लोक संगीत•कॉम
कजरी ने जल्दी जल्दी घर के काम निपटाए। उसे आज नर्मदा भाभी के घर बुलव्वे में जाना था। नर्मदा भाभी की बेटी की शादी थी। नर्मदा भाभी ने दोपहर में गाने बजाने का कार्यक्रम रखा था। ऐसे किसी भी बुलव्वे की कजरी शान होती थी। ढोलक की थाप पर वह बहुत सुंदर और मनमोहक गीत गाती थी।
सारा काम निपटाने के बाद कजरी तैयार हुई। उसने छोटे से आईने में खुद का चेहरा देखा और माथे की बिंदी ठीक की। चलने से पहले उसने अपने बच्चों से कहा,
"तुम दोनों चुपचाप पढ़ाई करना। हम नर्मदा ताई के घर जा रहे हैं। शाम तक लौटेंगे।"
दोनों बच्चों ने सर हिलाकर हाँ कहा। कजरी ने अपने बेटे से कहा,
"सावन तुम मंजरी का खयाल रखना। तुमसे छोटी है। ऐसा ना हो कि पिछली बार की तरह उससे झगड़ा करो।"
सावन ने कहा,
"मम्मी आप हमको डांटती हैं। झगड़ा मंजरी करती है।"
उसने मंजरी की तरफ देखा। कजरी ने कहा,
"तुम बड़े हो। बात संभालना चाहिए ना कि लड़ाई करनी चाहिए।"
कजरी ने मंजरी को भी हिदायत दी। उसके बाद बोली,
"अब जा रहे हैं। हमारे लौटने से पहले अगर पापा आ जाएं तो पानी पिला देना।"
कजरी बाहर निकल गई। उसने अपने सामने सावन से दरवाज़ा अंदर से बंद करवाया। उसके बाद नर्मदा के घर की तरफ चल दी।
नर्मदा के घर के आंगन में दरी बिछी हुई थी। कुछ औरतें बैठी कजरी का इंतज़ार कर रही थीं। कजरी ने कहा,
"अरे आप सब चुप बैठी हैं। हम तो सोच रहे थे कि ढोलक बज रही होगी। गाना बजाना शुरू हो गया होगा।"
नर्मदा ने कहा,
"अब शुरू तो तुम ही करोगी। तुमको ही आते हैं हर अवसर के गाने। बाकी आजकल तो सब फिल्मी गाने जानती हैं।"
कजरी दरी पर बैठ गई। उसने अपनी सहेली ललिता से कहा,
"चलो संभालो ढोलक। पहले गणेश जी की वंदना गाएंगे। उसके बाद कुछ भजन। बाद में शादी के गाने।"
ललिता ने ढोलक संभाल ली। कजरी गाने लगी। बाकी औरतें सिर्फ ताली बजा रही थीं। कजरी की आवाज़ बहुत मधुर थी। जब वह गाती थी तो गाने में डूब जाती थी। ललिता ऐसे अवसर पर ढोलक पर उसका खूब साथ देती थी। उन दोनों की जोड़ी बन गई थी।
करीब दो घंटे गाना बजाना चला। इन दो घंटों में कजरी ने बहुत से शादी ब्याह वाले गीत गाए। उसके पास ऐसे गीतों का खजाना था। कई गीत उसे ज़ुबानी याद थे। आजकल इन गीतों का चलन कम हो रहा था। ऐसे अवसरों पर या तो फिल्मी तर्ज़ पर बने गीत गाए जाते थे या फिर लोग डीजे बुलवा लेते थे। कजरी को खोती हुई इस परंपरा पर बहुत दुख था।
बुलव्वा खत्म हुआ तो नर्मदा ने सबको चाय नाश्ता कराया। सबके चलते समय बोली,
"कल सरोज का तिलक जाएगा। जल्दी आ जाना तैयारियां करनी हैं।"
सबने समय पर आने का आश्वासन दिया और अपने घर चली गईं। कजरी भी ललिता के साथ निकल रही थी तभी नर्मदा के देवर कमलेश ने उसे रोककर कहा,
"कजरी भाभी....गाती तो बहुत अच्छा हो। आजकल ऐसे गीत कम सुनने को मिलते हैं। धीरे धीरे इनका चलन खत्म हो गया है। ये सब गीत छोड़कर कुछ नए किस्म के गाने गाओ तो बहुत फेमस हो जाओगी।"
