रोज़ी के हाथ से काला-नीला खून बाहर बह रहा था। लारा ने जिस जड़ी-बूटी को पीसकर उसके जख्म पर लगाया था, उसका असर धीरे-धीरे होने लगा था। रोज़ी की आँखें जो ऊपर चढ़ चुकी थीं, वे सामान्य होने लगीं और उसके मुंह से झाग निकलना बंद हो गया। उसकी जान तो बच गई थी, लेकिन वह इतनी कमज़ोर हो चुकी थी कि उसके मुंह से आवाज़ नहीं निकल रही थी। पॉल उसे अपनी बाहों में समेटे रो रहा था।
ऐशली ने खौफ और हैरानी से लारा की तरफ़ देखा, जो अपने चाकू को एक बड़े पत्ते से साफ़ कर रही थी। ऐशली से रहा नहीं गया, उसने झिझकते हुए पूछा,
"लारा... तुमने रोज़ी की जान बचाई, जबकि वह तुमसे इतनी नफ़रत करती है। और... और तुम्हें इस अमेज़न के जंगल की इन अजीब चीज़ों के बारे में इतना सब कैसे पता है? क्या तुम पहले कभी यहाँ आई हो?"
लारा ने चाकू को अपने बैग में रखा और एक ठंडी सांस ली। उसने दूर घने पेड़ों की तरफ़ देखते हुए कहा,
"मैं कभी अमेज़न नहीं आई ऐशली। लेकिन मेरे डैड... वो एक फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट में बोटैनिस्ट (वैज्ञानिक) हैं। जब मैं छोटी थी, तो वे मुझे कॉमिक्स की जगह जंगलों, ज़हरीले कीड़ों, अमेज़न के रेनफॉरेस्ट और सर्वाइवल (ज़िंदा रहने की तकनीक) की किताबें पढ़ाया करते थे। वे कहते थे कि प्रकृति जितनी खूबसूरत है, उतनी ही बेरहम भी। उन्होंने मुझे सिखाया था कि किस पौधे में अमृत है और किसमें मौत। आज मैं जो कुछ भी कर पा रही हूँ, उन्हीं की दी हुई जानकारी की वजह से है, किसी जादू से नहीं।"
यह सुनकर मैट, बिल और यहाँ तक कि पॉल के दिल में भी लारा के लिए इज़्ज़त और ज़्यादा बढ़ गई। उन्हें समझ आ गया कि लारा कोई आम लड़की नहीं है, बल्कि उसके पास इस जंगल से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार है—'ज्ञान'। मैट ने लारा की तरफ़ देखा और कहा,
"लारा, तुम्हारे डैड ने तुम्हें जो सिखाया, आज उसकी वजह से हम सब सांस ले पा रहे हैं। अब से हम सब वही करेंगे जो तुम कहोगी।"
लेकिन यह बात ऐशली को अंदर ही अंदर चुभ गई। उसे अपनी हार बर्दाश्त नहीं हो रही थी। भले ही लारा ने रोज़ी की जान बचाई थी और उसके पास जानकारी थी, लेकिन ऐशली का घमंड अब नफ़रत के साथ-साथ 'जलन' में बदल चुका था। उसने मन ही मन सोचा कि स्कूल की सबसे गरीब लड़की आज उनकी लीडर बन बैठी है और ग्रुप के सारे लड़के उसकी तारीफों के पुल बांध रहे हैं। ऐशली ने रोज़ी के पास जाकर उसका हाथ पकड़ा और लारा को पीठ पीछे घूरने लगी। लड़कियों के बीच की नफ़रत कम होने की बजाय अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर आ चुकी थी।
"प्यास... मुझे प्यास लगी है...
टोनी सूखी आवाज़ में बड़बड़ाया। उसका कंधा अभी भी उखड़ा हुआ था। लारा ने आसमान की तरफ़ देखा; दोपहर होने वाली थी और धूप पेड़ों के पत्तों को चीरकर नीचे आ रही थी, जिससे उमस और दमघोंटू गर्मी बढ़ गई थी। लारा ने कहा,
"हमें आगे बढ़ना होगा। रोज़ी अब चल सकती है, पॉल तुम उसे सहारा दो। बिल, तुम टोनी को संभालो। मैट, तुम लाठी के सहारे धीरे-धीरे चलो। हमें पानी ढूंढना ही होगा, वरना डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) से हम सब बेहोश हो जाएंगे।"
वे सब फिर से उस दलदली और घने रास्ते पर चल पड़े। लारा ने ध्यान दिया कि हवा में नमी बढ़ रही थी और दूर से पानी के गिरने की एक धीमी सी आवाज़ आ रही थी। उसने सोफिया से कहा,
"सोफिया, हम सही रास्ते पर हैं। आगे कोई नदी या झरना है।
सोफिया ने मुस्कुराकर लारा का हाथ थाम लिया, लेकिन वह जानती थी कि पीछे चल रही ऐशली और रोज़ी की आँखें उन पर आग उगल रही हैं।
लगभग आधा घंटा चलने के बाद, घनी झाड़ियाँ खत्म हुईं और उनके सामने एक हसीन लेकिन खतरनाक नज़ारा था। अमेज़न की एक संकरी नदी उनके सामने बह रही थी। पानी एकदम साफ़ दिख रहा था। पानी देखते ही ऐशली, बिल और टोनी पागलों की तरह नदी की तरफ़ दौड़े। वे बिना सोचे-समझे पानी में मुंह डाल देना चाहते थे।
"रुको! कोई भी नदी के पानी को सीधे हाथ नहीं लगाएगा!"
लारा की चीख गूंजी, लेकिन पानी की प्यास में पागल हो चुकी ऐशली ने उसकी बात अनसुनी कर दी। ऐशली ने नदी के किनारे घुटने टेके और पानी पीने के लिए जैसे ही अपने दोनों हाथ पानी में डाले, लारा ने दौड़कर ऐशली को पीछे की तरफ़ खींचकर पटक दिया।
ऐशली गुस्से में चिल्लाई,
"क्या बदतमीज़ी है लारा! तुम पानी भी नहीं पीने दोगी क्या? तुम हमें तड़पा-तड़पा कर मारना चाहती हो?"
पॉल और बिल भी गुस्से में लारा की तरफ़ देखने लगे। लेकिन लारा ने कुछ नहीं कहा, उसने सिर्फ़ नदी के उस शांत पानी की तरफ़ उंगली से इशारा किया।
ऐशली ने जैसे ही पानी में देखा, उसका कलेजा मुंह को आ गया। जहाँ अभी ऐशली के हाथ थे, वहाँ पानी के अंदर से दर्जनों छोटी-छोटी, सिल्वर और लाल रंग की मछलियाँ तेज़ धारदार दांत चमकाती हुई सतह पर आ गईं। वे कोई आम मछली नहीं थीं, वे अमेज़न की कुख्यात 'पिराना' (Piranha) मछलियाँ थीं!
अगर ऐशली का हाथ पानी में एक सेकंड और रहता, तो वे मछलियाँ उसकी उंगलियों का मांस हड्डियों से अलग कर चुकी होतीं। ऐशली ने खौफ से अपने हाथ समेट लिए, उसका घमंड एक बार फिर चकनाचूर हो चुका था, लेकिन लारा के लिए उसकी नफ़रत अब उसके अंदर एक ज्वालामुखी की तरह सुलग रही थी... (जारी है)
लेखक _समीर खान