Noukrani ki Beti - 19 in Hindi Human Science by RACHNA ROY books and stories PDF | नौकरानी की बेटी - 19

Featured Books
  • इश्क दा मारा - 79

    यश यूवी को सब कुछ बता देता है और सब कुछ सुन कर यूवी को बहुत...

  • HOW TO DEAL WITH PEOPLE

                 WRITERS=SAIF ANSARI किसी से डील करने का मतल...

  • Kurbaan Hua - Chapter 13

    रहस्यमयी गुमशुदगीरात का समय था। चारों ओर चमकती रंगीन रोशनी औ...

  • AI का खेल... - 2

    लैब के अंदर हल्की-हल्की रोशनी झपक रही थी। कंप्यूटर स्क्रीन प...

  • यह मैं कर लूँगी - (अंतिम भाग)

    (भाग-15) लगभग एक हफ्ते में अपना काम निपटाकर मैं चला आया। हाल...

Categories
Share

नौकरानी की बेटी - 19



अब आनंदी को पोस्ट ग्रेजुएट के नतीजे का इंतजार था। और फिर एक दिन आनंदी का पोस्ट ग्रेजुएऐट का नतीजा निकला और आनंदी का फर्स्ट रेंक आया ही साथ ही गोल्ड मेडल भी मिल गया।

आनंदी का सपना पूरा हुआ देखते ही देखते वो पोस्ट ग्रेजुएशन भी कर लिया।उसको मार्क सिट और सर्टिफिकेट भी मिल गया।


रीतू ने घर पर ही एक बहुत बड़ी पार्टी रखी थी आनंदी के रेजल्ट के लिए।सब दोस्तों को भी बुलाया था आनंदी ने।हर बार की तरह इस बार भी रीतू ने बड़ा सा केक आॅडर किया था। आनंदी ने केक काट कर सबको सर्व किया।

फिर सब बहुत ही इन्जाय किये।

आनंदी को रीतू के मैनेजर ने उसकी इतनी बड़ी सफलता पर अपार हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि अब आगे क्या करना है।
आनंदी ने कहा मैं एक आई एस अफसर बनना चाहती हुं।
मैनेजर रोबर्ट क्लाइव बोलें बहुत अच्छे।
आनंदी के सारे दोस्तों ने एक साथ मिलकर डांस भी किया और फिर सभी ने बहुत ही अच्छे से डिनर किया और आनंदी को गुड नाईट बोल कर चले गए।

फिर रीतू के आफिस के दोस्तों ने भी डिनर किया और फिर घर चले गए।
फिर सभी के जाने के बाद आनंदी और रीतू ने मिलकर सबकुछ साफ कर के सोने चली गई।

अगले दिन सुबह आनंदी एक नई उम्मीद के साथ उठ कर रोज के काम करने के बाद बैठ गई।
अब आनंदी की मंजिल उसके बहुत करीब थीं।

आनंदी का अब सिविल सेवा परीक्षा जून में २२दिनाक को होने वाला था।

आनंदी ने सब कुछ लैपटॉप पर देख रही थी सबसे पहले जरूरी है कि यु पी एस की परीक्षा तीन चरणों में होती है। प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा, साक्षात्कार।

रीतू ने कहा देखो आनंदी तेरे लिए दिल्ली के एक अच्छे से होस्टल में रहने का इंतजाम कर लिया है क्योंकि तुझे अब आई एस की तैयारी करनी है।
जून में तेरा पेपर है और पोस्ट ग्रेजुएशन का तेरा रेजल्ट तेरे हाथ में आ गया है।

तेरी एयर टिकट बुक करवाया है।

आनंदी ने कहा हां दीदी अगर आप नहीं होती तो मेरा सपना कभी पूरा नहीं हो पाता।


रीतू ने कहा देखो इस बार तुझे अकेले ही सफ़र तय करना होगा। रीतू दीदी नहीं होगी वहां पर मेरा आशिर्वाद हमेशा रहेगा। और फिर तुझे मेरी शादी में तो आना होगा।


आनंदी ने कहा हां दीदी जरूर आऊंगी।

फिर आनंदी ने सारी पैकिंग कर लिया और क्योंकि अब एक नया सफर शुरू होने वाला था।
आज आनंदी को दिल्ली के लिए निकलना होगा।
दोनों एक-दूसरे के गले लगकर रोने लगे।

