hindi Best Motivational Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Motivational Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations a...Read More


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  • बड़े होकर क्या बनोगे?

    प्रार्थना खत्म होते ही स्कुल के सभी बच्चे अपने-अपने क्लास की तरफ भागे। वीना मैम...

  • गुरुदेव - 1

    गुरुदेव पार्ट -1 (एक परिचय)हमारी जिंदगी में कोई न कोई व्यक्ति हमें ऐसा अवश्य मिल...

  • उजाले की ओर----संस्मरण

    उजाले की ओर----संस्मरण ------------------------ नमस्कार स्नेही मित्रों...

बड़े होकर क्या बनोगे? By Shwet Kumar Sinha

प्रार्थना खत्म होते ही स्कुल के सभी बच्चे अपने-अपने क्लास की तरफ भागे। वीना मैम कक्षा वन की क्लास टीचर थी। अटेंडेंस रजिस्टर उठाकर वह भी क्लास की तरफ बढ गई। नवरात्रि का समय चल रहा थ...

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गुरुदेव - 1 By नन्दलाल सुथार राही

गुरुदेव पार्ट -1 (एक परिचय)हमारी जिंदगी में कोई न कोई व्यक्ति हमें ऐसा अवश्य मिलता ही है ,जिसको देखने से ही हमारे रोम-रोम में उत्साह और रोमांच भर जाता है। ऐसा ही एक व्यक्तित्व जिन्...

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मैं भी फौजी (देश प्रेम की अनोखी दास्तां) - 2 By Pooja Singh

मैं रूस्तम सेठ के साथ चला गया .....वहां मैं अपना काम पूरी लग्न और ईमानदारी से करता था ,यही बात रुस्तम सेठ को पसंद आती थी ,इसलिए मेरे भरोसे अपना काम छोड़कर कही भी चला जाता था ....--...

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उजाले की ओर----संस्मरण By Pranava Bharti

उजाले की ओर----संस्मरण ------------------------ नमस्कार स्नेही मित्रों ज़िंदगी की गलियों के अनुभव कुछ खट्टे,कुछ मीठे तो कुछ कड़वे भी ! लेकिन हर दिन नए अनुभव होते हैं और वे...

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भीतर से सचेत By Kanzariya Hardik

बुद्ध का एक शिष्य था। वह सन्यास लेकर नया-नया दीक्षित हुआ था। उसने बुद्ध से पूछा के मैं आज कहां भिक्षा माँगने जाऊं? बुद्ध ने कहा, मेरी एक श्राविका है, वहाँ चले जाना।शिष्य वहाँ गया।...

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वॉलेट   By Ratna Pandey

अपने बेटे नितिन की शादी के बाद राधा बहुत ही ख़ुश थी, एक बहुत बड़ी जवाबदारी जो निपट गई थी। उसने अपने पति से कहा, "गौरव कितनी प्यारी जोड़ी है ना हमारे नितिन और नेहा की।" "हाँ राधा तुम...

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यह कैसी विडम्बना है - (अंतिम भाग) By Ratna Pandey

“जी हाँ मैम, मैं इस कॉलेज में इसीलिए आई हूँ ताकि अपने निर्दोष पति को इंसाफ़ दिला सकूँ। यह सच की लड़ाई है मैम और मुझे पूरा विश्वास है कि आप भी सच का ही साथ देंगी। मैम इतने अच्छे लड़क...

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वो माँ By Naina Yadav

जिंदगी में कई गम मिलते हैं और खुशी भी मिलती है आज मैं उसी गम से हारी औरत की दास्तां बताने जा रही हूं |जिसे अपने आप से ज्यादा अपने परिवार की पड़ी रहती थी पर फिर भी उसके परिवार के...

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दूसरा मायका   By Ratna Pandey

संयुक्त परिवार में पली-बढ़ी लता बहुत ही संस्कारी थी।   सबकी चहेती थी वह, भगवान ने भी रंग रूप देने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। दादा-दादी, चाचा-चाची, ताऊ-ताई, छह बहन, पाँच भाई इतना बड...

