गाँव की रात.
आसमान में चाँद की हल्की रोशनी और हवाओं में ठंडक. तालाब के किनारे से लेकर पहाडी तक फैली खामोशी में सिर्फ दिलों की धडकन सुनाई दे रही थी.
शहवार ने कबीर को बुलाया था. वह सफेद दुपट्टे में, आँखों में सवाल लिए उसके सामने खडी थी.
शहवार( धीमे स्वर में)
कबीर. तुम जानते हो ना, हमारी मोहब्बत आसान नहीं है. मेरे घर वाले तुम्हारा नाम सुनते ही खून की कसम खा लेते हैं. हमारे खानदान की पुरानी दुश्मनी आज भी जिंदा है।
कबीर की आँखों में आंधी थी. वह नजरे झुकाकर नहीं, बल्कि सीधे शहवार की आँखों में देखते हुए बोला—
कबीर:
मुझे उनकी दुश्मनी से डर नहीं, शहवार. अगर तुम्हारा साथ मिल जाए तो मैं हर जंग जीत सकता हूँ. लेकिन अगर तुम ही पीछे हट गईं, तो मेरी दुनिया वहीं खत्म हो जाएगी।
शहवार का दिल काँप उठा. उसने कबीर का हाथ थामना चाहा, लेकिन तभी उसके कानों में अपने पिता नवाब फिरोज खान की आवाज गूँज उठी—
कबीर नाम मत लेना, वो हमारी इज्जत के खिलाफ है।
उसकी आँखों से आँसू छलक पडे.
पाँच) पुरानी दुश्मनी की परछाई
गाँव के बुजुर्ग अक्सर हवेली के दरबार में बैठकर किस्से सुनाते थे.
कबीर के दादा जमीर खान और शहवार के दादा फिरोज खान के बीच जमीन को लेकर खूनी झगडा हुआ था. दोनों खानदानों ने एक- दूसरे का खून बहाया.
उस दिन से ये कसम खा ली गई थी—
खानदान कभी भी आपस में रिश्ता नहीं जोडेंगे. दुश्मनी ही हमारी पहचान है।
इसी दुश्मनी ने सालों तक आग को जिंदा रखा.
और आज उसी आग के बीच कबीर और शहवार का रिश्ता सांस ले रहा था.
छह) मोहब्बत का ऐलान
एक दिन गाँव के मेले में, जब सब लोग इकठ्ठा थे, कबीर ने सबके सामने ऐलान कर दिया.
कबीर( जोरदार आवाज में)
मैं कबीर खान. इस गाँव के सामने एक सच कहता हूँ. मैं शहवार खान से मोहब्बत करता हूँ, और अगर मोहब्बत गुनाह है, तो मैं हर सजा मंजूर करूँगा!
भीड में सनसनी फैल गई.
लोगों ने कानाफूसी शुरू कर दी—
ये तो पागलपन है. ये दोनों खानदान कभी एक नहीं हो सकते।
उसी वक्त शहवार के पिता फिरोज खान गुस्से से खडे हुए.
फिरोज खान:
कबीर! तेरी औकात कैसे हुई मेरे खानदान का नाम अपनी जुबान पर लेने की? हमारी और तुम्हारी दुश्मनी को भूल गया?
कबीर ने सीना ठोककर जवाब दिया—
कबीर:
दुश्मनी पुरखों की थी, लेकिन दिल तो मेरा है. और दिल सिर्फ शहवार के लिए धडकता है।
सात) शहवार का इम्तिहान
उस रात फिरोज खान ने शहवार को अपने कमरे में बुलाया.
फिरोज खान( सख्त लहजे में)
अगर तूने कबीर से कोई रिश्ता रखा, तो मैं तेरा चेहरा भी नहीं देखूँगा. हमारी इज्जत, हमारी कसम. सब मिट्टी में मिल जाएगी।
शहवार की आँखें भर आईं. उसने धीरे से कहा—
शहवार:
अब्बा जान. इज्जत मोहब्बत से बडी नहीं होती. मैं कबीर को छोड दूँगी तो जिंदा रहकर भी मर जाऊँगी।
फिरोज खान का हाथ गुस्से में उठा, मगर वो बेटी को मार नहीं सके.
उन्होंने सिर्फ इतना कहा—
तूने अगर मेरी बात नहीं मानी, तो कल सुबह इस हवेली से तेरा नाम हमेशा के लिए मिटा दूँगा।
आठ) कबीर की जंग
कबीर जानता था कि इस मोहब्बत की कीमत भारी होगी.
उसने अपने दोस्तों से कहा—
कबीर:
मुझे हथियार नहीं चाहिए. मुझे सिर्फ हिम्मत चाहिए. मैं शहवार को किसी के भी खिलाफ बचाऊँगा, चाहे वो पूरा गाँव क्यों ना हो।
उसकी बातें सुनकर दोस्त डर गए.
कबीर, ये जानलेवा है. फिरोज खान के आदमी तुझे मार डालेंगे।
कबीर मुस्कुराया—
मोहब्बत जान मांगती है, और मैं जान देने को तैयार हूँ।
नौ) तूफान की रात
अगली रात हवेली में शहवार की शादी का एलान कर दिया गया.
