hindi Best Motivational Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Motivational Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations a...Read More


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प्रेरणा पथ - भाग 3 By Rajesh Maheshwari

11. आदमी और संत नर्मदा नदी के तट पर एक महात्मा जी रहते थे। उनके एक शिष्य ने उनसे निवेदन किया कि मुझे आपकी सेवा करते हुये दस वर्षों से भी अधिक समय...

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मेरी पहली कहानी  By Prashant Soni

मेरी पहली कहानी असल में यह कहानी मेरी नहीं है । और मेरी ही है जी हां मैं सच बोल रहा हु । अब आप सोच रहे हो गए की यह क्या पागल की तरह बात कर रहा है चलो अब छोड़ो...

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यात्रा तम से प्रकाश की By Rudra S. Sharma

मैं जिस तंत्र का हिस्सा हूँ; कोई भी उसमें मुझसे या मेरे होने से संतुष्ट नहीं था। अधिकतर सभी मुझे और मुझसे संबंधित को महत्व नहीं देते थे; मुझे मेरे लिये सभी की कुछ अभिव्यक्ति से तो...

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उजाले की ओर --संस्मरण By Pranava Bharti

उजाले की ओर --संस्मरण ----------------------- नमस्कार मित्रों ! झरोखों से झाँकता किसका जीवन किस ओर बहा ले जाए पता ही नहीं चलता | सच ही तो है,हम कहाँ जानते हैं किस डगर...

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काश लौट आये अब वो पल By निखिल ठाकुर

..... .....: काश लौट आये अब वो पल -1 ====================================================================== जब जब देखता हूं बचपन से संघर्ष मे लगे छोटे बच्चों को.... कितना दर्द और...

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तू इस मन का दास ना बन By Mohit Rajak

तू इस मन का दास ना बन इस मन को अपना दास बना ले देखो मन के खेल निराले नित्य नित्य नव डेरा डाले नए अश्व के जैसा चंचल, किसी के संभले ना आए संभाले इंद्रियों के विषयों में फस कर, ज...

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कोई शाम उदास ना हों By swati tiwari

पिछले दो माह से घर आ गया हूं | लॉकडाउन के बाद दो महीने उसी शहर में रहकर ऑनलाइन काम करता रहा बाद में पता चला मैनेजमेंट ने उन दिनों 70% सैलरी काट ली थी , यह कहकर कि कंपनी का सारा बिज...

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Situation By shivani

एक पुरानी कहानी है जरुर सुनाती हूँ और बड़ी शानदार है ! वो एक कौवा था और कोवै को तकलीफ क्या थी जानते है ! कोवै का रंग क्या होता है ? ( काला ) तो कौवा काला था वहा एक साधु थे , साधु...

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बस तुम खुद को पहचान लो By Mohit Rajak

प्रिय मित्रों इस संसार में जो कुछ भी है वह सब हमारे अंदर निहित है सब कुछ हमारे अंदर है यह संसार तो मात्र प्रतिबिंब है जैसा हम देखते हैं जैसी हम दृष्टि रखते हैं यह संसार हमें वैसा ह...

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सिरफिरा हाथी By Krishna Kant Srivastava

बहुत समय पहले की बात है। गांव में एक अध्यापक रहते थे। उनके अनेकों विद्यार्थी थे। एक दिन अध्यापक ने अपने सभी विद्यार्थियों को अपने पास बुलाया और बड़े प्यार से समझाया, विद्यार्थियों...

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पद्मा सचदेव के सफ़र की समाप्ति By Anand M Mishra

“तुम्हें मालूम था, यह राह नहीं निकलती, जहाँ पहुँचना मैंने, तुम उस तरफ जा भी नहीं रहे थे ,फिर भी तुम चलते रहे मेरे साथ-साथ…” इन पंक्तियों के रचयिता पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित ड...

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जीवन की प्राथमिकताएं By Krishna Kant Srivastava

शिक्षक ने आज कक्षा में प्रवेश करते ही मेज पर एक बड़ा सा खाली शीशे का जार रख दिया। शिक्षक ने जार को पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़ों से भर दिया। जार को पूरा भरने के बाद उन्होंने छात्रों स...