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बापासदाराम -टोटाणा ता. कांकरेज By वात्सल्य

एक अद्भुत महात्मा : - "बापा सदाराम " गुजरात राज्य, बनासकांठा जिल्ला एवम कांकरेज तहसीलका जाने-माने एक "टोटाणा" (totana ) नामक छोटा गाँव है l जहाँ से नजदीक बनास नदी एवम "थरा"...

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नीतिशास्त्र की दुविधा By Anand M Mishra

नीतिशास्त्र की दुविधा मानव कभी-कभी दुविधा वाली स्थिति में फंस जाता है। मन कुछ सोच नहीं सकता है। नीतिशास्त्र सामने आ जाता है। ऐसे ही एक घटना का जिक्र करना आवश्यक है। विद्यालय में...

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आत्मसम्मान  By Ratna Pandey

रोज-रोज अपने आत्मसम्मान पर चोट सहन करती उर्मिला अपने मन में सोच रही थी कि आख़िर क्यों वह अपने आत्मसम्मान को प्रतिदिन तार-तार होने देती है? क्यों बात-बात पर ताने सुनती है? क्या इस प...

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मैं गांधारी नहीं By Ratna Pandey

सूरज ढल रहा था अंधेरा पसरने की तैयारी में था। गांव की वह लड़कियां इसी अंधेरे का ही इंतज़ार करती हैं, जिनके घरों में शौचालय नहीं होते। गांव की एक ऐसी ही लड़की हाथ में लोटा लेकर, सून...

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माँ मुझे माफ़ कर दो By Ratna Pandey

राजीव का घर दुल्हन की तरह सजा हुआ था रंग-बिरंगे फूलों से बने हार, रंगीन बल्बों की सीरीज, बेहद आकर्षक मंडप और कानों को प्रिय लगे ऐसा लाजवाब संगीत चल रहा था। कोई भी राह से गुजरने वाल...

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रक्षक By Kishanlal Sharma

सब कुत्ते मैदान में आकर इकठे हो गए थे।रोज शाम को ऑफिसर कॉलोनी के बंगलो के नौकर कुत्तो को लेकर इस मैदान में आ जाते।फिर वे अपने अपने कुत्तो को खुला छोड़ देते।कुत्ते इस मैदान में इकठे...

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मित्रता और पारिवारिक मामले By धृतराष्ट्र सुमन

जीवन में कभी कभी हम ऐसे फैसले दोस्ती में ले लेते हैं जो नहीं लेने चाहिए, जब तक आप किसी को अच्छे से नहीं जानते तब तक मात्र दोस्ती के नाम पर किसी के पारिवारिक मामलों में न पड़ें! इसी...

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बाज की सीख By Krishna Kant Srivastava

बाज की सीखएक समय की बात है, एक बहेलिया जंगल में पक्षियों का शिकार करने गया। बहेलिया ने दाना डाला और जाल बिछाकर पक्षियों के जाल में फंसने का इंतजार करने लगा। बहुत प्रयास करने के बाद...

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हम कैसे आगे बढे - भाग ५ - अंतिम भाग By Rajesh Maheshwari

३७. बाँसुरीवाला मुंबई षहर के पैडर रोड पर अपने मित्र के यहाँ जब भी मैं जाता तो प्रतिदिन सुबह 6 बजे के लगभग एक अंधा वहाँ से बाँसुरी बजाता हुआ निकलता था। व...

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छोटी बहू By Ratna Pandey

घनश्याम अपनी पत्नी शामली के साथ रहते थे। मध्यम वर्ग के घनश्याम के माता-पिता का दुर्घटना होने की वजह से देहांत हो गया था। उनकी पत्नी ने दो वर्ष पूर्व एक बेटे को जन्म दिया था, अब फिर...

