hindi Best Moral Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


Languages
Categories
Featured Books
  • SYSTEM

    कहानी सिस्‍टम -आर.एन.सुनगरिया सत्रह स...

  • लॉकडॉउन और अधूरे सपने

    बबलू जो म.प्र. के उज्जैन के शिप्रा नदी के किनारे बसे एक छोटे से गांव का आठ साल क...

  • फौजी

    कहानी फौजी डॉ. हंसा दीप भारत में बगैर आरक्षण के रेल में सफर करने की चुनौती को...

बटुआ By Rajni Gosain

सोमनाथ जी को कार्यालय से घर आए हुए आधा घंटा हो चुका था! आज वह हाथ मुँह धोकर, कपडे बदलकर अन्य दिनों की तरह बैठक में नहीं बैठे थे बल्कि अपने शयनकक्ष में पलंग पर पीठ टिकाकर बैठे थे! उ...

Read Free

SYSTEM By Ramnarayan Sungariya

कहानी सिस्‍टम -आर.एन.सुनगरिया सत्रह साल बाद। मोटे कॉंच के द्वार को पुश करता हुआ बैंक में प्रवेश करता हूँ, तो ऑंखें चौंधिया जाती...

Read Free

फिर मिलेंगे... कहानी - एक महामारी से लॉक डाउन तक - 14 By Sarvesh Saxena

लॉक डाउन की आखिरी सुबह..... ध्रुव - “मम्मी.. मम्मी.., नानी.. नाना.. जल्दी ऊपर आओ, जल्दी ऊपर आओ..” |ध्रुव की इस पुकार से सब घबरा गये और छत पर इकट्ठा हो गये | पड़ोसी भी अपनी-अपनी छत...

Read Free

लॉकडॉउन और अधूरे सपने By Pragya Chandna

बबलू जो म.प्र. के उज्जैन के शिप्रा नदी के किनारे बसे एक छोटे से गांव का आठ साल का मासूम बच्चा है, वह गांव के ही सरकारी स्कूल में पढ़ता है। उसे पढ़ने का बहुत शौक है पर उसके पिता की...

Read Free

फौजी By Hansa Deep

कहानी फौजी डॉ. हंसा दीप भारत में बगैर आरक्षण के रेल में सफर करने की चुनौती को हम मध्यवर्गीय लोग कतई स्वीकार नहीं करते, बशर्ते, हालात् मजबूर न कर दें। ऐसी ही यात्रा करनी थी हमें व...

Read Free

मन की बात - 1 - वहां आकाश और है........ By Kusum Agarwal

अचानक से शुरू हुई रिमझिम ने मौसम खुशगवार कर दिया था। मानसी ने एक नजर खिड़की के बाहर डाली। पेड़ -पौधों पर झर-झर गिरता पानी एक कुदरती फव्वारे सा हर पेड़-पौधे को नहला कर उसका रूप संवा...

Read Free

सामाजिक आलेख - खाने की बर्बादी मतलब फिजूल खर्च और प्रदूषण By S Sinha

सामाजिक आलेख - खाने की बर्बादी मतलब फिजूल खर्च और प्रदूषण देखा गया है कि आजकल मध्यम वर्ग के लोगों की आमदनी भी ब...

Read Free

हैवानियत By Sunita Agarwal

सुबह से में जल्दी जल्दी घर के काम काज निबटा रही थी।सुबह को कितने सारे काम होते हैं।बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करना बच्चों और पति सोमेश के लिये नाश्ता और टिफिन बनाना बगैरह बगैरह।स...

Read Free

दादी की स्वर्ग यात्रा By Vijay Singh Tyagi

दादी की स्वर्ग यात्रा अक्सर दादी हमें अपनी जवानी की पारिवारिक स्थिति के बारे में बताती रहती थीं । दादी बताती थी कि जब उनकी शादी हुई थी , तब दादी घर में अकेली औरत थी । उनकी सास...

