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वर्षा का गीत लेखक: विजय शर्मा ऐरी, अजनाला, अमृतसरआसमान पर काले बादलों ने धीरे-धी...
क्या सच में हमारी परछाई हमें सुन सकती है? अगर ऐसा होता, तो क्या दुनिया के सारे ल...
एपिसोड 40: समाधि का द्वार और अंधेरे का विस्तार---शहर की बेचैनीसमाधि के द्वार से...
वो लड़की जो कभी नहीं हारीलेखिका: कांता जयपालभूमिकाकुछ कहानियाँ पढ़ने के लिए नहीं...
इस महा- श्रृंखला के रचनाकार लोकप्रिय लेखक एवं पूर्व पत्रकार, इकबाल राज हैं. यह क...
पल्लवी के मुँह से निकली उस कांपती हुई आवाज़—"मेरा हाथ छोड़ दो"—के बाद, सड़क के उस क...
अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 39 विश्वासघाती का नामरेगिस्तान की रात असंभव...
रहस्यमयी नक्शाffhहिमालय की ऊँची चोटियों पर सूरज की पहली क...
उधर देवपुर की सीमा पर, बवंडर के शांत होते ही पंडित विश्वनाथ दीनानाथ त्रिवेदी का...
लोकतंत्र की ज़मीनी सच्चाई और युवाओं की पुकार— सत्येंद्र कुमार "एस.टी.डी. मौर्य...
।।। एकांत ।।। ................ सब ने देखा फूल सा खिलता सदा जिसका बदन । कोई क्या जाने कि वह कैसे जिया एकांत में ।। जिन लवों की बात सुन सब खिलखिलाते मस्त हो।...
* जिंदगी किसी फिल्म से कम है क्या , किस मोड़ पर क्या होगा पता नहीं , अगर कुछ मिला नहीं इक क्षण पर कुछ घटा नहीं , मोड़ भी जिंदगी में रास्तों से ज़्यादा है , दुख चाहे कितने हों ह...
उदास हूं पर इस क़दर नही,, की तेरी खुशी भी न देख सकू,,, मैं वहां भी चुप रहती हूं,, जहां मेरे अपनो की खुशी हो ╭─❀⊰╯ ╨────────────━❥ ╭─?•••••••अंजू कुमारी••••• ╨───,,,,,,,,────...
रात साक्षी है ‘रात साक्षी है’ डॉ० सूर्यपाल सिंह की कविता पुस्तक है। इसमें सीता के अन्तिम रात की कथा है। इसे छह खंडों में प्रस्तुत किया जा रहा है। प्रथम खंड प्रस्तुत है। कथा...
‘’रत्नावली’’ पर एक दृष्टि बद्री नारायण तिवारी आज वातानुकूलित कमरों में बैठ कर जो लिखा जा रहा है उसका क्षणिक प्रचार तो मिल जायेगा किन्तु वह रचनायें कालजयी नहीं हो पातीं। भक्तवत्...
प्रेम के विविध रूप हैं।यह दुनिया का सबसे खूबसूरत एहसास है।रात्रि में अंबर के चंद्र,तारे, बादल,आकाशगंगा की धवल पट्टिका,पूरी पृथ्वी में पसरी निस्तब्धता और चारों ओर फैली चांदनी..........
इज़ाज़त... आज मुझे ये शाम सजाने की इज़ाज़त दे दोदिल-ओ-जान तुम पर लुटानेकी इज़ाज़त दे दोमिले जो दर्द या मिले सुकून - कुबूल है हमेंकभी रिहा ना हो पाए वैसे क़ैद होनेकी इज़ाज़त दे दो क...
डेफोड़िल्स ! - 1 तेरे झरने से पहले समर्पित नेह को, स्नेह को डेफोड़िल्स ही क्यों ? यह प्रश्न अवश्य मस्तिष्क में आया होगा दिलो-दिमाग को सताया होगा आख़िर जब इतने खूबस...
जीवन अनुनादों के संग में,धर्म धरा पर,पावन धरती। नद-नादी संगीत सुभेरी,जीवन को अल्हादित करती। थोड़ा सा अवलोकन कर लो,यहाँ पर आकर मेरे भाई। भारत को ही स्वर्ग बनाती,पंचमहल की प...
सरस्वती मॉं बन्दना, ज्ञान ज्योति उर बार। स्वीकारो मम प्रार्थना, करदो मॉं उद्धार ।।1।। गौरी सुत, गणपति करूं, बिनती बारम्बार। विधा, बुद्धि, उर में भरो, सुनलो शीघ्र पुका...
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