कमलेश कजरी के पति संतोष का दोस्त था। शहर में नौकरी करता था। अपनी भतीजी की शादी के लिए आया था। वह कजरी के साथ हंसी मज़ाक करता रहता था। कजरी ने कहा,
"भइया हम तो ऐसे ही गाने गाएंगे। हमारे दिल को इनसे सुकून मिलता है। जिन्हें सुनना हो सुनें नहीं तो कोई बात नहीं।"
"भाभी हम तो इसलिए कह रहे थे क्योंकि तुम्हारी आवाज़ सचमुच बहुत अच्छी है। आजकल तो लोग इंटरनेट पर वीडियो डालकर बहुत फेमस हो रहे हैं। पैसा भी कमाते हैं। तुम भी आजकल के गानों के वीडियो बनाकर डालो। देखना कितने लोग तुम्हें फॉलो करते हैं।"
"छोड़ो भइया हमें नहीं बनना है फेमस।"
कजरी चलने लगी तो कमलेश ने कहा,
"संतोष से कह देना शाम को आ जाए। बैठकर बातें करेंगे।"
कजरी ने हाथ के इशारे से कहा कि कह देगी। वह और ललिता आगे बढ़ गईं। ललिता उसके घर के पीछे ही रहती थी। चलते हुए ललिता ने कहा,
"कमलेश भइया गलत नहीं कह रहे थे। तुम तो पुराना कीपैड वाला मोबाइल रखती हो। तुम्हें पता नहीं है सचमुच आजकल तो लोग रील बनाकर खूब फेमस हो रहे हैं।"
कजरी पढ़ी लिखी थी। उसने लोगों को मोबाइल पर रील्स देखते हुए देखा था। संतोष भी कई बार उसे कुछ मज़ेदार रील्स दिखाता था। उसके बच्चे भी अपने पापा का मोबाइल लेकर कुछ ना कुछ देखते रहते थे। कजरी इंटरनेट और सोशल मीडिया के बारे में जानती थी पर उसने अपने आपको इस सबसे दूर रखा था। उसने कहा,
"क्या करेंगे फेमस होकर। हम जैसे हैं बहुत अच्छे हैं।"
ललिता ने इस विषय में आगे कुछ नहीं कहा। उसके बाद दोनों घर गृहस्ती की बातें करने लगीं।
संतोष पास के गांव के इंटर कॉलेज में टीचर था। वह नए विचारों का था। कजरी पढ़ी लिखी थी इसलिए उसे प्रोत्साहित करता रहता था कि वह घर गृहस्ती तक ही सीमित ना रहे। दुनिया को जाने समझे। उसे अक्सर प्रोत्साहित करता था कि वह इंटरनेट के ज़रिए देश दुनिया में क्या हो रहा है जाने। उसने कई बार कजरी को नया मोबाइल दिलाने की बात कही थी। कजरी ये कहकर टाल देती थी कि मोबाइल का सबसे अच्छा इस्तेमाल बात करना और मैसेज भेजना है। ये काम उसके मोबाइल से हो जाता है। बाकी उसे कोई शौक नहीं पालना है। रही देश दुनिया को जानने की बात तो वह न्यूज़ सुनती है। अखबार और किताबें पढ़ती है। उससे बहुत कुछ जानने को मिल जाता है।
कजरी सावन और मंजरी को पढ़ा रही थी। कल दोनों का ही टेस्ट था। सावन तो पढ़ने में मन लगा रहा था पर मंजरी का ध्यान इधर उधर भटक रहा था। इसका कारण था कि संतोष पास में बैठा अपने मोबाइल पर कुछ देख रहा था। उसकी आवाज़ सुनकर मंजरी देखने के लिए ललचा रही थी। कजरी ने उसे डांटते हुए कहा,
"पढ़ाई में मन नहीं लगता है तुम्हारा। चुपचाप पढ़ो। अगर टेस्ट में खराब नंबर आए तो पिटाई करेंगे।"
मंजरी किताब में देखने लगी। कजरी उठकर संतोष के पास गई। उसने कहा,
"आपको जो देखना है तो बाहर दालान में बैठकर देखिए। इस लड़की का मन वैसे ही बहुत चंचल है। बड़ी मुश्किल से मन लगा पाती है पढ़ने में।"
संतोष ने शिकायती नज़रों से उसकी तरफ देखा। कजरी बोली,
"आप तो खुद टीचर हैं। इस तरह बच्चे पढ़ेंगे कैसे?"
