मेरे पास माँ है
Episode 4 — आधी रात का स्टेशन
[SFX: रात का सन्नाटा… दूर ट्रेन की सीटी… हवा की तेज़ आवाज़]
Narrator:
रात के ठीक बारह बज चुके थे।
पूरा रेलवे स्टेशन लगभग सुनसान था।
कुछ बुझती हुई लाइटें…
पटरियों पर पसरा अंधेरा…
और दूर से आती ट्रेन की आवाज़।
लेकिन उस अंधेरे में अकेला खड़ा था—
आरव।
उसके हाथ में वही पुरानी लाल गुड़िया थी।
और जेब में वह कागज़…
जिस पर लिखा था—
“अपनी बहन को जिंदा देखना चाहते हो… तो रात 12 बजे पुराने रेलवे स्टेशन पर अकेले आना।”
आरव ने चारों तरफ देखा।
आरव:
अनाया…
मैं आ गया हूँ।
लेकिन कोई जवाब नहीं आया।
अचानक…
[SFX: पायल की हल्की आवाज़]
छन… छन…
आरव ने पीछे मुड़कर देखा।
एक लड़की धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ रही थी।
चेहरा आधा दुपट्टे से ढका हुआ था।
आरव की धड़कन तेज़ हो गई।
आरव:
अनाया?
लड़की रुक गई।
कुछ सेकंड तक दोनों एक-दूसरे को देखते रहे।
फिर लड़की ने अपना चेहरा ऊपर किया।
आरव की आँखों में आँसू आ गए।
आरव:
तुम…
लड़की की आँखें भी भर आईं।
लड़की:
भैया…
आरव जैसे पत्थर का हो गया।
बीस साल से जिस आवाज़ को उसने सिर्फ अपनी धुंधली यादों में सुना था…
आज वही आवाज़ उसके सामने थी।
आरव:
अनाया…
वह दौड़कर उसके पास गया।
दोनों भाई-बहन एक-दूसरे से लिपट गए।
[SFX: emotional music]
अनाया:
भैया… मुझे लगा था मैं तुम्हें कभी नहीं देख पाऊँगी।
आरव:
तुम इतने साल कहाँ थीं?
अनाया रोते हुए बोली—
अनाया:
मुझे नहीं पता।
जब से मुझे होश आया…
मुझे बताया गया कि मेरा परिवार मर चुका है।
आरव का दिल टूट गया।
आरव:
लेकिन माँ जिंदा है।
अनाया अचानक पीछे हट गई।
अनाया:
माँ?
उसकी आँखों में डर उतर आया।
आरव:
हाँ… माँ ने मुझे सब बताया।
अनाया ने सिर हिलाया।
अनाया:
नहीं भैया…
माँ ने तुम्हें सब नहीं बताया।
आरव चौंक गया।
आरव:
क्या मतलब?
अनाया कुछ बोलती…
उससे पहले पीछे से आवाज़ आई—
अजनबी:
क्योंकि तुम्हारी माँ के पास अभी भी एक राज़ है।
आरव तुरंत पीछे मुड़ा।
एक आदमी अंधेरे से बाहर आया।
आरव उसे देखते ही पहचान गया।
आरव:
तुम!
वही आदमी…
जिसकी तस्वीर उसे Episode 2 में दिखाई गई थी।
वही आदमी जिस पर उसके पिता की हत्या का शक था।
आरव अनाया के आगे खड़ा हो गया।
आरव:
मेरी बहन से दूर रहो!
अजनबी मुस्कुराया।
अजनबी:
तुम्हारे पिता भी यही कहते थे।
आरव गुस्से से आगे बढ़ा।
आरव:
तुमने मेरे पिता को मारा था?
अजनबी चुप रहा।
आरव:
जवाब दो!
अजनबी ने अपनी जेब से एक पुरानी घड़ी निकाली।
अजनबी:
यह घड़ी पहचानते हो?
आरव ने घड़ी को देखा।
उसकी साँस रुक गई।
आरव:
ये…
ये पापा की है।
अजनबी:
हाँ।
आरव:
ये तुम्हारे पास कैसे आई?
अजनबी धीरे-धीरे आरव के करीब आया।
अजनबी:
क्योंकि तुम्हारे पिता की मौत वाली रात…
मैं उनके साथ था।
आरव के चेहरे पर गुस्सा और डर दोनों थे।
आरव:
तो फिर सच बताओ!
अजनबी ने कहा—
अजनबी:
तुम्हारे पिता को जिस आदमी ने मारा…
मैं उसे जानता हूँ।
आरव:
कौन है?
