विधि के पढ़ाई के यह दो साल भी बीत गये...लेकिन अंश की कोई खबर नही आयी ना वो आया।।।
आगे...दस साल बाद...
"अभय उठो ना...!! ऑफिस नहीं जाना
है क्या आज", माही भी सोयी ही हैं...ये बाप बेटी की नींद भी ना कुंभकर्ण से कम नही।
किसी बात की कोई खबर नहीं रहती, अगर मै ना उठाऊ इनको...तो पता नही पूरे दिन सोते रहेगे...!!
विधि अकेली ही किचन मे काम करते
हुए बोले जा रही थी। उधर अभय और माही दोनो रजाई के अंदर से सब बातें सुनकर मुस्कुरा रहे थे।
विधि फिर से हाथ का काम छोड़ कर बेडरूम मे जाती है और दोनों को फिर से उठाने की कोशिश करती हैं तभी दोनों ही मिलकर विधि को ही नीचे बेड पर खीच लेते हैं।
अरे,, रे,, ये क्या है...!! "ख़ुद तो सोते ही हो और अब मुझे भी, चलो निकलो बाहर दोनों बिस्तर से"...!! कब से मै अकेली पागलो की तरह बोले जा रही हु और तुम दोनो छुप कर सुन रहे हो।
विधि दोनों को डाटते हुए बेड से उठाती
है, चलो जल्दी बेटा तुम्हारी बस भी आती होगी चलो जल्दी से वॉशरूम जल्दी से फ्रेश हो जाओ।
बेटा चलो जल्दी स्कूल के लिए लेट
हो जायेगा...."तुम्हारे पापा का क्या है उनका तो कोई टाइम ही नहीं है जब मन करे तब निकल लिए"...
"तो क्या...!!अपने बाप का ही हैं।
अभय ने हँसते हुए कहा।
हा मगर स्कूल नहीं है बाप का वहा वक़्त पर जाना पड़ता है।
अभय और माही दोनों रेडी होकर
डायनिंग टेबल पर आकर बैठते हैं।
चलो अब जल्दी से नास्ता लगाओ
लेट हो जायेगा..अभय ने माही की तरफ देखकर हाई फ़ाई देते हुए कहा।
ओह्हो..!! जब से मै कह रही हु तब
देर नहीं हुई और अब दो मिनिट क्या
हुआ लेट हो गये।
नास्ता टेबल पर रखते हुए विधि ने कहा।
तीनों मिल कर नास्ता करने लगे।
ओके..!! कल पता है ना क्या है..??
विधि ने अभय से पूछा।
अभय : "क्या है कल"...??
कल हमारी गुड़िया का बर्थ डे है।
विधि ने माही को प्यार करते हुए कहा।
अभय : ओह्हो.. मतलब कल पार्टी..!!
तीनों हँसने लगे।
विधि : "हा लेकिन आज मुझे कुछ
शॉपिंग करनी है माही के लिए"..!!
तो आप चलोगे, या मै अकेली ही जाऊ माही को लेकर।
अभय : माही की स्कूल के बाद तुम ही चली जाओ मुझे आज काम है ऑफिस
में थोड़ा।
कल का काम भी तो आज ही करना
पड़ेगा तभी तो कल पार्टी करेगे।
विधि : ओके..!! तो हम दोनों ही चलेंगे शॉपिंग करने। माही ख़ुशी से विधि की
गोद में आकर बैठे गयी और विधि के गालों पर एक किस दे दी।
Love u मम्मा...!!
अभय : ओके...!! चलो अब बस का टाइम हो गया।
विधि भी अपने काम मे लग गयी।
वक़्त कैसे गुजरा विधि को पता ही ना
चला घड़ी देखी तो माही की स्कूल की
छुट्टी का टाइम हो चुका था तो विधि
जल्दी से रेडी होकर स्कूल चली गई।
माही की स्कूल छुट चुकी थी वो गेट पर विधि का वेट कर रही थी।
विधि माही को लेकर मॉल आती हैं।
मॉल के अंदर जाते ही माही के ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा वो मम्मी का हाथ खिच कर कभी कोई खिलौना तो कोई डॉल् लेने की जिद करने लगी।
माही : "मम्मी वो टेडी देखो ना...कितना प्यारा है"...!!