फिरोज खान ने अपने पुराने साथी नवाब अजहर के बेटे से उसकी शादी तय कर दी, ताकि खानदान की दुश्मनी और गहरी हो जाए.
शहवार का दिल रो रहा था. वो अपने कमरे में अकेली बैठी थी, तभी खिडकी पर कबीर आ गया.
कबीर( धीरे)
शहवार, मुझे बस एक जवाब चाहिए. क्या तुम मेरे साथ चलोगी?
शहवार की आँखों से आँसू बह निकले.
उसने बिना सोचे कबीर का हाथ पकड लिया—
हाँ. मैं तेरे साथ चलूँगी, चाहे मौत ही क्यों ना मिल जाए।
दस) भागने की कोशिश
दोनों ने आधी रात को हवेली से भागने का प्लान बनाया.
चाँदनी में कबीर और शहवार खेतों से गुजरते हुए गाँव के बाहर जाने लगे.
लेकिन तभी अचानक गोली चलने की आवाज आई.
धाँय!
फिरोज खान के आदमियों ने दोनों को घेर लिया.
आदमी:
रुक जाओ कबीर! वरना अगली गोली तुम्हारे सीने में होगी।
कबीर ने शहवार को पीछे किया और सीना चौडा करके खडा हो गया.
कबीर:
गोली मारनी है तो मारो. लेकिन मेरी मोहब्बत को कोई छू नहीं सकता।
शहवार चिल्लाई—
नहीं! कोई उसे हाथ मत लगाना!
ग्यारह) चरम टकराव
फिरोज खान खुद घोडे पर सवार होकर वहाँ आ पहुँचे.
उनके चेहरे पर गुस्से की आग जल रही थी.
फिरोज खान:
कबीर! आज तू इस गाँव में आखिरी बार खडा है. या तो तू मेरी बेटी को छोड दे, या तेरी लाश यहाँ गिरेगी।
कबीर की आँखों में निडर चमक थी.
उसने शहवार का हाथ पकडकर कहा—
कबीर:
मोहब्बत छोडना मेरे बस में नहीं है, नवाब साहब. आप चाहें तो मेरी जान ले लीजिए, लेकिन मेरे दिल को मार नहीं सकते।
भीड सन्न रह गई.
कभी दुश्मनी की वजह से खून बहाने वाले दोनों खानदान अब दो दिलों की वजह से आमने- सामने खडे थे.
बारह) शहवार का फैसला
शहवार ने सबके सामने अपनी चूडी तोड दी और कहा—
शहवार:
अब्बा जान, अगर आप मेरी मोहब्बत के खिलाफ खडे रहेंगे, तो मैं अपनी जान दे दूँगी. लेकिन कबीर को छोडकर किसी और की दुल्हन नहीं बनूँगी।
उसकी आवाज में ऐसी सच्चाई थी कि भीड में सन्नाटा छा गया.
कुछ बुजुर्गों ने आपस में कहा—
ये वही मोहब्बत है जो दुश्मनी मिटा सकती है. क्यों बच्चों की मोहब्बत के बीच पुरानी नफरत लाना?
तेरह) फैसला
लंबी चुप्पी के बाद, फिरोज खान की आँखों में आँसू आ गए.
उन्होंने तलवार जमीन पर फेंक दी और भारी आवाज में कहा—
फिरोज खान:
कबीर. तूने साबित कर दिया कि मोहब्बत दुश्मनी से बडी होती है. अगर मेरी बेटी तुझसे खुश रहेगी, तो मैं अपनी नफरत को दफ्न कर दूँगा।
भीड ने तालियाँ बजाईं.
दुश्मनी की आग में जलते दोनों खानदान आखिरकार मोहब्बत के सामने झुक गए.
चौदह) मोहब्बत की जीत
कबीर और शहवार एक- दूसरे को गले से लगा चुके थे.
आसमान में चाँद और सितारे जैसे उनकी मोहब्बत का जश्न मना रहे थे.
गाँव की गलियों में यह दास्तान फैल गई—
कबीर और शहवार की मोहब्बत ने पुरानी दुश्मनी को हरा दिया।
To Be Continued.
आगे कहानी में दिखेगा कि मोहब्बत की ये जीत वाकई स्थायी है या फिर नयी साजिशें उनके रिश्ते की परीक्षा लेंगी.
गाँव में अब एक नई हलचल थी.
कबीर और शहवार की मोहब्बत ने दुश्मनी की दीवार गिरा दी थी, लेकिन दोनों के सामने अब एक और बडा इम्तिहान था — शादी का दिन.
एक) शादी की तैयारी
शहवार का घर सज चुका था. लाल- गुलाबी रंग की सजावट, चमकदार लाइट्स, और फूलों की खुशबू पूरे हवेली में फैल चुकी थी. गाँव वालों की खुशी भी जाहिर थी, लेकिन कुछ चेहरे इस शादी में खामोशी लिए खडे थे.
