hindi Best Moral Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • सिर माथे

    ’’कोई है?’’ रोज की तरह घर में दाखिल होते ही मैं टोह लेता...

  • स्वीकृति - 14

    बड़के चाचा के इस दावे से, कि पिछले 2 दिन से होटल के उस कमरे में जो महिला बंद पड़...

  • उत्तरजीवी

    विभागाध्यक्ष की ऊंची एड़ी की सैंडिल अपनी धमक के साथ विभाग की ओर तेजी से बढ़ रही थी...

अपहरण - भाग ४   By Ratna Pandey

रमेश ने समझाते हुए कहा, "अशोक हम कोई गुंडे नहीं हैं। हमारे लिए हर लड़की, हर नारी, इज़्जत की पात्र है। हम उसे अगवा ज़रूर करेंगे लेकिन कुछ और नहीं। हम उसके साथ बहुत ही इज़्जत से पेश आएँ...

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सिर माथे By Deepak sharma

’’कोई है?’’ रोज की तरह घर में दाखिल होते ही मैं टोह लेता हूँ। ’’हुजूर!’’ पहला फॉलोअर मेरे सोफे की तीनों गद्दियों को मेरे बैठने वाले...

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स्वीकृति - 14 By GAYATRI THAKUR

बड़के चाचा के इस दावे से, कि पिछले 2 दिन से होटल के उस कमरे में जो महिला बंद पड़ी थी उसे वह जानते है, वह उनकी ही परिचित हैं , पुलिस वाले ने राहत की सांस ली कि चलो.., इस मामले से जल...

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उत्तरजीवी By Deepak sharma

विभागाध्यक्ष की ऊंची एड़ी की सैंडिल अपनी धमक के साथ विभाग की ओर तेजी से बढ़ रही थी। लिव ! लिव ! लिव ! सुधा ने मन ही मन दोहराया और मुस्कराई । पंद्रह दिन पहले अस्पताल से लौटकर जब वह अप...

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एक खूबसूरत सफर By Rama Sharma Manavi

सत्य ही कहा गया है कि दुनिया बहुत छोटी है, कब किस मोड़ पर कौन बिछड़ा हुआ मिल जाय कुछ कहा नहीं जा सकता था।मैंने स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि अब कभी जिंदगी में उससे मुलाकात हो पाएगी।ह...

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घुटन - अंतिम भाग By Ratna Pandey

एक दिन कुमुदिनी ने तिलक से कहा, "तिलक भैया आप क्यों मेरी मम्मी को यह बात नहीं बता देते। बता दो ना? मेरे पापा, मम्मी से बहुत डरते हैं। यदि माँ के सामने वह स्वीकार कर लेंगे तो शायद फ...

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कॉन्डम और प्रेम के हालात By बिट्टू श्री दार्शनिक

"कॉन्डम" स्कूल जाते बच्चे से ले कर के आज की पीढ़ी के हर बूढ़े लोग तक इस शब्द को जानते है।यह शब्द उस वस्तु के लिए उपयोग किया गया है जो की एक पतले से प्लास्टिक रबर के बने गुब्बारे जै...

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अय्याश--(अन्तिम भाग) By Saroj Verma

शौक़त के घरवाले उन पर दबाव बनाने लगें,यहाँ तक कि शौक़त की अम्मी और अब्बाहुजूर भी चाहते थे कि कैसे भी उन पर दबाव बनाकर हमारा उनसे तलाक़ करवा दिया जाएं, वें सभी इस मक़सद में कामयाब भी हो...

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शेष जीवन (कहानियां पार्ट14) By Kishanlal Sharma

अपने दो बेटों और एक बेटी की शादी वह कर चुके थे।शादी करने से पूर्व उन्होंने अपने बच्चों की राय जानना भी जरूरी नही समझालेकिन रमेश को विश्वास था कि उसके साथ ऐसा नही होगा।उसके ऐसा सोचन...

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गरीब बाप - 1 By Mintu Paswan

नमस्कार दोस्तों मैं आप के बीच एक ऐसा कहा एक गरीब कि ज़िन्दगी क्या होती हैं। यह एक कहानी नहीं सच्चाई है । भारत का एक ऐसा राज्य जो गरीबों का राज्य नी लेकर आया हूँ ,जिससे पता चलता है...

