Hindi in Hindi Drama by Leela nagetiya books and stories PDF | प्यार की एक नई शुरुआत - 3

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प्यार की एक नई शुरुआत - 3

एक तरफ मम्मी- पापा और मायरा आपस में प्यार से बातें कर रहे थे, तो वहीं दूसरी तरफ खडा रोहन लगातार आदित्य को घूर रहा था. उसकी आँखें आदित्य के चेहरे पर टिकी थीं. रोहन का इस तरह देखना आदित्य को बहुत अजीब लग रहा था, उसके दिल में एक घबराहट सी होने लगी थी.

रोहन की उस अजीब नजर से बचने के लिए आदित्य तुरंत बात संभालते हुए कहता है, अंकल- आंटी, आप लोग मायरा से बात करिए, मैं जरा डॉक्टर से पूछकर आता हूँ कि वो इसे डिस्चार्ज कब करेंगे।

जैसे ही आदित्य जाने के लिए मुडता है, तभी रोहन पीछे से कहता है, चलो, मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ।

आदित्य थोडा झेंपते हुए कहता है, अरे नहीं. तुम रहने दो, तुम अभी तो आए हो।

लेकिन रोहन वहीं खडे- खडे आदित्य को और ज्यादा घूरने लगता है. उसकी आँखों का वो तीखापन देखकर आदित्य अंदर से बिल्कुल घबरा जाता है. वह तुरंत बात बदलते हुए कहता है, मेरा मतलब. आप तीनों मायरा के साथ ही रहिए, मैं अकेला चला जाऊँगा।

तभी पापा बीच में बोलते हैं, हाँ रोहन बेटा, आदित्य बेटा चला जाएगा अकेला. तुम इतने दिनों बाद आए हो, अपनी बहन से बात करो।

बेड पर लेटी मायरा वहाँ चल रही इस अजीब सी सिचुएशन को अच्छी तरह समझ जाती है. वह भाँप लेती है कि रोहन की वजह से आदित्य असहज हो रहा है. वह तुरंत बात को अपने ऊपर लेते हुए कहती है, भैया. आप मुझसे मिलना नहीं चाहते क्या? आप मुझसे बिल्कुल प्यार नहीं करते?

रोहन मायरा की बात सुनकर एकदम पिघल जाता है और हडबडाकर कहता है, नहीं मायरा! तुम गलत समझ रही हो. मैं तो बस डॉक्टर से तुम्हारी हालत पूछने जा रहा था. ठीक है, आदित्य चला जाएगा. अब बताओ, तुम कैसी हो? मैं तुम्हारे पास ही हूँ।

आदित्य कमरे से बाहर जाते- जाते मुडकर एक बार मायरा की तरफ देखता है. मायरा उसे दिलासा देने के लिए धीरे से मुस्कुरा देती है. आदित्य भी एक गहरी साँस लेकर बाहर निकल जाता है.

माँ मायरा के चेहरे को बडे प्यार से सहलाते हुए पूछती हैं, अब कैसी है मेरी बच्ची? और ये सब अचानक हुआ कैसे तुम्हारे साथ? कल फोन पर तो तुम बिल्कुल ठीक थी।

मायरा थोडा हिचकिचाती है, पर अपनी बात संभालते हुए कहती है, मम्मी. वो एक्चुअली मैं डाइटिंग कर रही थी ना, तो शायद उसी वजह से बहुत ज्यादा कमजोरी आ गई थी. बस इसीलिए मैं बेहोश हो गई थी. वो तो अच्छा हुआ कि आदित्य सही वक्त पर वहाँ था और मुझे तुरंत अस्पताल लेकर आया।

पापा यह सुनते ही थोडे गंभीर हो जाते हैं और लाड जताते हुए कहते हैं, मेरी बेटी को डाइटिंग करने की बिल्कुल कोई जरूरत नहीं है! वह जैसी भी है, हमारे लिए बिल्कुलपरफेक्ट है।

तभी पास में खडा रोहन मायरा को चिढाते हुए बीच में बोल पडता है, हाँ पापा, यह अगर फूलकर गुब्बारा भी हो जाएगी ना, तब भी हमें कोई दिक्कत नहीं है!

