hindi Best Moral Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • पूर्ण-विराम से पहले....!!! - 3

    पूर्ण-विराम से पहले....!!! 3. शिखा सोचने बैठी तो एक के बाद एक अतीत का पृष्ठ उलटत...

  • राम रचि राखा - 1 - 8

    राम रचि राखा अपराजिता (8) फरवरी शुरु हो गया था। ठण्ड काफ़ी कम हो चुकी थी। फिर भी...

  • ईमानदारी की आदत

    क्हानी ईमानदारी की आदत राजनारायण बोहरे स्टेट हाइवे नं. एक सौ पन्द्रह के किल...

पूर्ण-विराम से पहले....!!! - 3 By Pragati Gupta

पूर्ण-विराम से पहले....!!! 3. शिखा सोचने बैठी तो एक के बाद एक अतीत का पृष्ठ उलटता ही चला गया| स्कूल,कॉलेज, प्रखर का मिलना, फिर समीर से विवाह और समीर के विदा लेने के बाद उसकी डायरिय...

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समंदर और सफेद गुलाब - 2 - 5 By Ajay Sharma

समंदर और सफेद गुलाब 5 मेरी बात सुनकर अनिल बीच में ही बोल पड़ा, ‘अरे डॉक्टर साहब... ऐसा है तो आप कोई और रोल कर लें, उसमें दिक्कत ही क्या है?’ ‘बिल्कुल नहीं, मैं जो घर से सोचकर आया थ...

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गवाक्ष - 9 By Pranava Bharti

गवाक्ष 9= प्रथम मिलन की रात्रि में स्वाति ने अपने संस्कारों के तहत पति के पैर छुए ; "यह क्या बकवासबाज़ी है ----यह मत समझना इन दिखावटी बातों से मैं तुम्हारे प्रभाव में आ जाऊँगा -...

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उर्वशी - 12 By Jyotsana Kapil

उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 12 शिखर का यह नियम था कि वर्ष में दो बार वह हर काम से छुट्टी लेकर पूरे परिवार के साथ भृमण पर निकल जाते थे। यही समय होता था अपनों के बीच क्वालिटी टाइम बित...

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आधा आदमी - 24 By Rajesh Malik

आधा आदमी अध्‍याय-24 छोटी के आते ही मैं लेट्रीन के बहाने उसे मैदान में ले गया और बड़ी चालाकी से उससे बात उगलवाने लगा, ‘‘आय री, तैं कल रात में आई राहैं न?‘‘ ‘‘भागव बहिनी.‘‘ ‘‘भागव बहि...

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महामाया - 30 By Sunil Chaturvedi

महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – तीस अखिल जब राधामाई के कमरे में पहुंचा। कमरे में ब्लू जिंस पर मेंहदी रंग का टाॅप पहिने, खुले बालों को कंधों तक झुलाये एक लड़की कुछ लिखने में तल्लीन...

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होने से न होने तक - 45 By Sumati Saxena Lal

होने से न होने तक 45. हम लोग समय को लेकर बेहद अधीर हो रहे हैं पर किसी को धक्का दे कर तो जल्दी करने को कहा नहीं जा सकता है फिर भी एक बार पुनः अपना अनुरोध दोहरा कर हम लोग उठ खड़े हुए...

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मैं, मैसेज और तज़ीन - 3 By Pradeep Shrivastava

मैं, मैसेज और तज़ीन - प्रदीप श्रीवास्तव भाग -3 नग़मा की इन सारी बातों को मैंने तब सच समझा था लेकिन आज जब चैटिंग की दुनिया का ककहरा ही नहीं उसकी नस-नस जान चुकी हूं तो यही समझती हूं कि...

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आधी दुनिया का पूरा सच - 19 By Dr kavita Tyagi

आधी दुनिया का पूरा सच (उपन्यास) 19 जब मन्दिर के प्रांगण में कार आकर रुकी और उसमें से अर्द्धचेतन रानी को कार से उतारा गया, तो वहाँ पर पास पड़ोस से कई लोग आकर खड़े हो गये । उस समय वह...

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राम रचि राखा - 1 - 8 By Pratap Narayan Singh

राम रचि राखा अपराजिता (8) फरवरी शुरु हो गया था। ठण्ड काफ़ी कम हो चुकी थी। फिर भी शाम में छह बजे तक धुंधलका छाने लगता था। उस दिन अनुराग मेरी ओफिस आया। आते ही बोला, “तुम्हारे लिए एक स...

