्हें खोने के बारे में सोच भी नहीं सकता।”



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🌑 4. ज़ारा का अंतिम प्रहार


ज़ारा चीख उठी—

उसकी रूह कांप गई।


“नहीं!!!

यह कैसे हो सकता है?”


उसकी आँखें लाल हो गईं।

उसने हवा में हाथ घुमाया

और मायाजाल का पूरा मैदान

अचानक टूटने लगा।


“अगर रूहानी मेरी नहीं…

तो किसी की भी नहीं!”


उसने काली ऊर्जा की एक धार

अयान और रूहानी की ओर फेंकी।


अयान ने रूहानी को अपनी बाँहों में लिया—

और उसके सामने दीवार बनकर खड़ा हो गया।


धार उसके सीने पर लगी।

वो पीछे गिर गया।


रूहानी चीख उठी—

“अयान!!!”


अयान ज़मीन पर गिरा—

साँस भारी

लेकिन आँखें उससे हटती नहीं थीं।


“भागो… रूहानी…”

उसकी धीमी आवाज़ गूँजी।

“नहीं! मैं तुम्हें छोड़कर नहीं जाऊँगी!”


ज़ारा फिर एक और हमला करने वाली थी—

पर तभी

हवा में तेज़ नीली रोशनी चमकी।


जमीन काँप उठी।


किसी की आवाज़ आई—

“ज़ारा… बस!”


रूहानी ने मुड़कर देखा—

और उसकी आँखें फैल गईं।


कोई…

एक नई रूह…

दूर से उनकी ओर बढ़ रही थी।


ये रूह

ना ज़ारा जैसी थी

ना मायाजाल जैसी।

उसकी आँखों में नीला तेज़ था—


और उसका पहला शब्द था—


“अयान… उठो।

तुम्हें अभी हारना नहीं है।”


रूहानी ने फुसफुसाया—

“ये कौन…?”


अयान की आँखें खुलीं—

उसकी साँस रुक गई।


वो बोला—

“ये…

ये रूह तो…

हमारी कहानी से बिल्कुल अलग है।”


ज़ारा डर गई।

वो पीछे

हटने लगी।


नई रूह ने अपने हाथ उठाए—

और पूरा मायाजाल

नीले प्रकाश में जगमगाने लगा।



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🌙 एपिसोड 63 — हुक लाइन


> “अयान ने रूहानी को तो पा लिया…

लेकिन अब उसका सामना

उस रूह से होने वाला था

जिसके आने का जिक्र

किसी कहानी में लिखा ही नहीं था…”