राहुल और उसके दोस्त शहर से दूर एक पुराने गाँव में छुट्टियाँ मनाने आए थे। गाँव में सुनसान रास्तों और घने जंगलों के बीच एक पुरानी हवेली खड़ी थी। गाँव के लोग कहते थे कि हवेली में रात के समय अजीब घटनाएँ होती हैं। लेकिन राहुल और उसके दोस्तों ने इसे मजाक समझा और तय किया कि वे रात को वहां जाएंगे।
रात का समय था। चाँद की हल्की रोशनी में हवेली डरावनी लग रही थी। लकड़ी के दरवाज़े चरमराते हुए खुले और अंदर का अँधेरा और भी भयानक दिख रहा था। जैसे ही वे अंदर कदम रखते, हवेली की पुरानी दरवाज़ें अपने आप बंद हो गईं।
राहुल ने टॉर्च जलाई और कमरे की चारों दीवारों पर नजर डाली। दीवारों पर पुराने चित्र और मकड़ी के जाले थे। तभी अचानक एक ठंडी हवा का झोंका आया और कमरे में कुछ गिरने की आवाज़ हुई। दोस्तों ने डर के मारे पीछे हटने की कोशिश की, लेकिन दरवाजा अब बंद था।
वे धीरे-धीरे हवेली की दूसरी मंजिल की ओर बढ़े। वहां एक पुराना पुस्तकालय था। किताबों की गंध और अँधेरा वातावरण उनके डर को और बढ़ा रहा था। राहुल ने एक किताब उठाई और जैसे ही उसने उसे खोला, किताब के पन्नों से एक अजीब सी आवाज़ आने लगी।
“तुम यहाँ क्यों आए हो?” आवाज़ धीरे-धीरे कमरे में गूंजने लगी। दोस्त डर के मारे चिल्लाने लगे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। तभी पुस्तकालय की खिड़कियों के पीछे कुछ हिलता दिखाई दिया। छाया धीरे-धीरे कमरे के बीच में आकर ठहर गई।
राहुल ने हिम्मत जुटाई और देखा कि वह छाया धीरे-धीरे मानव आकार ले रही थी। उसका चेहरा धुँधला और आँखें लाल थीं। वह धीरे-धीरे राहुल और उसके दोस्तों के पास बढ़ रही थी। डर के मारे दोस्तों ने भागने की कोशिश की, लेकिन दरवाज़ा अभी भी बंद था।
अचानक छाया ने कहा, “जो लोग मेरी हवेली में बिना बुलाए आए हैं, उन्हें सजा मिलनी चाहिए।” राहुल ने धीरे से कहा, “हम केवल मजाक के लिए आए थे। हम कुछ नुकसान नहीं करेंगे।”
छाया ने उनकी तरफ एक लंबी नजर डाली और धीरे-धीरे गायब हो गई। दरवाज़े अपने आप खुल गए और राहुल और उसके दोस्त हवेली से बाहर भाग निकले। उनके हाथ कांप रहे थे और दिल की धड़कन तेज़ थी।
वापस गाँव लौटते समय, उन्होंने देखा कि हवेली में फिर से अजीब रोशनी और shadows दिखाई दे रहे थे। राहुल ने ठान लिया कि वह कभी भी अकेले वहां नहीं जाएगा।
लेकिन अगले दिन, जब वह अपने कमरे में बैठे थे, उनकी टेबल पर वही किताब रखी थी जो हवेली में थी। और पन्नों के बीच से एक नोट निकला –
“मैं हमेशा तुम्हारे पीछे हूँ।”
राहुल ने उस नोट को फेंक दिया, लेकिन रात के समय जब वह सोने गया, उसने महसूस किया कि कमरे की खिड़कियों पर वही डरावनी shadows फिर से दिखाई देने लगीं।
राहुल ने उस नोट को फेंक दिया, लेकिन रात के समय जब वह सोने गया, उसने महसूस किया कि कमरे की खिड़कियों पर वही डरावनी shadows फिर से दिखाई देने लगीं।
और तभी अचानक बत्ती अपने आप बंद हो गई। कमरे में गहरी खामोशी छा गई। धीरे-धीरे दरवाज़ा अपने आप खुला और उसी छाया की फुसफुसाती आवाज़ आई—
“मैंने कहा था, मैं हमेशा तुम्हारे पीछे हूँ… अब तुम बच नहीं सकते।”