hindi Best Moral Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • 30 शेड्स ऑफ बेला - 10

    30 शेड्स ऑफ बेला (30 दिन, तीस लेखक और एक उपन्यास) Eposode 10 by Rinki Vaish रिंक...

  • राम रचि राखा - 5 - 1

    राम रचि राखा मुझे याद करोगे ? (1) "आनंद, आओ दूध पी लो” रुचि ने बाल्कनी से जोर से...

  • पोषम्पा

    पोषम्पा भई पोषम पा,सौ रुपये की घड़ी चुराई दो रुपये की रबड़ी खाई,अब तो जेल में जाना...

आखा तीज का ब्याह - 3 By Ankita Bhargava

आखा तीज का ब्याह (3) प्रतीक के हॉस्पिटल जाने के बाद वासंती ने अपनी सासुमां को फोन लगाया, "हैलो! प्रणाम मम्मा!" "खुश रहो बेटा! कैसे हो! हमारी परी वनू कैसी है?" "बहुत बदमाश हो गई है...

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बना रहे यह अहसास - 6 By Sushma Munindra

बना रहे यह अहसास सुषमा मुनीन्द्र 6 रूम में यामिनी और व्याख्या हैं। रविवार होने से व्याख्या दोपहर में आ गई है। कर्मचारी लंच दे गया। भरी हुई थाली देख कर अम्मा अकबका जाती हैं। ‘‘गूड़ा,...

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एक लेखक की ‘एनेटमी‘ - 2 By Priyamvad

एक लेखक की ‘एनेटमी‘ प्रियंवद (2) इन उलझे और आपस में लड़ते चीखते विचारों के पार उसके अंदर मृत्यु की गहरी तड़प थी। यह तड़प पहली बार एक तिलचट्‌टे की हत्या करने के बाद पैदा हुयी थी। उस रा...

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30 शेड्स ऑफ बेला - 10 By Jayanti Ranganathan

30 शेड्स ऑफ बेला (30 दिन, तीस लेखक और एक उपन्यास) Eposode 10 by Rinki Vaish रिंकी वैशदरख्तों पर पसर गए हैं साए आंखों से बहते खारे पानी ने ताज़ी लिखी इबारत को धो डाला था। अपनी टैगला...

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यारबाज़ - 10 By Vikram Singh

यारबाज़ विक्रम सिंह (10) मैं उस शाम को अपनी प्रेमिका बबनी के आंगन के आसपास घूमने लगा अर्थात गुमटी के पास था । मैंने आज एक फिर पत्र लिखा था वह मैं बबनी को देना चाह रहा था। अचानक से...

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कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर - 15 By Neena Paul

कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर 15 ऐसा अधिक देर तक नहीं चलता सरोज। हर काम की एक अति होती है। इसने तो बेइमानी की सब हदों को पार कर दिया है। लॉफ़्बरो में कोई ऐसा इनसान नहीं जिसके आगे यह हा...

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राम रचि राखा - 5 - 1 By Pratap Narayan Singh

राम रचि राखा मुझे याद करोगे ? (1) "आनंद, आओ दूध पी लो” रुचि ने बाल्कनी से जोर से आवाज लगाई। शाम के लगभग सात बजने वाले थे। सूर्य डूब चुका था। पश्चिमी क्षितिज पर लालिमा बिखरी हुई थी।...

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पितृशोक By Deepak sharma

पितृशोक “आप से एक सर्टिफिकेट चाहिए था, डॉ. साहिबा,” नीरू का केस हमारे मनश्चिकित्सा विभाग के बाबू अशोक चन्द्र लाए थे, “जिस लड़की को हम लोग ठीकमठीक समझ कर अभी दो माह पहले अपने छोटे भा...

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पोषम्पा By AKANKSHA SRIVASTAVA

पोषम्पा भई पोषम पा,सौ रुपये की घड़ी चुराई दो रुपये की रबड़ी खाई,अब तो जेल में जाना पड़ेगा। जेल की रोटी खाना पड़ेगा,जेल का पानी पीना पड़ेगा अब तो जेल में जाना पड़ेगा।  ये प्यारी तोतली भा...