रोहन की बात सुनकर माँ उसे आँखें दिखाती हैं और कहती हैं, चुप कर रोहन! तुम्हें क्या पता हम लडकियों को खुद को फिट और पतला रखने के लिए कितनी मेहनत करनी पडती है। फिर वह मायरा की तरफ मुडकर बडे प्यार से समझाती हैं, बेटा, मैं जानती हूँ तुम्हारे मन की बात. अपनी जवानी के दिनों में मैं भी ऐसी ही पागलों की तरह डाइटिंग करती थी. लेकिन अब यह पागलपन बंद! क्योंकि मेरी प्रिंसेस तो पहले से ही इतनी प्यारी और अच्छी है।

पापा भी माँ की बात का समर्थन करते हुए मुस्कुरा देते हैं. माँ आगे कहती हैं, आज मैं अपने हाथों से तुम्हें खाना खिलाऊँगी. तुम वैसे भी बहुत कम खाती हो, अब कोई बहाना नहीं चलेगा।

तभी गेट खुलता है और आदित्य अंदर आता है. वह सबके सामने आकर कहता है, अंकल- आंटी, मैंने डॉक्टर से बात कर ली है. उन्होंने कहा है कि मायरा अब पहले से काफी ठीक है, हम इसे आज ही घर ले जा सकते हैं. बस उसके थोडे बहुत रूटीन चेकअप बाकी हैं, वो रिपोर्ट्स आ जाएँ फिर हम इसे डिस्चार्ज करवा लेंगे।

यह सुनकर पापा तुरंत कहते हैं, जब तक सारे चेकअप पूरे नहीं हो जाते, मैं यहीं अस्पताल में रुकूँगा।

माँ उन्हें टोकते हुए कहती हैं, अरे, पर आपके ऑफिस का क्या? ऑफिस कौन जाएगा फिर?

पापा माँ की तरफ देखते हैं और बडे प्यार से कहते हैं, ऑफिस का क्या है हनी. मेरी बेटी से जरूरी मेरे लिए कुछ भी नहीं है।

माँ उन्हें समझाते हुए कहती हैं, अब वो बिल्कुल ठीक है, आप बिना वजह परेशान मत होइए और ऑफिस जाइए. शाम के टाइम हम सब घर पर एक साथ बैठकर खाना खाएँगे।

मायरा भी स्थिति को संभालते हुए मुस्कुराकर कहती है, हाँ पापा, आप प्लीज ऑफिस जाइए. मैं अब सच में बिल्कुल ठीक हूँ. फिर हम सब शाम के टाइम घर पर मिलते हैं ना।

पापा थोडे उदास मन से सिर हिलाते हैं और कहते हैं, चलो ठीक है, तुम सब कह रहे हो तो मैं जा रहा हूँ। फिर वह माँ की तरफ मुडकर कहते हैं, तुम्हें भी तो अपनी बेटी के लिए उसकी पसंद का अच्छा- अच्छा खाना बनाना होगा ना? उसके लिए शॉपिंग करनी होगी, फिर खाना बनाने में भी टाइम लगेगा. चलो, मेरे साथ ही गाडी में चल पडो।

माँ कहती हैं, हाँ, मैं बस थोडी देर में आ जाऊँगी, आप मेरी चिंता मत कीजिए।

तभी रोहन बीच में आकर कहता है, मॉम, आप पापा के साथ जाइए और चिंता बिल्कुल मत करिए. मायरा के पास मैं हूँ ना यहाँ, आप लोग आराम से जा सकते हैं।

मम्मी- पापा रोहन से कहते हैं, ठीक है बेटा, तुम यहाँ हो तो हम निकल रहे हैं।

इसके बाद रोहन मायरा की तरफ मुडता है और कहता है, मायरा, मैं मम्मी- पापा को बाहर गाडी तक छोडकर आता हूँ। यह कहकर रोहन कमरे से बाहर चला जाता है.