Read Free

कुरुक्षेत्र By RAVI LAITU

कुरुक्षेत्र तूलिका की वजह से आज एक और प्रैस्टीजियस एसाइनमेंट मेरे हाथ लगा था और इस समय ओरिएन्टल एक्सपोर्ट हाउस से निकलकर अपने व...

Read Free

उम्मीद. By Vandana Gupta

उम्मीद क्या सबके साथ ही ऐसा होता है ? जब धडकनों के स्पंदन चुगली करने लगते हों, आँखें हर पल बेचैन सी कुछ खोजती हों, लबों पर आकर हर बात दम तोड़ देती हो और नींद तो जैसे जन्मों की दुश्म...

Read Free

अलभ्य By Avadhesh Preet Patna

अलभ्य जिस वक्त मैं ट्रेन से उतरकर प्लेटफाॅर्म पर आया, सुबह के चार बजकर सत्रह मिनट हो रहे थे। घड़ी मेरी कलाई पर बंधीं थी, लेकिन समय का भान प्लेटफाॅर्म पर उतरते ही रेलवे स्टेशन की उस...

Read Free

राम रचि राखा - 1 - 6 By Pratap Narayan Singh

राम रचि राखा अपराजिता (6) अक्टूबर आधा बीत चुका था। रात में हवाएँ शीतल होने लगी थीं। बरसात की उमस पूरी तरह ख़त्म हो चुकी थी। अनुराग से मिले लगभग साढ़े तीन महीने हो चुके थे। इस बीच ह...

Read Free

केसरिया बालम - 10 By Hansa Deep

केसरिया बालम डॉ. हंसा दीप 10 रुख बदलती हवाएँ नन्हीं किलकारियों में खोते हुए धानी को कुछ तो ऐसा महसूस होता जो सामान्य नहीं था, कुछ था जो पीछे छूटता नज़र आता। शायद वह बाली का प्यार थ...

Read Free

आधी दुनिया का पूरा सच - 17 By Dr kavita Tyagi

आधी दुनिया का पूरा सच (उपन्यास) 17. अगले दिन उसने समय पर बिस्तर छोड़ दिया और नित्य कर्मों से निवृत्त होकर मन्दिर की सफाई में पुजारी जी का हाथ बँटाने लगी। पुजारी जी ने देखा कि रानी...

Read Free

हंस अकेला रोया By Siniwali Sharma

हंस अकेला रोया अचानक लाश जलने की बदबू विपिन को आने लगी। मुड़कर चारों तरफ देखा। दूर-दूर तक कहीं कोई नहीं था। भोर होने को थी। घास पर ओस की बूंदें बिखरी थीं। ये बूंदें उसकी आँखों में...

Read Free

खारा पानी By Asha Pandey Author

खारा पानी लड़का आज ही इस घर में आया है, नौकरी करने। मगरी, जिसके साथ वह आया है, लडके के गाँव का है। वह पिछले कई सालों से इस घर में नौकर है। उसी ने मालकिन से लड़के की पैरवी की है। लड़का...

Read Free

गवाक्ष - 6 By Pranava Bharti

गवाक्ष 6= वे बात करते-करते जैसे बार-बार अपने वर्तमान से भूत में प्रवेश कर जाते थे । अपने क्षेत्र में प्रवेशकर उन्होंने राजनीति की वास्तविकता को समझा था । समाज के लिए कुछ व्यवहा...

Read Free

सॉफ्ट-कोर्नर By Ram Nagina Maurya

सॉफ्ट-कोर्नर ‘‘इधर बीच मेरे कमरे में कोई आया था क्या?’’ ‘‘क्यों?’’ ‘‘दो दिनों के लिए मैं टूर पर बाहर क्या गया, तुम लोगों ने मेरी आलमारी, उसमें रखी चीजों, किताबों आदि को ही उथल-पुथल...

Read Free

समंदर और सफेद गुलाब - 2 - 3 By Ajay Sharma

समंदर और सफेद गुलाब 3 वह कल शाम से लगातार यही डायलॉग बोल रहा था। न जाने मैं कितनी बार सुन चुका था। मुझे लग रहा था कि सुनते-सुनते मेरे कान पक गए हैं। अभी मैं सोच ही रहा था कि निर्मा...