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आपकी आराधना - 1 By Pushpendra Kumar Patel

अतीत के कुछ अनसुलझे रहस्य जो बदल देंगे आराधना की जिन्दगी.....

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आउटडेटिड By Sudha Adesh

आउटडेटेड ‘ मैडम अभी तक नहीं आई ? मेरा ग्यारह बजे का अपाइन्टमेंट था ।’ नीलेश ने व्यग्रता से अर्दली से पूछा ।‘ आती ही ह...

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राधे चाची By Pratibha Adhikari

राधे चाची '' ओ गीता ! चाहा बना दे ! '', राधे चाची ने अपनी बहू से कहा |'' होय '', गीता उत्तर दिया | फुसेरी रंगत, अंडाकार चेहरे वाली गीता के माथे से ई...

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एनीमल फॉर्म - 1 By Suraj Prakash

एनीमल फॉर्म जॉर्ज ऑर्वेल अनुवाद: सूरज प्रकाश (1) ताल्लुका बाड़े यानी मैनर फॉर्म के मिस्टर जोन्स ने रात के लिए मुर्गियों के दड़बों को ताला तो लगा दिया था, लेकिन वह इतना ज्यादा पिए ह...

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किस्सा बाँके बाबू के जाने का By प्रेम गुप्ता 'मानी'

किस्सा बाँके बाबू के जाने का प्रेम गुप्ता ‘मानी’ मई की बेहद गर्म पिघलती हुई दोपहरी थी। कमरा किसी हलवाई की भट्टी की तरह तप रहा था। कमरे के बाहर आँगन और आँगन से बाहर गेट के उस पार का...

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जिंदगी मेरे घर आना - 2 By Rashmi Ravija

जिंदगी मेरे घर आना भाग २ और इस सारे बदलाव का श्रेय नेहा नवीना यानी उसे दिया जाता है जबकि यह सब तो अनजाने में हो गया किसी योजना के तहत उसने कुछ नहीं किया। किसी भी चीज को गंभीरता से...

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इक समंदर मेरे अंदर - 4 By Madhu Arora

इक समंदर मेरे अंदर मधु अरोड़ा (4) ....गुड़िया, तुझे मलाई पसंद है, इसलिये दो बार मलाई डाल देता हूं। एक तू खा लेना और एक घर तक ले जाना’। वह दही के दोने को बायें हाथ की हथेली पर रखती...

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मेरा स्वर्णिम बंगाल - 11 - अंतिम भाग By Mallika Mukherjee

मेरा स्वर्णिम बंगाल संस्मरण (अतीत और इतिहास की अंतर्यात्रा) मल्लिका मुखर्जी (11) समय तेजी से आगे बढ़ रहा था। अख़बार रखकर मै वसुंधरा सेंटर जाने के लिए तैयार हो गई। सौरभ टीवी देख रहा थ...

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गवाक्ष - 23 By Pranava Bharti

गवाक्ष 23== कॉस्मॉस पीड़ा से भर उठा था किन्तु अब उसे अपना सफ़र आगे बढ़ाना था। सत्यनिधि भीतर से भीग उठी, उसने आगे बढ़कर कॉस्मॉस को आलिंगन में ले लिया, उसके नेत्रों में अश्रुकण ट...

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पूर्ण-विराम से पहले....!!! - 17 By Pragati Gupta

पूर्ण-विराम से पहले....!!! 17. हालांकि समीर और शिखा को ऐसी कोई मेजर हेल्थ प्रॉब्लम नही थी कि उनको किसी भी इमरजेंसी में अपने बेटे की जरूरत होती| पर और मां-बाप की तरह ही समीर और शिखा...

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अपने-अपने इन्द्रधनुष - 1 By Neerja Hemendra

अपने-अपने इन्द्रधनुष (1) आज न जाने क्यों मुझे घर के अन्दर अच्छा नही लग रहा था। बार-बार मन में उठ रही व्याकुलता व अपने आस-पास फैली उदासी से निजात पाने के लिए मैं छत पर आ गई। खुली हव...

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जय हिन्द की सेना - 7 By Mahendra Bhishma

जय हिन्द की सेना महेन्द्र भीष्म सात अटल सारी रात सो न सका। प्रेयसी ममता का विछोह जहाँ उसे जीवन के प्रति निराश कर रहा था, वहीं बहन मोना का आशा के विपरीत पुनर्मिलन जीवन के प्रति उम्म...

