Ameeri aur Garibi Kitaab ke do Panne - 1 in Hindi Motivational Stories by Poonam Kuhar books and stories PDF | अमीरी और गरीबी किताब के दो पन्ने। - 1

Featured Books
  • When Miracles Happen - 3

    उस मूर्ति के गायब हो जाने के बाद राजू माँ के पास आकर लेट गया...

  • खुदकुशी

    खुदकुशी                      कमल चोपड़ा        ​रातभर तेज़ आ...

  • RAAKH - खामोश चीखों का शहर

    इस शहर में, सूरज उम्मीद जगाने नहीं उगता था; वह तो बस पिछली र...

  • Flower

    यह उस वक्त की बात है जब मैं 15 साल का था। मेरे लिए प्यार शब्...

  • औद्योगिक कचरा

    औद्योगिक कचरा और विकास  विवेक रंजन श्रीवास्तव आज आधुनिक विका...

Categories
Share

अमीरी और गरीबी किताब के दो पन्ने। - 1

आज हम बात करेंगे गरीबी क्या हैं ? और जो अमीर होते हैं उन्हें क्या पता गरीब होना कितनी बड़ी बात हैं !

एक शक्श ने कहा गरीब किताब का वह पन्ना है अगर जिसे छोड़ दिया या फाड़ दिया जाए तो अमीर एक तुछ चीज रह जाती हैं। जो की गरीब के बिना अधूरी लगती हैं। इस बात को हम कहानी के माध्यम से समझाना चाहेंगे।

एक बार एक गांव में दो दोस्त रहते थे जिसमे से एक अमीर और एक गरीब था फिर भी उनकी दोस्ती बहुत गहरी दोस्ती थी। दोनो साथ में रहते थे साथ में खाते पीते और सब काम साथ में करते थे।

इस बात से गांव वाले परेशान हो गए और सोचने लगे की इनकी दोस्ती कैसी तोड़ी जाए । धीरे-धीरे उनमें फूट डालनी शुरू कर दी लेकिन इस बात का पता गरीब दोस्त को चल गया फिर भी यह बात उस अमीर दोस्त को नही बताई। क्योंकि वह देखना चाहता था की मेरा दोस्त मुझसे कितना प्रेम करता हैं लेकिन इसका उल्टा उसे देखने को मिला और उन दोनो में अनबन शुरू हो गई और वह गरीब दोस्त गांव छोड़कर चला गया।

धीरे-धीरे वक्त बीतता गया और उस अमीर दोस्त को समझ में आया की उस गरीब दोस्त के बिना हर चीज छोटी हैं और वह जब साथ में था दुनिया की छोटी चीज भी बहूत कीमती लगती थी। इस तरह उसकी हालत तनाव की ओर बढ़ रही थी और उसे अपनी अमीर, रहीसी भी अच्छी नही लग रही थी।

" हसरत सुकून ए दिल को पाने की थी ये जमाना बार बार उस दिल के दरवाजे को दफन किए जा रहा था "

फिर वह अपनी समस्या के समाधान के लिए एक साधु के पास गया और उसे अपनी सारी व्यथा बताई तब साधु ने उससे पूछा अगर तुम्हारी मित्रता गहरी थी तो तूने उसका साथ क्यों नही दिया ?
तब वह इंसान बोला की मैं लोगो की बातो में आ गया था और इसके बाद साधु ने उससे पूछा की अगर लोग तुम्हे अपने परिवार के बारे में ऐसा बोलते तो तुम क्या करते तब उस अमीर ने कहा मैने सोचा नही क्या करता मैं ? तब साधु ने कहा तो तू मेरी एक बात मान इस संसार को त्याग दे । ऐसा सुनकर वह अमीर दोस्त आश्चर्य में पड़ गया मैं क्रू तो क्या क्रू ?
"किसी गरीब की गरीबी देखकर यह मत समझना की उसके पास कुछ भी हैं अगर तुम्हे जो सुकून मिल रहा हैं वह एक गरीब की गरीबी से मिल रहा है क्युकी तब उसे देखकर सोचते हो की मेरे पास सभ कुछ हैं और तुम्हे जो तसल्ली मिलती हैं अमीर होने की वो दूसरे इंसान की गरीबी देखकर होती हैं तो कभी किसी गरीब का मजाक मत बनाना "


और इस कहानी के अगले भाग को पढ़ना चाहते हो तो आपके साथ की जरूरत हैं ।
अगर यह कहानी अच्छी लगी हो तो बताना और इसके अगले भाग में देखना आगे क्या होता हैं ।।।।

थैंक यू ____ सभी का______
🙏🏻🙏🏻🙏🏻
आप खुश रहो हमेशा यही दुआ है हमारी ___