Jaadui Duniya - 3 in Hindi Adventure Stories by Ram Make books and stories PDF | जादुई दुनियां - 3

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जादुई दुनियां - 3

तब वीर के सवालों का जवाब देते हुए प्रकाश अंकल बोले , " इस दुनिया में कुछ भी असम्भव नहीं है , सब कुछ संभव है , सब जानते हैं कि ह्यूमन बॉडी भी एलिमेंट से मिलकर ही बनी है और हम अगर अपने अंदर की एलिमेंटल पावर को जगा ले तब हम भी एलिमेंट्स को कंट्रोल कर सकते हैं, यह एक तरह से जादू ही है " ।यह सब सुनकर वीर  को समझ नहीं आ रहा था कि वह रिएक्ट कैसे करें , यह सब जानकर वीर भी जल्द से जल्द elements पर काबू करना सीखना चाहता था ।"वैसे तो इन सब चीजों को सीखने के लिए जिस training की जरूरत होती है , लेकिन उन सब बातों में बहुत समय लग जाएगा और हमारे पास समय नही है" प्रकाश अंकल वीर से बोलते है । "तो कोई तो दूसरा रास्ता होगा न अंकल" वीर प्रकाश अंकल से बोला, "। वीर की बात सुनकर प्रकाश अंकल बोले, "तुम उन सब बातों की चिंता मत करो, वो मैं सब कर दूंगा। तुम बस इतना ध्यान रखना की तुम्हारे हाई स्कूल की पढ़ाई जल्द ही ख़त्म होने वाली है। उसके बाद मैं तुम्हे city international collage में addmission दिलवा दूंगा"।यह सुनकर वीर प्रकाश अंकल से पूछता है, " city international college ही क्यों ...? मैं तो किसी भी college से अपनी पढाई पूरी कर सकता हु , और जहाँ तक मुझे पता है इस कॉलेज में सिर्फ बहुत ही बड़े और अमीर खानदान के बच्चे पढने के लिये आते हैं "।"हाँ वीर, तुम सही कह रहे हो , लेकिन तुम इसकी चिंता मत करो में तुम्हारा addmission करवा दूंगा, वैसे भी अगर तुम्हें mutant zone में जाना है तो उसके लिए ट्रेनिंग की भी जरूरत होगी " प्रकाश अंकल वीर से कहते है।प्रकाश अंकल की बात सुनकर वीर उनसे बोला, " , " इसका मतलब उस college में मुझे training भी दी जाएगी"।।। तब प्रकाश अंकल वीर से कहते है, " हाँ वीर...! वैसे तो city international college बाकी कॉलेजों जैसा ही है पर वहा secretly तुम्हे और तुम्हारे जैसे दूसरे लोगो को ट्रेनिंग दी जाती है , ताकि तुम्हें mutant zone में ज्यादा परेशानी का सामना न करना पड़े ।प्रकाश अंकल की बात सुनकर वीर बोला, " पर अंकल में तब तक क्या करूँगा ...? "।वीर की बात सुनकर प्रकाश अंकल एक गहरी सांस लेते है और फिर कहते है , " वीर तब तक तुम ध्यान लगाओ , क्योंकि अगर तुम mutant zone में जाना चाहते हो तब तुम्हे अपनी elemental powers को जगाना होगा " ।प्रकाश अंकल की बात सुनकर वीर उनसे पूछता है, " लेकिन अंकल मेरी elemental powers का ध्यान लगाने से मतलब " ।प्रकाश अंकल जवाब देते हुए कहते है, " वीर मेरी बात ध्यान से सुनो  अगर तूम city international college में चले भी जाते हो तब भी जब तक तुम अपनी elemental powers को जगा नही लेते तब तक तुम्हे आगे की training नही दी जाएगी और उन सब मे बहुत ही ज्यादा समय लग जाएगा , और इसीलिये तुम्हे पहले अपनी elemental powers को जगाना होगा "।वीर प्रकाश अंकल की बात सुनकर उनसे पूछता है, " तो अंकल में अपनी elemental powers को कैसे जगा सकता हूँ"।प्रकाश अंकल वीर का सवाल सुनकर वीर को बताते हुए बोले , " वीर , तुम अभी यह सब नही समझ सकते हो इसीलिए अभी तुम वह ही करो जो मैं तुमसे करने के लिए कहता हूँ " ।यह सुनकर वीर प्रकाश अंकल से पूछता है, "मुझे क्या करना होगा अंकल "।प्रकाश अंकल वीर को बताते हुए बोले, " तुम मेरे साथ आओ " ।वीर भी प्रकाश अंकल से बिना सवाल किए उनके पीछे पीछे चल देता है । थोड़ी देर बाद प्रकाश अंकल वीर को अपनी लैब में ही एक रूम में लेकर आते है । वीर वहाँ देखता है की पूरा कमरा खाली था , उस कमरे में कुछ था तो वह वहां उस कमरे के बीचों बीच रखा हुआ एक फुटबॉल के जितना बड़ा एक पत्थर था ।अभी वीर यह सब देख कर कुछ समझने की कोशिश कर ही रहा था कि तभी प्रकाश अंकल वीर को उस पत्थर के सामने बिछी हुई mate की तरफ इशारा करते हुए कहते है , " वीर जाओ उस mate पर जाकर अपने पैरों को मोड़ कर बैठ जाओ और जैसा में कहूं करते जाओ "।वीर प्रकाश अंकल की बात मानते हुए उस mate पर जाकर बैठ जाता है और फिर वो प्रकाश अंकल से पूछता है, " अंकल आप अखिर मुझसे करवाना चाहते हो "।तब प्रकाश अंकल वीर के सवालों का जवाब देते हुए बोले , " वीर में तुम्हारी elemental powers को जगाने में मदद कर रहा हु , अगर कोई भी अपने दिमाग को एक जगह बिना ध्यान भटकाए concentrate करे तब वो किसी भी element को controll कर सकता है, अब में जैसा कहु वैसा करते जाओ"।वीर भी अपना हाँ में हिला देता है, फिर प्रकाश अंकल वीर से आगे कहते है , "अब तुम अपने दोनों हाथो को घुटनों पर रख कर ध्यान लगाने की कोशिश करो , तुम जिस element पर focus करोगे और जो element तुम्हारे लायक होगा तब  वह अपने आप तुम्हारे चारो तरफ घूमने लगेगा , वीर अब तुम बिना समय गवाए ध्यान लगाना शुरू कर सकते हो "।इतना कहकर प्रकाश अंकल वीर से थोड़ी दूरी पर शांति से जाकर खड़े हो जाते है , ताकि ध्यान लगते वक़्त वीर का ध्यान किसी भी आवाज से न भटके । वीर भी आंखे बंद करके अपना ध्यान लगाने लगता है ।जब वीर ध्यान लगा रहा था तब उसने महसूस किया कि meditate करते समय उसका पूरा शरीर ताजगी महसूस कर रहा था और उसे ऐसा भी लग रहा था जैसे उसका दिमाग और भी ज्यादा तेज होने लगा हो , लेकिन यह सब बहुत ही धीरे धीरे हो रहा था ।