संतोष उठकर बाहर चला गया।
बच्चों को पढ़ाने के बाद कजरी बाहर आई तो उसने देखा कि संतोष चारपाई पर लेटा कुछ सोच रहा है। उसने पास बैठते हुए उसने कहा,
"क्या हुआ? नाराज़ हो गए क्या?"
संतोष उठकर बैठ गया। उसने कहा,
"नाराज़ क्यों होएंगे? तुमने गलत थोड़ी ना कहा था। हमें ध्यान रखना चाहिए।"
"तो फिर क्या सोच रहे थे?"
संतोष ने कजरी की तरफ देखकर कहा,
"उस दिन कमलेश से बहुत देर तक बात हुई थी। उसने तुम्हारे बारे में एक बात कही थी।"
कजरी ने हंसते हुए कहा,
"यही कि हमको आजकल के गाने गाकर वीडियो बनाना चाहिए। उन्हें इंटरनेट पर डालना चाहिए। हमसे भी यही बात कही थी।"
"तो गलत क्या है इसमें। अच्छा गाती हो। तुम्हारा गाना लोगों को पसंद आएगा।"
कजरी ने सर हिलाकर उसकी बात खारिज कर दी। संतोष ने कहा,
"तुम समझ नहीं रही हो। हुनर है तुम्हारे पास। हम तो देखते हैं कि लोगों को कला का ज्ञान भी नहीं है फिर भी वीडियो बनाकर नाम कमा रहे हैं। तुम तो सचमुच अच्छा गाती हो।"
कजरी ने हाथ जोड़कर कहा,
"हमको नहीं कमाना है नाम। कभी ज़रूरत पड़ी तो नौकरी कर लेंगे। ये सब नहीं करेंगे।"
संतोष ने उसे घूरकर देखा। वह बोला,
"अब तुमने नाराज़ करने वाली बात करी है। हम क्या पैसों के लिए कह रहे हैं। हम कमाते हैं। खेती बाड़ी है। किस चीज़ की कमी है जो पैसों के लिए तुमसे ये सब करने को कहेंगे।"
कजरी की मंशा वो नहीं थी। उसने तो नौकरी की बात ऐसे ही कह दी थी। उसकी बात संतोष को बुरी लगी थी। उसने कहा,
"हमारा मतलब वो नहीं था। अब नाराज़ मत होइए। बात ये है कि हमको ये सब पागलपन लगता है। पवन को देखा है ना। रील बनाने के चक्कर में पढ़ाई लिखाई छोड़कर बैठा है। हम नहीं चाहते हैं कि हम ये सब करें और हमें देखकर बच्चे बिगड़ें।"
संतोष अभी भी नाराज़ था। कजरी ने कहा,
"अब गुस्सा छोड़िए। चलकर खाना खा लीजिए।"
संतोष ने कहा,
"कजरी...माना पवन जैसे बहुत से लोग हैं जो रील बनाने के चक्कर में पागल हो रहे हैं। इसके चक्कर में दिन रात का चैन खो बैठे हैं। अपने रिश्तों की परवाह नहीं करते हैं। रील के चक्कर में जान तक जोखिम में डाल देते हैं। वहीं बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो इसका सही उपयोग कर रहे हैं। अपनी और दूसरों की ज़िंदगी में नया बदलाव ला रहे हैं।"
उसने कजरी की तरफ देखकर कहा,
"हमारा तो मानना है कि ये इंसान पर निर्भर है कि वह चीज़ का कैसे उपयोग करता है। तुम अगर इंटरनेट पर वीडियो नहीं डालना चाहती हो तो मत डालो पर हम चाहेंगे कि एकबार इस दुनिया को देखो और खुद परखो।"
ये कहकर संतोष उठकर अंदर चला गया। कजरी उसे खाना परोसने चली गई।