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बात बस इतनी सी थी - 4 By Dr kavita Tyagi

बात बस इतनी सी थी 4 मंजरी की माँ ने जब देखा कि पुरोहित के मत का समर्थन करते हुए मंजरी के पिता खुद ही अपनी बेटी के पक्ष को कमजोर कर रहे हैं, तब वह आगे आकर बोली - "ठीक ही तो कह रही ह...

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गूंगा गाँव - 4 By रामगोपाल तिवारी (भावुक)

चार मध्य प्रदेश के उत्तर में स्थित, शिक्षा और संस्कृति का केन्द्र ग्वालियर जिला और जिले की संस्कृत साहित्य के गौरव महाकवि भवभूति की कर्म स्थली डब...

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फीनिक्स By padma sharma

फीनिक्स शेफाली ने शादी डॉट कॉम पर अपनी प्रोफाइल बनाने के लिये नेट खोला । शादी डॉट कॉम को सिलेक्ट करने के बाद रजिस्ट्रेशन के कॉलम पर क्लिक किया। कई सारे...

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आबरू By Dr Fateh Singh Bhati

आज उसके यहाँ पंचायती बैठी थी | हालाँकि उसके श्वसुर जी अपनी जाति के पाँच पंचों में से एक थे | ज़िन्दगी भर दूसरों के घर पंचायती करते रहे लेकिन आज दुर्भाग्य ने उनके घर को घेर लिया | उस...

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सड़क पर औरतें By Priyadarshan Parag

सड़क पर औरतें प्रियदर्शन उसे वहां से नहीं मुड़ना था। घर अगले मोड़ पर था। लेकिन वह मुड़ गई। उसे मालूम था, कुछ देर चलेगी तो बाज़ार आ जाएगा। धूप तेज़ थी। दुपट्टा उसने मुंह पर लपेट रखा...

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परम्परागत By Deepak sharma

परम्परागत अपने इंटर कॉलेज की साथिन अध्यापिकाओं के साथ स्टाफ़-रूम में बैठी मैं समोसे खाने जा ही रही थी कि एक नवयुवती अन्दर आयी| उसकी आयु चौबीस और अट्ठाइस के बीच कुछ भी हो सकती थी| उस...

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होमवर्क By AKANKSHA SRIVASTAVA

उफ़्फ़फ़फ़ ये होमवर्क!कैसे भूल जाती हूं मैं गुड्डी को होमवर्क कराना। सुबह- सुबह ही दिन खराब हो गया। ऊपर से ये टीचरे और लिख - लिख कर भेजती है " send your homework, send your homework" ज...

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( स्मरण पुस्तक) स्काउट-गाइड प्रशिक्षण By Durgesh Tiwari

स्काउट-गाइड प्रशिक्षण(उत्तरप्रदेश भारत स्काउट और गाइड जनपद गोरखपुर)~~~~~~~~~~~~?~~~~~~~~~~~~~ (स्मरण पुस्तिका)प्रार्थना-दया कर दान भक...

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जिंदगी की साँझ By Sunita Agarwal

मिस्टर अशोक शर्मा जो सेवानिवृत एकाउंट अफसर हैं।बड़ा रौब था जवानी में उनका किसी भी कार्यालय में उनके काम में जरा भी लेट लतीफी हुई कि तुरंत पूरे कार्यालय को हड़का देते थे।और उनके पद की...

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दर्द. By Sumit Vig

दर्द एक शहर में एक छोटा सा मोहल्ला था। जहाँ लगभग सब धर्मों और जातियों के लोग रहते थे। उन में एक परिवार था जिनके सदस्य लिलिपुट जैसे दिखते थे। उस परिवार में पति पत्नी और उनका एक लड़का...

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अंदर खुलने वाली खिड़की - 3 - अंतिम भाग By Priyamvad

अंदर खुलने वाली खिड़की (3) बीमारियों के मौसम में अक्सर बहुत लोग एक साथ मर जाते थे। इतने अधिक, कि श्मशान घाट की जमीन पर घंटो मुर्दे अपनी अपनी अर्थियों में पड़े रहते, खासतौर से गरीब मु...

