pyar ek ankaha ahsaas ? in Hindi Love Stories by Anita books and stories PDF | प्यार? एक अनकहा एहसास...!! पार्ट 8

The Author
Featured Books
Categories
Share

प्यार? एक अनकहा एहसास...!! पार्ट 8

विधि ने जब वो पैकेज खोला तो 
उसमे वही टैडी था, जिसे माही ने 
लेने की जिद की थी। 
विधि समझ गयी की यह किसने भेजा 
है। लेकिन यह समझ नहीं आरहा था 
की अब क्या करे ...अगर अभय पूछे 
तो उसे क्या बताये।। 

विधि इसी उलझन में बैठी थी की 
माही भी स्कूल से घर आगयी। 
टैडी को देख कर माही तो बहुत 
खुश हुईं।। 

माही :" थैंक यू, मम्मा"..!! आप ले  
आयी मेरा टैडी... थैंक यू आप बहुत अच्छी हो.."लव यू मम्मा"..!! 
कहते हुए मम्मी के गले लग गयी। 

अब विधि बताये भी तो क्या वो बस 
चुप थी।। 
शाम को जब अभय घर आया तो 
माही के हाथ मे टैडी देख कर विधि 
से पूछ बैठा...अरे...विधि तुम मॉल 
कब गयी थी और इसे कब लेकर 
आयी। 
बताया नही, उपर से तुम्हारी तबियत खराब है...मुझे कह देती मै चला 
जाता।।

विधि : तुम ऑफिस मे थे और मुझे 
कोई काम भी नही था तो चली गयी।  
माही का मन था उसमे तो लाना 
जरूरी था...उसे नाराज कैसे रख 
सकते हैं वो भी आज के दिन।। 

अभय : हा.. ये भी सही है।
चलो अब तुम दोनो रेडी हो जाओ 
हमें जाना भी तो है। 

तीनो रेडी होकर मूवी देखने चले गए। 
फिर वहा से किसी रेस्टॉरेंट में दिनर के लिए। 

अभय : मै गाड़ी पार्क कर के आता 
हु तब तक तुम दोनो चलो। 
विधि और माही दोनों अंदर जाने 
लगे, 
तभी वहा अंश, जो रस्टोरेंट से बाहर निकल रहा था विधि को देख कर 
वही रुक गया लेकिन विधि की 
नजरे जब अंश पर पड़ी...कुछ पल 
के लिए विधि को कुछ समझ नही 
आया की क्या करे वो भी वही रुक 
गयी। 
तब अंश ही, सामने आकर कुछ 
कहने वाला ही था की...अभय भी 
वहा आगया। 

अभय : अरे,,, अब तक तुम लोग 
यही हो चलो आओ।। 

माही : "पापा वह अंकल"..!! 

अभय : कौन अंकल..? बेटा... 

माही : पापा कल वो जो मॉल मे मिले 
थे ना जिसने मम्मी को गिरने से बचाया था...ये वही अंकल थे। 

अभय : ओह्ह.. 
मुझे क्यो नही मिलाया मै भी थैंक्स कह देता उनसे, उन्होंने हमारी जान को जो गिरने से बचाया है।। 
अभय ने कहते हुए जब मुड़कर देखा 
तो अंश जा चुका था।। 

फिर सब ने मिल कर डीनर किया।  
अभय ओर माहि दोनों ही खुश थे।

लेकिन विधि अंश के ही ख्यालों में 
थी विधि को कभी लगता की, ऐसे 
ही अचानक हम दुबारा टकरा गए। 
तो दूसरे पल लगता कहीं अंश फिर 
से तो उसकी जिंदगी मे वापिस तो 
नही आना चाहता अगर ऐसा है तो 
यह उसके और अभय की शादीशुदा जिंदगी के लिए ठीक नहीं है। 

क्योंकि... विधि की जिंदगी अब तक अच्छी खासी चल रही थी । 
अभय के प्यार ने अंश को भुलाने में 
काफी मदत की थी। वो अपनी सोच 
मे थी तभी, अभय ने विधि से कहा। 

अभय : "क्या बात है"..?? विधि.!! 
कल से तुम कुछ खोयी खोयी सी हो, 
क्या हुआ मम्मी पापा की याद आरही हैं..या तबियत ठीक नहीं है, क्या हुआ है...?? खाने मे भी ध्यान नही है 
तुम्हारा। 

विधि : "कुछ नही मै ठीक हु"...!! 
मम्मी की याद आगयी थोड़ी। 

अभय : तो ऐसा कहो ना कल चलते 
हैं, मिल आते हैं कोनसा दूर जाना है, 
वैसे तुम भी जा सकती हो। कल माही
को लेकर चली जाना। 

विधि : हम्म्... 