Read Free

उर्वशी - 9 By Jyotsana Kapil

उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 9 वह सम्मोहित होकर उसे आपादमस्तक देखता रहा। कपोल पर छाई एक लट, साँसों का उठता गिरता स्पंदन। शौर्य की धड़कनों का शोर बढ़ता जा रहा था। उसकी देह से उठती मदिर...

Read Free

आधा आदमी - 21 By Rajesh Malik

आधा आदमी अध्‍याय-21 ‘‘मैं तो यहीं कहूँगा माई, कि समाज के हर तबके को चाहिए वह आप लोगों के हक में आवाज उठाये.‘‘ ‘‘अरे छोड़ों बेटा! अब हम तुमसे क्या बताये, हम लोग तो इतने अभागे हैं कि...

Read Free

महामाया - 27 By Sunil Chaturvedi

महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – सत्ताईस अनुराधा के आश्रम लौट आने से अखिल सबसे ज्यादा खुश था। अनुराधा ने ही उसे बताया था कि बाबाजी ने उसकी नौकरी छुड़वा दी है और यहीं उसके लिये एक नर...

Read Free

होने से न होने तक - 42 By Sumati Saxena Lal

होने से न होने तक 42. शनिवार के लिए पूरे स्टाफ के साथ मैनेजमैंण्ट की मीटिंग का नोटिस मिला था। इस बार मीटिंग डिग्री कालेज के हॉल में नही, समीति के कक्ष में रखी गयी थी। नोटिस देख कर...

Read Free

भुइंधर का मोबाइल - 4 - अंतिम भाग By Pradeep Shrivastava

भुइंधर का मोबाइल - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 4 अंततः मुझे कमरे के अंदर झांकने का रास्ता नजर आ गया। मैंने खाने वाली मेज के पास लगी कुर्सियों में से एक खींच कर उस खिड़की के पास लगाई जिसके...

Read Free

छिनाल By Kumar Gourav

टोले के बीचोंबीच था उसका घर । उसका घर मतलब छिनाल का घर । खौफ इतना कि नई पीढ़ी ने उसका चेहरा तक न देखा था । कहते हैं पहले ये रामनाथ मिश्र का मकान था और ये उनकी पतोहु थी । इसके बाप न...

Read Free

लोकल के लिए वोकल बनना By Sarvesh Singh

हमे हमारे देश को आत्मनिर्भर बंनाने के लिए सबसे पहले हमे खुद से अपने देश के लिए बहुत अच्छी और सकारात्मक सोच रखनी पड़ेगी और साथ ही साथ हमे हमारे आज पास की दुकान छोटी छोटी चीजों को अधि...

Read Free

महाराष्ट्र एयरलाइन्स टेकिंग ऑफ By Anirudh Deshpande

महाराष्ट्र एयरलाइन्स टेकिंग ऑफ (यह कहानी ‘बाबा कभी नहीं लौटे’ नाम से जनसत्ता, दिसंबर, २०१३, में छपी थी) अनिरुद्ध देशपांडे “यंग मैन व्हाट इस योर नेम ?” ऊंचे भारी स्वर और क्लिष्ट अंग...

Read Free

बेवकूफ By Vandana Bajpai

बेवकूफ लखपत राय चाचा जी के घर हमारा पुराना आना-जाना रहा है | लखपतराय जी मेरे पिता के मित्र थे | बचपन से उनको देखा है, बहुत उसूल वाले आदमी थे | पिताजी अक्सर उनकी प्रशंसा किया करते थ...

Read Free

जननम - 8 By S Bhagyam Sharma

जननम अध्याय 8 "आपके रहने से इस गांव को कैसा कष्ट ? मैं बार-बार कहता हूं लावण्या....! मरगथम, आज यहां कौन आया था ?" "वह शोक्कलिंगम साहब आए थे।" आनंद का चेहरा एकदम लाल हो गया। 'दी...