रीतू बोली बहुत याद आयेंगी तू आनंदी।

आनंदी भी रोने लगी और फिर रीतू आनंदी को एयरपोर्ट छोड़ने गई। आनंदी ने कहा कि अब आप जाओ दी, मैं चली जाऊंगी।
रीतू ने कहा अपना ख्याल रखना।

फिर आनंदी आगे बढ़ गई।
आनंदी अकेली ही हवाई जहाज पर सवार होकर उड़ान भरने लगी।उसे उस आनंदी की याद आ रही थी जो डरी हुई सहमी हुई सी थी। आज कहा से कहा पहुंच गई।


और फिर आनंदी पहुंच गई दिल्ली।उसे रह,रह कर लंदन की याद आ रही थी।
अपने युनिवर्सिटी को मिस कर रही थी।


दिल्ली एयरपोर्ट से बाहर निकल कर रीतू के द्वारा दिये पत्ते पर आनंदी पहुंच गई ।

एक बहुत बड़ा गर्ल्स हॉस्टल था। वहां जाकर आनंदी ने एक लेटर दिया जो रीतू ने लिखा था।

शीतल मैम बोली आओ आनंदी गोल्ड मेडलिस्ट और टापर स्टुडेंट राईट।

आनंदी ने कहा हां मैम। फिर आनंदी को उसका रूम मिल गया।

सबसे पहले आनंदी ने रीतू को फोन कर सब बताया।
रीतू बोली अरे आनंदी तू क्या गई मेरा तो मन नहीं लग रहा है।

आनंदी भी रोने लगी।


उसके बाद आनंदी ने मां को फोन किया।
कृष्णा वाई ने कहा आनंदी घर कब आयेगी।
आनंदी ने कहा हां मां मैं आती हूं।
आनंदी तैयार हो कर निकल गई और फिर सीधे मां के पास पहुंच गई।

आनंदी गले लगकर कर रोने लगी और बोली मां अब मैं कुछ बन जाऊंगी तो तुझे कोई काम करने की जरूरत नहीं है।

राजू दादा के घर किसी और को लगा लेना।


कृष्णा ने कहा हां ठीक है चल कुछ खा ले। आनंदी और कृष्णा बैठ कर खाना खाने लगे।


फिर आनंदी होस्टल वापस आ गए और फिर अपनी तैयारी शुरु कर दिया।

फिर आनंदी का एडमिट कार्ड आ गया और फिर उसका आई एस अफसर का परीक्षा भी आ गया।


आज आनंदी को सिविल सेवा परीक्षा प्रारम्भिक का पेपर था। कुछ घंटों तक पेपर चला।
आनंदी का पेपर बहुत ही अच्छा गया था।
सितंबर में दुसरा पेपर होने वाला था।
आनंदी होस्टल में रात दिन पढ़ाई में लगी रहती थी।
रीतू रोज विडियो काल करती थी आनंदी को।
आनंदी सब बातें बोला करती थी।

आनंदी को उसका कालेज दोस्त ज़ोन कभी कभी फोन करता था।


आनंदी ने देखा कि आई एस की तैयारी उसकी मंजिल तक पहुंचने पर है।उसका सपना पूरा हो जाएगा। दूसरा पेपर सितम्बर में होने वाला था उसके लिए एक महीने बचे थे।


आनंदी ने अपनी क्षमता से अधिक मेहनत किया और फिर दूसरा पेपर भी होने वाला था
ये मेन परीक्षा भी था जिसमें 9पेपर होने वाला था।

आनंदी शाहजहां रोड नई दिल्ली में पेपर देने जा रही थी और वो समय से परीक्षा देने पहुंच गई और उसकी परीक्षा बहुत ही अच्छा हुआ ‌।


होस्टल पहुंच कर आनंदी ने रीतू को फोन पर सब बताया और रीतू ने कहा अब तेरा साक्षात्कार होगा। आनंदी ने कहा बस कुछ दिन बाद ही होगा।

आज आनंदी का इंटरव्यू है वो समय से पहले ही पहुंच गई और फिर इंटरव्यू हुआं और घर आकर रीतू को फोन पर सब विस्तार से बताया कि जी के, करेंट अफेयर्स, कुछ परिस्थिति से जुड़े सवाल पूछे गए।