बच्चों और संतोष को भेजने के बाद कजरी गरम कपड़ों को धूप दिखाने के लिए बाहर डाल रही थी। हल्की हल्की ठंड पड़ने लगी थी। कुछ ही दिनों में उनकी ज़रूरत पड़ने वाली थी। अब बस रज़ाई और कंबल धूप में डालने बचे थे। उसने सोचा कि उन्हें कल धूप दिखाएगी। ये सब करते हुए वह थक गई थी। वह आकर चारपाई पर बैठ गई। उसके दिमाग में बहुत देर से कल रात संतोष के साथ हुई बातचीत घूम रही थी। संतोष ने उससे कहा था कि वह एकबार इंटरनेट की दुनिया को खुद देखे फिर अपनी राय बनाए। वह सोच रही थी कि उसे संतोष की बात माननी चाहिए।
"क्या हो रहा है कजरी?"
ललिता की आवाज़ सुनकर कजरी अपने विचारों से बाहर आई। उसने आसपास धूप में पड़े गरम कपड़ों की तरफ इशारा करते हुए कहा,
"ठंड आने ही वाली है। आज इन्हें धूप दिखा रहे थे।"
ललिता उसके पास बैठ गई। उसने कहा,
"आज सुबह ही अम्मा ने हमसे कहा कि रज़ाई कंबल निकाल कर धूप दिखा दो। अब आज नहीं, कल हम भी धूप दिखा देंगे।"
कजरी ललिता के साथ बातें करने लगी। बातें करते हुए भी उसे संतोष की कही बात याद आ रही थी। उसकी नज़र ललिता के हाथ में पकड़े फोन पर पड़ी। उसने कहा,
"तुम्हारे फोन में इंटरनेट चलता है।"
"हाँ....हर महीने नेटपैक डलवाते हैं। नेट के बिना तो हमारा काम ही ना चले।"
"ऐसा क्या करती हो नेट पर?"
कजरी का सवाल सुनकर ललिता ने हंसकर कहा,
"एकबार तुम इस्तेमाल करना शुरू करो फिर तुम्हारा भी काम इसके बिना नहीं चलेगा।"
कजरी ने कहा,
"कल तुम्हारे भइया कह रहे थे कि इस पर बहुत से लोग अच्छा काम भी कर रहे हैं। तुमने देखा है।"
ललिता ने कुछ सोचकर कहा,
"हाँ... हमने देखा है कि एक सर हैं जो ऑनलाइन बच्चों को पढ़ाते हैं। उनकी ऑनलाइन फ्री क्लास के कारण बहुत से गरीब बच्चे अच्छे नंबर लाते हैं।"
कजरी को जानकर बहुत अच्छा लगा। उसने कहा,
"ये तो बहुत अच्छी बात है। लेकिन वीडियो देखकर समझ में आता है।"
"क्यों नहीं आएगा? जैसे टीचर क्लास में पढ़ाते हैं वैसे ही वीडियो पर। हमारी पिंकी तो इंटरनेट से बहुत कुछ सीखती है। तुम्हीं जाने क्यों बिदकती हो। अपने बच्चों को भी दूर रखती हो।"
कजरी सोच में पड़ गई। ललिता ने उसे और भी बहुत सी बातें बताईं। ललिता ने उसे एक ऐसी औरत के बारे में बताया जो उन लोगों की तरह ही गांव में रहती थी। वह हिंदी माध्यम से पढ़ी थी। इंटरनेट से अच्छी अंग्रेज़ी सीखकर अब लोगों को सिखाती है। सब जानकर कजरी को लगने लगा था कि अब तक वह एक दुनिया से अंजान थी जहाँ बहुत कुछ सीखने और समझने के लिए था। उसने सोचा कि एकबार वह खुद इस दुनिया को जानने की कोशिश करेगी।
सावन अपने दोस्त से मिलकर लौटा तो खुश लग रहा था। स्कूल से लौटने के बाद बहुत परेशान था। गणित के एक पाठ का टेस्ट होना था जो उसे समझ नहीं आया था। वह अपने दोस्त की मदद लेने गया था। उसे खुश देखकर कजरी ने पूछा,
"समझ आ गया पाठ?"