अंश विधि के शांत जीवन में एक 
तूफान की तरह अंश फिर से आया 
था। 

विधि को कुछ समझ नही आरहा 
था की क्या करें, कैसे रोके इस 
तूफान को, अब विधि को अंश से 
मिलना था और सब कुछ क्लियर 
करना था वो अब और ऐसे घुट घुट 
कर नहीं जी सकती थी। 

विधि ने अंश से मिलने का निर्णय 
लिया। 

दूसरे दिन अभय के ऑफिस जाने 
के बाद विधि ने उसी पुराने नम्बर 
पर अंश को कॉल किया और अंश 
को मिलने की बात की। 

अंश ने विधि को उसी जगह बुलाया 
जहा वो पहले मिलते थे...दोनों उसी 
जगह फिर से मिलने वाले थे। 


अंश: हैलो... विधि। 
विधि अंश का इंतजार कर रही थी 
वही बैठ कर। 
अंश की आवाज सुनते ही विधि ने 
मुड़कर देखा। 

विधि : हाई... 
कहते ही विधि चुप हो गयी। कितने 
दिनों बाद उसने अंश को गौर से देखा 
था। 
आज अंश को देखते ही विधि का 
सारा गुस्सा गायब हो गया और एक 
पल तो उसे ऐसा लगा की भागते 
हुए जाकर अंश के गले लग जाऊ। 
उसे गले लगा कर खुप रोयें, उससे 
पूछे की "क्यों किया उसने ऐसा"...!! 

क्यु..??उसके प्यार को धोका दिया 
उसे वादा करके मुकर गया और चला 
गया रोता छोड़ कर।। 
मगर उसने ख़ुद को संभाल लिया। 

अंश : कैसी हों..?? 


विधि : "क्यों आये हो अंश, तुम 
यहाँ..?? 
चले तो गए थे ना मुझे रोता छोड़ 
कर"...निकाल दिया था तुमने, अपनी जिन्दगी से मुझे...
तो रहते ना दूर ही, अब फिर से 
क्यों...??? आगये।। 

अंश : "मै नहीं गया था कभी दूर"... 
ना कभी दूर जाना चाहा और ना 
ही कभी तुम्हें भूलने की कोशिश 
की हैं।।। 


आज अंश विधि से मिलने आया था। 
आज अंश को देखते ही विधि का 
सारा गुस्सा गायब हो गया और एक 
पल तो उसे ऐसा लगा की भागते हुए जाकर अंश के गले लग जाऊ। 
उसे गले लगा कर खुप रोयें, उससे पूछे 
की "क्यों किया उसने ऐसा"...
क्यु..??उसके प्यार को धोका दिया...
उसे प्यार का वादा करके क्यो..??मुकर गया और चला गया रोता छोड़ कर।। 
मगर उसने ख़ुद को संभाल लिया। 
फिर भी उसका गुस्सा फुट पड़ा अंश
पर जब अंश ने पूछा... 

अंश : कैसी हों..?? 


विधि : जैसी भी हु मरु या जीयुं तुम्हे क्या..??"क्यों आये हो तुम यहाँ..?? 
जब चले ही गए थे तो" ... 

निकाल दिया था तुमने अपनी जिन्दगी 
से मुझे...तो रहते ना दूर ही अब फिर से क्यों आगये। 

अंश : "मै नहीं गया था कभी दूर"... 
ना कभी दूर जाना चाहा और ना ही 
कभी तुम्हें भूलने की कोशिश की। 
मुझे तो हर पल तुम्हारे साथ रहना था।
मगर शायद किस्मत को ही नही मंजूर 
था हमारा साथ।। 
अंश शांत होकर कह रहा था मगर विधि का बहुत गुस्से में थी। 

विधि : झुठ... झूठ  है ये सब, बंद करो अपना ये, अपने पन का दिखावा। 
अब और तुम्हारी बातों मे नही आने 
वाली मैं। 

अंश :" कुछ भी झूठ नही है, मेरा हर 
एक लफ़्ज सही है...ना ही मेरा प्यार 
कभी झूठा था ना मै"। 

विधि गुस्से मे उठ कर वहा से जाने 
लगी तभी अंश ने विधि का हाथ पकड़ा, 
अंश : देखो मेरी आँखों मे...तुम्हें क्या लगता हैं,क्या मै तुमसे झुठ बोलुगा। 