रोहन के बाहर जाते ही मायरा आदित्य से कुछ बोलना चाहती है, लेकिन इससे पहले कि वह कुछ बोल पाती, आदित्य तुरंत अपनी जैकेट संभालते हुए कहता है, ठीक है, फिर मैं भी अब चलता हूँ।

मायरा हैरान होते हुए बोलती है, अरे! तू कहाँ जा रहा है? तू तो मेरे ही साथ रुकेगा ना यहाँ?

आदित्य कंधे उचकाकर कहता है, अब मुझे यहाँ रुकने की क्या जरूरत है? रोहन है ना तेरे साथ. और वैसे भी, अब तो तू बिल्कुल ठीक हो गई है।

मायरा चिढती हुई कहती है, ये क्या बात हुई? तूने तो कहा था कि मैं तेरे साथ ही रुकूँगा और पूरे चौबीस घंटे तू मेरे साथ रहने वाला था ना?

आदित्य मजाकिया अंदाज में मुस्कुराते हुए कहता है, हाँ तो भाई, चौबीस घंटे हो गए हैं, इसलिए अब मैं चलता हूँ।

मायरा और चिढकर कहती है, झूठे! अभी चौबीस घंटे भी नहीं हुए हैं और तू अभी से मुझे छोडकर जा रहा है?

आदित्य थोडा गंभीर होकर खिडकी की तरफ देखता है और कहता है, यार मायरा, तूने देखा नहीं तेरा भाई मुझे कैसे घूर- घूर कर देख रहा था? तू क्या चाहती है कि मैं उसके हाथों मारा जाऊँ?

मायरा उसे दिलासा देते हुए कहती है, अरे ऐसा कुछ नहीं होगा, मैं हूँ ना तेरे साथ!

आदित्य तपाक से कहता है, भाई, इसी बात का तो डर है कि तू मेरे साथ है!

मायरा मुँह बनाते हुए कहती है, प्लीज यार रुक जा, मैं अकेले उस बोरिंग इंसान के साथ यहाँ नहीं रह सकती।

आदित्य हंसते हुए कहता है, अच्छा! तो तू उस बोरिंग इंसान से बचने के लिए अपने इस मासूम दोस्त को मरवाना चाहती है?

मायरा कहती है, तू Tension मत ले, कुछ नहीं होगा. अगर भाई ने कुछ भी कहा या पूछा, तो मैं सब संभाल लूंगी।

आदित्य मुस्कुराते हुए हार मान लेता है और कहता है, अब जब तुझसे दोस्ती की है, तो निभानी तो पडेगी ही! पर मुझे लगता है कि इस दोस्ती को निभाने के चक्कर में किसी दिन मुझे अपनी जान से हाथ धोना पडेगा।

मायरा मुस्कुराती हुई कहती है, टेंशन मत ले, सब ठीक रहेगा।

आदित्य एक ठंडी साँस भरता है और स्टूल पर बैठते हुए कहता है, यार, अगर तेरा छोटा भाई होता ना, तो मैं उसे चुटकियों में संभाल लेता. पर तेरा ये बडा भाई. कितना खडूस है! तू देखती नहीं है उसे? मुझे अच्छी तरह से पता है कि वह कितना बडा खडूस है।

मायरा कहती है, अच्छा, यह खडूस वाली बात छोडो ना तुम! मुझे तुमसे एक बहुत जरूरी बात पूछनी थी।

आदित्य उसकी गंभीरता को देखकर थोडा सीधा बैठ जाता है और बोलता है, हाँ बोल, क्या बात है?