कबीर हवेली के बाहर खडा, शहवार की ओर देख रहा था. उसकी आँखों में खुशी और बेचैनी दोनों थे.
कबीर( दिल में)
ये शादी सिर्फ एक दिन की रस्म नहीं है. ये हमारी जिंदगी की जंग जीतने की पहली निशानी है।
शहवार कमरे में तैयार हो रही थी. दुल्हन की तरह उसने अपने चेहरे पर हल्की मुस्कान रखी थी, लेकिन दिल में हलचल थी.
शहवार( आइने में खुद से)
कबीर. क्या ये सच में नई शुरुआत होगी या फिर एक नई साजिश?
दो) नई साजिश की शुरुआत
शादी के दो दिन पहले, गाँव में एक अज्ञात आदमी आया.
वह काले कपडे में, चेहरा आधा ढका हुआ था. उसने हवेली के बुजुर्गों को बुलाया और कहा—
अज्ञात आदमी:
फिरोज खान, तुम्हें पता होना चाहिए कि कबीर के बारे में एक राज है. अगर तुम जानो तो यह शादी रोकी जा सकती है।
भीड में हलचल मच गई. फिरोज खान की आँखों में गुस्सा और शक दोनों थे. उन्होंने कबीर को बुलाया.
फिरोज खान:
कबीर. इस शादी से पहले सच बताओ, वरना मैं इसे रद्द कर दूँगा।
कबीर ने सिर उठाकर कहा—
मैंने सब सच तुम्हें पहले ही बता दिया है. अब अगर तुम मुझ पर शक करते हो, तो इसका फैसला शादी के बाद लोग करेंगे।
लेकिन फिरोज खान संतुष्ट नहीं थे. उनका शक बढता गया.
तीन) शादी से पहले रात
शहवार ने शादी से एक रात पहले कबीर को अपने कमरे में बुलाया.
कमरे में हल्की मोमबत्ती की रौशनी थी, और बाहर हवा में रात की ठंडक थी.
शहवार:
कबीर. अगर कल हमारे रास्ते में कोई नई बाधा आई, तो तुम क्या करोगे?
कबीर ने शहवार का हाथ थामते हुए कहा—
मैं तुम्हें छोडने वाला नहीं हूँ. चाहे दुनिया के सारे लोग हमें रोकें, मैं तुम्हारे साथ रहूँगा।
शहवार ने आँसू पोंछे और बोली—
तो चलो. कल हमारी कहानी का सबसे बडा दिन होगा।
चार) शादी का दिन
गाँव में शादी का माहौल था.
सजावट, संगीत, खुशियाँ. सब कुछ एक परफेक्ट फिल्मी सीन जैसा लग रहा था.
शहवार सफेद- लाल जोडे में, और कबीर पारंपरिक लहंगे में तैयार थे.
दोनों की आँखों में एक- दूसरे के लिए अपार मोहब्बत थी.
लेकिन उसी वक्त, फिरोज खान की आँखों में चिंता थी.
वह जानते थे कि कबीर और शहवार की कहानी में अभी भी एक अज्ञात खतरा छुपा है.
पाँच) शादी के दौरान ड्रामा
जैसे ही मंडप में संगीत बजने लगा, अज्ञात आदमी फिर से आया.
उसने चुपके से फिरोज खान को एक लिफाफा दिया.
फिरोज खान ने लिफाफा खोला और चेहरा बदल गया.
फिरोज खान( गुस्से में)
ये क्या है? कबीर के खिलाफ साजिश?
भीड में हलचल मच गई. कुछ लोग चिल्लाने लगे—
क्या शादी रोक दी जाएगी?
कबीर ने सीना चौडा किया और कहा—
अगर इसमें सच है तो सामने लाओ. मैं डरने वाला नहीं हूँ।
फिरोज खान ने लिफाफा पढा और फिर चुप हो गए. उनकी आँखों में अब गुस्से के साथ एक अनकहा दर्द था.
छह) साजिश का सच
लिफाफे में एक पुराना खत था, जिसमें लिखा था कि कबीर के पिता और फिरोज खान के दादा के बीच दुश्मनी सिर्फ जमीन के लिए नहीं थी, बल्कि एक और राज था — एक गुमशुदा खजाना जिसे पाने के लिए दोनों खानदान ने एक- दूसरे को मौत तक लडाया.
फिरोज खान ने चुपचाप कबीर की ओर देखा.
कबीर ने गहरी साँस ली और कहा—
शहवार. चाहे कुछ भी हो, मैं तुम्हारा साथ नहीं छोडूँगा।
शहवार की आँखों में आँसू थे, लेकिन वह मुस्कुरा दी.
तो चलो. इस साजिश को हमारे प्यार के सामने हरा दें।
सात) शादी का वादा
मंडप में, फूलों की बारिश के बीच, कबीर और शहवार ने एक- दूसरे से शादी का वादा किया.
दोनों ने एक- दूसरे की आँखों में प्यार, वफा और संघर्ष का इरादा देखा.