"हाँ मम्मी... बहुत अच्छी तरह से।"
"तो दोस्त ने मदद कर दी।"
कजरी की बात सुनकर सावन ने जवाब दिया,
"उसे तो खुद प्रॉब्लम थी।"
"तो फिर किसने समझाया?"
"मम्मी हमारे दोस्त के पापा के पास लैपटॉप है। उन्होंने उस पर एक वीडियो चला दिया। उस वीडियो में पूरे पाठ को अच्छी तरह समझाया गया था।"
आज कजरी को दूसरी बार इंटरनेट के फायदे के बारे में पता चला था। वह अब उस दुनिया को जानने के लिए और अधिक उत्सुक थी। सावन हाथ पैर धोकर आया। कजरी ने उसे नाश्ता दिया। खाते हुए सावन ने कहा,
"आप मना कर देती हैं नहीं तो हम पापा से मोबाइल या लैपटॉप खरीदने को कहते। कितना कुछ सीखते।"
"जब पापा का मोबाइल लेते हो तब तो दोनों भाई बहन बेकार की चीज़ें देखते हो।"
सावन ने शिकायत करते हुए कहा,
"वो तो कुछ देर के लिए ही मिलता है। उसमें क्या सीख सकते हैं। थोड़ा मनोरंजन कर लेते हैं।"
कजरी ने कुछ नहीं कहा। सावन नाश्ता करके पढ़ने बैठ गया।
अब तक कजरी ने इंटरनेट की दुनिया के बारे में सुना था। खुद उसे जाना नहीं था। उसके अंदर इंटरनेट की इस दुनिया को जानने समझने की उत्सुकता अब बहुत अधिक बढ़ चुकी थी। वह चाहती थी कि उसने जो कुछ सुना है उसका खुद भी अनुभव करे। रात में बिस्तर पर लेटे हुए उसने संतोष से कहा,
"उस दिन आप बता रहे थे कि इंटरनेट पर सब खराब ही नहीं है। बहुत कुछ अच्छा भी है।"
"हाँ कहा तो था...."
"ललिता ने भी हमें बहुत कुछ बताया है। कल सावन को पढ़ाई में समस्या थी। अपने दोस्त के साथ उसने वीडियो देखा तो समस्या दूर हो गई।"
संतोष ने करवट बदल कर कजरी की तरफ देखा। उसने कहा,
"तो तुमको लगने लगा है कि इंटरनेट के भी फायदे हैं।"
"हाँ... जो सुना है उससे तो यही लगता है। अपनी तरफ से तो अनुभव नहीं किया।"
संतोष समझ रहा था कि कजरी ये सब क्यों कह रही है। कजरी उस दुनिया को अनुभव करना चाहती है पर वह चाहता था कि ये बात कजरी खुलकर कहे। कजरी ने अपनी बात कहकर एक संकेत दिया था पर वह खुलकर कुछ कह नहीं पाई।
संतोष से बात हुए एक हफ्ते से अधिक हो गया था। संतोष ने उस विषय में आगे कोई बात नहीं की थी। कजरी संकोच में कुछ कह नहीं पाई थी। उसे लगता था कि उस दिन नौकरी वाली बात कहकर उसने संतोष को चोट पहुँचाई है। वह अभी भी नाराज़ है। उसने आगे बात ना छेड़ने का निश्चय किया।
कजरी का जन्मदिन था। सुबह वह नहा धोकर मंदिर गई थी। वहाँ से लौटी तो संतोष और बच्चों ने उसे मुबारकबाद दी। वह सोच रही थी कि उसके मायके से भी घरवालों का फोन आएगा। वह अपना कीपैड वाला फोन ढूंढ़ रही थी। मंदिर जाते समय भी उसने खोजा था पर मिला नहीं था। जल्दी में वह बिना फोन लिए चली गई थी। खोजने से भी जब उसे फोन नहीं मिला तो उसने संतोष से कहा,
