Quotes by PAYAL PARDHI in Bitesapp read free

PAYAL PARDHI

PAYAL PARDHI

@payalpardhi731402
(1.1k)

/// #sad # and reality of life //❌meri kvitaye💕💕💕🙏💕🙏💕

💕असान हैं क्या??

जी लेता मैं तुझे आजीवन,
पर तू बता—ये ज़िंदगी,
जीना तुझे आसान है क्या?

जो खो गया,
उसे ढूँढ लेता अभी,
पर तू बता—ये बचपन,
ढूँढना तुझे आसान है क्या?

जो रूठ गया, उसे मना लेता,
जो बिछड़ गया, उसे पा लेता,
पर सच बता मुझे—
प्यार पाना आसान है क्या?

अगर आसानी से मिल जाता,
वो इतना ख़ास होता क्या?
बिना मेहनत के पा लेना,
सच में आसान है क्या?

पहुँच पाता ,वहाँ मैं एक दिन
रास्ते जहां को जाते हैं,
पर तू बता—ये मंज़िल,
पहुंचना इतना आसान है क्या?

पकड़ लेता तो यूँ न फिसलता,
बीता समय वापस लाना—
आसान है क्या?

पर इतना जान गया हूँ इस मौत को,
तू न आना इतनी जल्दी,
सब कुछ छोड़ कर जाना—
इतना आसान है क्या??

_PAYAL PARDHI

Read More

first latting go
( ना मिलना ही ठीक है )


बुरा है ये पल,
जब भूल जाना है तुमको,
कुछ ख़्वाब अधूरे ही ठीक हैं,

जानती हूँ,
दिल नहीं लगेगा बिना तेरे,
बिना देखे ही रहना,
अब ठीक है।

याद करूँगी हमेशा तुम्हें,
जब-जब ज़िंदगी मुरझाया करेगी,
पर कोशिश रहेगी न देखने की,
कुछ पल बिन तुम्हारे ही ठीक हैं।


दिल और दिमाग थक चुके हैं मेरे,
ना जाने ये कैसी माया है,
तुम हो तो सब कुछ ठीक लगे,
पर अब समझ लिया है —
तुम पास न हो,तो ही शायद ठीक है।

नए मोड़ पर मिलेंगे एक दिन,
मैं भूल जाऊँ और पूछूँ — कौन हो तुम?
तुम्हारा ज़िक्र तक न हो,
वही अब ठीक है।

— Payal Pardhi

Read More

💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕

Read More

मैंने कहा—
“आगे बढ़ते हैं,”
पर उसने मुझे रोक लिया।
ज़िंदगी मेरी बीतती गई,
और वो चैन से सोता रहा।

मेहनती आगे बढ़ते रहे,
मैं बेचारा देखता रहा।
आसमान को छूते रहे वो,
मैं अपाहिज-सा बना रहा।
बोल उठा उनका इतिहास भी,
मैं गूँगा बना रहा।
ज़िंदगी मेरी गुजर गई,
पर वो चैन से सोता रहा।

थक कर पूछा मैंने उससे—
“तू है कौन जो फ़ैसले लेता गया?”
डाँट कर बोला उसने—
“हम दोनों तो एक ही हैं।
तू करता रहा,
जो मैं करवाता गया।
तेरा आलस हूँ मैं,
जो तेरे भीतर पलता गया।
तू सोचता रहा—
मैं कल पर टालता गया।
सब कामयाब होते गए,
तू देख-देख जलता गया।
ज़िंदगी तेरी बीत गई,
मैं चैन से सोता गया।”

तेरा दुश्मन तू खुद ही था,
दोष किस्मत को देता गया।
जवानी तेरी बीत गई,
बुढ़ापा तेरा आ गया।
पंख लगा सब उड़ गए,
तू खुद के पंख नोचता गया।
ज़िंदगी तेरी बीत गई,
चैन से क्यों तू सोता रहा?

मैंने कहा—
“अब क्या करूँ?
वक़्त हाथ से फिसल गया।”
उसने कहा—
“जो करना है अब कर ले,
तुझे रोकते-रोकते
अब मैं भी तो थक गया।”


-----PAYAL 💕PARDHI.

Read More

one day, i become a writter,💕💕💕💕💕💕💕💕support me yaar💕💕💕💕💕💕Follo kro,

read my novel💕