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भारतीय हॉकी की वापसी By Anand M Mishra

5 अगस्त! कुछ विशेष महत्वपूर्ण दिन! मन में उत्सुकता! क्या विशेष होगा इस वर्ष! भारतीय हॉकी के लिए यादगार दिन का गवाह बना! चार दशकों के ऐतिहासिक दर्द के बोझ को पार किया! निश्चित ही...

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तर्ज़नी से अनामिका तक - भाग १२ - अंतिम भाग By Rajesh Maheshwari

101. नैतिकता का तालाब यह घटना कई वर्ष पूर्व की है परंतु पीढी दर पीढी वहाँ के आसपास के निवासियों की जुबान पर आज भी रहती है। जबलपुर को तालाबों को षहर भी कहा जात...

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वो चार लोग By Mayank Saxena Honey

वो चार लोग (सत्यता पर आधारित एक प्रेरक दर्शन।) चार लोग देखेंगे तो क्या कहेंगे? चार लोग सुनेंगे तो क्या कहेंगे? आप सभी ने ये वाक्य अवश्य सुने होंगे। आखिर वो चार लोग हैं कौन? और आखिर...

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एक जन्म: By Naina Yadav

एक बार एक मनुष्य अपने जीवन से तंग होकर ईश्वर से कहता है कि हे भगवान मैं इस रूप से तंग होकर इसका त्याग करना चाहता हूं भगवान बोले तथास्तु उन्होंने पूछा कि तुम क्या बनना चाहते हो उसने...

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वक्त सबसे अच्छा मित्र By Anand M Mishra

वक्त सब सिखा देता है। वक्त की मार जीवन में प्रायः हर किसी को लगती है। चाहे वे श्रीराम, श्रीकृष्ण, तुलसीदास, कालीदास या कोई और हों। जब वक्त की मार पडती है तो बड़े-बड़े धराशायी हो जा...

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दो यार और वो - दो यार By Mehul Pasaya

सुनो महेश तुम मेरे साथ आ सकते हो, मुझे थोडा काम है तुम्हराहा चलो चंदू वैसे भी मे अभी कुच भी काम नही कर रहा हू सो चल सकते हैओके तो चलो, वैसे हमे ना कही घुमने जाना है तो तुम तयार होह...

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सफलता का रहस्य By Krishna Kant Srivastava

एक नौजवान युवक ने अपने जीवन यापन हेतु बड़े उत्साह के साथ एक व्यापार की शुरुआत की, परंतु दुर्भाग्यवश कुछ ही समय में किसी बड़े घाटे की वजह से उसका व्यापार बंदी की कगार पर पहुंच गया।व्य...

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मनीराम तोता By Kamal Maheshwari

मनीराम तोते के पूरे परिवार को किसी शिकारी ने मार डाला था । जब शिकारी ने उसके पूरे परिवार की हत्या की थी , तब वह परिवार के लिए भोजन तलाश में गया था । आकर देखा तो उसकी पत्नी और दो छो...

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गुरू की सीख By Krishna Kant Srivastava

गुरु रामदास विद्यालय में हिंदी शिक्षक के रूप में कार्य करते थे। गुरु रामदास बड़े दिनों बाद आज शाम को घर लौटते वक़्त अपने दोस्त गोपाल जी से मिलने उसकी दुकान पर गए। गोपाल जी शहर में कप...

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राष्ट्रीय ध्वज के अभिकल्पक By Anand M Mishra

हर देश के लिए यह जरूरी है कि उसका एक झंडा हो, जिसके तले पूरा राष्ट्र एक हो जाए जो त्याग, शांति और एकता का प्रतीक हो। ऐसे में देश को एक सूत्र में बाँधने का कार्य हमारा राष्ट्रीय ध...