Read Free

रण-नाद By Deepak sharma

रण-नाद प्रधानाध्यापिका की अपनी पहली नियुक्ति के अन्तर्गत जब मुझे दूर का कस्बापुर मिला तो मैं घबरा गयी। अभी तक के अपने छत्तीस वर्ष मैंने अपने मार्गदर्शक, वकील पिता और स्नेही, एहतिया...

Read Free

नशा। By Arjuna Bunty

प्रिय पाठकों, हम इंसानों की एक बहुत ही खास आदत होती है, सच पूछिए तो हमें हर चीज की पहले पहल बुराई दिखती है, अच्छाई हमें दिखती ही नहीं या हम उसे देखना नहीं चाहते हैं , उसे हमें जबरद...

Read Free

कटघरे में खड़े रिश्ते By Sudha Adesh

कटघरे में खड़े रिश्ते माँ एक हफ्ते से आई.सी.यू. में भर्ती हैं । उन्हें सीवियर हार्ट अटैक हुआ था । इलाज चल रहा है पर अभी भी वे खतरे से बाहर नहीं हैं । उन्हें झपकी लेते देखकर विशाल ने...

Read Free

बडी प्रतिमा - 10 - अंतिम भाग By Sudha Trivedi

बडी प्रतिमा (10.) अगली शाम विभा पिछवाडे की नल पर बैठी कपडे धो रही थी। उसी समय गीतू बागीचों की ओर जाती दिखी। फजली सर या किसी ने भी किसी को यह नहीं बताया था कि असली चोर पकडा गया है।...

Read Free

आँखों देखा हाल - क्रिकेट By Siniwali Sharma

आँखों देखा हाल क्रिकेट आइये चलते हैं ३२- ३३ साल पहले जब भारत के गांवों में क्रिकेट अपनी पैठ बना रहा था। ठीक उसी समय कपिल देव की अगुआई में भारत ने क्रिकेट का विश्व कप जीता था। इस जी...

Read Free

अपनों के बीच By Asha Pandey Author

अपनों के बीच गर्मी में झुलसता मई का महीना। जीवन-मरण के बीच झूलती अम्मा । सबको खबर कर दी गई थी कि अम्मा अब नहीं बचेंगी। ये शायद उनकी अन्तिम बीमारी होगी। बेटे एवं बहू सभी अलग-अलग शहर...

Read Free

बटुआ By Rajni Gosain

सोमनाथ जी को कार्यालय से घर आए हुए आधा घंटा हो चुका था! आज वह हाथ मुँह धोकर, कपडे बदलकर अन्य दिनों की तरह बैठक में नहीं बैठे थे बल्कि अपने शयनकक्ष में पलंग पर पीठ टिकाकर बैठे थे! उ...

Read Free

SYSTEM By Ramnarayan Sungariya

कहानी सिस्‍टम -आर.एन.सुनगरिया सत्रह साल बाद। मोटे कॉंच के द्वार को पुश करता हुआ बैंक में प्रवेश करता हूँ, तो ऑंखें चौंधिया जाती...

Read Free

फिर मिलेंगे... कहानी - एक महामारी से लॉक डाउन तक - 14 By Sarvesh Saxena

लॉक डाउन की आखिरी सुबह..... ध्रुव - “मम्मी.. मम्मी.., नानी.. नाना.. जल्दी ऊपर आओ, जल्दी ऊपर आओ..” |ध्रुव की इस पुकार से सब घबरा गये और छत पर इकट्ठा हो गये | पड़ोसी भी अपनी-अपनी छत...

Read Free

लॉकडॉउन और अधूरे सपने By Pragya Chandna

बबलू जो म.प्र. के उज्जैन के शिप्रा नदी के किनारे बसे एक छोटे से गांव का आठ साल का मासूम बच्चा है, वह गांव के ही सरकारी स्कूल में पढ़ता है। उसे पढ़ने का बहुत शौक है पर उसके पिता की...

Read Free

फौजी By Hansa Deep

कहानी फौजी डॉ. हंसा दीप भारत में बगैर आरक्षण के रेल में सफर करने की चुनौती को हम मध्यवर्गीय लोग कतई स्वीकार नहीं करते, बशर्ते, हालात् मजबूर न कर दें। ऐसी ही यात्रा करनी थी हमें व...