विधि : फिर क्यों चले गए थे मुझे छोड़ कर..?? 
सब कुछ ठीक चल रहा था। 
मेरे घर वाले, तुम्हारे परिवार वाले सब 
लोग मान गए थे हमारी शादी के लिए, 
फिर क्या हुआ ऐसा की तुम आये ही नहीं।। 

अंश : तुम मेरी बात सुनोगी तब ना। 
तुम कुछ सुनने को राज़ी ही नही हो, 
तो कैसे बताऊ। 
बैठो यहाँ आराम से सब बताता हू...
कहते हुए अंश ने विधि का हाथ पकड़ा और उसे बैठने के लिए कहा लेकिन 
विधि सुन ही नही रही थी, वह बहुत 
गुस्से मे थी। 
पर उसकी आँखों मे आँसू भी थे। 

विधिने अंश का हाथ झटक कर उसे धक्का दिया तब अंश धक्के से गिर 
गया। 

विधि मुह फेर कर जाने ही वाली थी 
की उसे ऐसा लगा जो कुछ गलत है, 
कुछ तो बहुत ही बुरा था । 

विधि ने जब पलट कर देखा तो उसकी चीख निकल गयी। अंश...
अंश जिसका एक पैर ही नही था वो अपाहिज हो चुका था।।
उसने एक आर्टिफिशियल पैर लगा रखा 
था जो अब तक विधि की नजरों मे नही आया था। 

विधि दौड़ते हुये आयी और अंश से
लिपट गयी और रोते हुए कहने लगी। 

विधि : "अंश...!! ये कब हुआ..!! 
तुमने मुझे कुछ बताया क्यों नहीं"...?? 
क्या तुमने मुझे इतना पराया कर दिया 
जो बताना भी जरूरी नहीं समझा।। 


अंश : "कैसे बताता तुम्हें, मुझे ख़ुद को पाँच साल बाद पता चला"।
मै पूरे पाँच साल कोमा में था। मेरे साथ क्या हुआ यह सब मुझे होश मे आने के बाद पता चला। कितने साल गुजर गए 
थे, यह भी नही जानता था। मुझे ठीक 
होने मे ही इतने साल गुजर गए की 
बताने के लिए कुछ रहा ही नही...तब 
तक सब कुछ बदल गया था।। 
अंश भी विधि को गले लगा कर बस 
रोये जा रहा था।। 
दोनों फिर से एक दूसरे की बाहों में थे, 
मगर अब सब कुछ बदल चुका था...
दोनों बस रोये जा रहे थे। 

कुछ देर बाद विधि ने अंश को दूर 
किया। जैसे कुछ गलत हो रहा हो। 


अंश : "मुझे गलत मत समझना मै 
तुम्हारी जिंदगी में दखल देने नही 
आया"। 
"मै तो तुमसे मिलने आया था", लेकिन जब पता चला तुम्हारी शादी हो चुकी है तब सोचा चला जाऊ लौट कर...लेकिन मन नहीं माना, सिर्फ एक बार तुम्हें 
देखना चाहता था। तुमसे मिलना चाहता था लेकिन सामने आने  की कभी हिम्मत 
नहीं हुयी। 

मगर किस्मत ने देखो बार बार तुम्हें मेरे सामने लाकर खड़ा किया। 
लेकिन तुम टेंशन मत लो,मै चला 
जाऊगा हमेशा के लिए। फिर कभी 
तुम्हारे सामने नही आऊगा।। 

विधि ने अंश की बात सुनते ही उसके 
मुह पर हाथ रख लिया। 

विधि : "खबरदार अगर फिर से दूर जाने की बात की तो"..!! अब कहीं नहीं जाने दूगी तुम्हे और वो भी ऐसी हालत में, इस हालत मे तुम्हें सबसे ज्यादा मेरी जरूरत है। 

अंश : नही विधि... "मै तुम्हारे हँसते- खेलते परिवार मे कोई प्रॉब्लम नहीं क्रियेट करना चाहता"। मै नही चाहता मेरी 
वजह से तुम्हारे परिवार मे कोई प्रॉब्लम 
हो, कोई तुम्हे गलत समझे।। 

विधि : नहीं अंश..!! कोई कुछ नहीं कहेगा। अभय भी बहुत अच्छे इंसान 
है। वो समझ जाएँगे। 