अजनबी ने अनाया की तरफ देखा।
फिर आरव से कहा—
अजनबी:
तुम्हारी बहन जानती है।
आरव ने अनाया की तरफ देखा।
आरव:
अनाया?
अनाया काँपने लगी।
आरव:
तुम जानती हो पापा को किसने मारा?
अनाया ने आँखें बंद कर लीं।
अनाया:
हाँ…
आरव का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
आरव:
कौन?
अनाया ने धीरे से कहा—
अनाया:
जिस रात पापा मरे थे…
मैंने उसे देखा था।
आरव:
किसे?
अनाया ने जवाब देने के बजाय आरव का हाथ पकड़ लिया।
अनाया:
भैया…
हमें यहाँ से जाना होगा।
अभी।
आरव:
क्यों?
अनाया की आँखों में डर था।
अनाया:
क्योंकि उसे पता चल गया है कि मैं तुम्हें मिल चुकी हूँ।
अचानक स्टेशन की सारी लाइटें बंद हो गईं।
[SFX: बिजली बंद… सन्नाटा…]
अंधेरा।
फिर…
धाँय!
गोली चलने की आवाज़।
अनाया चीख पड़ी।
आरव:
अनाया!
आरव ने उसे पकड़ लिया।
लेकिन तभी दूसरी गोली चली।
धाँय!
अजनबी जमीन पर गिर पड़ा।
आरव:
तुम्हें गोली लगी?
अजनबी ने अपने सीने पर हाथ रखा।
खून निकल रहा था।
वह गिरते-गिरते आरव के पास आया।
उसने आरव के कान में सिर्फ इतना कहा—
अजनबी:
अपनी माँ पर भरोसा मत करना…
आरव:
क्या?
अजनबी:
क्योंकि…
तुम्हारे पिता की मौत के पीछे…
तुम्हारी माँ अकेली नहीं थी।
अजनबी बेहोश होकर गिर गया।
आरव स्तब्ध रह गया।
आरव:
माँ?
अनाया ने आरव का हाथ कसकर पकड़ लिया।
अनाया:
भैया…
चलो!
आरव:
नहीं।
अब मैं कहीं नहीं जाऊँगा।
मुझे सच चाहिए।
तभी दूर से पुलिस की गाड़ियों की आवाज़ आने लगी।
[SFX: पुलिस siren]
अनाया घबरा गई।
अनाया:
भैया, पुलिस को देखकर मैं नहीं रुक सकती।
आरव:
क्यों?
अनाया ने उसकी आँखों में देखकर कहा—
अनाया:
क्योंकि पुलिस के रिकॉर्ड में…
मैं बीस साल पहले मर चुकी हूँ।
[SFX: तेज़ dramatic hit]
आरव की आँखें फैल गईं।
आरव:
क्या?
अनाया पीछे हटने लगी।
अनाया:
भैया…
अगर पुलिस ने मुझे देख लिया…
तो सिर्फ मैं नहीं…
तुम भी नहीं बचोगे।
[SFX: suspense music]
Narrator:
आरव के सामने अब सिर्फ एक बहन नहीं थी…
बल्कि बीस साल से छिपी हुई एक पूरी सच्चाई थी।
एक ऐसी सच्चाई जिसमें…
उसके पिता की मौत…
उसकी बहन का गायब होना…
उसकी माँ की खामोशी…
और आज रात हुई गोलीबारी…
सब एक-दूसरे से जुड़े हुए थे।
लेकिन आरव को अभी यह नहीं पता था…
कि उसी रात उसके घर में उसकी माँ अकेली नहीं थी।
कोई पहले से उसका इंतज़ार कर रहा था।
और उस आदमी के हाथ में था—
आरव के पिता की दूसरी चि
ट्ठी।
जिस पर सिर्फ एक लाइन लिखी थी—
“अगर आरव को यह चिट्ठी मिल गई… तो समझो उसकी माँ ने मुझे धोखा दिया है।”
जारी रहेगा…
❤️ Episode 5 में…
आरव घर लौटता है और अपनी माँ से पहली बार सीधा सवाल करता है—
“क्या आपने पापा को धोखा दिया था?”
लेकिन माँ के जवाब से पहले…
दरवाज़े के पीछे छिपा आदमी सामने आता है।
और आरव उसे देखते ही पहचान जाता है।
वह आदमी वही है… जिसे आरव बीस साल से अपना पिता समझता आया था।