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केसरिया बालम - 12 By Hansa Deep

केसरिया बालम डॉ. हंसा दीप 12 चुप्पियों का बढ़ता शोर धानी महसूस करती कि उसका प्यार जताना अब बाली को अच्छा नहीं लगता। वह तो सिर्फ इतना चाहती थी कि अगर कोई परेशानी है तो उसका समीप्य ब...

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जननम - 10 By S Bhagyam Sharma

जननम अध्याय 10 आनंद ने कुछ सोचते हुए पत्र को बंद किया। इस पत्र ने जो सदमा दिया है उससे बाहर निकलना नहीं हो सकता उसे लगा। ऐसा एक सदमा ! अचानक ऊपर से एक नक्षत्र सिर के ऊपर गिरा जैसे...

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रम्भा By Deepak sharma

रम्भा सोने से पहले मैं रम्भा का मोबाइल ज़रूर मिलाता हूँ| दस और ग्यारह के बीच| ‘सब्सक्राइबर नाट अवेलेबल’ सुनने के वास्ते| लेकिन उस दिन वह उपलब्ध रही- “इस वक़्त कैसे फ़ोन किया, सर?” “रे...

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मन की बात - 2 - अभी जिंदगी और है..….. By Kusum Agarwal

सुबह का 5:00 बजे का अलार्म लगा कर सोने की आदत पुरानी हो चुकी थी। अब तो विभा की नींद अलार्म बजने से पहले ही खुल जाती थी और वह यंत्रबद्ध सी सीधे रसोई की ओर जाती थी ताकि ताजा पानी भरन...

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ईमानदारी की आदत By राजनारायण बोहरे

क्हानी ईमानदारी की आदत राजनारायण बोहरे स्टेट हाइवे नं. एक सौ पन्द्रह के किलोमीटर क्रमांक 1 से 30 तक की चकाचक सड़क देखकर नेषनल हाइवे वाले भी लज्जा खाते हैं । यह सड़क मेरे कस्बे क...

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बुआजी के फ्रैक्चर का इलाज By r k lal

बुआजी के फ्रैक्चर का इलाज आर० के० लाल उस दिन रश्मि बुआजी बाथरूम में फिसल कर गिर गई थी जिससे उनका पैर फ्रैक्चर हो गया था । उनके बेटे सुधीर ने उन्हें लाद-फांद कर...

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काहे होत अधीर By Usha Kiran Khan

काहे होत अधीर - उषाकिरण खान सोभन एक अच्छा नाविक था जबकि वह नाविक जाति का नहीं था। इस जलप्रांतर में केवट होने की जरूरत नहीं थी नाविक होने के लिए। नाव लग्गा से सबका नाता था। साल के क...

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सेंधा नमक - 1 By Sudha Trivedi

सेंधा नमक सुधा त्रिवेदी (1) यह पहला ही मौका था वन्या के लिए जब किसी इतने बडे कार्यक्रम में जाने का उसे मौका मिल रहा था । फिल्मी स्टार, नामी राजनयिक - सभी आनेवाले थे इसमें । आमंत्रण...

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कर्तव्यपालन की सज़ा By Vandana Gupta

कर्तव्यपालन की सज़ा जब जल्दी हो तो सारे काम भी उल्टे होते हैं. कभी हाथ से दूध गिरता है तो कभी बर्तन तो कभी सब्जी. हद हो गयी है आज तो लगता है अपाइंटमेंट कैंसल ही करनी पड़ेगी. कितनी मु...

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BOYS school WASHROOM - 3 By Akash Saxena "Ansh"

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि कैसे यश की बस मे कुछ लड़कों से कहा सुनी हो जाती है और मामला बस इन्चार्ज तक पहुंचता है। बस में बच्चों को डरता देख टीचर बात को ज़्यादा आगे ना बढ़ाते हुए चुप चा...

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खुद खुदी से By Jaya Jadwani

खुद खुदी से वो जब मिली मैं अपनी उम्र की तीसरी बादान पर थी....फिसल कर चौथी पर गिरने से ठीक पहले खुद को संभालती हुई. मुझे पता ही नहीं चला इतने सारे बरस मेरे सिर पर से कैसे गुज़र गए और...

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चिरनिद्रा By Pratibha

चिरनिद्रा हरे रामा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे रामा, हरे कृष्णा हर रामा हरे कृष्णा हरे रामा । मैं आहिस्ता -आहिस्ता सुरमयी सुबह के इन सुरों की डोर में बंध रही थी... उड़ रही थी दूर तक...