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अमानवीयतासे नैतिकता की ओर By Varun Sharma

अमानवीयतासे नैतिकता की ओरCopyright © 2021 by Varun Sharmaकानपुर के एक कसबे में रेती नामक रोड पर नई सफेदी से चमकते हुए घर के आगे एक छोटा बगीचा था। जिसमे कुछ खुशबू बिखेरते फूल और सब्...

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विसर्जन - 5 - अंतिम भाग By Sarvesh Saxena

यह कहते हुए टीटू जोर जोर से रोने लगा और सब उनकी बात से हैरान थे सब को ऐसा लग रहा था जैसे सब ने एक बड़ा पाप किया है तभी पुलिस वाले ने माइक को अपने हाथों में लेकर कहा “ हम सब लोग झूठ...

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एक राज़ By Ratna Pandey

राम सिंह अपने माता-पिता के साथ अपने छोटे से घर में बहुत ख़ुश था। उसके पिता रघुवीर सिंह हमेशा बीमार रहते थे इसलिए उन्होंने राम सिंह की नौकरी लगते ही अपनी नौकरी छोड़ दी। उसकी माँ घर का...

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एक पिता का निर्णय By Saroj Prajapati

संजय ऑफिस से आया तो घर में सन्नाटा पसरा हुआ था। उसकी मां माथा पकड़े बैठी थी तो पत्नी माला ‌ सुबक रही थी। संजय उन दोनों का यह हाल देख घबरा गया और मां से बोला "सब ठीक है ना! क्या हुआ...

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आख़िर वह कौन था By Ratna Pandey

सोलह वर्ष की हँसती-खेलती सुशीला गुमसुम-सी बहुत उदास रहने लगी थी। कुछ दिनों पहले उसकी माँ इमारत पर काम करते समय, गिरकर स्वर्ग सिधार गई थी। पिता तो पहले ही स्वर्ग सिधार चुके थे। अब उ...

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प्रेरणा पथ - भाग 6 - अंतिम भाग By Rajesh Maheshwari

41 पागल कौन एक अर्द्धविक्षिप्त वृद्ध महिला मैले कुचैले कपड़े पहने किसी तरह अपने शरीर को ढके हुये सड़क पर जा रही थी। उसे देखकर बच्चे पागल पागल कहकर उसे...

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बड़े होकर क्या बनोगे? By Shwet Kumar Sinha

प्रार्थना खत्म होते ही स्कुल के सभी बच्चे अपने-अपने क्लास की तरफ भागे। वीना मैम कक्षा वन की क्लास टीचर थी। अटेंडेंस रजिस्टर उठाकर वह भी क्लास की तरफ बढ गई। नवरात्रि का समय चल रहा थ...

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गुरुदेव - 1 By नन्दलाल सुथार राही

गुरुदेव पार्ट -1 (एक परिचय)हमारी जिंदगी में कोई न कोई व्यक्ति हमें ऐसा अवश्य मिलता ही है ,जिसको देखने से ही हमारे रोम-रोम में उत्साह और रोमांच भर जाता है। ऐसा ही एक व्यक्तित्व जिन्...

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मैं भी फौजी (देश प्रेम की अनोखी दास्तां) - 2 By Pooja Singh

मैं रूस्तम सेठ के साथ चला गया .....वहां मैं अपना काम पूरी लग्न और ईमानदारी से करता था ,यही बात रुस्तम सेठ को पसंद आती थी ,इसलिए मेरे भरोसे अपना काम छोड़कर कही भी चला जाता था ....--...

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उजाले की ओर----संस्मरण By Pranava Bharti

उजाले की ओर----संस्मरण ------------------------ नमस्कार स्नेही मित्रों ज़िंदगी की गलियों के अनुभव कुछ खट्टे,कुछ मीठे तो कुछ कड़वे भी ! लेकिन हर दिन नए अनुभव होते हैं और वे...

