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🙂मन की लालसा ☺️ मैं यह चाहती हूं, पर हो नहीं रही है। मन की मनवा ही खींचे, मान नहीं रही है। चाहती हूं छोड़ दु, पर छूट नहीं रही है। ऊंचे ख्याल से मन, छूट नहीं रही है। मां को मानव ही छोड़, सी रही है। अपने पर व्यंगय कसे, तो आंसु निकल रही है। नवीन ख्याल आवत है, सोच सोच कर उक सावत है। अक्षर मनवा चाहत है, पर हट नहीं रही है। कोशिश हम नहीं छोड़ेंगे, जब तक पा न लें।
सखी तुम ऐसे क्यों हो गई? जीवन है वह सबसे सुखी, जहां मन की इच्छाएं पूरी होती है। जब मन ही मन से रूठ जाए, तब कहां नूरी पूरी होती है। राखी तुम ऐसे क्यों हो गई?? आज भी वह दिन याद है जब , तुम अपने लिए नहीं अपने मन की। दासी थी फिर क्या हुआ कि, दासी ही महारानी बन गई मन की। जीवन की आश नहीं छोड़ना ,सखी क्योंकि यही तुम्हारी असली प्यास है। मन की दौड़ कुचल कर आगे बढ़ाना ,दोस्त क्योंकि यही तो तुम्हारी असली त्रास है। सखी क्या तुम बदलोगी?? - Anshu kumari
अकेले आए थे, अकेले जाएंगे। सच की आस में , जीवन की भड़ास में, मन की त्रास ने, सच की तलाश में, सब कुछ सिखा दिया , कि अकेले आए थे अकेले जाएंगे। आंखों से खात्मा ने, हृदय से परमात्मा में, धोखे से आत्मा ने, विश्व से रक्मा में, यह भी सिखा दिया, कि अकेले आए थे और अकेले जाएंगे। शायद यही शक्ल बनाया, भ्रम को बहुत दूर भगाया। यही जीवन का सजीवन बूटी कहलाया, माता-पिता से है यह आग्रह आया, एक बार तो प्राण भी लेना पर हाथ कभी ना छोड़ना, अकेले आए थे ,अकेले जाएंगे
प्रेम की तालाश बच्चे ढूंढ रहे प्रेम को, माता-पिता ढूंढ रहे बच्चे के प्रेम को, क्या प्रेम की तलाश पूरी होगी? कोई प्रेम कर रहा कुकर को, कोई प्रेम कर रहा गौ को, प्रेम का युद्ध चल रहा है। क्या प्रेम की तलाश पूरी होगी? प्रेम करने वाले प्रेम कर रहे हैं कैलाश से, प्रेम करने वाले प्रेम कर रहे कावा स, क्या उनकी प्रेम की तलाश पूरी होगी? सोच रहे माता-पिता की बच्चे प्रेम नहीं करते, क्या बच्चों की प्रेम की तलाश तुमने पुरी की? शायद की ही होगी। सुन सकता है तो सुन , हे श्रोता प्रेम का लेने को सब व्याकुल हैं। प्रेम पाने हेतु प्रेम को बांटना जरूरी है। है प्रेम अनूठी पर, प्रेम को तो प्रेम की आवश्यकता होती होग। बच्चों को तू समझ, तभी बच्चे भी तुम्हें समझेंगे। क्या प्रेम की दौड़ पूरी होगी??? - Anshu kumari
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