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खुद्दार By Asha Pandey Author

खुद्दार हरे-पीले, पके-अधपके आमों से लदे पेड़ों का बगीचा । बीच से निकली है सड़क । बगीचे को पार करती हुई मेरी कार एक घने आम के पेड़ के नीचे रुक जाती है। हम सभी कार से उतरते हैं। नीचे, प...

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नगाड़ा By Renu Asthana

नगाड़ा मई की चिलचिलाती दुपहरी अंगारे बरसा रही थी, उस पर बवंडर उठाती गर्म हवा । जमीन झुलसी जा रही थी । पानी सूख रहा था । खेत दरारों से पटे जा रहे थे । और शहरों में थोड़ी – थोड़ी छाया क...

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हिचर-मिचर By Deepak sharma

हिचर-मिचर इस वर्ष का आज मेरा पहला उपवास है। १६ जनवरी की इस पूर्णिमा के दिन। हर पूर्णिमा के दिन मैं उपवास रखता हूँ। माँ की स्मृति में। पिछले तिरपन वर्ष से। ३१ जनवरी, १९६१ की उस पूर्...

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इंतज़ार दूसरा - 3 By Kishanlal Sharma

गणतंत्र दिवस की परेड देझने वालो की खासी भीड़ थी।लोग मिलो तक सड़क के दोनों तरफ खड़े थे।वे भी एक जगह खड़े हो गए थे।परेड शुरू होने पर फौजी जवानों को देखकर माया की आंखे पति को याद करके नम...

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सुनहरी साँझ By Lovelesh Dutt

सुनहरी साँझ---लवलेश दत्त“हैलो! भइया...” वीरेन्द्र ने बड़े भाई सुरेन्द्र को फोन किया।“हाँ वीरू! क्या हुआ?” “क्या हुआ? आप तो इतने बिजी रहते हैं कि आपको कुछ खबर ही नहीं”“पर हुआ क्या?...

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गुब्बारा By Vivek Mishra

अगस्त का आख़िरी हफ़्ता था। बारिश बहुत कम हुई थी। बादल आसमान पर ठहरे थे। बरसने के लिए उन्हें किसी ख़ास चीज़ की तलाश थी, जो शायद ज़मीन पर नहीं थी। हम उन्हें बरसने पर मजबूर नहीं कर सके थे।...

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सफ़र By Abhinav Singh

जाने कैसी कैसी बीमारी ले आता है इ चीन भी, सब साला गड़बड़ी इनके खाने पीने की वजह से है। हम तो सुन रहे की ससुर छिपकली, कॉकरोच सब भून भान के खा जाते हैं।‘ खाना खा के तख्त पर...

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जिवन का अंत By रनजीत कुमार तिवारी

आदरणीय पाठकों मेरा सादर प्रणाम आप सबके लिए एक कहानी लिख रहा हूं। अच्छा लगे तो मेरा मनोबल बढ़ाने की कृपा करें।आइए कहानी की ओर चलतें है। यह कहानी गांव की एक सिधी साधी भाभी की है।जि...

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ये दूरियाँ By Heena_Pathan

कभी कभी जिंदगी में ये दूरियाँ मिलों की लगती है ये दूरियाँ ना कि सफर की है ये दुरिया है दिलों की हमारे आस पास रहते लोगों की कुछ अपने कुछ पराये है जिंदगी में रिश्ते एक बार बनते है...

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पूर्ण-विराम से पहले....!!! - 3 By Pragati Gupta

पूर्ण-विराम से पहले....!!! 3. शिखा सोचने बैठी तो एक के बाद एक अतीत का पृष्ठ उलटता ही चला गया| स्कूल,कॉलेज, प्रखर का मिलना, फिर समीर से विवाह और समीर के विदा लेने के बाद उसकी डायरिय...

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समंदर और सफेद गुलाब - 2 - 5 By Ajay Sharma

समंदर और सफेद गुलाब 5 मेरी बात सुनकर अनिल बीच में ही बोल पड़ा, ‘अरे डॉक्टर साहब... ऐसा है तो आप कोई और रोल कर लें, उसमें दिक्कत ही क्या है?’ ‘बिल्कुल नहीं, मैं जो घर से सोचकर आया थ...

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गवाक्ष - 9 By Pranava Bharti

गवाक्ष 9= प्रथम मिलन की रात्रि में स्वाति ने अपने संस्कारों के तहत पति के पैर छुए ; "यह क्या बकवासबाज़ी है ----यह मत समझना इन दिखावटी बातों से मैं तुम्हारे प्रभाव में आ जाऊँगा -...