"अपने फोन से मेरा नंबर मिलाइए। सुबह से फोन दिख नहीं रहा है।"
संतोष ने कहा,
"ठीक से देखो। यहीं कहीं होगा।"
"इतनी देर से देख तो रहे हैं। जाने कहाँ है? आप घंटी बजाइए।"
संतोष ने कॉल किया। घंटी तो बज रही थी पर अलग तरह की थी। कजरी कुछ समझ नहीं पा रही थी। संतोष ने कहा,
"अंदर के कमरे से आवाज़ आ रही है। जाकर देखो।"
कजरी अंदर गई तो आले से आवाज़ आती सुनाई पड़ी। वह पास गई तो एक नया फोन था। पीछे से सावन और मंजरी ने कहा,
"हैप्पी बर्थडे मम्मी...."
नया फोन पाकर कजरी बहुत खुश हुई। संतोष ने कहा,
"तुम फोन लेना चाहती थी पर कह नहीं पा रही थी। कल शाम ललिता के पते पर आया। सावन उसके घर से ले आया था। रात को तुम्हारे सोने के बाद हमने तुम्हारा पुराना फोन चुरा लिया था। जब तुम मंदिर गई थी तब तुम्हारा सिम इस नए फोन में डालकर चालू कर दिया।"
इस तोहफे को पाकर कजरी बहुत खुश थी। वह संतोष के सीने से लग गई।
शुरुआत में नया फोन चलाने में कजरी को कुछ दिक्कत हुई। सावन और ललिता ने उसकी कुछ चीज़ों को समझने में मदद की। लेकिन ये समस्या महज़ एक दो दिन की ही थी। कुछ आधारभूत बातें जानने के बाद कजरी खुद ही रोज़ नया सीखने लगी। कुछ ही दिनों में उसने इंटरनेट का इस्तेमाल कैसे करना है सीख लिया। अब वह संतोष और बच्चों के जाने के बाद कुछ घंटे इंटरनेट पर बिताती थी। गूगल पर बहुत कुछ सर्च करती थी। यूट्यूब पर वीडियो देखती थी। इस विशाल सागर में गोते लगाते हुए वह समझ गई थी कि ये बहुत ही गहरा और फैला हुआ है। यहाँ गीत संगीत है। साहित्यिक मंच हैं। मनोरंजन के साथ सीखने के लिए भी बहुत कुछ है। जितना वह इस दुनिया में डूब रही थी उतना ही और अधिक जानने समझने की उसकी प्यास बढ़ रही थी।
इतवार का दिन था। सारा काम निपटा कर कजरी अपना मोबाइल लेकर बैठी थी। वह कुछ पढ़ रही थी। संतोष उसके पास आकर बैठ गया। उसने कहा,
"तो अब मोबाइल पर वक्त बिताना अच्छा लगने लगा।"
कजरी ने उसकी तरफ देखकर कहा,
"आपने सही कहा था। यहाँ तो बहुत कुछ है सुनने, पढ़ने और देखने के लिए। हमें एक साइट मिली है। यहाँ बड़े बड़े साहित्यकारों की कहानियां हैं। इस समय हम मुंशी प्रेमचंद की कहानी ईदगाह पढ़ रहे हैं। बहुत पहले किताब में पढ़ी थी। आज दोबारा पढ़कर अच्छा लग रहा है।"
संतोष ने मुस्कुराते हुए कहा,
"तुम तो बहुत जानकार हो गई हो। नई नई साइट खोज लेती हो। कहानियां पढ़ने लगी हो। हमें भी सिखाओ।"
कजरी ने हंसकर कहा,
"सिखाने वाली क्या बात है? कहते हैं जिन खोजा तिन पाइयां। जिसकी जो पसंद वो यहाँ मिलेगा।"
कजरी फिर से कहानी पढ़ने लगी। उसी समय सावन वहाँ आ गया। वह कजरी से फोन मांगने लगा। उसे अपनी पढ़ाई से संबंधित कुछ सर्च करना था। कजरी अपना फोन देने जा रही थी पर संतोष ने उसे रोककर कहा,
