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हालात ए मुफलिसी में जेब जरा क्या हल्की हुई अपना कहने वालों की भीड़ भी धीरे धीरे घटती गई। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
बहुत शौक था उसे आईना दिखलाने का जब वक्त ने उसे आईना दिखलाया फिर क्यों वह उसे देखने से कतराया!! सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
जिंदगी और जिंदगी भर की कमाई लुटा दी जिस औलाद पर आखिर में उन्होंने ये सिला दिया कि तुमने हमारे लिए किया ही क्या!! सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
वक्त रहते जो नहीं करते वक्त की कद्र वक्त निकलने पर वो पछताते उम्र भर। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
आवेश और भावनाओं में बहकर लिए गए फैसले अक्सर आपको मुश्किल में डाल देते अगर थोड़ा सा संयम से लेंगे जो काम सभी मुश्किलों का मिल जाएगा निदान।। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
जहां मिले ना आपके आचार विचार वहां आगे बढ़ने से पहले करें थोड़ा सोच विचार।। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
कुछ फासला रहे दरम्यान तो अच्छा है सुना है! ज्यादा नजदीकियां अक्सर फासले बढ़ा देती है।। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
जहां बेइंतहा बढ़ने लगते जरूरतों के कद वहां से खुशियां पीछे खींच लेती अपने कदम।। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
अंधेरा तो यूं ही बदनाम है, ऐ जिंदगी! लोग तो अक्सर पैसों की खनक और रूप की चमक में उलझ राह भटक जाते हैं।। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
जिम्मेदारियों की गठरी सबके कांधों पर है किसी की हल्की और किसी की भारी है फर्क बस इतना सा कोई रोकर निभा रहा कोई हंसकर निभा रहा अपनी जिम्मेदारी।। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
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