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उर्वशी - 12 By Jyotsana Kapil

उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 12 शिखर का यह नियम था कि वर्ष में दो बार वह हर काम से छुट्टी लेकर पूरे परिवार के साथ भृमण पर निकल जाते थे। यही समय होता था अपनों के बीच क्वालिटी टाइम बित...

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आधा आदमी - 24 By Rajesh Malik

आधा आदमी अध्‍याय-24 छोटी के आते ही मैं लेट्रीन के बहाने उसे मैदान में ले गया और बड़ी चालाकी से उससे बात उगलवाने लगा, ‘‘आय री, तैं कल रात में आई राहैं न?‘‘ ‘‘भागव बहिनी.‘‘ ‘‘भागव बहि...

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महामाया - 30 By Sunil Chaturvedi

महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – तीस अखिल जब राधामाई के कमरे में पहुंचा। कमरे में ब्लू जिंस पर मेंहदी रंग का टाॅप पहिने, खुले बालों को कंधों तक झुलाये एक लड़की कुछ लिखने में तल्लीन...

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होने से न होने तक - 45 By Sumati Saxena Lal

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मैं, मैसेज और तज़ीन - 3 By Pradeep Shrivastava

मैं, मैसेज और तज़ीन - प्रदीप श्रीवास्तव भाग -3 नग़मा की इन सारी बातों को मैंने तब सच समझा था लेकिन आज जब चैटिंग की दुनिया का ककहरा ही नहीं उसकी नस-नस जान चुकी हूं तो यही समझती हूं कि...

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आधी दुनिया का पूरा सच - 19 By Dr kavita Tyagi

आधी दुनिया का पूरा सच (उपन्यास) 19 जब मन्दिर के प्रांगण में कार आकर रुकी और उसमें से अर्द्धचेतन रानी को कार से उतारा गया, तो वहाँ पर पास पड़ोस से कई लोग आकर खड़े हो गये । उस समय वह...

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राम रचि राखा - 1 - 8 By Pratap Narayan Singh

राम रचि राखा अपराजिता (8) फरवरी शुरु हो गया था। ठण्ड काफ़ी कम हो चुकी थी। फिर भी शाम में छह बजे तक धुंधलका छाने लगता था। उस दिन अनुराग मेरी ओफिस आया। आते ही बोला, “तुम्हारे लिए एक स...

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केसरिया बालम - 12 By Hansa Deep

केसरिया बालम डॉ. हंसा दीप 12 चुप्पियों का बढ़ता शोर धानी महसूस करती कि उसका प्यार जताना अब बाली को अच्छा नहीं लगता। वह तो सिर्फ इतना चाहती थी कि अगर कोई परेशानी है तो उसका समीप्य ब...

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जननम - 10 By S Bhagyam Sharma

जननम अध्याय 10 आनंद ने कुछ सोचते हुए पत्र को बंद किया। इस पत्र ने जो सदमा दिया है उससे बाहर निकलना नहीं हो सकता उसे लगा। ऐसा एक सदमा ! अचानक ऊपर से एक नक्षत्र सिर के ऊपर गिरा जैसे...

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रम्भा By Deepak sharma

रम्भा सोने से पहले मैं रम्भा का मोबाइल ज़रूर मिलाता हूँ| दस और ग्यारह के बीच| ‘सब्सक्राइबर नाट अवेलेबल’ सुनने के वास्ते| लेकिन उस दिन वह उपलब्ध रही- “इस वक़्त कैसे फ़ोन किया, सर?” “रे...

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मन की बात - 2 - अभी जिंदगी और है..….. By Kusum Agarwal

सुबह का 5:00 बजे का अलार्म लगा कर सोने की आदत पुरानी हो चुकी थी। अब तो विभा की नींद अलार्म बजने से पहले ही खुल जाती थी और वह यंत्रबद्ध सी सीधे रसोई की ओर जाती थी ताकि ताजा पानी भरन...

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ईमानदारी की आदत By राजनारायण बोहरे

क्हानी ईमानदारी की आदत राजनारायण बोहरे स्टेट हाइवे नं. एक सौ पन्द्रह के किलोमीटर क्रमांक 1 से 30 तक की चकाचक सड़क देखकर नेषनल हाइवे वाले भी लज्जा खाते हैं । यह सड़क मेरे कस्बे क...

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बुआजी के फ्रैक्चर का इलाज By r k lal

बुआजी के फ्रैक्चर का इलाज आर० के० लाल उस दिन रश्मि बुआजी बाथरूम में फिसल कर गिर गई थी जिससे उनका पैर फ्रैक्चर हो गया था । उनके बेटे सुधीर ने उन्हें लाद-फांद कर...