अंश : "क्या समझ जाएँगे"..?? 
तुम क्या कहोगी उसे ..?? कौन है यह... पूछेगा तो क्या कहोगी....बता पाओगी, 
ये वही है जिससे मै बहुत प्यार करती हूँ, या करती थी। 
जिसके बिना मै जी नही सकती थी। एक पल रह नही सकती थी और जब यह आगया है लौट कर तो इसे कैसे जाने दु। 
क्या ये सब कहोगी....?? और अभय 
क्या तुमसे कुछ नही कहेगा आने देगा 
मेरे पास...क्या आ पाओगी अपना 
परिवार छोड़ कर अपनी बेटी से दूर रह पाओगी...?? बोलो विधि... !! 
अंश जोर जोर से बस विधि को बोले 
जा रहा था और विधि बिना कुछ कहे 
बस सुन रही थी। 
अंश : अब कुछ नही हो सकता विधि, 
मुझे अब दूर जाना ही पड़ेगा अब बहुत 
देर हो चुकी हैं। मै यहाँ भी नही रह 
सकता अगर ऐसे ही तुम्हारे सामने 
आता रहा तो तुम नही रह पाओगी 
और यह सब बहुत गलत है हम दोनों 
के लिए। 
"अब तुम अकेली नही हो, एक माँ हो, 
एक पत्नी हो"...!! तुम उस इंसान को धोका नही दे सकती, जिसने तुम्हें हर 
पल संभाला है...तुम्हारा इतना ख्याल रखता है...!! 
मेरा तुमसे तुम्हारी जिंदगी से दूर जाना 
ही बेहतर है।। 

विधि : नही अंश... सब ठीक ही होगा 
तुम कहीं नही जाओगे अब जो इतने 
सालों के बाद मिले हो मैं तुम्हें अब कहीं नही जाने दूगी।। 

विधि कुछ मानने को तैयार ही नही थी 
तब अंश ने विधि को अपने पास लिया 
और उसे समझाने की कोशिश की... 
"मै कहीं भी रहु मगर हर पल तुम्हारे 
दिल मे ही रहुंगा जब भी याद करो मुझे महसूस करोगी"... 
फिर कहो...!! कहा दूर हु तुमसे...
"जब भी याद आये मेरी आँखे बंद 
करके मुझे याद कर लेना...बस, हरपल अपने पास ही पाओगी"...!! 

विधि फिर से अंश को धक्का देती है, 
"बंद करो अपनी ये किताबी बाते ऐसे 
नही होता कभी"...!! जब अपना दूर 
हो तो याद करने से नही पास आता है, बल्कि हम और ज्यादा दुखी होते है। 
"नही होता है ऐसा अंश"...!! 

"मुझे कुछ नही पता बस, तुम कहीं नही जाओगे"...!! ऐसे ही रहोगे हर पल मेरे पास...कहते हुए विधि फिर से अंश की बाहों मे चली गयी।। 
"बस ऐसे ही रहना है मुझे हर पल, अब कहीं नही जाना है"। 

अंश : "ठीक है रहो मुझे क्या"...!! मै 
तो अकेला हु...मेरा कोई नही याद करने वाला तुम अपना ही देखो और देखो 
कितने बजे है क्या वक़्त हुआ है घर मे 
सब तुम्हें ही ढूंढ रहे होंगे। 

अंश की यह बाते सुन कर जैसे विधि 
किसी सपने से जागी हो इस तरह.... 
विधि : अरे,,  हा..!! माही स्कूल से 
आगयी होगी और अभय का कॉल 
आया तो क्या कहेगी वो। चलो मुझे तो 
अब जाना पड़ेगा।। 

अंश : देखा आगयी होश में...!! अब 
यही तुम्हारी जिंदगी है...अभय और माही 
मै तो बस एक याद हु।। 
जिसे तुम सिर्फ याद कर सकती हो 
महसूस कर सकती हो लेकिन मेरे साथ 
रह नही सकती।। 
"चलो मै तुम्हे घर तक छोड़ देता हु"..!!

विधि : नही...!! अब जब अकेले ही...तुम्हारे बिना रहना है, तो अभी से 
ये सफ़र शुरू करते हैं।। 
कहते हुए विधि वहा से चली गई।। 

अंश भी अपने रास्ते चला गया।। 

दोनों अपने अपने रास्ते चले गए दोनों की आँखों मे आँसू थे जो शायद अब हरपल 
हो मगर दिलो में एक सुकून भी था।।

अंश इस बात से खुश था, क्योंकि विधि 
को अभय जो मिला था...उसी की तरह प्यार करने वाला जीवनसाथी।।
और...
विधि इस बात से खुश थी, क्योंकि 
उसकी गलतफहमी अब दूर हो चुकी
थी। 

विधि को अबतक लगता था अंश ने उसे धोका दिया है...विधि अंश को अबतक गलत समझती थी, लेकिन अंश से 
मिलकर उसकी बाते सुनकर...विधि के 
दिल में अंश के लिए और ज्यादा प्यार 
और इज्जत बढ़ गयी थी।।। 



समाप्त......