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बंद हो चुकी खिड़की By Dr pradeep Upadhyay

बंद हो चुकी खिड़कीआज बत्तीस साल के बाद उससे सामना हुआ था।पहले तो सोचा भी कि उसके सामने नहीं जाऊं। फिर भी मन के किसी कोने में कहीं कोई दबी-छुपी ख्वाहिश मुझे उसके सामने जाने को विवश...

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क्या मैं पैसे खाती हूं! By Saroj Prajapati

बड़े शहर में रहने के कारण उनके खर्चे काफी बढ़ने लगे थे। कितना भी देखभाल कर खर्च करती है लेकिन महीने का अंत आते आते लाख चाहने के बाद भी बचत तो दूर खर्चे पूरे करने भी दूभर होने लगे थ...

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निष्ठा By जॉन हेम्ब्रम

शाम का वक्त था परिणीति अपनी मां के लिए दवाइयां खरीदने बाजार गई हुई थी। उसके पिता बचपन में ही चल बसे थे उसका एक बड़ा भाई और सिर्फ मां थी,लेकिन उसकी मां अक्सर किसी बीमारी से पीड़ित ह...

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मैं यमुनानगर हूँ By Jatin Tyagi

यमुना नगर :- हरियाणा का एक ऐसा जिला जिसे भारत विभाजन के समय लोगो ने बसाया । जिन्हें हम रिफ्यूजी कहते हैं । यमुना नगर को आजादी के समय में यमुना नगर नहीं कहा जाता था । आज मेरा शहर इत...

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फेसबुक आशिक़ी By Rama Sharma Manavi

मेरी इकलौती 19 वर्षीया बेटी शिवी बीकॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा है,बेहद चुलबुली,हमेशा खिलखिलाने वाली लेकिन पढ़ाई के प्रति पूर्ण गम्भीर,वह सीए बनना चाहती है।उसकी तीन अच्छी फ्रेंड्स हैं...

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गुलाम भारत में खुली एक छोटी सी दुकान कैसे बनी आजाद भारत का नंबर वन ब्रांड By Jatin Tyagi

हल्दीराम के प्रोडक्ट्स लगभग हर घर में इस्तेमाल किए जाते हैं. वहीं किसी भी पार्टी में नाश्ते के तौर पर लगाई जाने वाली नमकीन बिना हल्दीराम के अधूरी सी है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि...

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कितना बदल गया इंसान By S Sinha

                                                    लेख -  कितना बदल गया इंसान    आज हम दशकों बाद  अपने बीते दिनों , ख़ास कर बचपन की धूमिल यादों को  ,  साफ़ साफ़ देखने का प्रयास कर रह...

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अपहरण - भाग ४   By Ratna Pandey

रमेश ने समझाते हुए कहा, "अशोक हम कोई गुंडे नहीं हैं। हमारे लिए हर लड़की, हर नारी, इज़्जत की पात्र है। हम उसे अगवा ज़रूर करेंगे लेकिन कुछ और नहीं। हम उसके साथ बहुत ही इज़्जत से पेश आएँ...

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सिर माथे By Deepak sharma

’’कोई है?’’ रोज की तरह घर में दाखिल होते ही मैं टोह लेता हूँ। ’’हुजूर!’’ पहला फॉलोअर मेरे सोफे की तीनों गद्दियों को मेरे बैठने वाले...

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स्वीकृति - 14 By GAYATRI THAKUR

बड़के चाचा के इस दावे से, कि पिछले 2 दिन से होटल के उस कमरे में जो महिला बंद पड़ी थी उसे वह जानते है, वह उनकी ही परिचित हैं , पुलिस वाले ने राहत की सांस ली कि चलो.., इस मामले से जल...

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उत्तरजीवी By Deepak sharma

विभागाध्यक्ष की ऊंची एड़ी की सैंडिल अपनी धमक के साथ विभाग की ओर तेजी से बढ़ रही थी। लिव ! लिव ! लिव ! सुधा ने मन ही मन दोहराया और मुस्कराई । पंद्रह दिन पहले अस्पताल से लौटकर जब वह अप...

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एक खूबसूरत सफर By Rama Sharma Manavi

सत्य ही कहा गया है कि दुनिया बहुत छोटी है, कब किस मोड़ पर कौन बिछड़ा हुआ मिल जाय कुछ कहा नहीं जा सकता था।मैंने स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि अब कभी जिंदगी में उससे मुलाकात हो पाएगी।ह...