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भीतर से सचेत By Kanzariya Hardik

बुद्ध का एक शिष्य था। वह सन्यास लेकर नया-नया दीक्षित हुआ था। उसने बुद्ध से पूछा के मैं आज कहां भिक्षा माँगने जाऊं? बुद्ध ने कहा, मेरी एक श्राविका है, वहाँ चले जाना।शिष्य वहाँ गया।...

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वॉलेट   By Ratna Pandey

अपने बेटे नितिन की शादी के बाद राधा बहुत ही ख़ुश थी, एक बहुत बड़ी जवाबदारी जो निपट गई थी। उसने अपने पति से कहा, "गौरव कितनी प्यारी जोड़ी है ना हमारे नितिन और नेहा की।" "हाँ राधा तुम...

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यह कैसी विडम्बना है - (अंतिम भाग) By Ratna Pandey

“जी हाँ मैम, मैं इस कॉलेज में इसीलिए आई हूँ ताकि अपने निर्दोष पति को इंसाफ़ दिला सकूँ। यह सच की लड़ाई है मैम और मुझे पूरा विश्वास है कि आप भी सच का ही साथ देंगी। मैम इतने अच्छे लड़क...

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वो माँ By Naina Yadav

जिंदगी में कई गम मिलते हैं और खुशी भी मिलती है आज मैं उसी गम से हारी औरत की दास्तां बताने जा रही हूं |जिसे अपने आप से ज्यादा अपने परिवार की पड़ी रहती थी पर फिर भी उसके परिवार के...

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दूसरा मायका   By Ratna Pandey

संयुक्त परिवार में पली-बढ़ी लता बहुत ही संस्कारी थी।   सबकी चहेती थी वह, भगवान ने भी रंग रूप देने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। दादा-दादी, चाचा-चाची, ताऊ-ताई, छह बहन, पाँच भाई इतना बड...

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बापासदाराम -टोटाणा ता. कांकरेज By वात्सल्य

एक अद्भुत महात्मा : - "बापा सदाराम " गुजरात राज्य, बनासकांठा जिल्ला एवम कांकरेज तहसीलका जाने-माने एक "टोटाणा" (totana ) नामक छोटा गाँव है l जहाँ से नजदीक बनास नदी एवम "थरा"...

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नीतिशास्त्र की दुविधा By Anand M Mishra

नीतिशास्त्र की दुविधा मानव कभी-कभी दुविधा वाली स्थिति में फंस जाता है। मन कुछ सोच नहीं सकता है। नीतिशास्त्र सामने आ जाता है। ऐसे ही एक घटना का जिक्र करना आवश्यक है। विद्यालय में...

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आत्मसम्मान  By Ratna Pandey

रोज-रोज अपने आत्मसम्मान पर चोट सहन करती उर्मिला अपने मन में सोच रही थी कि आख़िर क्यों वह अपने आत्मसम्मान को प्रतिदिन तार-तार होने देती है? क्यों बात-बात पर ताने सुनती है? क्या इस प...

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मैं गांधारी नहीं By Ratna Pandey

सूरज ढल रहा था अंधेरा पसरने की तैयारी में था। गांव की वह लड़कियां इसी अंधेरे का ही इंतज़ार करती हैं, जिनके घरों में शौचालय नहीं होते। गांव की एक ऐसी ही लड़की हाथ में लोटा लेकर, सून...

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माँ मुझे माफ़ कर दो By Ratna Pandey

राजीव का घर दुल्हन की तरह सजा हुआ था रंग-बिरंगे फूलों से बने हार, रंगीन बल्बों की सीरीज, बेहद आकर्षक मंडप और कानों को प्रिय लगे ऐसा लाजवाब संगीत चल रहा था। कोई भी राह से गुजरने वाल...

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रक्षक By Kishanlal Sharma

सब कुत्ते मैदान में आकर इकठे हो गए थे।रोज शाम को ऑफिसर कॉलोनी के बंगलो के नौकर कुत्तो को लेकर इस मैदान में आ जाते।फिर वे अपने अपने कुत्तो को खुला छोड़ देते।कुत्ते इस मैदान में इकठे...