Read Free

मन की बात - 1 - वहां आकाश और है........ By Kusum Agarwal

अचानक से शुरू हुई रिमझिम ने मौसम खुशगवार कर दिया था। मानसी ने एक नजर खिड़की के बाहर डाली। पेड़ -पौधों पर झर-झर गिरता पानी एक कुदरती फव्वारे सा हर पेड़-पौधे को नहला कर उसका रूप संवा...

Read Free

सामाजिक आलेख - खाने की बर्बादी मतलब फिजूल खर्च और प्रदूषण By S Sinha

सामाजिक आलेख - खाने की बर्बादी मतलब फिजूल खर्च और प्रदूषण देखा गया है कि आजकल मध्यम वर्ग के लोगों की आमदनी भी ब...

Read Free

हैवानियत By Sunita Agarwal

सुबह से में जल्दी जल्दी घर के काम काज निबटा रही थी।सुबह को कितने सारे काम होते हैं।बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करना बच्चों और पति सोमेश के लिये नाश्ता और टिफिन बनाना बगैरह बगैरह।स...

Read Free

दादी की स्वर्ग यात्रा By Vijay Singh Tyagi

दादी की स्वर्ग यात्रा अक्सर दादी हमें अपनी जवानी की पारिवारिक स्थिति के बारे में बताती रहती थीं । दादी बताती थी कि जब उनकी शादी हुई थी , तब दादी घर में अकेली औरत थी । उनकी सास...

Read Free

कुरुक्षेत्र By RAVI LAITU

कुरुक्षेत्र तूलिका की वजह से आज एक और प्रैस्टीजियस एसाइनमेंट मेरे हाथ लगा था और इस समय ओरिएन्टल एक्सपोर्ट हाउस से निकलकर अपने व...

Read Free

उम्मीद. By Vandana Gupta

उम्मीद क्या सबके साथ ही ऐसा होता है ? जब धडकनों के स्पंदन चुगली करने लगते हों, आँखें हर पल बेचैन सी कुछ खोजती हों, लबों पर आकर हर बात दम तोड़ देती हो और नींद तो जैसे जन्मों की दुश्म...

Read Free

अलभ्य By Avadhesh Preet Patna

अलभ्य जिस वक्त मैं ट्रेन से उतरकर प्लेटफाॅर्म पर आया, सुबह के चार बजकर सत्रह मिनट हो रहे थे। घड़ी मेरी कलाई पर बंधीं थी, लेकिन समय का भान प्लेटफाॅर्म पर उतरते ही रेलवे स्टेशन की उस...

Read Free

राम रचि राखा - 1 - 6 By Pratap Narayan Singh

राम रचि राखा अपराजिता (6) अक्टूबर आधा बीत चुका था। रात में हवाएँ शीतल होने लगी थीं। बरसात की उमस पूरी तरह ख़त्म हो चुकी थी। अनुराग से मिले लगभग साढ़े तीन महीने हो चुके थे। इस बीच ह...

Read Free

केसरिया बालम - 10 By Hansa Deep

केसरिया बालम डॉ. हंसा दीप 10 रुख बदलती हवाएँ नन्हीं किलकारियों में खोते हुए धानी को कुछ तो ऐसा महसूस होता जो सामान्य नहीं था, कुछ था जो पीछे छूटता नज़र आता। शायद वह बाली का प्यार थ...

Read Free

आधी दुनिया का पूरा सच - 17 By Dr kavita Tyagi

आधी दुनिया का पूरा सच (उपन्यास) 17. अगले दिन उसने समय पर बिस्तर छोड़ दिया और नित्य कर्मों से निवृत्त होकर मन्दिर की सफाई में पुजारी जी का हाथ बँटाने लगी। पुजारी जी ने देखा कि रानी...