रीतू ने कहा मुझे पता है कि मेरी आनंदी सब में आगे, सबसे आगे।
आनंदी ने कहा हां दीदी जरूर।

फिर आनंदी को आई ए एस की इतनी कठिन परिश्रम के बाद उसको आई एस बनने का मौका मिल गया। उसके नम्बर सबसे अधिक था।उसको आई एस टापर्स घोषित किया गया। मुख्य परीक्षा में आनंदी को कुल 1500 नम्बर आए थे और साक्षात्कार में 200 नम्बर आए थे।
आनंदी का नाम पेपर में भी छपा था।

रीतू को जैसे ही खबर मिली तो वो तुरंत दिल्ली के लिए निकल गई एयर टिकट बुक पहले से ही करवा लिया था।


आनंदी ने आज वो कर दिखाया जो शायद कोई सपने में करता है। फिर आनंदी का इंटरव्यू लिया गया कि एक नौकरानी की बेटी कैसे एक सफल आई ए एस अफसर बनने का सपना पूरा करती है।
रीतू ने आते ही आनंदी को अपने घर ले कर गई।
और फिर घर के सभी लोग मिलकर उसका स्वागत किया। कृष्णा वाई भी दूर खड़ी आनंदी को देख रही थी और फिर रीतू ने कहा कि आज आनंदी इस मुकाम पर पहुंच गई है। और अब एक नया सफर शुरू होने वाला है।

फिर आई एस के सभी चरणों को पार करने के बाद आनंदी को 21महीने की ट्रेनिंग करनी पड़ेगी।इसकी ट्रेनिंग लाल बहादुर शास्त्री नेशनल अकैडमी आफ ऐडमिनिस्ट्रेशन में शुरू होगी।

फिर आनंदी की 21महीने की ट्रेनिंग होने वाली थी। रीतू बोली तेरी ट्रेनिंग शुरू होने वाली है उससे पहले मैं शादी करूंगी।

रीतू ने आनंदी को और बाकी सब को अपनी शादी के लिए लंदन आने को बोला और फिर रीतू वापस लंदन चली गई।

आनंदी भी बहुत खुश थी कि रीतू दी शादी कर रही है और फिर रीतू ने अगले महीने की एयर टिकट बुक करवाया आनंदी और बाकी सब लोगों का।


एक बार फिर आनंदी अपने सपनों की दुनिया में पहुंच गई इस बार की आनंदी में और उस समय की आनंदी में जमीन आसमान का फर्क था।


लंदन पहुंच कर ही आनंदी अपने स्कूल गई और सबसे मिलकर अपने आई एस की परीक्षा में टाॅप करने की बात बोली।

फिर एक दिन अपने युनिवर्सिटी भी गई और सबसे मिलकर आई।
और आगे अपने दोस्तों को भी रीतू दी कि शादी में बुलाया।


कल रीतू की शादी थी। रीतू ने बड़ा होटल बुक करवाता था और खुब अच्छी तरह तैयारी भी करवाईं था।
मेहंदी लगवाना,गाना बजाना सब चल रहा था। कृष्णा वाई भी बहुत खुश थी।
आनंदी भी खुश हो कर नाच गा रही थी।
सब लोग बहुत खुश नजर रहे थे।


आज रीतू और शैलेश का इन्जगेजमेन्ट बहुत अच्छी तरह से हो गया दोनों ने एक-दूसरे को हीरे की अंगूठी पहनाई और फिर केक काट कर एक दूसरे को खिलाया।

सबने ताली बजाकर खुशी जाहिर किया। फिर खाना पीना हुआं। वहीं पर रीतू ने रहने का इंतजाम किया था।
दूसरे दिन सुबह रीतू की हल्दी की रस्म की गई। फोटोग्राफर भी समय से आ गया था।
आनंदी ने भी रीतू को हल्दी लगाया। राजू ने आनंदी को हल्दी लगा दिया।
आनंदी ने कहा क्या दादा मुझे क्यों लगाया।
राजू बोला अरे भाई कहां मैंने लगाया।


फिर उधर शैलेश का भी हल्दी हो गया।


क्रमशः