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घुटन - अंतिम भाग By Ratna Pandey

एक दिन कुमुदिनी ने तिलक से कहा, "तिलक भैया आप क्यों मेरी मम्मी को यह बात नहीं बता देते। बता दो ना? मेरे पापा, मम्मी से बहुत डरते हैं। यदि माँ के सामने वह स्वीकार कर लेंगे तो शायद फ...

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कॉन्डम और प्रेम के हालात By बिट्टू श्री दार्शनिक

"कॉन्डम" स्कूल जाते बच्चे से ले कर के आज की पीढ़ी के हर बूढ़े लोग तक इस शब्द को जानते है।यह शब्द उस वस्तु के लिए उपयोग किया गया है जो की एक पतले से प्लास्टिक रबर के बने गुब्बारे जै...

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अय्याश--(अन्तिम भाग) By Saroj Verma

शौक़त के घरवाले उन पर दबाव बनाने लगें,यहाँ तक कि शौक़त की अम्मी और अब्बाहुजूर भी चाहते थे कि कैसे भी उन पर दबाव बनाकर हमारा उनसे तलाक़ करवा दिया जाएं, वें सभी इस मक़सद में कामयाब भी हो...

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शेष जीवन (कहानियां पार्ट14) By Kishanlal Sharma

अपने दो बेटों और एक बेटी की शादी वह कर चुके थे।शादी करने से पूर्व उन्होंने अपने बच्चों की राय जानना भी जरूरी नही समझालेकिन रमेश को विश्वास था कि उसके साथ ऐसा नही होगा।उसके ऐसा सोचन...

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गरीब बाप - 1 By Mintu Paswan

नमस्कार दोस्तों मैं आप के बीच एक ऐसा कहा एक गरीब कि ज़िन्दगी क्या होती हैं। यह एक कहानी नहीं सच्चाई है । भारत का एक ऐसा राज्य जो गरीबों का राज्य नी लेकर आया हूँ ,जिससे पता चलता है...

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बंद हो चुकी खिड़की By Dr pradeep Upadhyay

बंद हो चुकी खिड़कीआज बत्तीस साल के बाद उससे सामना हुआ था।पहले तो सोचा भी कि उसके सामने नहीं जाऊं। फिर भी मन के किसी कोने में कहीं कोई दबी-छुपी ख्वाहिश मुझे उसके सामने जाने को विवश...

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क्या मैं पैसे खाती हूं! By Saroj Prajapati

बड़े शहर में रहने के कारण उनके खर्चे काफी बढ़ने लगे थे। कितना भी देखभाल कर खर्च करती है लेकिन महीने का अंत आते आते लाख चाहने के बाद भी बचत तो दूर खर्चे पूरे करने भी दूभर होने लगे थ...

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निष्ठा By जॉन हेम्ब्रम

शाम का वक्त था परिणीति अपनी मां के लिए दवाइयां खरीदने बाजार गई हुई थी। उसके पिता बचपन में ही चल बसे थे उसका एक बड़ा भाई और सिर्फ मां थी,लेकिन उसकी मां अक्सर किसी बीमारी से पीड़ित ह...

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मैं यमुनानगर हूँ By Jatin Tyagi

यमुना नगर :- हरियाणा का एक ऐसा जिला जिसे भारत विभाजन के समय लोगो ने बसाया । जिन्हें हम रिफ्यूजी कहते हैं । यमुना नगर को आजादी के समय में यमुना नगर नहीं कहा जाता था । आज मेरा शहर इत...

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फेसबुक आशिक़ी By Rama Sharma Manavi

मेरी इकलौती 19 वर्षीया बेटी शिवी बीकॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा है,बेहद चुलबुली,हमेशा खिलखिलाने वाली लेकिन पढ़ाई के प्रति पूर्ण गम्भीर,वह सीए बनना चाहती है।उसकी तीन अच्छी फ्रेंड्स हैं...

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गुलाम भारत में खुली एक छोटी सी दुकान कैसे बनी आजाद भारत का नंबर वन ब्रांड By Jatin Tyagi

हल्दीराम के प्रोडक्ट्स लगभग हर घर में इस्तेमाल किए जाते हैं. वहीं किसी भी पार्टी में नाश्ते के तौर पर लगाई जाने वाली नमकीन बिना हल्दीराम के अधूरी सी है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि...

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कितना बदल गया इंसान By S Sinha

                                                    लेख -  कितना बदल गया इंसान    आज हम दशकों बाद  अपने बीते दिनों , ख़ास कर बचपन की धूमिल यादों को  ,  साफ़ साफ़ देखने का प्रयास कर रह...

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