Read Free

हंस अकेला रोया By Siniwali Sharma

हंस अकेला रोया अचानक लाश जलने की बदबू विपिन को आने लगी। मुड़कर चारों तरफ देखा। दूर-दूर तक कहीं कोई नहीं था। भोर होने को थी। घास पर ओस की बूंदें बिखरी थीं। ये बूंदें उसकी आँखों में...

Read Free

खारा पानी By Asha Pandey Author

खारा पानी लड़का आज ही इस घर में आया है, नौकरी करने। मगरी, जिसके साथ वह आया है, लडके के गाँव का है। वह पिछले कई सालों से इस घर में नौकर है। उसी ने मालकिन से लड़के की पैरवी की है। लड़का...

Read Free

गवाक्ष - 6 By Pranava Bharti

गवाक्ष 6= वे बात करते-करते जैसे बार-बार अपने वर्तमान से भूत में प्रवेश कर जाते थे । अपने क्षेत्र में प्रवेशकर उन्होंने राजनीति की वास्तविकता को समझा था । समाज के लिए कुछ व्यवहा...

Read Free

सॉफ्ट-कोर्नर By Ram Nagina Maurya

सॉफ्ट-कोर्नर ‘‘इधर बीच मेरे कमरे में कोई आया था क्या?’’ ‘‘क्यों?’’ ‘‘दो दिनों के लिए मैं टूर पर बाहर क्या गया, तुम लोगों ने मेरी आलमारी, उसमें रखी चीजों, किताबों आदि को ही उथल-पुथल...

Read Free

समंदर और सफेद गुलाब - 2 - 3 By Ajay Sharma

समंदर और सफेद गुलाब 3 वह कल शाम से लगातार यही डायलॉग बोल रहा था। न जाने मैं कितनी बार सुन चुका था। मुझे लग रहा था कि सुनते-सुनते मेरे कान पक गए हैं। अभी मैं सोच ही रहा था कि निर्मा...

Read Free

उर्वशी - 9 By Jyotsana Kapil

उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 9 वह सम्मोहित होकर उसे आपादमस्तक देखता रहा। कपोल पर छाई एक लट, साँसों का उठता गिरता स्पंदन। शौर्य की धड़कनों का शोर बढ़ता जा रहा था। उसकी देह से उठती मदिर...

Read Free

आधा आदमी - 21 By Rajesh Malik

आधा आदमी अध्‍याय-21 ‘‘मैं तो यहीं कहूँगा माई, कि समाज के हर तबके को चाहिए वह आप लोगों के हक में आवाज उठाये.‘‘ ‘‘अरे छोड़ों बेटा! अब हम तुमसे क्या बताये, हम लोग तो इतने अभागे हैं कि...

Read Free

महामाया - 27 By Sunil Chaturvedi

महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – सत्ताईस अनुराधा के आश्रम लौट आने से अखिल सबसे ज्यादा खुश था। अनुराधा ने ही उसे बताया था कि बाबाजी ने उसकी नौकरी छुड़वा दी है और यहीं उसके लिये एक नर...

Read Free

होने से न होने तक - 42 By Sumati Saxena Lal

होने से न होने तक 42. शनिवार के लिए पूरे स्टाफ के साथ मैनेजमैंण्ट की मीटिंग का नोटिस मिला था। इस बार मीटिंग डिग्री कालेज के हॉल में नही, समीति के कक्ष में रखी गयी थी। नोटिस देख कर...

Read Free

भुइंधर का मोबाइल - 4 - अंतिम भाग By Pradeep Shrivastava

भुइंधर का मोबाइल - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 4 अंततः मुझे कमरे के अंदर झांकने का रास्ता नजर आ गया। मैंने खाने वाली मेज के पास लगी कुर्सियों में से एक खींच कर उस खिड़की के पास लगाई जिसके...

Read Free

छिनाल By Kumar Gourav

टोले के बीचोंबीच था उसका घर । उसका घर मतलब छिनाल का घर । खौफ इतना कि नई पीढ़ी ने उसका चेहरा तक न देखा था । कहते हैं पहले ये रामनाथ मिश्र का मकान था और ये उनकी पतोहु थी । इसके बाप न...