"तुम कहानी पढ़ो। मैं अपना फोन दे देता हूँ।"
उसने सावन को अपना फोन दे दिया। कजरी कहानी पढ़ने लगी।
कजरी अब बहुत कुछ जान चुकी थी। इस नई दुनिया में उसे बहुत मज़ा आ रहा था। वह देख रही थी कि यहाँ ना सिर्फ सीखने के लिए बहुत कुछ है बल्कि अपने आप को अभिव्यक्त करने का भी अच्छा मंच है। वह चाहती थी कि अब वह खुद को दुनिया के सामने लाए। उसने सोशल मीडिया पर अपना अकाउंट बनाया। यहाँ उसकी पहचान नए लोगों से हुई। अब वह दूसरों के विचार जानने के साथ साथ अपने विचार भी रखने लगी थी। इस सबके कारण उसके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई थी।
अपने सोशल मीडिया अकाउंट के ज़रिए उसकी पहचान माधव प्रसाद कौल नाम के एक बुज़ुर्ग से हुई थी। अवकाश प्राप्त माधव अक्सर बांसुरी पर कोई गीत बजाकर उसका वीडियो पोस्ट करते थे। माधव के वीडियो देखना कजरी को बहुत अच्छा लगता था।
आज भी उन्होंने एक वीडियो डाला था। कजरी उस पर कमेंट करने जा रही थी। कुछ सोचकर उसने उन्हें मैसेज करके उनके वीडियो के बारे में बताया। कुछ ही क्षणों में माधव का जवाब भी आ गया। कजरी ने भी उन्हें जवाब भेजा। इस तरह दोनों के बीच मैसेज का आदान प्रदान शुरू हो गया। दोनों अक्सर एक दूसरे से मैसेज पर बात करते थे।
बातचीत के दौरान माधव ने कजरी को अपने बारे में बताया। वह बैंक में अधिकारी थे। बचपन से परिवार में संगीत का माहौल था। उन्हें भी बांसुरी ने आकर्षित किया था। बांसुरी पर बहुत सी धुनें बजाते थे। सब उनकी खूब तारीफ करते थे। अवकाश ग्रहण के बाद उन्होंने अपने हुनर को लोगों के सामने रखना शुरू किया। उनका कहना था कि जब लोग उनके हुनर को सराहते हैं तो उन्हें बहुत अच्छा लगता है।
माधव के बारे में जानने के बाद कजरी को संतोष की कही बात फिर याद आई। संतोष ने कहा था कि तुम्हारे पास हुनर है। उसे दुनिया के सामने लाओ। अब वह भी चाहती थी कि अपने गाने की प्रतिभा का प्रदर्शन करे। उसे बस एक बात ठीक नहीं लग रही थी। कमलेश ने कहा था कि उसे आजकल के गाने गाकर वीडियो बनाना चाहिए। उसे उन गानों से कोई ऐतराज़ नहीं था पर वो जो गीत गाती थी उन्हें गाकर उसे दिली तसल्ली मिलती थी।
कजरी कश्मकश में थी कि क्या करे?
कजरी के मायके से खबर आई कि उसकी दादी बहुत बीमार हैं और उससे मिलना चाहती हैं। वह अपनी दादी की चहेती थी। अपने खानदान में वह अकेली लड़की थी। उसके जन्म पर उसकी दादी बहुत खुश हुई थीं। दादी की बदौलत ही वह पढ़ लिख सकी थी। खबर मिलते ही कजरी फौरन अपने मायके चली गई।
उसकी दादी बहुत अधिक बीमार थीं। उन्हें शहर ले जाकर अस्पताल में भर्ती कराने की तैयारी चल रही थी। कजरी अपनी दादी के पास बैठी थी। उसकी दादी ने धीरे से कहा,
"कुछ गाकर सुनाओ...."