मायरा सीधे आदित्य की आँखों में देखते हुए पूछती है, क्या मैं सच में सिर्फ कमजोरी की वजह से बेहोश हुई थी? मुझे अंदर से ऐसा नहीं लगता कि मैं साधारण तरीके से बेहोश हुई हूँ।

आदित्य उसे अजीब नजरों से देखता है और हंसते हुए कहता है, अरे, अगर तू बेहोश नहीं हुई होती, तो इस वक्त अस्पताल के बेड पर थोडी लेटी होती!

मायरा अपना सिर झटकती है और कहती है, मेरे कहने का मतलब समझो आदित्य! हाँ, मैं मानती हूँ कि मैं थोडी कमजोर हूँ, पर अचानक से ऐसे बेहोश हो जाना? इतनी कमजोर भी नहीं हूँ मैं कि चलते- चलते सीधे अस्पताल पहुँच जाऊँ. जरूर कुछ और बात है जो मुझे याद नहीं आ रही।

आदित्य उसका हाथ थपथपाते हुए बडे प्यार से समझाता है, तुझे अपने बारे में नहीं पता मायरा, तू सच में बहुत कमजोर है. डॉक्टर ने भी यही कहा है, इसलिए फालतू का दिमाग मत दौडा।

अभी आदित्य अपनी बात पूरी ही कर रहा था कि अचानक कमरे के हैंडल पर किसी का हाथ पडता है.

आदित्य हडबडाकर पीछे हटता है और डरते हुए फुसफुसाता है, और देख, बातें बंद कर अब! अगर तेरे इस खडूस भाई ने हम दोनों को इस तरह सीरियस होकर बात करते हुए सुन लिया ना. तो वो मुझे जिंदा नहीं छोडेगा!

दरवाजा खुलता है और रोहन की जगह एक नर्स अंदर आती है. नर्स को देखकर आदित्य के फेफडों में जैसे जान वापस आती है और वह चैन की साँस लेता है.

नर्स ट्रे टेबल के पास आकर कहती है, मैम, आपकी दवाइयों का समय हो गया है।

आदित्य तुरंत आगे बढता है और नर्स से कहता है, हाँ, इसे दवाई खिलानी है ना? लाइए, मुझे दे दीजिए, मैं खुद इसे दवाई खिला दूँगा।

नर्स दवाई और पानी का ग्लास रखकर कमरे से बाहर चली जाती है. आदित्य दवाई की गोलियाँ मायरा की तरफ बढाता है और धीरे से कहता है, तू पहले यह दवाई खा. और जो बात तू पूछ रही थी ना, तेरी तसल्ली के लिए मैं खुद इस बारे में सब कुछ पता लगाऊँगा।

मायरा दवाई हाथ में लेते हुए हैरान होकर पूछती है, पूछ लेगा मतलब?

आदित्य चारों तरफ देखते हुए फुसफुसाता है, हाँ, मतलब मैं पता लगाता हूँ कि तेरी बेहोशी के पीछे की यह बात सच है या झूठ. डॉक्टर से या किसी और से, मैं सब पता कर लूँगा।

मायरा के चेहरे पर एक राहत भरी मुस्कान आ जाती है. वह भावुक होकर कहती है, आदित्य, सच में थैंक यू! तू हमेशा मुझ पर भरोसा करता है।

तभी अचानक कमरे के बाहर कॉरिडोर में किसी के भारी जूतों की आवाज सुनाई पडती है—खट. खट. खट!

आदित्य के चेहरे का रंग उड जाता है, वह चौंककर दरवाजे की तरफ देखता है और घबराकर कहता है, अरे बाप रे! ये जूतों की आवाज. तेरा भाई सच में वापस आ गया क्या?

मायरा उसकी घबराहट देखकर मुस्कुराती है और कहती है, अरे बुद्धू, वो सिर्फ मम्मी- पापा को बाहर गाडी तक छोडने गया था. मेरा भाई घर थोडी गया

था जो इतनी जल्दी नहीं आता, उसे वापस तो अंदर आना ही था ना!