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जीवन की सच्ची पूंजी By Krishna Kant Srivastava

एक बार एक शक्तिशाली राजा दुष्यंत घने वन में शिकार खेल रहा थे। अचानक मौसम बिगड़ गया। आकाश में काले बादल छा गए और मूसलाधार वर्षा होने लगी। धीरे-धीरे सूर्य अस्त हो गया और घना अंधेरा छ...

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साला फटीचर By श्रुत कीर्ति अग्रवाल

साला फटीचर आज काम का बोझ बहुत ज्यादा था, आलोक को मानो साँस लेने की भी फुर्सत नहीं थी। ऐसे में जब पियून ने किसी विजय कुमार का कार्ड लाकर सामने रखा तो उसने मना ही कर दिया... एक तो...

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हंसना- गुण या दोष? By Anand M Mishra

हंसी के कई प्रकार होते हैं – अट्टहास, मुस्कुराना, खिलखिलाना, मंद मुस्कान आदि। सभी में मनोभाव अलग-अलग तरह के होते हैं। दांत निपोरकर हंसने वाली मुद्रा अलग होती है, वह एक प्रकार से शा...

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कृष्णा By Vijay Tiwari Kislay

कृष्णा कृष्णा था तो पिछड़े वर्ग से किंतु ईश्वर ने उसके दिमाग में बुद्धि कूट कूट कर भरी थी। वह जितना बुद्धिमान था उतना ही सहृदयी और परोपकारी भी था। धर्मपरायणता, सुसंस्का...

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आधार - 24 - भगवत कृपा, जीवन की दिव्य शक्ति है। By Krishna Kant Srivastava

भगवत कृपा, जीवन की दिव्य शक्ति है।कभी आप रास्ते में पड़े पत्थर से टकराकर लड़खड़ाते हैं फिर संभल जाते हैं और चोट खाने से बच जाते हैं। कभी आपके नजदीक से एक तेज रफ्तार कार गुजर जाती ह...

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पुस्तकों की दुनिया By Anand M Mishra

पुस्तकों का संसार! आज के डिजिटल युग से बिल्कुल अलग! पुस्तकें इतिहास, साहित्य, विज्ञान और सभ्यता की संवाहक हैं। दुनिया में परिवर्तन के इंजन हैं। दुनिया को देखने की खिड़कियां हैं।...

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बिनु पानी सब सून By श्रुत कीर्ति अग्रवाल

प्रिय दीदीचौंक गई न? तुमने तो कभी सोंचा तक नहीं होगा कि मैं तुम्हें पत्र लिखूँगी। पर एक बात शायद भूल गई तुम, या शायद जान-बूझ कर भुला दिया कि मैं सदा की स्वार्थी रही हूँ... आज भी मे...

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प्रेरणा पथ - भाग 3 By Rajesh Maheshwari

11. आदमी और संत नर्मदा नदी के तट पर एक महात्मा जी रहते थे। उनके एक शिष्य ने उनसे निवेदन किया कि मुझे आपकी सेवा करते हुये दस वर्षों से भी अधिक समय...

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मेरी पहली कहानी  By Prashant Soni

मेरी पहली कहानी असल में यह कहानी मेरी नहीं है । और मेरी ही है जी हां मैं सच बोल रहा हु । अब आप सोच रहे हो गए की यह क्या पागल की तरह बात कर रहा है चलो अब छोड़ो...

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यात्रा तम से प्रकाश की By Rudra S. Sharma

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उजाले की ओर --संस्मरण By Pranava Bharti

उजाले की ओर --संस्मरण ----------------------- नमस्कार मित्रों ! झरोखों से झाँकता किसका जीवन किस ओर बहा ले जाए पता ही नहीं चलता | सच ही तो है,हम कहाँ जानते हैं किस डगर...

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काश लौट आये अब वो पल By निखिल ठाकुर

..... .....: काश लौट आये अब वो पल -1 ====================================================================== जब जब देखता हूं बचपन से संघर्ष मे लगे छोटे बच्चों को.... कितना दर्द और...