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आखा तीज का ब्याह - 3 By Ankita Bhargava

आखा तीज का ब्याह (3) प्रतीक के हॉस्पिटल जाने के बाद वासंती ने अपनी सासुमां को फोन लगाया, "हैलो! प्रणाम मम्मा!" "खुश रहो बेटा! कैसे हो! हमारी परी वनू कैसी है?" "बहुत बदमाश हो गई है...

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बना रहे यह अहसास - 6 By Sushma Munindra

बना रहे यह अहसास सुषमा मुनीन्द्र 6 रूम में यामिनी और व्याख्या हैं। रविवार होने से व्याख्या दोपहर में आ गई है। कर्मचारी लंच दे गया। भरी हुई थाली देख कर अम्मा अकबका जाती हैं। ‘‘गूड़ा,...

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एक लेखक की ‘एनेटमी‘ - 2 By Priyamvad

एक लेखक की ‘एनेटमी‘ प्रियंवद (2) इन उलझे और आपस में लड़ते चीखते विचारों के पार उसके अंदर मृत्यु की गहरी तड़प थी। यह तड़प पहली बार एक तिलचट्‌टे की हत्या करने के बाद पैदा हुयी थी। उस रा...

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यारबाज़ विक्रम सिंह (10) मैं उस शाम को अपनी प्रेमिका बबनी के आंगन के आसपास घूमने लगा अर्थात गुमटी के पास था । मैंने आज एक फिर पत्र लिखा था वह मैं बबनी को देना चाह रहा था। अचानक से...

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कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर - 15 By Neena Paul

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राम रचि राखा - 5 - 1 By Pratap Narayan Singh

राम रचि राखा मुझे याद करोगे ? (1) "आनंद, आओ दूध पी लो” रुचि ने बाल्कनी से जोर से आवाज लगाई। शाम के लगभग सात बजने वाले थे। सूर्य डूब चुका था। पश्चिमी क्षितिज पर लालिमा बिखरी हुई थी।...

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पितृशोक By Deepak sharma

पितृशोक “आप से एक सर्टिफिकेट चाहिए था, डॉ. साहिबा,” नीरू का केस हमारे मनश्चिकित्सा विभाग के बाबू अशोक चन्द्र लाए थे, “जिस लड़की को हम लोग ठीकमठीक समझ कर अभी दो माह पहले अपने छोटे भा...

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पोषम्पा By AKANKSHA SRIVASTAVA

पोषम्पा भई पोषम पा,सौ रुपये की घड़ी चुराई दो रुपये की रबड़ी खाई,अब तो जेल में जाना पड़ेगा। जेल की रोटी खाना पड़ेगा,जेल का पानी पीना पड़ेगा अब तो जेल में जाना पड़ेगा।  ये प्यारी तोतली भा...

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आपकी आराधना - 1 By Pushpendra Kumar Patel

अतीत के कुछ अनसुलझे रहस्य जो बदल देंगे आराधना की जिन्दगी.....

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आउटडेटिड By Sudha Adesh

आउटडेटेड ‘ मैडम अभी तक नहीं आई ? मेरा ग्यारह बजे का अपाइन्टमेंट था ।’ नीलेश ने व्यग्रता से अर्दली से पूछा ।‘ आती ही ह...

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राधे चाची By Pratibha Adhikari

राधे चाची '' ओ गीता ! चाहा बना दे ! '', राधे चाची ने अपनी बहू से कहा |'' होय '', गीता उत्तर दिया | फुसेरी रंगत, अंडाकार चेहरे वाली गीता के माथे से ई...

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एनीमल फॉर्म - 1 By Suraj Prakash

एनीमल फॉर्म जॉर्ज ऑर्वेल अनुवाद: सूरज प्रकाश (1) ताल्लुका बाड़े यानी मैनर फॉर्म के मिस्टर जोन्स ने रात के लिए मुर्गियों के दड़बों को ताला तो लगा दिया था, लेकिन वह इतना ज्यादा पिए ह...

