कहानी — “मेरे इश्क़ में शामिल रुमानियत है”
🌙 एपिसोड 62
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हवेली के आँगन में रात का सन्नाटा उतर चुका था।
लेकिन अयान के सीने में चल रहा तूफ़ान किसी पहाड़ को तोड़ सकता था।
उसके हाथ में रूहानी का कंगन था—
गर्म… जैसे अभी-अभी उसकी कलाई से उतरा हो।
अयान ने कंगन को सीने से लगाया और आँखें बंद कर लीं।
“रूहानी… मैंने तुम्हें खोया नहीं है।
तुम जहाँ भी हो… मैं आ रहा हूँ।”
शायरी और आरव दोनों उसके पीछे पहुँचे।
आरव बोला—
“अयान, तुम अकेले मत जाओ।
वो ज़ारा है… वो रूह से खेलती है।”
अयान ने गर्दन उठाई—
उसकी आँखों में एक ऐसा अंधेरा था
जो किसी भी रूह को चुनौती दे सकता था।
“अगर मुझे अकेले जाना पड़ा…
तो जाऊँगा।
रूहानी मेरी है।
उसे मैं किसी भी कीमत पर वापस लाऊँगा।”
शायरी आगे बढ़ी—
“लेकिन हम जानते भी नहीं कि वो कहाँ गई!”
अयान ने कंगन को धीरे-धीरे ज़मीन पर रखा—
और फुसफुसाया—
“तुम खुद रास्ता दिखाओगी…
है ना, रूहानी?”
जैसे उसके शब्दों ने कोई जादू जगाया हो—
कंगन हल्का-सा काँपा।
उससे नीली रोशनी निकली—
धीरे-धीरे जमीन पर एक चक्र बनाने लगी।
आरव दहशत में बोला—
“ये… ये क्या हो रहा है?”
अयान ने शांत स्वर में कहा—
“ये वही जगह है…
जहाँ रूहें कैद की जाती हैं।
ज़ारा ने उसे ‘मायाजाल’ में लिया है।”
चक्र पूरा हुआ।
और जमीन फटी—
जिसके भीतर धुआँ और काली रोशनी घुमने लगी।
एक दरवाज़ा…
रूहों की दुनिया का।
शायरी चीख पड़ी—
“अयान!! ये मौत का दरवाज़ा है! वहाँ जाने का मतलब—”
“—रूहानी को जीतकर लाना।”
अयान ने उसकी बात काट दी।
“मैं डरकर नहीं भाग सकता।”
उसने आरव की तरफ देखा—
“अगर मैं नहीं लौटा…
तो उसे बाहर निकालना तुम्हारी जिम्मेदारी है।”
आरव की आँखें भर आईं—
“तुम लौटोगे।
तुम्हें लौटना ही होगा।”
अयान ने बिना एक शब्द बोले
दरवाज़े में कदम रख दिया।
अंधेरा उसे निगल गया।
जैसे कोई खाई…
कोई छिपी हुई दुनिया…
कोई ऐसा स्थान जहाँ
न समय चलता है न जिंदगी।
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🔥 मायाजाल की पहली साँस
अयान ने जैसे ही आँखें खोलीं—
फ़िज़ा बदल चुकी थी।
आसमान काला,
जमीन धुँधली,
हर तरफ़ रूहों की फुसफुसाहट—
“कौन आया… कौन आया…”
धीरे-धीरे धुआँ हटने लगा—
और सामने एक रास्ता उभरा।
एक रास्ता…
जो लाल रोशनी में डूबा था।
अयान आगे बढ़ा।
हर कदम पर अजीब-सी ठंड
उसकी हड्डियों में उतर जाती।
लेकिन वह रुका नहीं।
उसकी आँखों में बस एक ही नाम था—
रूहानी।
कई मिनट चलने के बाद
उसे एक घेरा दिखा—
गहरा, चमकता, लाल।
और उसके बीच…
एक लड़की खड़ी थी।
उसकी पीठ अयान की तरफ थी।
उसके बाल हवा में उड़ रहे थे।
उसकी कलाई पर वही निशान—
जिस पर कंगन रहता था।
“रूहानी…”
अयान की आवाज़ काँप गई।
लेकिन जैसे ही लड़की मुड़ी—
अयान के शरीर में बिजली दौड़ गई।
चेहरा रूहानी का था
लेकिन आँखें…
ज़ारा की थीं।
ज़ारा मुस्कुराई—
जिसमें रूहानी का दर्द
और उसका खुद का ज़हर मिला हुआ था।
“देखा अयान…”
उसने कदम बढ़ाया।
“मोहब्बत में जब अधूरापन हो…
तो रूहें भी डरती हैं।”
अयान ने उसकी आँखों में सीधे देखा—
“मैं तुमसे नहीं डरता।
मैं उसे लेने आया हूँ।”
ज़ारा ने सिर टेढ़ा किया—
उसकी मुस्कान और गहरी हो गई।
“तो ले लो।
लेकिन अगर ले जाना है…
तो पहले उसे पहचानो।
कौन सी रूहानी तुम्हारी है?”
उसने चुटकी बजाई।
और अचानक—
हवा में छह रूहानियाँ प्रकट हो गईं।
सभी एक जैसी।
सभी एक-दूसरे की प्रतिलिपि।
अयान ने आँखें चौड़ी कीं—
“ये क्या पागलपन है?”
ज़ारा की हँसी गूँज उठी—
“एक गलत चुनाव…
और तुम्हारी रूह हमेशा के लिए यहीं कैद हो जाएगी।”
अयान का दिल धड़क उठा।
छह रूहानी…
छह चेहरे…
लेकिन सिर्फ़ एक असली।
वह जानता था—
अगर उसने गलत को छुआ
तो उसकी मोहब्बत भी खत्म
और खुद भी।
ज़ारा फुसफुसाई—
“चलो अया
न…
देखते हैं अब तेरी मोहब्बत कितनी सच्ची है।”
अयान के सामने
सबसे कठिन इम्तिहान था—
सच्ची रूहानी को पहचानना।
और यह खेल
उसकी मोहब्बत
या उसकी मौत
दोनों में से एक लिखने वाला था।