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तू इस मन का दास ना बन By Mohit Rajak

तू इस मन का दास ना बन इस मन को अपना दास बना ले देखो मन के खेल निराले नित्य नित्य नव डेरा डाले नए अश्व के जैसा चंचल, किसी के संभले ना आए संभाले इंद्रियों के विषयों में फस कर, ज...

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कोई शाम उदास ना हों By swati tiwari

पिछले दो माह से घर आ गया हूं | लॉकडाउन के बाद दो महीने उसी शहर में रहकर ऑनलाइन काम करता रहा बाद में पता चला मैनेजमेंट ने उन दिनों 70% सैलरी काट ली थी , यह कहकर कि कंपनी का सारा बिज...

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Situation By shivani

एक पुरानी कहानी है जरुर सुनाती हूँ और बड़ी शानदार है ! वो एक कौवा था और कोवै को तकलीफ क्या थी जानते है ! कोवै का रंग क्या होता है ? ( काला ) तो कौवा काला था वहा एक साधु थे , साधु...

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बस तुम खुद को पहचान लो By Mohit Rajak

प्रिय मित्रों इस संसार में जो कुछ भी है वह सब हमारे अंदर निहित है सब कुछ हमारे अंदर है यह संसार तो मात्र प्रतिबिंब है जैसा हम देखते हैं जैसी हम दृष्टि रखते हैं यह संसार हमें वैसा ह...

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सिरफिरा हाथी By Krishna Kant Srivastava

बहुत समय पहले की बात है। गांव में एक अध्यापक रहते थे। उनके अनेकों विद्यार्थी थे। एक दिन अध्यापक ने अपने सभी विद्यार्थियों को अपने पास बुलाया और बड़े प्यार से समझाया, विद्यार्थियों...

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पद्मा सचदेव के सफ़र की समाप्ति By Anand M Mishra

“तुम्हें मालूम था, यह राह नहीं निकलती, जहाँ पहुँचना मैंने, तुम उस तरफ जा भी नहीं रहे थे ,फिर भी तुम चलते रहे मेरे साथ-साथ…” इन पंक्तियों के रचयिता पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित ड...

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जीवन की प्राथमिकताएं By Krishna Kant Srivastava

शिक्षक ने आज कक्षा में प्रवेश करते ही मेज पर एक बड़ा सा खाली शीशे का जार रख दिया। शिक्षक ने जार को पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़ों से भर दिया। जार को पूरा भरने के बाद उन्होंने छात्रों स...

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भारतीय हॉकी की वापसी By Anand M Mishra

5 अगस्त! कुछ विशेष महत्वपूर्ण दिन! मन में उत्सुकता! क्या विशेष होगा इस वर्ष! भारतीय हॉकी के लिए यादगार दिन का गवाह बना! चार दशकों के ऐतिहासिक दर्द के बोझ को पार किया! निश्चित ही...

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101. नैतिकता का तालाब यह घटना कई वर्ष पूर्व की है परंतु पीढी दर पीढी वहाँ के आसपास के निवासियों की जुबान पर आज भी रहती है। जबलपुर को तालाबों को षहर भी कहा जात...

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वो चार लोग By Mayank Saxena Honey

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वक्त सबसे अच्छा मित्र By Anand M Mishra

वक्त सब सिखा देता है। वक्त की मार जीवन में प्रायः हर किसी को लगती है। चाहे वे श्रीराम, श्रीकृष्ण, तुलसीदास, कालीदास या कोई और हों। जब वक्त की मार पडती है तो बड़े-बड़े धराशायी हो जा...

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दो यार और वो - दो यार By Mehul Pasaya

सुनो महेश तुम मेरे साथ आ सकते हो, मुझे थोडा काम है तुम्हराहा चलो चंदू वैसे भी मे अभी कुच भी काम नही कर रहा हू सो चल सकते हैओके तो चलो, वैसे हमे ना कही घुमने जाना है तो तुम तयार होह...

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सफलता का रहस्य By Krishna Kant Srivastava

एक नौजवान युवक ने अपने जीवन यापन हेतु बड़े उत्साह के साथ एक व्यापार की शुरुआत की, परंतु दुर्भाग्यवश कुछ ही समय में किसी बड़े घाटे की वजह से उसका व्यापार बंदी की कगार पर पहुंच गया।व्य...