उनकी फरमाइश पर कजरी उन्हें गीत सुनाने लगी। दादी उसका गीत बड़े ध्यान से सुन रही थीं।
कजरी को जो भी गीत आते थे वो उसकी दादी के थे। उसकी सुरीली आवाज़ के कारण उन्होंने उसे बहुत से गीत सिखाए थे। जब वह लिखना सीख गई थी तब खुद को याद बहुत से गीत उन्होंने कजरी से कॉपी में लिखाए थे। कजरी का गीत खत्म हुआ तो उन्होंने कहा,
"हमारा बक्सा खोलकर उसमें से वो कापी निकालो जिसमें तुमने गीत लिखे थे।"
कजरी उनके बक्से से वो कॉपी निकाल लाई। उसकी दादी ने कहा,
"अब ये कापी तुम्हारी है। दादी तुम्हें ये भेंट देकर जा रही है। इसमें लिखे गीतों को बचाकर रखना तुम्हारी ज़िम्मेदारी है।"
कजरी ने कॉपी को अपनी दादी का तोहफा समझ कर रख लिया।
अस्पताल में दो दिन गुज़ारने के बाद उसकी दादी की मृत्यु हो गई।
दादी के अंतिम संस्कार निपटा कर कजरी वापस अपने घर आ गई।
एक दिन शाम को वह संतोष के साथ बैठी थी। संतोष ने बात छेड़ते हुए कहा,
"कुछ तय किया कि किस तरह के वीडियो बनाओगी।"
कजरी अभी भी तय नहीं कर पाई थी। वह कहने जा रही थी कि अभी कुछ सोचा नहीं है तभी अचानक उसे दादी की दी गानों वाली कॉपी की याद आई। अब तक मन में चल रही कश्मकश अचानक खत्म हो गई। उसने तय कर लिया था कि उसे क्या करना है। उसने कहा,
"हम वही गीत गाएंगे जो हमें सुकून देते हैं।"
उसकी बात सुनकर संतोष ने कहा,
"उन गीतों को बहुत लोग नहीं सुनेंगे।"
कजरी ने कहा,
"हमारा उद्देश्य अब नाम कमाना नहीं है। दादी ने हमें उन गीतों को बचाकर रखने की ज़िम्मेदारी दी है। हम अपने वीडियो बनाकर उन्हें ज़िंदा रखेंगे।"
ये बात कहते हुए कजरी के मन में कोई संशय नहीं था।
कजरी ने ललिता को अपना निर्णय बताकर उससे सहयोग की मांग की। ललिता उसकी साथी बनने को तैयार हो गई। शुरुआत में उन दोनों ने मिलकर कुछ वीडियो बनाए। उन्हें कजरी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड कर दिया। कुछ लोगों ने उन्हें पसंद किया। कजरी के गीतों के वीडियो पर अच्छे कमेंट्स आए। इस सफलता से उत्साहित होकर कजरी ने तय किया कि वह अपना एक चैनल बनाएगी।
कुछ रीसर्च करने के बाद कजरी ने संतोष की सहायता से वीडियो बनाने, उन्हें एडिट करने आदि के सारे उपकरण इकट्ठे कर लिए।
पूरी तैयारी के साथ कजरी ने अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया जिसका नाम रखा लोकसंगीत•कॉम।
ललिता ढोलक पर साथ देती थी। कजरी गीत गाती थी। संतोष आवश्यक सहायता करता था।
कुछ समय लगा पर कजरी का यूट्यूब चैनल प्रसिद्ध हो गया। कजरी को लोग अब उन गी
तों की वजह से जानते थे।
लोगों में प्रसिद्ध हो गया था कि कजरी ने अपनी परंपरा से जुड़े गीतों को वो मुकाम दोबारा दिला दिया है जो उनसे छिन रहा था।