कबीर:
शहवार. मैं तुम्हें अपनी आखिरी साँस तक प्यार करूंगा।
शहवार:
कबीर. मैं तेरे साथ जिऊँगी और मरूँगी।
भीड में तालियाँ गूँजीं. यह प्यार की जीत थी, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं थी.
आठ) नया अध्याय — खतरे की आहट
शादी के बाद, दोनों ने सोचा कि अब उनका सफर आसान होगा. लेकिन गाँव के एक पुराने बुजुर्ग ने चेतावनी दी—
जो खजाना इस कहानी के पीछे है, वह सिर्फ प्यार की कहानी नहीं. बल्कि एक नई जंग की शुरुआत है।
कबीर और शहवार की मोहब्बत अब न केवल खुद को बल्कि अपने पूरे खानदान को बदलने वाली थी.
To Be Continued.
अगला हिस्सा कहानी में दिखाएगा कि कबीर और शहवार इस नए रहस्य और खतरे से कैसे निपटेंगे, और क्या उनकी मोहब्बत को असली परीक्षा का सामना करना पडेगा।
गाँव में उस दिन सुबह से ही हलचल थी. हवा में खुशबू थी — महक रही थी गुलाब, चमक रही थी चांदनी, और जमीं पर बिखरी हुई थी खुशियों की रोशनी.
कबीर ने अपनी शादी और वालिमा को ऐसा बना दिया था कि पूरा गाँव उसकी शान और दौलत का दीवाना था. यह सिर्फ एक शादी नहीं थी — यह एक महाकाव्य थी, जिसमें प्रेम, दौलत और विलासिता का मेल था.
एक) महल की सजावट और तैयारी
कबीर के महल में शादी के पहले ही हफ्ते से तैयारियाँ शुरू हो गई थीं. हवेली के बरामदे में खास तौर पर imported क्रिस्टल चंदेलियर्स लटकाए गए थे. हर चंदेलियर में हजारों छोटे- छोटे हीरे embedded थे, जो जैसे चांदनी में चमकते हुए आसमान के सितारों की नकल कर रहे थे.
महल के अंदर हर कमरे को अलग थीम पर सजाया गया था.
एक हॉल था जहाँ सफेद और सुनहरे फूलों की बारिश होती थी, और उसके बीच में crystal vase में महँगे गुलाब रखे थे.
एक कमरे में antique फर्नीचर रखा गया था, जो यूरोप से imported था.
लिविंग Room में हाथ से बुने हुए silk carpets थे, जिन पर अरबों की कीमत के नक्शे थे.
गाँव के लोग इन सब चीजों को देखकर हैरान रह गए.
कबीर की शान तो किसी राजा से कम नहीं है, वे आपस में कह रहे थे.
दो) शहवार का लहंगा — करोडों का गहना
शहवार की शादी के दिन, वह एक सुनहरे लाल और सफेद लहंगे में सजकर आई थी, जिसकी कीमत करोडों में थी.
लहंगे पर हाथ से बने एम्ब्रॉयडरी डिजाइन में छोटे- छोटे हीरे और मोती जडे हुए थे. उसका dupatta pure silk का था, जिस पर हीरे और जवाहरात embedded थे.
उसका गहना सेट भी अपनी मिसाल खुद था—
एक हार जिसमें पाँच सौ कैरेट के हीरे थे.
हाथ में कंगन, जो हीरे और माणिक से सजे हुए थे.
कानों में chandelier earrings, जिनमें चाँदनी की तरह चमक थी.
गाँव की लडकियाँ चुपचाप शहवार को देख रही थीं, उनकी आँखों में इर्ष्या और आश्चर्य दोनों थे.
शहवार की किस्मत देखो. कबीर उसे सोने और हीरों की तरह सजाता है, एक लडकी ने कहा.
तीन) शादी का मंडप — विलासिता का प्रतीक
कबीर ने शादी का मंडप खुद डिजाइन करवाया था. मंडप के चारों कोनों में बुलबुलों के आकार के फूल सजाए गए थे. मंडप की छत पर कांच की झूमर लटके थे, जिनमें अंदर से सोने की पत्थर embedded थे.
मंडप के बीच में एक सोने का मंच रखा गया था, जिस पर फूलों की बारिश होती थी. मंच के चारों तरफ pure velvet के कुर्सियाँ सजाई गई थीं.
गाँव के बुजुर्ग मंडप को देखकर दांतों तले अंगुलियाँ दबा रहे थे.
ये शादी नहीं. ये तो एक सपना है! उन्होंने कहा.
चार) कबीर का स्वागत और शहवार के लिए जश्न
शादी के दिन कबीर ने शहवार के स्वागत के लिए एक भव्य procession रखा था.
उसने अपने पुराने दोस्तों, संगीतकारों और dancers को बुलाया. पूरे गाँव में ढोल नगाडों की आवाज गूँज रही थी.
कबीर सफेद sherwani में, सोने के काम से सजा हुआ, हाथ में एक diamond- encrusted sword लेकर आया था. उसकी मुस्कान में शहवार के लिए प्यार और गर्व झलक रहा था.