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मनीराम तोता By Kamal Maheshwari

मनीराम तोते के पूरे परिवार को किसी शिकारी ने मार डाला था । जब शिकारी ने उसके पूरे परिवार की हत्या की थी , तब वह परिवार के लिए भोजन तलाश में गया था । आकर देखा तो उसकी पत्नी और दो छो...

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गुरू की सीख By Krishna Kant Srivastava

गुरु रामदास विद्यालय में हिंदी शिक्षक के रूप में कार्य करते थे। गुरु रामदास बड़े दिनों बाद आज शाम को घर लौटते वक़्त अपने दोस्त गोपाल जी से मिलने उसकी दुकान पर गए। गोपाल जी शहर में कप...

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राष्ट्रीय ध्वज के अभिकल्पक By Anand M Mishra

हर देश के लिए यह जरूरी है कि उसका एक झंडा हो, जिसके तले पूरा राष्ट्र एक हो जाए जो त्याग, शांति और एकता का प्रतीक हो। ऐसे में देश को एक सूत्र में बाँधने का कार्य हमारा राष्ट्रीय ध...

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जीवन की सच्ची पूंजी By Krishna Kant Srivastava

एक बार एक शक्तिशाली राजा दुष्यंत घने वन में शिकार खेल रहा थे। अचानक मौसम बिगड़ गया। आकाश में काले बादल छा गए और मूसलाधार वर्षा होने लगी। धीरे-धीरे सूर्य अस्त हो गया और घना अंधेरा छ...

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साला फटीचर By श्रुत कीर्ति अग्रवाल

साला फटीचर आज काम का बोझ बहुत ज्यादा था, आलोक को मानो साँस लेने की भी फुर्सत नहीं थी। ऐसे में जब पियून ने किसी विजय कुमार का कार्ड लाकर सामने रखा तो उसने मना ही कर दिया... एक तो...

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हंसना- गुण या दोष? By Anand M Mishra

हंसी के कई प्रकार होते हैं – अट्टहास, मुस्कुराना, खिलखिलाना, मंद मुस्कान आदि। सभी में मनोभाव अलग-अलग तरह के होते हैं। दांत निपोरकर हंसने वाली मुद्रा अलग होती है, वह एक प्रकार से शा...

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कृष्णा By Vijay Tiwari Kislay

कृष्णा कृष्णा था तो पिछड़े वर्ग से किंतु ईश्वर ने उसके दिमाग में बुद्धि कूट कूट कर भरी थी। वह जितना बुद्धिमान था उतना ही सहृदयी और परोपकारी भी था। धर्मपरायणता, सुसंस्का...

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आधार - 24 - भगवत कृपा, जीवन की दिव्य शक्ति है। By Krishna Kant Srivastava

भगवत कृपा, जीवन की दिव्य शक्ति है।कभी आप रास्ते में पड़े पत्थर से टकराकर लड़खड़ाते हैं फिर संभल जाते हैं और चोट खाने से बच जाते हैं। कभी आपके नजदीक से एक तेज रफ्तार कार गुजर जाती ह...

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पुस्तकों की दुनिया By Anand M Mishra

पुस्तकों का संसार! आज के डिजिटल युग से बिल्कुल अलग! पुस्तकें इतिहास, साहित्य, विज्ञान और सभ्यता की संवाहक हैं। दुनिया में परिवर्तन के इंजन हैं। दुनिया को देखने की खिड़कियां हैं।...

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बिनु पानी सब सून By श्रुत कीर्ति अग्रवाल

प्रिय दीदीचौंक गई न? तुमने तो कभी सोंचा तक नहीं होगा कि मैं तुम्हें पत्र लिखूँगी। पर एक बात शायद भूल गई तुम, या शायद जान-बूझ कर भुला दिया कि मैं सदा की स्वार्थी रही हूँ... आज भी मे...

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