Al - Amanah - Saltanat ki Kismat - 2 in Hindi Classic Stories by Harun Khan books and stories PDF | अल - अमानह : सल्तनत की किस्मत - 2

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अल - अमानह : सल्तनत की किस्मत - 2


दूसरा अध्याय : अली की बेचैनी और एक अनसुलझी पहेली

अली के साथ हुई उस घटना से अब अली परेशान रहने लगा। अब वह अपने आपको एक रहस्य में छुपा हुआ पाता था।
उसकी आँखों की नींद उड़ चुकी थी। अली के मन और कान में दिन-रात शेख हमजा के आखिरी शब्द गूंजते थे—

"अल-अमानह... आखिरी वारिस... वो तलवार..."

अली हर समय सोचता था,
"क्या वो बूढ़ा शेख हमजा सच बोल रहा था? क्या मैं आखिरी वारिस हूँ? ये अल-अमानह... वो तलवार... इसका रहस्य क्या है? और वे लोग कौन थे जिन्होंने मुझ पर हमला किया? आखिर वह मुझसे क्या चाहते थे? मुझे इस रहस्य के बारे में जानना होगा।"

अली परेशान रहता था और साथ में डर भी रहा था कि—
"अगर मैं इस रहस्य के बारे में सही से नहीं जान पाया तो क्या होगा?"

लेकिन अली ने मन ही मन ठान लिया था कि वह यह रहस्य जानकर ही रहेगा और इसे सुलझाएगा भी।
लेकिन उसने सोचा कि वह ये सब अकेले नहीं कर पाएगा। अली ने ठान लिया कि वह ये सारी बातें अपने खास दोस्त जुनैद को बताएगा।

जुनैद के घर पर - 

अली, जुनैद के घर पहुँचता है। जैसे ही जुनैद उसे देखता है, वह घबरा कर पूछता है—

जुनैद: "अली! क्या हुआ मेरे दोस्त? तुम इतनी चिंता में क्यों हो?"

क्योंकि अली के चेहरे से साफ झलक रहा था कि वह किसी बात को लेकर चिंता में है।

जुनैद ने अली को बैठाया और उससे उसकी चिंता की वजह पूछी।

अली: "जुनैद! मैं तुम्हें एक बहुत बड़ा रहस्य बताने वाला हूँ। तुम मुझसे वादा करो कि तुम किसी को कुछ नहीं बताओगे।"

जुनैद: "अली, मेरे दोस्त! मैं तुमसे वादा करता हूँ कि मैं यह बात किसी को नहीं बताऊंगा।"

इसके बाद अली जुनैद को अपने साथ हुई हर घटना बता देता है—शेख हमजा की आखिरी बातें, अल-अमानह तलवार का रहस्य, और उस पर हुए हमले तक की सारी बातें।

जुनैद यह सब सुनकर चौंक जाता है और कहता है—

जुनैद: "अली! यह तो मुझे बहुत बड़ा रहस्य लग रहा है!"

अली: "मुझे पता है, जुनैद! इसलिए तो मैं तुम्हारे पास आया हूँ।"

जुनैद: "मैं भी इस रहस्य को जानने के लिए उत्सुक हूँ और मैं तुम्हारी इसमें मदद करूंगा।"

अली: "जुनैद! मुझे यह बात समझ नहीं आ रही कि यह बूढ़ा शेख हमजा कौन था? उसे कैसे पता चला कि मैं आखिरी वारिस हूँ? और अल-अमानह तलवार के रहस्य के बारे में उसे कैसे पता चला? और वे आदमी कौन थे जिन्होंने मुझ पर हमला किया?"


---

आमिर ताहिर की साजिश :- 

इधर अली और जुनैद बातें कर रहे थे, और उधर अत्याचारी आमिर ताहिर के जासूस उसके पास जाते हैं।

जासूस: "सरदार! वह शेख हमजा मर गया और वह एक 20 साल के लड़के के साथ था जिसका नाम अली है। कहीं वही लड़का असली वारिस तो नहीं है?"