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किस्सा बाँके बाबू के जाने का By प्रेम गुप्ता 'मानी'

किस्सा बाँके बाबू के जाने का प्रेम गुप्ता ‘मानी’ मई की बेहद गर्म पिघलती हुई दोपहरी थी। कमरा किसी हलवाई की भट्टी की तरह तप रहा था। कमरे के बाहर आँगन और आँगन से बाहर गेट के उस पार का...

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जिंदगी मेरे घर आना - 2 By Rashmi Ravija

जिंदगी मेरे घर आना भाग २ और इस सारे बदलाव का श्रेय नेहा नवीना यानी उसे दिया जाता है जबकि यह सब तो अनजाने में हो गया किसी योजना के तहत उसने कुछ नहीं किया। किसी भी चीज को गंभीरता से...

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इक समंदर मेरे अंदर - 4 By Madhu Arora

इक समंदर मेरे अंदर मधु अरोड़ा (4) ....गुड़िया, तुझे मलाई पसंद है, इसलिये दो बार मलाई डाल देता हूं। एक तू खा लेना और एक घर तक ले जाना’। वह दही के दोने को बायें हाथ की हथेली पर रखती...

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मेरा स्वर्णिम बंगाल - 11 - अंतिम भाग By Mallika Mukherjee

मेरा स्वर्णिम बंगाल संस्मरण (अतीत और इतिहास की अंतर्यात्रा) मल्लिका मुखर्जी (11) समय तेजी से आगे बढ़ रहा था। अख़बार रखकर मै वसुंधरा सेंटर जाने के लिए तैयार हो गई। सौरभ टीवी देख रहा थ...

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गवाक्ष - 23 By Pranava Bharti

गवाक्ष 23== कॉस्मॉस पीड़ा से भर उठा था किन्तु अब उसे अपना सफ़र आगे बढ़ाना था। सत्यनिधि भीतर से भीग उठी, उसने आगे बढ़कर कॉस्मॉस को आलिंगन में ले लिया, उसके नेत्रों में अश्रुकण ट...

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पूर्ण-विराम से पहले....!!! - 17 By Pragati Gupta

पूर्ण-विराम से पहले....!!! 17. हालांकि समीर और शिखा को ऐसी कोई मेजर हेल्थ प्रॉब्लम नही थी कि उनको किसी भी इमरजेंसी में अपने बेटे की जरूरत होती| पर और मां-बाप की तरह ही समीर और शिखा...

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अपने-अपने इन्द्रधनुष - 1 By Neerja Hemendra

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जय हिन्द की सेना - 7 By Mahendra Bhishma

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गूंगा गाँव - 4 By रामगोपाल तिवारी (भावुक)

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फीनिक्स By padma sharma

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सड़क पर औरतें By Priyadarshan Parag

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होमवर्क By AKANKSHA SRIVASTAVA

उफ़्फ़फ़फ़ ये होमवर्क!कैसे भूल जाती हूं मैं गुड्डी को होमवर्क कराना। सुबह- सुबह ही दिन खराब हो गया। ऊपर से ये टीचरे और लिख - लिख कर भेजती है " send your homework, send your homework" ज...

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जिंदगी की साँझ By Sunita Agarwal

मिस्टर अशोक शर्मा जो सेवानिवृत एकाउंट अफसर हैं।बड़ा रौब था जवानी में उनका किसी भी कार्यालय में उनके काम में जरा भी लेट लतीफी हुई कि तुरंत पूरे कार्यालय को हड़का देते थे।और उनके पद की...

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दर्द. By Sumit Vig

दर्द एक शहर में एक छोटा सा मोहल्ला था। जहाँ लगभग सब धर्मों और जातियों के लोग रहते थे। उन में एक परिवार था जिनके सदस्य लिलिपुट जैसे दिखते थे। उस परिवार में पति पत्नी और उनका एक लड़का...

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अंदर खुलने वाली खिड़की - 3 - अंतिम भाग By Priyamvad

अंदर खुलने वाली खिड़की (3) बीमारियों के मौसम में अक्सर बहुत लोग एक साथ मर जाते थे। इतने अधिक, कि श्मशान घाट की जमीन पर घंटो मुर्दे अपनी अपनी अर्थियों में पड़े रहते, खासतौर से गरीब मु...

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