शहवार की आँखों में भी आँसू थे—खुशी के और हल्की सी घबराहट के.
कबीर( धीमे स्वर में)
शहवार. ये दिन सिर्फ हमारा नहीं है, ये हमारी कहानी का सबसे बडा जश्न है।
शहवार ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया—
कबीर. तेरे साथ मैं हर दिन यही जश्न मनाना चाहूँगी।
पाँच) वालिमा — दौलत का जलवा
वालिमा का आयोजन महल के एक खुले बगीचे में किया गया था. वहाँ crystal chandeliers, imported carpets, और तीन मंजिलों तक फैलती हुई सजावट थी.
कबीर ने दुनिया भर के chefs को बुलाया था ताकि हर मेहमान को एक royal feast मिले. वहाँ थी—
Persian delicacies
Italian pasta varieties
French desserts
भारतीय royal thali जिसमें सब्जियाँ, बिरयानी और मिठाइयाँ शामिल थीं
खाना सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं था, बल्कि presentation भी इतना शानदार था कि लोग उसे देखने के लिए फोटो खींचते रहे.
गाँव के लोग और मेहमान दांतों तले कह रहे थे—
कबीर ने ये शादी नहीं. ये तो एक महल जैसा जश्न बना दिया।
छह) गाँव में चर्चा — शहवार की किस्मत
गाँव की गलियों में अब सिर्फ शादी की बातें थीं.
लडकियाँ, बूढे और बच्चे सब शहवार और कबीर की शादी के बारे में चर्चा कर रहे थे.
शहवार की किस्मत देखो. उसने कबीर जैसा पति पाया और दौलत की बारिश में जीना शुरू किया, एक बुजुर्ग ने कहा.
कबीर का महल, उसकी दौलत. ये किसी राजा की कहानी लगती है, एक युवक ने मुस्कुरा कर कहा.
लडकियाँ आपस में बात कर रही थीं—
हमारी भी किस्मत होती तो हम भी ऐसे शादी करते।
कुछ की आँखों में इर्ष्या थी, तो कुछ में सपना.
सात) रात का जश्न — विलासिता का उत्सव
शादी के बाद की रात में महल के बगीचे में एक भव्य जश्न रखा गया.
संगीत, रोशनी, और ठंडी हवा में शराब और मिठाई की खुशबू घुली हुई थी.
कबीर और शहवार ने पहली बार इस रात को एक- दूसरे के साथ खास पल बनाया.
कबीर ने शहवार को गले लगाकर कहा—
तू मेरी दुल्हन है, मेरी कहानी है. मेरी दौलत का सबसे बडा हिस्सा तू है।
शहवार ने मुस्कुराकर कहा—
और तू मेरा राजा है, कबीर।
गाँव के लोग उस रात तक इस शादी की चर्चा करते रहे.
आठ) दुल्हन की चमक और गाँव वालों की प्रतिक्रिया
शहवार की दुल्हन बनी तस्वीर गाँव के हर घर में छा गई थी.
लडकियाँ उसके लहंगे और हीरों के गहनों की तस्वीरें देखकर अपने आप में तुलना करने लगी थीं.
लडकी:
वो लहंगा. वो गहने. ये सब उसकी किस्मत है।
दूसरी लडकी:
कबीर और शहवार. ये जोडी तो कहानी बन गई।
किसी के दिल में खुशी थी, तो किसी के दिल में जलन.
नौ) मोहब्बत और दौलत का संगम
कबीर और शहवार की कहानी अब सिर्फ मोहब्बत की नहीं थी.
यह दौलत और शान की कहानी भी बन गई थी.
गाँव में लोग कहते थे—
कबीर ने मोहब्बत को दौलत के संग जोडकर एक मिसाल पेश की।
कबीर का महल, उसकी दौलत, और उसकी शहवार के लिए मोहब्बत अब गाँव के लिए एक कहानी थी जो हर उम्र के लोगों को प्रेरणा देती थी.
दस) एक नई कहानी की शुरुआत
लेकिन इस कहानी का अंत नहीं था. गाँव के बुजुर्ग कहते थे—
जहाँ मोहब्बत और दौलत मिलती है, वहाँ नयी कहानियाँ जन्म लेती हैं. कबीर और शहवार की कहानी भी एक नई कहानी की शुरुआत थी।
गाँव में अब एक ही सवाल था—
क्या कबीर और शहवार की मोहब्बत इस दौलत और विलासिता के बीच टिक पाएगी?
To Be Continued.
वालिमा का जश्न खत्म होते ही गाँव में एक नई हलचल शुरू हो गई थी.
कबीर और शहवार की मोहब्बत और उनकी शादी की धूम ने सबको मोहित कर दिया था, लेकिन कुछ लोगों के दिलों में जलन और शंका अभी भी बाकी थी.
एक) साजिश की आहट
कबीर के महल में शादी के बाद दूसरे ही दिन एक अज्ञात व्यक्ति पहुँचा.
उसका चेहरा आधा ढका हुआ था और हाथ में एक पुरानी parchment थी.
