अपने दादा की बात की तुम्हारे दोस्त वो अब आ नहीं पाएंगे यह सुन कर आनंद को चिंता होने लगी उसने अपने दादा से पूछने की कोशिश की पर दादा खामोश हो कर वहां से चले गए दादा की इस खामोशी को देख अब वह और भी परेशान होने लगा उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे तभी पीछे से उसके पापा आए उन्होंने आनंद के कंधे पर हाथ रखा आनंद पहले से डरा हुआ था और उस हाथ के स्पर्श होने से वह डर गया अपने बेटे को डरा हुआ देख पापा ने कहा
पापा..........आनंद क्या हुआ बेटे तुम इतने डरे और घबराए हुए क्यों हो?
आनंद..........(डरते हुए) पापा पापा आज इस पार्टी में मेरे कुछ दोस्त भी आने वाले थे। पर वह अभी तक आए नहीं जब मैने ये बात दादा को बताई तो उन्होंने कहा कि तुम्हारे दोस्त अब आ नहीं पाएंगे इसलिए में डरा हुआ हु, पापा क्या दादा सच कह रहे थे? क्या वहां कुछ खतरा है?
पापा...........अरे बेटा तू बेकार में चिंता कर रहा है तुझे पता है न तेरे दादा ज्यादा पढ़े लिखे नहीं है नाही वह इस गांव से कभी बाहर गए है और वैसे भी गांवों में ऐसी कई काल्पनिक बातें चर्चा में होती है तुझे इन सब बातों से डरना नहीं चाहिए
आनंद........ सचमे ऐसा ही है न?
पापा.........हा बेटे चिंता मत कर तेरे दोस्त कही कुछ काम की वजह से नहीं आ पाए होंगे हो सकता है कल सुबह वह आ जाए
आनंद..........हा ये भी हो सकता है
पापा..........अच्छा अब चल पार्टी में सब लोग तुझे ही ढूंढ रहे है और तेरी मम्मी भी कह रही है कि जिसके लिए पार्टी रखी है वही यहां मौजूद नहीं है
आनंद..........हा आप चलिए में एक कॉल कर के आता हु
पापा.........(हंसते हुए) जल्दी आ जाना वरना तेरा गुस्सा तेरी मम्मी मुझ पर उतार देगी और मुझे डांटने लग जाएगी
उसके पापा वहां से चले गए और आनंद ने एक आखरी बार उन्हें कॉल किया पर रिंग जा रही थी लेकिन कोई उठा नहीं रहा था अब वह परेशान था पर वह खुद से बाते करके खुद को दिलासा दे रहा था
आनंद.........नहीं नहीं चिंता करने की कोई बात नहीं है वो लोग किसी काम की वजह से नहीं आए होंगे दादा की बातों में ध्यान नहीं देना है पापा की बात याद रखनी है कल सुबह में अपने दोस्तों से मिलूंगा और पिटाई करते हुए पूछूंगा इतनी देर क्यों लगा दी हा यही सही है उन्हें कुछ नहीं होगा
आनंद अपनी पार्टी में चला गया वहां काफी लोग आए हुए थे वह अपने मम्मी पापा के साथ खड़ा था लोगो और रिश्तेदारों ने उसे उसके जन्मदिन और नए घर के लिए बधाई दी और देखते ही देखते सब हो जाने के बाद पार्टी खत्म हो गई और आनंद इन सब चीजों की वजह से काफी थक गया था
मम्मी.........आनंद बेटा लगता है तुम काफी थक गए हो पार्टी तो खत्म हो गई जाओ अब तुम अपने कमरे में जाके सो जाओ
आनंद........हा में जा रहा हु आप दोनों को गुड नाइट
वह अपने कमरे की ओर चला गया और वह अपने बेड पर लेटते ही वह सो गया
अगली सुबह आनंद उठा वह अपने कमरे से बाहर आया और नीचे किचन में गया जहां उसकी मम्मी चाय बना रही थी उन्होंने अपने बेटे को देखा जिसकी नींद अभी तक पूरी तरह से नहीं खुली थी उन्होने कहा
मम्मी.........गुड मॉर्निंग
आनंद........गुड मॉर्निंग
मम्मी.........क्या हुआ रात को अच्छे से सोए नहीं क्या? नींद पूरी नहीं हुई
आनंद.......(उबासी लेते हुए) देर से सोया था इसलिए नींद पूरी नहीं हुई
