Quotes by Prithvi Nokwal in Bitesapp read free

Prithvi Nokwal

Prithvi Nokwal

@prithvinokwal403810
(6.2k)

एक अधूरी मुस्कान का मलाल
लगभग एक महीना पहले मेरी दुकान पर एक बच्चा आया था। उसकी उम्र कम थी, चेहरे पर मासूमियत थी और आँखों में एक सपना। वह एक बास्केटबॉल किट लेने आया था। वह उसे बहुत पसंद कर रहा था, शायद काफी समय से लेने की इच्छा भी रखता था।
लेकिन कुछ देर बाद उसके माता-पिता ने वह किट नहीं खरीदी। बच्चा चुप हो गया। उसके चेहरे की चमक अचानक फीकी पड़ गई। उसकी आँखों में जो उदासी थी, वह आज भी मेरे मन में कहीं ठहरी हुई है।
मैं सिर्फ एक सेल्समैन हूँ, दुकान का मालिक नहीं। उस दिन मेरे मन में बार-बार यही विचार आया कि काश मैं मालिक होता। शायद मैं उसे वह किट दे पाता, या कम से कम कुछ समय के लिए उसके चेहरे पर मुस्कान ला पाता।
मुझे दुख इस बात का नहीं कि एक सामान नहीं बिका। दुख इस बात का है कि एक बच्चे की छोटी-सी खुशी मेरी आँखों के सामने अधूरी रह गई और मैं चाहकर भी कुछ नहीं कर सका।
एक महीने बाद भी उस बच्चे का उदास चेहरा याद आता है। शायद इसलिए कि कभी-कभी इंसान को किसी अनजान व्यक्ति के लिए भी उतनी ही संवेदना महसूस होती है, जितनी अपने लोगों के लिए।
कुछ मुस्कानें बहुत छोटी होती हैं, लेकिन उनका अधूरा रह जाना दिल में लंबे समय तक एक मलाल छोड़ जाता है।

Read More

हार मान चुके हैं भाई इस जीवन से!
- Prithvi Nokwal

सब कुछ बदल गया माँ तेरे जाने के बाद!
- Prithvi Nokwal

जिसके करियर नहीं बना है पीछे पैसे का जुगाड़ नहीं है मुझे लगता है उसे शादी नहीं करनी चाहिए !

जीवन में इतना दुख क्यों है मेरे?

देश में AI, स्टार्टअप और इनोवेशन की बातें हो रही थीं,
और कांग्रेस अब भी “पुराने स्क्रिप्ट” से लॉगिन करने की कोशिश में लगी थी। 😄
AI कहता है – “डेटा बोलता है।”
पर यहाँ कुछ लोग अब भी “ड्रामा बोलता है” मोड में अटके हैं।
जब दुनिया क्लाउड पर शिफ्ट हो चुकी है,
तब कुछ नेताओं का सिस्टम अभी भी फ्लॉपी डिस्क ढूंढ रहा है।
भविष्य की राजनीति में
स्पीड, विज़न और टेक समझ ज़रूरी है,
वरना जनता खुद ही “अनइंस्टॉल” बटन दबा देती है।

Read More

समय बलवान है किसमें कितना दिमाग है कोई मायने नहीं रखता !

BORN TO LEAD , NOT TO FOLLOW

माँ, तू अब नहीं है मेरे सामने,
पर तेरी सीखें और दुआएँ हैं मेरे साथ।
तेरी यादें बन गई हैं मेरी ताकत,
तेरी ममता की छाया रहेगी सदा मेरे जीवन में।

Read More

नाना-नानी का घर बहुत बड़ा नहीं था, पर उसमें दिल भर देने वाली जगह थी। कच्चा आँगन, मिट्टी की खुशबू और सुबह-सुबह चूल्हे का धुआँ। मामा-मामी का अपनापन, नानी की मीठी डाँट, नाना की शांत मुस्कान— सब कुछ सादा, पर सच्चा। वो गाँव, वो गलियाँ, जहाँ शोर नहीं, सुकून रहता था। आज भी यादों में वही छोटा सा घर सबसे बड़ा लगता है।
- Prithvi Nokwal

Read More