देखो कैसे मेरी तरफ़ ही देख रहा है,
मम्मी देखो ना वो क्या कह रहा है...!!
विधि : बेटा वो क्या कहेगा..???
माही : "नहीं मम्मी वो कह
रहा है मुझे अपने साथ ले चलो"।
विधि, माही की प्यारी बाते सुन कर हँसने लगी।
विधि नीचे बैठ कर माही को प्यार से समझाने लगी।
विधि : ओके...!! पहले हम हमारी प्यारी गुड़िया के लिए प्यारी सी ड्रेस लेंगे बाद में उसका प्यारा टेडी। ओके...!!
माही : ओके...मम्मी...!!
कहते हुए दोनों सीढियो से उपर जाने
लगी मगर माही अपनी मस्ती में चल रही थी और विधि का हाथ पकड़ कर उसे खिच रही थी।
"बेटा आराम से चलो"..!!
जल्दी क्या है और ऐसे मुझे खीचोगी
तो मै गिर जाउंगी, एक तो ये साडी...तुम्हारे साथ आने के पहले मैंने
भी नहीं सोचा...मुझे ये साडी पहननी
ही, नहीं चाहिए थी।
विधि बोल ही रही थी की उसका पैर
सीढ़ियों से फिसल गया और वो गिरते
गिरते बच गयी शायद किसी मजबूत
हाथों ने उसे थाम लिया था।
विधि ने गिरते हुए अपनी आँखे बंद
कर ली, मगर जब उसे एहसास हुआ की...किसी ने उसे गिरने से बचा लिया
तो वो आँखे खोल कर देखने लगी।
देखते ही विधि ने झट से ख़ुद को सभाँल लिया।
आज फिर से दस साल पुरानी बाते
विधि के सामने आ गयी।
वही अंश...जिसे पहली बार कॉलेज
मे देख कर विधि ख़ुशी में उछल पड़ी
थी। जिसमे उसे पूरी दुनिया मिली थी।
आज उसी अंश को देख कर उसकी
आँखो में आँसू आगये मगर गुस्सा भी।
क्योकि विधि ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की..अंश ऐसा भी कर सकता
हैं। वो उसे ऐसा अकेला छोड़ कर कभी
जा सकता हैं उसके प्यार को धोका दे सकता है और अंश ने ऐसा किया था...
तो विधि को गुस्सा आना लाजमी था।।
विधि ख़ुद को संभाल कर जाने लगी
तभी पीछे से अंश ने आवाज लगाई, विधि...
मगर विधि उसे अनसुना कर दिया और चली गयी।
सामने माही खड़ी थी।
"सॉर्री मम्मा " माही कान पकड़ कर
रोनी सी सूरत बना कर कहने लगी।
"कोई नहीं बेटा" ...!! मै ठीक हु, चलो हम घर चलते हैं।
विधि माही को लेकर मॉल से बाहर
निकल रही थी तभी अंश ने फिर से आवाज लगाई...
विधि... सुनो तो...!!
माही : मम्मी, कोई अंकल आप को आवाज दे रहे है।
माही ने पीछे पलट कर देखते हुए कहा।
विधि : कोई नहीं है तुम चलो ...