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मित्रता और पारिवारिक मामले By धृतराष्ट्र सुमन

जीवन में कभी कभी हम ऐसे फैसले दोस्ती में ले लेते हैं जो नहीं लेने चाहिए, जब तक आप किसी को अच्छे से नहीं जानते तब तक मात्र दोस्ती के नाम पर किसी के पारिवारिक मामलों में न पड़ें! इसी...

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बाज की सीख By Krishna Kant Srivastava

बाज की सीखएक समय की बात है, एक बहेलिया जंगल में पक्षियों का शिकार करने गया। बहेलिया ने दाना डाला और जाल बिछाकर पक्षियों के जाल में फंसने का इंतजार करने लगा। बहुत प्रयास करने के बाद...

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हम कैसे आगे बढे - भाग ५ - अंतिम भाग By Rajesh Maheshwari

३७. बाँसुरीवाला मुंबई षहर के पैडर रोड पर अपने मित्र के यहाँ जब भी मैं जाता तो प्रतिदिन सुबह 6 बजे के लगभग एक अंधा वहाँ से बाँसुरी बजाता हुआ निकलता था। व...

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छोटी बहू By Ratna Pandey

घनश्याम अपनी पत्नी शामली के साथ रहते थे। मध्यम वर्ग के घनश्याम के माता-पिता का दुर्घटना होने की वजह से देहांत हो गया था। उनकी पत्नी ने दो वर्ष पूर्व एक बेटे को जन्म दिया था, अब फिर...

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अमानवीयतासे नैतिकता की ओर By Varun Sharma

अमानवीयतासे नैतिकता की ओरCopyright © 2021 by Varun Sharmaकानपुर के एक कसबे में रेती नामक रोड पर नई सफेदी से चमकते हुए घर के आगे एक छोटा बगीचा था। जिसमे कुछ खुशबू बिखेरते फूल और सब्...

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विसर्जन - 5 - अंतिम भाग By Sarvesh Saxena

यह कहते हुए टीटू जोर जोर से रोने लगा और सब उनकी बात से हैरान थे सब को ऐसा लग रहा था जैसे सब ने एक बड़ा पाप किया है तभी पुलिस वाले ने माइक को अपने हाथों में लेकर कहा “ हम सब लोग झूठ...

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एक राज़ By Ratna Pandey

राम सिंह अपने माता-पिता के साथ अपने छोटे से घर में बहुत ख़ुश था। उसके पिता रघुवीर सिंह हमेशा बीमार रहते थे इसलिए उन्होंने राम सिंह की नौकरी लगते ही अपनी नौकरी छोड़ दी। उसकी माँ घर का...

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एक पिता का निर्णय By Saroj Prajapati

संजय ऑफिस से आया तो घर में सन्नाटा पसरा हुआ था। उसकी मां माथा पकड़े बैठी थी तो पत्नी माला ‌ सुबक रही थी। संजय उन दोनों का यह हाल देख घबरा गया और मां से बोला "सब ठीक है ना! क्या हुआ...

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आख़िर वह कौन था By Ratna Pandey

सोलह वर्ष की हँसती-खेलती सुशीला गुमसुम-सी बहुत उदास रहने लगी थी। कुछ दिनों पहले उसकी माँ इमारत पर काम करते समय, गिरकर स्वर्ग सिधार गई थी। पिता तो पहले ही स्वर्ग सिधार चुके थे। अब उ...

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प्रेरणा पथ - भाग 6 - अंतिम भाग By Rajesh Maheshwari

41 पागल कौन एक अर्द्धविक्षिप्त वृद्ध महिला मैले कुचैले कपड़े पहने किसी तरह अपने शरीर को ढके हुये सड़क पर जा रही थी। उसे देखकर बच्चे पागल पागल कहकर उसे...

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