Irritable in Hindi Short Stories by Vandna Sharma books and stories PDF | चिड़चिड़ा

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चिड़चिड़ा

कहानी *चिड़चिड़ा*

कभी-कभी सबको प्यार बाँटने वाला भी प्यार के लिए प्यासा रह जाता है। यह कहानी एक ऐसे युवा की है जो दिल्ली की एमएनसी कंपनी में कार्यरत है। वर्कलोड के चलते हमेशा चिड़चिड़ा रहता है।दिल्ली की जून माह की एक आम सुबह। सात बजे ही दोपहर हो जाती है। विकास रोज की तरह सुबह नौ बजे बाइक से ऑफिस के लिए निकलता है। उसका ऑफिस नोएडा में है। घर से निकलते ही चिपचिपाती गर्मी, चुभती धूप और उसपर दिल्ली का ट्रैफिक। दिल्ली नोएडा बॉर्डर पर हमेशा जाम ही रहता। गाड़ियों का धुआँ, हॉर्न भोंपू बजाते ,एक चुभता, कानों का चीरता शोर, सुबह ही मूड खराब हो जाता।विकास अच्छी कद-काठी का, आकर्षक शरीर वाला, परिश्रमी युवा है। तीन भाइयों में मंझला बेटा हमेशा उपेक्षा का शिकार होता है। बड़ों को कुछ नहीं कह सकते क्योंकि वो बड़े हैं उनकी सेवा करनी है। छोटों को कुछ नहीं कह सकते, क्योंकि छोटों का ध्यान रखना उसका कर्तव्य है। परिवार में सबको खुश रखने के लिए विकास रात-दिन लगा रहता। अपना मन, अपने शौक मारकर सबकी सेवा में तत्पर रहता फिर भी परिवार से डाँट, फटकार और उपेक्षा ही मिलती। क्योंकि सबके काम करने और सबकी सेवा करने में उसका खुद का काम पिछड़ जाता। विकास को ही नकारा समझा जाता।ये तो जग का नियम है। जो व्यक्ति हमेशा सबकी सहायता के लिए तत्पर रहता है, निःस्वार्थ सभी के लिए सेवा करता है वही व्यक्ति नाकारा, आलसी और खुद पर ध्यान न देने वाला सबकी आलोचनाओं का शिकार बनता है।विकास का ऑफिस आ चुका था। जैसे ही अपने केबिन पहुँचा। सीनियर बॉस ने बुला लिया। "कहो विकास क्या अपडेट है। शिपमेंट पहुंची क्यों नहीं अभी तक।" "जी अभी देखता हूँ क्या समस्या है। आकर रिपोर्ट करता हूँ अभी।"अपनी सीट पर काम करने में व्यस्त था कि साथी सहकर्मी पहुँच गया। "विकास मुझे आज जल्दी जाना है, ये रही मेरी फाइल। शाम तक पूरी कर बॉस को दे देना।" विकास के उत्तर की प्रतीक्षा किये बिना ही फाइल रखकर चला गया।कभी क्लाइंट के फोन, कभी बॉस के फोन और काम के दबाव में विकास चिड़चिड़ा रहने लगा।शाम को घर पहुँचता तो बीवी पर गुस्सा करने लगता। उसकी बीवी समझदार थी। अपने पति की बेचैनी समझती थी। इसलिए कुछ ना कहती। बुरा तो उसे भी लगता। लेकिन वक्त की नजाकत को देखते हुए चुप रहती। घर में क्लेश न हो इसीलिए बस चुपचाप खाना बनाकर दे देती और मेज पर रखकर सोने चली जाती।विकास को ऑफिस से आकर भी चैन कहाँ था। देर रात ऑफिस वालों के फोन आते रहते। उसका काम ही ऐसा था। पूरे दिन लोगों से बातें करते, जवाब देते वो इतना चिड़चिड़ा हो जाता कि अपनी बीवी-बच्चों से भी बात करने का मन नहीं करता।रात को खाना खाकर विकास अपनी छत पर घूमने चला गया। छत पर एक कुर्सी पड़ी थी। उसी पर बैठकर चाँद को निहारने लगा। चाँद से बातें करना लगा। "ऐ चाँद तू भी तन्हा है तारों के बीच में और मैं भी तन्हा हूँ दुनिया की भीड़ में।विकास को अपने भविष्य की चिंता रही थी। 45 वर्ष का हो चुका था। अभी तक जीवन में कोई ठहराव नहीं था। चालीस के बाद कोई भी इंसान हो जिंदगी की रेस में दौड़ते हुए थक जाता है फिर उसका मन एक ठहराव चाहता है। एक सुकून ढूँढता है। विकास का भी यही हाल था।सत्रह साल से नौकरी कर रहा है। दो बार कोरोना की मंदी की वजह से नौकरी छूट भी गई थी। आठ महीने बेरोजगार रहा। बच्चे की फीस घर का राशन, और उसपर दिल्ली की महँगाई ने उसे तोड़ दिया। उसकी सभी सेविंग, सभी जमा-पूँजी खत्म हो चुकी थी।घड़ी में समय देखा रात के ग्यारह बज चुके थे। मौसम अभी भी गर्म था। हवा भी नहीं चल रही थी। जैसे ही अपने बेडरूम में पहुँचा देखा कि उसकी बीवी जाग रही थी। वो कुछ कहना चाहती थी विकास से इसीलिए सही समय का इंतजार कर रही थी।विकास को शांत देखकर बोली- "क्या हुआ परेशान लग रहे हो। आज मेरी तबीयत भी ठीक नहीं रही।" गुस्से में विकास ने उसे कुछ भी बोलने से मना कर दिया। "मैं कुछ देर शांत रहना चाहता हूँ।"उसकी बीवी इस खामोशी को तोड़ना चाहती थी। माहौल को हल्का करने के लिए धीरे से बोली - "सुनो चिड़चिड़े, इतना चिड़चिड़ापन अच्छा नहीं। जिंदगी बहुत खूबसूरत है। सोच बदलो, दुनिया बदल जायेगी। प्रोफेशनल बनो, अपनी प्राथमिकता तय करो। पहले खुद से पूछो आखिर तुम क्या चाहते हो। ना कहना सीखो। पहले खुद से प्यार करो खुद की कीमत समझो और कभी मुस्कुराओ भी लिया करो मेरे प्यारे चिड़चिड़े।"विकास उसकी बातें सुन मुस्कुराने लगा और बोला। "अच्छा! चिड़चिड़ी अब सो जाओ और मुझे भी सोने दो। कल सुबह बात करेंगे।"अगली सुबह चिड़चिड़ा विकास कुछ देर से उठा। लगभग आठ बजे आँख खुली देखा हल्की बारिश हो रही थी। अचानक से मौसम बदल गया। ठंडी हवा चलने लगी। कुछ देर बालकनी में बैठा बारिश को देखता रहा। आज उसे बहुत हल्का महसूस हो रहा था।तभी पीछे से उसकी बीवी आई उसे कॉफी का मग पकड़ाते हुए मजाक के मूड में बोली। "आज चिड़चिड़ा कहीं दिखाई नहीं दे रहा।" और दोनों हँसने लगे। बारिश अभी भी हो रही थी।———x———  *वन्दना शर्मा*  *10/6/26*---