आमिर ताहिर: "हो सकता है! अब वह लड़का हमारे लिए खतरा साबित हो सकता है, हमें उसे खत्म कर देना होगा।"

जासूस: "सरदार! हमने उसका पीछा किया और उस पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन वह भी शेख हमजा की तरह एक तंग गली में घुस गया। हमने उसे बहुत ढूंढा लेकिन वह वहाँ से निकलने में कामयाब हो गया।"

यह सुनकर आमिर ताहिर अपने साथियों से कहता है—

आमिर ताहिर: "उसे ढूंढने की जरूरत नहीं, वह खुद आएगा! हमें सिर्फ उसे उस खास तलवार अल-अमानह तक पहुंचाने का नक्शा ढूंढना है।"

जासूस: "सरदार! हमने शेख हमजा के घर की पूरी तलाशी ली थी, लेकिन वहाँ कोई नक्शा नहीं मिला। और जो किताबों में जानकारी मिली थी, वह तो हमें पहले से ही पता थी।"

आमिर ताहिर: "उस दिन हमारे आने से पहले ही शेख हमजा ने वह नक्शा जरूर छुपा दिया होगा। अब हमें उसे ढूंढना होगा, क्योंकि शेख हमजा अब नहीं रहा।"

जासूस: "लेकिन सरदार! हम उसे कैसे ढूंढेंगे?"

आमिर ताहिर: "तुम्हें ढूंढने की जरूरत नहीं, अगर वह लड़का अली असली वारिस होगा, तो वह खुद शेख हमजा के घर इस खास तलवार अल-अमानह का सुराग खोजने आएगा।"

जासूस: "तो हमें क्या करना चाहिए?"

आमिर ताहिर: "तुम लोग शेख हमजा के घर के पास पहरा दो और भेष बदलकर नजर रखो। क्योंकि वह तुम में से दो आदमियों को पहचानता है।"


---

अली और जुनैद की यात्रा :- 

इधर आमिर ताहिर अपनी योजना बना रहा था, और उधर अली और जुनैद ने तय किया कि वे शेख हमजा के घर जाएंगे।

लेकिन समस्या यह थी कि उन्हें शेख हमजा के घर का पता नहीं था।

जुनैद: "अली! अब क्या होगा? हमें तो शेख हमजा के घर का पता ही नहीं मालूम!"

अली को याद आता है कि शेख हमजा के हाथों पर कुछ लिखा था।

अली: "जुनैद! जब मैं उस दिन शेख हमजा से मिला था, तो उसके हाथ पर यह पता लिखा था—

"मेरा घर, शहर के बीच, एक लकड़ी की दुकान"

"मुझे लगता है कि वही उसके घर का पता है।"

जुनैद: "तुम सही कहते हो! और शहर में लकड़ी की दुकान भी सिर्फ़ एक ही है, तो हमें वहीं जाना चाहिए!"

लेकिन उन्हें नहीं पता था कि आमिर ताहिर के जासूस पहले से वहाँ तैनात हैं।

अली और जुनैद ने फैसला किया कि वे रात के अंधेरे में जाएंगे, ताकि किसी को उन पर शक न हो।

धीरे-धीरे रात हो गई। चारों ओर अंधेरा था, लेकिन चाँद पूरी तरह से चमक रहा था।

अली और जुनैद शेख हमजा के घर पहुँचते हैं।

वह अंदर दाखिल होते हैं। वे एक पुराने छोटे से कमरे में जाते हैं, जहाँ एक पुरानी अलमारी थी जिसमें कई कागज और पुरानी किताबें रखी थीं।

कमरे में अंधेरा था, लेकिन जुनैद अपने साथ मशाल लाया था। उसने मशाल जलाई और उजाला हुआ।

लेकिन जैसे ही उजाला हुआ, अली और जुनैद जो कुछ देखते हैं, उससे वे चौंक जाते हैं...!

आगे क्या होगा?-- 

अली और जुनैद ने ऐसा क्या देखा कि वे चौंक गए?

क्या अली को अपने सवालों के जवाब मिलेंगे?

क्या अली इस रहस्य को जान पाएगा?

क्या आमिर ताहिर की योजना सफल होगी?
क्या अमीर ताहिर अल - अमानह तलवार को पाने में सफल होगा और क्या उसका दुनिया पर हुकूमत करने का सपना सच हो पाएगा ?

जानने के लिए पढ़ें—

अध्याय 3 - To Be Continued... 

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