माही : मगर मम्मी...!! हमने तो टेडी
तो लिया ही नहीं।।
विधि : उसे पापा लेकर आयेगे...विधि
ने माही से कहा।
माही का हाथ पकड़ कर, जो लिया
था उसे ही लेकर विधि जल्दी में मॉल
से निकल गयी।
रास्ते मे टैक्सी लेकर दोनों घर पहुची।
अभय पहले ही घर पहुँच गया था।
विधि ने डोर खोला तो सामने अभय
खड़ा था।
"कर ली शॉपिंग"?? माही को गोद में उठाते हुए अभय ने पूछा।
"कहा पापा..!! मम्मा ने मेरा टेडी भी
नही लिया", मेरी वजह से मम्मी फिसल कर गिर रही थी...तो मम्मी नाराज हो गयी।
माही ने मासूमियत से कहा तो अभय
ने माही के गालो को किस करते हुए कहा....कोई नहीं बेटा हम कल ले
आयेगे आपका टेडी।
"प्रॉमिस पापा"..!! प्रॉमिस बेटा...!!
माही अभय के गले लग गयी।
विधि,क्यो क्या हुआ? तुम इतनी गुमसुम क्यों हो। कहीं कुछ लगी तो नहीं ना...
अभय ने विधि से पूछा।
विधि थोड़ी नाराज थी मॉल से
आते ही डिनर की तयारी मे लग गयी।
विधि : नहीं, बस थोड़ी थक गई हु।
अभय : तो आराम करो थोड़ा, बाद
मे डिनर बना लेना, हम कहा भागे जा
रहे और ना डिनर।
अभय ने मुस्कुराते हुए विधि को खुश
करने के लिए कहा।
मगर विधि का मन बिल्कुल भी खुश
नहीं था...वो तो कहीं और ही खोयी
थी।
रात को खाना खाते समय भी विधि
चुप ही थी।
डिनर कर के विधि ने माही को सुला
दिया और अपने कमरे मे चली गयी।
विधि को नींद भी नही आरही थी उसकी आँखों में बस अंश का चेहरा दिख रहा
था। अभय कब का सो चुका था।
सभी पुरानी बाते विधि के सामने आने लगी। ना चाहते हुए भी विधि को सभी पुरानी बाते याद आने लगी और वो..ख़ुद
से ही बोले जा रही थी क्यों चले गए थे
तुम मुझे छोड़ कर और जब गए तो
आये क्यों...??
बड़ी मुश्किलों से विधि ने अंश की यादों
को भूलने की कोशिश की थी।।
मगर आज फिर से अंश ने उसके सामने आकर उसे रुला दिया।
रोते हुए उसे कब नींद आगयी पता भी
ना चला।
दूसरे दिन अभय जल्दी ही ऑफिस
के लिए तयार हो गया...
अभय : माही नही उठी अभी तक...??
विधि : हा..!! अभी कुछ देर पहले ही
उठी है..!!
Good morning..पापा...!!
Good morning...बेटा..!!!
एंड हैप्पी बर्थडे बेटा...!!
माही को पास लेकर माथे पर किस
करते हुए अभय ने कहा।
और विधि तुम्हारी तबियत कैसी है अब..??
हा..!!अब ठीक है...!!
ओके...!!
अभय : "मैं अभी ऑफिस जा रहा हूँ"...माही बेटा, आप भी स्कूल
जाओ...!!
और अपने दोस्तों के लिये चॉकलेट
लेकर जाना... फिर हम शाम को मूवी जायेंगे और बाद मे डिनर बाहर ही
करेगे।।
ओके..!!
ओके..!! पापा...बाय पापा...!!
माही ने हाथ हिलाते हुए कहा...
अभय : "चलो विधि मै निकलता हु,
मेरे आने तक तुम भी अपने काम
खत्म करके थोड़ा आराम कर लो"...
फिर हम शाम को मिलते हैं....!!
विधि : ओके..!! बाय...
अभय और माही दोनों चले गए विधि
भी अपने कामो मे लगी थी तभी डोर
बैल बजी तो विधि ने डोर खोला तो
कोई वहा बड़ा सा पैकेज छोड़ गया
था।
विधि ने बाहर देखा मगर कोई नही था।
विधि को समझ नही आया यह क्या है। विधि उस गिफ्ट पैक को अंदर ले आयी और खोल कर देखा तो उसमे वही टेडी
था जो माही ने लेने की जिद की थी।।
क्रमश:........