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उसने कहा तुम्हारी आँखे बड़ी प्यारी है… 👀 मैंने कहा अक्सर तेज़ बारिश के बाद मौसम सुहाना लगता है..!! 🙃
ना शिकवा था लबों पर, ना कोई दिखावा था, हाथ में जलती लौ थी, कलाई पर लाल कलावा था। वो चुपचाप नदी के तट पर, जाने क्या लिख रही थी, एक नन्हे से दीपक में, शायद पूरी दुनिया रख रही थी। नदी की बहती लहरें भी, पल भर को ठहर-सी गईं, जब उसकी हथेली से कुछ सुनहरी किरणें उतर सी गईं। वो दीप नहीं था केवल, कोई ख़्वाब बह रहा था, अँधेरी रात के सीने में, कोई जवाब बह रहा था। कलाई पर बँधा वो धागा, अटूट विश्वास की निशानी था, हथेली से छूटा वो दीपक, किसी मासूम मन्नत की कहानी था। लहरों ने भी बड़े अदब से, उसे अपने आगोश में लिया था, जैसे उस नन्हे चिराग़ से, सदियों पुराना कोई रिश्ता रहा था । झुकी पलकों के साये में, अटूट यक़ीन समाया था, शीतल जल के दर्पण पर, उसका चेहरा नूर बन आया था। दूर तलक वो दीपक फिर, लहरों के संग बहता गया, रात के गहरे सन्नाटे में, उम्मीद का रंग भरता गया। जो बात लबों तक आकर भी, कभी न जा सकी कही, वो बात उस जलते दीये ने, सीधे नदी से जाकर ही कही । कुछ ख़्वाब थे जिन्हें उसने, उस रोशनी के साथ बहाया, कुछ नाम थे जिन्हें उसने, अपनी दुआओं में छुपाया। और जब वो दीपक आँखों से, दूर कहीं खो गया, न जाने क्यों लगा मुझे— जैसे उसका अपना कोई, उसके दिल के और क़रीब हो गया। दृश्य: घाट के दूसरी तरफ़ से 🌊🪔 Credit : किसी की तस्वीर 😊
Someone asked Me: "Why do You stay silent during pain?" Me answered: "A teacher is always quiet during the test."
सितारों से भरी हुई रातें पसंद है… बेवजह की हुई उसकी बातें पसंद है… तारीफ़ के क़ाबिल है उसके बाल भी पर, मुझे ज़्यादा उसकी आँखें पसंद है।। 👀❣️
हम उस समाज का हिस्सा है जहाँ… घरेलू लड़की से पूछते है, “कितना पढ़ी हो?” ओर पढ़ने वाली लड़की से पूछते है, ”घर के काम तो आते है न?”
हमारे बारे में सब कुछ जानने का दावा करते हो... तो सुनो, वो शख्स मेरे लिए सिर्फ 'इंसान' नहीं है। उस संग बारिश में भीगने का खुमार ऐसा, तेज़ बुखार में भी 'लबों' पे इंकार नहीं है॥ _Shivam D.
कुछ पंक्तियाँ पढ़ी और डूबने सा लगा वक्त ठहरा , आसमां चलने सा लगा जो सोचकर आया था यहाँ , वो अब गलत सा लगा इस बार शायद ... कोई अपना सा लगा ।। - Shivam Dhuriya
तुम्हारे साथ ज़रा लम्हें बिताने पर समय का यूँ गुज़रना, लगता है जैसे... मेरी घड़ी को तुमसे 'रश्क' और मुझे 'इश्क़' होने लगा है ।। (रश्क = ईर्ष्या) - Shivam D.
न जाने क्यूँ चाँद से एक रिश्ता सा लगता है इसे देखते ही दिल के अरमाँ, जुबाँ पे उछलने लगता हैं l और क्या कहूं, इस सितारे के बारे में ये हम, तो चाँद तुम सा लगता है ll - Shivam Dhuriya
बहुत गुरूर था सड़कों को अपनी लंबाई पे... मैंने इसे कदमों से पैदल ही नाप दिया था। मैं कभी भूख से व्याकुल, तो कभी पानी की तलाश में था, कहीं बच्चों के पैरों में दर्द, तो कहीं माताओं की आँख में पानी था॥ कभी पैरों में चप्पल थी, नहीं तो नंगे पैरों से दौड़ लगाया था अपनों के लिए ही दूर गया था, आज अपनों के लिए ही भागा था॥ कभी कुछ मिला तो खाया नहीं तो भूख को गले लगाया था, एक 'काल' से बचने की चिंता में मग्न... 'मति' का मारा मैं वहाँ क्यों सोने को जा रहा था? अब मुझे क्या पता, कि दूसरे 'काल' को वहीं से गुज़र के जाना था, शायद भूल गया था कि 'काल को हराना' मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन के बराबर था॥ और कोई नहीं... मैं देश का एक गरीब और अब तो मरा हुआ आदमी था, जो 'शिवम्' के हाथ से लिखकर आपको कुछ याद दिलाने वापस आया था!! दिनांक-08/05/2020 (औरंगाबाद रेल्वेट्रैक हादसा)
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