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काहे होत अधीर By Usha Kiran Khan

काहे होत अधीर - उषाकिरण खान सोभन एक अच्छा नाविक था जबकि वह नाविक जाति का नहीं था। इस जलप्रांतर में केवट होने की जरूरत नहीं थी नाविक होने के लिए। नाव लग्गा से सबका नाता था। साल के क...

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सेंधा नमक - 1 By Sudha Trivedi

सेंधा नमक सुधा त्रिवेदी (1) यह पहला ही मौका था वन्या के लिए जब किसी इतने बडे कार्यक्रम में जाने का उसे मौका मिल रहा था । फिल्मी स्टार, नामी राजनयिक - सभी आनेवाले थे इसमें । आमंत्रण...

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कर्तव्यपालन की सज़ा By Vandana Gupta

कर्तव्यपालन की सज़ा जब जल्दी हो तो सारे काम भी उल्टे होते हैं. कभी हाथ से दूध गिरता है तो कभी बर्तन तो कभी सब्जी. हद हो गयी है आज तो लगता है अपाइंटमेंट कैंसल ही करनी पड़ेगी. कितनी मु...

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BOYS school WASHROOM - 3 By Akash Saxena "Ansh"

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खुद खुदी से By Jaya Jadwani

खुद खुदी से वो जब मिली मैं अपनी उम्र की तीसरी बादान पर थी....फिसल कर चौथी पर गिरने से ठीक पहले खुद को संभालती हुई. मुझे पता ही नहीं चला इतने सारे बरस मेरे सिर पर से कैसे गुज़र गए और...

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चिरनिद्रा By Pratibha

चिरनिद्रा हरे रामा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे रामा, हरे कृष्णा हर रामा हरे कृष्णा हरे रामा । मैं आहिस्ता -आहिस्ता सुरमयी सुबह के इन सुरों की डोर में बंध रही थी... उड़ रही थी दूर तक...

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खुद्दार By Asha Pandey Author

खुद्दार हरे-पीले, पके-अधपके आमों से लदे पेड़ों का बगीचा । बीच से निकली है सड़क । बगीचे को पार करती हुई मेरी कार एक घने आम के पेड़ के नीचे रुक जाती है। हम सभी कार से उतरते हैं। नीचे, प...

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नगाड़ा By Renu Asthana

नगाड़ा मई की चिलचिलाती दुपहरी अंगारे बरसा रही थी, उस पर बवंडर उठाती गर्म हवा । जमीन झुलसी जा रही थी । पानी सूख रहा था । खेत दरारों से पटे जा रहे थे । और शहरों में थोड़ी – थोड़ी छाया क...

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हिचर-मिचर By Deepak sharma

हिचर-मिचर इस वर्ष का आज मेरा पहला उपवास है। १६ जनवरी की इस पूर्णिमा के दिन। हर पूर्णिमा के दिन मैं उपवास रखता हूँ। माँ की स्मृति में। पिछले तिरपन वर्ष से। ३१ जनवरी, १९६१ की उस पूर्...

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सुनहरी साँझ By Lovelesh Dutt

सुनहरी साँझ---लवलेश दत्त“हैलो! भइया...” वीरेन्द्र ने बड़े भाई सुरेन्द्र को फोन किया।“हाँ वीरू! क्या हुआ?” “क्या हुआ? आप तो इतने बिजी रहते हैं कि आपको कुछ खबर ही नहीं”“पर हुआ क्या?...

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गुब्बारा By Vivek Mishra

अगस्त का आख़िरी हफ़्ता था। बारिश बहुत कम हुई थी। बादल आसमान पर ठहरे थे। बरसने के लिए उन्हें किसी ख़ास चीज़ की तलाश थी, जो शायद ज़मीन पर नहीं थी। हम उन्हें बरसने पर मजबूर नहीं कर सके थे।...

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सफ़र By Abhinav Singh

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जिवन का अंत By रनजीत कुमार तिवारी

आदरणीय पाठकों मेरा सादर प्रणाम आप सबके लिए एक कहानी लिख रहा हूं। अच्छा लगे तो मेरा मनोबल बढ़ाने की कृपा करें।आइए कहानी की ओर चलतें है। यह कहानी गांव की एक सिधी साधी भाभी की है।जि...

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ये दूरियाँ By Heena_Pathan

कभी कभी जिंदगी में ये दूरियाँ मिलों की लगती है ये दूरियाँ ना कि सफर की है ये दुरिया है दिलों की हमारे आस पास रहते लोगों की कुछ अपने कुछ पराये है जिंदगी में रिश्ते एक बार बनते है...

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