Read Free

लोकल के लिए वोकल बनना By Sarvesh Singh

हमे हमारे देश को आत्मनिर्भर बंनाने के लिए सबसे पहले हमे खुद से अपने देश के लिए बहुत अच्छी और सकारात्मक सोच रखनी पड़ेगी और साथ ही साथ हमे हमारे आज पास की दुकान छोटी छोटी चीजों को अधि...

Read Free

महाराष्ट्र एयरलाइन्स टेकिंग ऑफ By Anirudh Deshpande

महाराष्ट्र एयरलाइन्स टेकिंग ऑफ (यह कहानी ‘बाबा कभी नहीं लौटे’ नाम से जनसत्ता, दिसंबर, २०१३, में छपी थी) अनिरुद्ध देशपांडे “यंग मैन व्हाट इस योर नेम ?” ऊंचे भारी स्वर और क्लिष्ट अंग...

Read Free

बेवकूफ By Vandana Bajpai

बेवकूफ लखपत राय चाचा जी के घर हमारा पुराना आना-जाना रहा है | लखपतराय जी मेरे पिता के मित्र थे | बचपन से उनको देखा है, बहुत उसूल वाले आदमी थे | पिताजी अक्सर उनकी प्रशंसा किया करते थ...

Read Free

जननम - 8 By S Bhagyam Sharma

जननम अध्याय 8 "आपके रहने से इस गांव को कैसा कष्ट ? मैं बार-बार कहता हूं लावण्या....! मरगथम, आज यहां कौन आया था ?" "वह शोक्कलिंगम साहब आए थे।" आनंद का चेहरा एकदम लाल हो गया। 'दी...

Read Free

रण-नाद By Deepak sharma

रण-नाद प्रधानाध्यापिका की अपनी पहली नियुक्ति के अन्तर्गत जब मुझे दूर का कस्बापुर मिला तो मैं घबरा गयी। अभी तक के अपने छत्तीस वर्ष मैंने अपने मार्गदर्शक, वकील पिता और स्नेही, एहतिया...

Read Free

नशा। By Arjuna Bunty

प्रिय पाठकों, हम इंसानों की एक बहुत ही खास आदत होती है, सच पूछिए तो हमें हर चीज की पहले पहल बुराई दिखती है, अच्छाई हमें दिखती ही नहीं या हम उसे देखना नहीं चाहते हैं , उसे हमें जबरद...

Read Free

कटघरे में खड़े रिश्ते By Sudha Adesh

कटघरे में खड़े रिश्ते माँ एक हफ्ते से आई.सी.यू. में भर्ती हैं । उन्हें सीवियर हार्ट अटैक हुआ था । इलाज चल रहा है पर अभी भी वे खतरे से बाहर नहीं हैं । उन्हें झपकी लेते देखकर विशाल ने...

Read Free

बडी प्रतिमा - 10 - अंतिम भाग By Sudha Trivedi

बडी प्रतिमा (10.) अगली शाम विभा पिछवाडे की नल पर बैठी कपडे धो रही थी। उसी समय गीतू बागीचों की ओर जाती दिखी। फजली सर या किसी ने भी किसी को यह नहीं बताया था कि असली चोर पकडा गया है।...

Read Free

आँखों देखा हाल - क्रिकेट By Siniwali Sharma

आँखों देखा हाल क्रिकेट आइये चलते हैं ३२- ३३ साल पहले जब भारत के गांवों में क्रिकेट अपनी पैठ बना रहा था। ठीक उसी समय कपिल देव की अगुआई में भारत ने क्रिकेट का विश्व कप जीता था। इस जी...

Read Free

अपनों के बीच By Asha Pandey Author

अपनों के बीच गर्मी में झुलसता मई का महीना। जीवन-मरण के बीच झूलती अम्मा । सबको खबर कर दी गई थी कि अम्मा अब नहीं बचेंगी। ये शायद उनकी अन्तिम बीमारी होगी। बेटे एवं बहू सभी अलग-अलग शहर...

Read Free