वह सीधे फिरोज खान के पास गया और बोला—
यह खत तुम पढो, इसमें उस खजाने का पता है जिसके लिए हमारे पूर्वजों ने जंग लडी थी।
फिरोज खान की आँखें खुली की खुली रह गईं. उन्होंने यह खत झट से बंद कर लिया और किसी से बात करने निकल गए.
गाँव में धीरे- धीरे चर्चा फैल गई—
क्या यह शादी एक नई साजिश की शुरुआत है?
दो) गाँव में राजनीति
कबीर के महल के सामने गाँव के बडे बुजुर्ग एक Meeting कर रहे थे.
उनमें से कुछ कहते थे—
कबीर की दौलत और शहवार के लिए मोहब्बत. ये दोनों हमारे गाँव की पुरानी परंपरा को बदल सकती है।
तो कुछ लोग कहते थे—
ये मोहब्बत किसी बडी साजिश का हिस्सा है, हमें सतर्क रहना चाहिए।
इस Meeting में फिरोज खान भी शामिल थे. उनकी आँखों में चिंता और गुस्सा दोनों थे.
उन्होंने कहा—
इस शादी के बाद भी हमारी कहानी खत्म नहीं हुई. जो खत मिला है, वह हमें सच का सामना करवाएगा।
तीन) कबीर और शहवार की चुप्पी
कबीर और शहवार महल के एक बडे बगीचे में बैठे थे. वहाँ चांदनी रात थी, हवा में फूलों की खुशबू थी और दूर कहीं संगीत बज रहा था.
शहवार:
कबीर. क्या तुम्हें लगता है कि शादी के बाद सब ठीक रहेगा?
कबीर:
नहीं. शहवार. अब तो असली लडाई अभी बाकी है. हमें तैयार रहना होगा।
शहवार ने सिर झुकाया और उसकी आँखों में डर और भरोसा दोनों थे.
चार) खत का राज
फिरोज खान ने गाँव में खुलासा किया कि वह खत दरअसल कबीर के पिता और उनके पूर्वजों के बीच छुपा हुआ खजाना है.
इस खजाने का राज सालों से छुपा हुआ था और जो इसे पाएगा वही गाँव पर राज करेगा.
गाँव में हडकंप मच गया. कुछ लोग कहते थे—
अगर कबीर को ये खजाना मिल गया तो वह हमारे गाँव का राजा बन जाएगा।
कुछ लोग डर रहे थे—
ये शादी सिर्फ मोहब्बत नहीं. ये सत्ता की जंग है।
पाँच) पहली चुनौती
कबीर को इस राज का पता चलने के बाद पहला खतरा मिला.
एक रात वह महल से लौटते समय एक अज्ञात समूह से घिर गया. उनके हाथ में तलवारें थीं और चेहरे पर मास्क.
गुरुप:
कबीर. खजाना हमारा होगा. तुम्हें अब पीछे हटना होगा।
कबीर ने अपने तलवार को कसते हुए कहा—
मैं पीछे नहीं हटूँगा. जो मेरा है, वही मेरा रहेगा।
शहवार ने दूर से यह नजारा देखा और उसकी आँखों में आँसू आ गए. उसने खुद को रोक लिया और सोचा—
अगर कबीर जीत गया तो हमारा प्यार जीत जाएगा, लेकिन अगर वह हार गया तो हमारी दुनिया टूट जाएगी।
छह) महल में साजिश
महल के अंदर, फिरोज खान और उनके विश्वस्त सलाहकार Meeting कर रहे थे.
उनका मकसद साफ था— कबीर को इस खजाने तक नहीं पहुंचने देना.
सलाहकार:
नवाब साहब, अगर हम समय रहते इस खत को कबीर के हाथ में जाने से रोक दें तो शादी का जश्न भी खतरे में नहीं होगा।
फिरोज खान ने ठंडी आवाज में कहा—
मैं अपनी बेटी की खुशी नहीं खोना चाहता, लेकिन इस खजाने का राज हमारी किस्मत बदल सकता है।
गाँव में अब एक साजिश गहरी होती जा रही थी, जिसे कबीर और शहवार दोनों ने महसूस करना शुरू कर दिया था.
सात) मोहब्बत की परीक्षा
एक दिन शहवार ने कबीर से सवाल किया—
अगर खजाना सच है तो क्या तुम मोहब्बत के लिए इसे छोड दोगे?
कबीर ने उसका हाथ पकडते हुए कहा—
मोहब्बत ही मेरी असली दौलत है, शहवार. खजाना चाहे जितना बडा क्यों न हो, मैं उसे तुम्हारे बिना हासिल नहीं करना चाहता।
शहवार की आँखों में आँसू थे, लेकिन वह मुस्कुराई.
तुम सच में मेरे लिए सब कुछ छोड सकते हो?
कबीर:
तुम्हारे बिना मेरा कोई सब कुछ नहीं है।
आठ) गाँव में जश्न और विरोध
कबीर और शहवार ने गाँव में एक भव्य जश्न रखा, जिसमें दौलत, गहनों और संगीत की बरसात थी. लेकिन इस जश्न के बीच गाँव में दो धडे बन गए— एक उनका समर्थन कर रहा था, और दूसरा उनके खिलाफ साजिश कर रहा था.