मम्मी........अच्छा जाओ बाहर आंगन में घूमो फिरो ताजी हवा लो नींद खुलेगी तुम्हारे पापा भी बाहर ही है चाय बनने के बाद सब चाय पियेंगे
आनंद वहां से आंगन की ओर चला गया जहां उसके पापा कुर्सी पर मोबाइल में अखबार पढ़ रहे थे आनंद वही अपने आंगन में मॉर्निंग वॉक करने लगा
आनंद........गुड मॉर्निंग पापा
पापा........गुड मॉर्निंग बेटा अच्छे से सोए रात को? वैसे नींद पूरी नहीं हुई होगी काफी देर में हम सब सोए थे
आनंद..........हा
दोनों वहां पर अपने अपने काम में व्यस्त थे आनंद अभी अपने दोस्तों के बारे में भूल गया था चलते चलते उसने देखा कि लोगों की भीड़ कही जा रही थी उसने उन्हें देख अपने पापा से कहा
आनंद.........पापा क्या यहां लोग एक साथ सुबह सुबह मॉर्निंग वॉक पर जाते है क्या? देखिए
पापा........नहीं ऐसा तो नहीं है बात कुछ और है शायद पता करना होगा
उन्होंने भीड़ में से एक आदमी को आवाज लगाई और कहा
पापा..........सुनो राजू यहां आना तो
राजू..........जी भैया
पापा.........ये सारे लोग इतनी सुबह सुबह एक साथ जा कहा रहे है?
राजू..........अरे भैया आपको नहीं पता जंगल के छोटे वाले रास्ते में किसकी मौत हो गई है वहां पर पुलिस भी जांच पड़ताल करने के लिए आई है सारे लोग वही जा रहे है
यह सुन कर दोनों चौंक गए और तभी आनंद को अपने दोस्तों की याद आई इस बात ने उसे चिंतित कर दिया उसने तुरंत अपना फोन जेब से निकाला और अपने दोस्त को कॉल किया रिंग जाने लगी तभी किसी ने कॉल उठाया आनंद बोला
आनंद..........अरे यार कहा हो तुम लोग? यहां रात को आए क्यों नहीं? और फोन क्यों नहीं उठा रहे थे?
तभी फोन से एक अनजानी आवाज आई
..........जी आप कौन है? और जिस नम्बर पर आपने कॉल किया है क्या रिश्ता है आपका उनके साथ?
आनंद.........जी में आनंद हु ,और यह नम्बर मेरे दोस्त अभय का है पर आप कौन है? और अभय कहा है?
इंस्पेक्टर............में इंस्पेक्टर संजीव राणा हु आप जल्दी से यहां गांव पहुंचने के छोटे रास्ते पर आ जाइए
आनंद........क्या हुआ है? सर
इंस्पेक्टर........यह बात में फोन पर नहीं बता पाऊंगा आप जल्दी से यहां आ जाए
फिर उन्होंने कॉल कट कर दिया आनंद काफी चिंतित हो गया वह दौड़ते हुए घर के अंदर गया उसने अपनी बाइक की चाबी पकड़ी और बाइक पर सवार हो गया लेकिन उसे गांव तक पहुंचने वाले छोटे रास्ते का पता नहीं था उसने राजू को आवाज लगाई जो उसके पापा से बात कर रहा था
आनंद.........राजू तुम्हे पता है वह छोटा रास्ता कहा पर है?
राजू........हा भैया मुझे पता है
आनंद.........आओ मेरे साथ चलो वहां पर
दोनों बाइक पर बैठे और घटना स्थल की ओर चले गए जाते हुए आनंद के दिमाग में काफी अलग अलग विचार उसे परेशान करने लगे उसे उसके दादा की बताई बात भी याद आने लगी वह मन ही मन दुआ प्रार्थना कर रहा था कि उसके दोस्तों को कुछ न हुआ हो वे सब ठीक और सुरक्षित हो इसके साथ ही उसके दादा की बात भी उसके मन में गूंज रही थी
तेरे दोस्त अब आ नहीं पाएंगे, तेरे दोस्त अब आ नहीं पाएंगे
(आगे क्या होगा? क्या आनंद की मन की उथल पुथल शांत होगी? या मन की बेचैनी किसी दूसरी चीज में बदल जाएगी? दोस्तो की मौत की खबर सुन के क्या करेगा आनंद?)
(जानने के लिए पढ़िए कहानी का अगला भाग)
"पढ़ने के लिए धन्यवाद 🙂↕️"