Karmjali Kokh - 5 in Hindi Women Focused by kalpita books and stories PDF | कर्मजली कोख... - 5 (अंतिम भाग)

The Author
Featured Books
Categories
Share

कर्मजली कोख... - 5 (अंतिम भाग)

आज घर में अफरा-तफरी का माहौल था।
साजिया के फैसले से कोई खुश नहीं था।
सास नाराज़ थी, नंद ताने दे रही थी,
और आसिफ बेचैन होकर बार-बार एक ही बात पूछ रहा था —
“तुम पागल हो गई हो क्या?”
लेकिन इस बार
साजिया का फैसला अडिग था।
वह धीरे-धीरे कदम बढ़ाती हुई
अपने हाथों में बच्चे को संभाले
रेशमा के कमरे की तरफ बढ़ने लगी।
कमरे के अंदर
रेशमा अपने फर वाले गुड्डे को थपकियाँ देकर सुला रही थी।
कोई और औरत होती
तो शायद अब तक मर चुकी होती,
लेकिन रेशमा तो जैसे
मरना-जीना दोनों भूल चुकी थी।
“आपा…”
साजिया ने धीमे से आवाज़ लगाई।
“श्श्श…”
रेशमा फुसफुसाई,
“मेरा बेटा सो रहा है…
थोड़ी देर बाद आना…”
साजिया की आँखें भर आईं।
वह धीरे से उसके पास बैठी और बोली —
“आपका फ़रिश्ता… मेरे पास है…”
इतना कहकर
उसने अपना नवजात बेटा
रेशमा की गोद में रख दिया।
रेशमा का पूरा शरीर सिहर उठा।
उसने काँपती उंगली से
बच्चे के गाल को छुआ।
अचानक बच्चा जोर से रो पड़ा।
रेशमा बुरी तरह घबरा गई।
उसने पहली बार
अपनी गोद में पड़े किसी बच्चे की आवाज़ सुनी थी।
वह स्तब्ध होकर उसे देखती रही।
कभी उसके मुलायम गाल को छूती,
कभी उसकी नन्ही हिलती उंगलियों को
अपनी हथेली में दबा लेती।
फिर अचानक वह चीख उठी —
“उठाओ इसे…!
मेरी कोख कर्मजली है…!
मैं अपने बच्चे खा गई…!
मेरा शौहर मुझसे दूर हो गया…
सास-नंद दुश्मन बन गए…
मैं अभागन हूँ…
हटाओ इसे… जल्दी हटाओ…”
साजिया ने तुरंत
रेशमा को कसकर गले लगा लिया।
“नहीं आपा…
ऐसा नहीं कहते…”
उसकी आवाज़ भी आँसुओं में भीग चुकी थी।
“फलक का लिखा मिटा नहीं सकते…
लेकिन आप अभागन नहीं हैं।
देखिए…
यह आपका ही फ़रिश्ता है।
संभालिए इसे…”
साजिया भी फूट-फूटकर रोने लगी।
“मैं आपसे रश्क करती थी…
आपकी शान-शौकत देखकर…
लेकिन आप पर जो बीती है…
वो माँ बनकर समझ आया।”
उसने रेशमा का चेहरा दोनों हाथों में थाम लिया।
“आप गुनहगार नहीं हैं आपा…
जो बिना गुनाह के इतनी बड़ी सज़ा भुगत रही हैं…”
कुछ पल बाद
उसने बच्चे को रेशमा की बाँहों में ठीक से टिकाया और बोली —
“चलिए…
अपने घर चलते हैं।
हमें नहीं रहना इस नाम के खानदानी   घर में।
हम दोनों मिलकर पालेंगे
इस नन्हे फ़रिश्ते को…”
दोनों बहनें आँसू पोंछते हुए उठीं।
रेशमा ने काँपते हाथों से बच्चे को सीने से लगा लिया
और धीरे-धीरे दहलीज़ की तरफ बढ़ने लगी।
तभी पीछे से
सास की आवाज आई
"जाओ जाओ ...दोनों जाओ हम अपने आसिफ का दुबारा निकाह कर देंगे ..."
" तुम दोनों बहनों से भी अच्छे रिश्ते आ जायेगे मेरे भाई के लिए ..दफा हो जाओ " नंद चिल्ला कर बोली
तभी आसिफ गुस्से में अपनी मां और बहन पर चिल्ला पड़ा...
"क्यों मेरी जिंदगी बर्बाद करने में लगी हो दोनों...पहले भी मै आपकी बातों में आ गया और इतनी अच्छी बीबी का तिरस्कार किया ...बस अब और नहीं... मैं भी जा रहा हूं इनके साथ"

आसिफ की टूटी हुई आवाज़ गूँजी —
“रेशमा…!”
दोनों रुक गईं।
आसिफ की आँखें आँसुओं से भरी थीं।
“मुझे माफ़ कर दो…”
उसकी आवाज़ काँप रही थी,
“वारिस के लालच में मैं अंधा हो गया था।
पिता बनने के ख्वाब ने
मेरे अंदर के इंसान…और पति… दोनों को मार दिया था।”
वह धीरे-धीरे रेशमा के सामने आकर खड़ा हो गया।
“मुझे हमेशा अपना दर्द दिखाई देता रहा…
तुम्हारा नहीं।”
उसने हाथ जोड़ दिए।
“खुदा के लिए रहम करो…
मुझे माफ़ कर दो…"

पीछे खड़ी सास और नंद भी रो पड़ीं।
उन्होंने भी
रेशमा से अपने सलूक की माफी मांगी भले ही अपने बेटे और भाई के खोने के डर से

रेशमा चुप रही।
लेकिन इस बार
उसकी गोद खाली नहीं थी।
उसकी बाँहों में
एक नन्हा फ़रिश्ता था…
जो धीरे-धीरे उसकी उंगली पकड़कर
जैसे उसे फिर से जिंदगी की तरफ लौटा रहा था।

एक नई जिंदगी की शुरुआत होने जा रही थी ...
आसिफ रेशमा और बच्चे को पकड़ कर घर के अंदर ले जाने लगा...
साजिया की आंखों में आँसू थे । एक दम खाली हाथ खड़ी थी..
आसिफ वापिस मुड़ा और साजिदा का हाथ पकड़ कर बोला
" मै तुमसे भी माफी मांगता चाहता हूं...तुम्हारे साथ भी गलत हुआ.. मै वंश बढ़ाने के लिए सही गलत सब भूल गया था और मां की बातों में आ गया...तुम जो चाहती हो वो पूरा करूंगा..अंदर चलो तुम भी "
"मै आगे लखनऊ में पढ़ना चाहती हुं...आपा की गोद भी अब सूनी नहीं है ..आप इजाजत दे "
आसिफ ने सर हिला कर इजाज़त दे दी।
               ****************

कल्पिता 🌻 
दिल से दुनिया तक ❤️