समर्थक:
कबीर और शहवार की जोडी मिसाल है, मोहब्बत जीत रही है।
विरोधी:
यह शादी सिर्फ एक राजनीतिक चाल है. कबीर का मकसद सिर्फ सत्ता है।
नौ) पहले दुश्मन की चाल
विरोधी धडे ने कबीर के खिलाफ साजिश को अंजाम देने का निर्णय लिया.
उन्होंने गाँव में अफवाह फैलाना शुरू किया—
कबीर ने खजाने का राज छुपाया है, और वह इस शादी का इस्तेमाल इसे पाने के लिए कर रहा है।
गाँव में हलचल फैल गई. लोग सोचने लगे—
क्या कबीर सच में मोहब्बत कर रहा है या सत्ता के पीछे है?
दस) महल में तूफान
महल में एक रात तूफान आया. बारिश की बूँदें हवेली पर जोर से गिर रही थीं और बिजली के चमकते हुए बिजली के साथ गर्जना हो रही थी.
कबीर और शहवार एक बडे हॉल में खडे थे.
शहवार:
कबीर. अब हमें खुद को बचाना होगा. यह शादी सिर्फ हमारी नहीं, हमारे गाँव की भी जंग है।
कबीर:
हम मिलकर हर तूफान झेलेंगे, शहवार. चाहे कितनी भी ताकत हमें रोकने की कोशिश करे।
ग्यारह) नया अध्याय — प्रेम, साजिश और सत्ता
गाँव में अब सिर्फ मोहब्बत की कहानी नहीं थी, बल्कि सत्ता की जंग भी शुरू हो गई थी.
कबीर और शहवार को अब न केवल अपने प्यार को बचाना था, बल्कि उस खजाने के राज को भी सामने लाना था.
गाँव में अब एक ही चर्चा थी—
क्या कबीर और शहवार अपने प्यार और सत्ता की इस जंग में जीत पाएंगे?
To Be Continued.
अगला हिस्सा कहानी में दिखाएगा कि कबीर और शहवार खजाने की साजिश और दुश्मनी के तूफान में कैसे अपना रास्ता ढूंढेंगे और क्या उनकी मोहब्बत इन सब से बच पाएगी।
कबीर और शहवार की कहानी अब सिर्फ एक शादी की कहानी नहीं रही थी — यह एक जंग बन चुकी थी. गाँव में हर तरफ उनके नाम की चर्चा थी. लोग पूछ रहे थे — क्या यह मोहब्बत सत्ता के सामने टिक पाएगी?
लेकिन कबीर और शहवार के दिल में एक- दूसरे के लिए अटूट भरोसा था. और यही भरोसा उन्हें उस सबसे बडे तूफान से लडने की ताकत दे रहा था जो उनकी मोहब्बत और उनकी दुनिया को मिटा सकता था.
एक) दुश्मन की साजिश खुलना
एक दिन महल में फिरोज खान और उनके विश्वस्त सलाहकारों की बैठक हुई. दरअसल, फिरोज खान के पास वह खत था जो कबीर के पिता और उनके पूर्वजों के बीच छुपे खजाने का राज बताता था.
सलाहकार ने कहा—
नवाब साहब, अगर हम कबीर को इस खजाने तक पहुँचने से रोक दें तो न केवल हमारी साजिश सफल होगी, बल्कि शादी का महल भी सुरक्षित रहेगा।
फिरोज खान ने आँखें बंद कर लीं और बोला—
मैं अपनी बेटी की खुशी नहीं खोना चाहता, लेकिन इस खजाने का राज हमारी किस्मत बदल सकता है।
इस फैसले के बाद फिरोज खान ने साजिश का सबसे बडा कदम उठाया — वह कबीर के भरोसे में बैठे एक खास आदमी को हटा देना चाहता था, ताकि कबीर अकेला हो और दबाव में आकर हार मान ले.
दो) कबीर की चुनौती
कबीर ने महल में अपने विश्वस्त लोगों के साथ चर्चा की. उसने कहा—
अगर यह खत सच है, तो हमें इस राज तक पहुँचना ही होगा. लेकिन सबसे पहले हमें अपने दुश्मनों को समझना होगा।
शहवार ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—
कबीर. क्या तुम जानते हो कि इस रास्ते में हम दोनों की मोहब्बत का सच भी खतरे में है?
कबीर ने मुस्कुरा कर कहा—
तुम्हारा हाथ थामकर मैं किसी भी खतरे का सामना कर सकता हूँ।
तीन) खजाने की खोज
कबीर और शहवार ने तय किया कि वे खजाने की खोज खुद करेंगे. उन्होंने महल में छुपी हुई पुरानी किताबों और नक्शों को देखा. उनमें एक नक्शा मिला जिसमें खजाने की दिशा और इसका स्थान लिखा था.
लेकिन इस खोज के दौरान एक बडी बाधा मिली — फिरोज खान ने अपने लोगों को भेज दिया था जो कबीर को रोकने आए.
कबीर और शहवार को यह समझ आ गया कि यह लडाई केवल खजाने के लिए नहीं है, बल्कि उनके प्यार और अस्तित्व के लिए है.
चार) गाँव में समर्थन और विरोध
गाँव में अब तीन धडे बन चुके थे—
एक. कबीर और शहवार के समर्थक
दो. फिरोज खान के समर्थक
तीन. तटस्थ लोग जो केवल देख रहे थे कि किसका हाथ जीतेगा.
समर्थक कबीर के लिए चिल्ला रहे थे—
कबीर को जीतना है, क्योंकि यह मोहब्बत की लडाई है।
विरोधी कह रहे थे—
कबीर सत्ता की चाल में फँसा है, वह खजाने के पीछे अपना मकसद खोज रहा है।
गाँव में माहौल गर्म होता जा रहा था.
पाँच) पहला बडा संघर्ष
कबीर और शहवार ने खजाने के नक्शे के अनुसार जंगल की ओर यात्रा शुरू की. रास्ते में उन्हें फिरोज खान के कुछ लोग रोकने आए.
एक लंबी लडाई हुई — तलवारों की खनक, घोडों की दौड, और शहवार के चीखते हुए नाम का गूंज.
कबीर ने अपने तलवार से दुश्मनों को पीछे हटाया और शहवार को सुरक्षित निकाला. इस लडाई ने दोनों के दिल में विश्वास और मजबूती भर दी.
शहवार:
कबीर. तू मेरा सच है।
कबीर:
और तू मेरी जीत।
छह) खजाने का रहस्य
जंगल में कबीर और शहवार को एक पुराना मंदिर मिला, जहाँ खजाने का नक्शा समाप्त हो गया. मंदिर के भीतर एक दरवाजा था जिस पर लिखा था—
जो प्रेम में सच्चा है, वही इसे पाएगा।
दरवाजा खोलते ही दोनों के सामने सोने, चाँदी और गहनों से भरा एक कमरा था. वहाँ हीरे, जवाहरात, और antique सिक्कों का एक विशाल संग्रह था.
लेकिन यह खजाना सिर्फ दौलत नहीं था — इसमें एक पत्र था जिसमें लिखा था—
सच्ची दौलत मोहब्बत है. जिसने यह पाया, उसने जीवन की सबसे बडी जीत पाई।
कबीर और शहवार ने एक- दूसरे को देखा और मुस्कुराए.
सात) अंतिम जंग
लेकिन इस खुशी में फिरोज खान ने अपने लोगों के साथ हमला कर दिया. महल में और जंगल में एक साथ बडी लडाई छिड गई.
कबीर ने तलवार से लडते हुए कहा—
जो भी हमारी मोहब्बत को रोकने की कोशिश करेगा, मैं उसे नहीं छोडूँगा।
शहवार ने अपनी ताकत दिखाते हुए कहा—
और मैं तेरे साथ हमेशा लडूंगी।
यह लडाई गाँव के इतिहास में दर्ज हो गई.
आठ) मोहब्बत की जीत
आखिरकार, कबीर और शहवार ने अपने दुश्मनों को हरा दिया. फिरोज खान ने भी अपनी हार मान ली और अपनी बेटी की मोहब्बत को स्वीकार किया.
गाँव में खुशियाँ लौट आईं.
कबीर और शहवार ने खजाने को गाँव के कल्याण में लगाने का फैसला किया.
नौ) एक नई शुरुआत
कबीर और शहवार की कहानी अब गाँव के लिए एक मिसाल बन गई थी— मोहब्बत, साजिश और सत्ता की जंग में जीत की कहानी.
गाँव में अब यही कहा जाने लगा—
कबीर और शहवार की मोहब्बत ने दिखा दिया कि सच्चा प्यार सबसे बडी दौलत है।
वालिमा के बाद कबीर और शहवार की जिन्दगी में नई लडाई शुरू हो गई थी. गाँव में खजाने का राज और फिरोज खान की साजिश चर्चा में थी. फिरोज ने तय किया कि वह कबीर को रोक देगा, लेकिन कबीर ने ठान लिया था कि चाहे कुछ भी हो, वह शहवार के साथ खजाने तक पहुँचेगा.
एक रात, जंगल में दोनों नक्शे के साथ खजाने की तलाश में निकले. रास्ते में दुश्मनों ने हमला कर दिया. तलवारों की खनक, चीखें और घोडे की दौड — सब कुछ रोमांच से भरपूर था. कबीर ने शहवार को बचाते हुए लडाई जीती.
पुराने मंदिर में एक दरवाजा मिला जिस पर लिखा था —“ सच्ची दौलत मोहब्बत है। दरवाजा खोलते ही सोने, जवाहरात और antique खजाना सामने था, लेकिन साथ में एक पत्र था. कबीर और शहवार ने पढा और एक- दूसरे को मुस्कुराते हुए देखा.
फिरोज खान ने हार मान ली. गाँव में खुशी का माहौल था.
To be continued..