वीर जब ध्यान लगा रहा था तब उसने महसूस किया कि meditate करते समय उसका पूरा शरीर ताजगी महसूस कर रहा था और उसे ऐसा भी लग रहा था जैसे उसका दिमाग और भी ज्यादा तेज होने लगा हो , लेकिन यह सब बहुत ही धीरे धीरे हो रहा था । । शायद इसलिए ही ऋषि मुनि अपना ज्यादातर समय ध्यान लगाने में ही उपयोग करते है । ।



। । प्रकाश अंकल भी वीर को ध्यान लगाते हुए देख रहे थे , वह वहाँ इसीलिए थे ताकी जब वीर अपनी elemental powers को जगाए तब वह देख सके कि वीर ने किस element को जगाया है। । 



। । वीर ने बहुत देर बाद अपनीआंखे खोली , इस समय वीर अपने पूरे शरीर को बहुत ही ज्यादा फ्रेश महसूसकर रहा था । ।

। । तभी वीर देखता है कि प्रकाश अंकल उसके सामने बैठे हुए खाना खा रहे थे । । तब उसने प्रकाश अंकल से पूछा , " अंकल , आप यही हो " । । 

। । वीर की बात सुनकर प्रकाश अंकल खाना खाते हुए ही जवाब देते हैं , " हाँ वीर, मैं यही देख रहा था कि तुम कौन से element को जगाते हो" । । 



। । वीर प्रकाश अंकल की बात सुनकर अपने चहरे पर मुस्कान लाते हुए बोलता है, " अंकल  फिर बताइए मेने कोन सा element जगाया" । । 

। ।" हम्ममम्म वैसे वीर तुमने अभी तो कोई एलिमेंट नही जगाया है, लेकिन अगर तुम और मेहनत करो तो हो सकता है कि तुम बहुत ही जल्द कोई न कोई element जगा लो " , वीर की बात सुनकर प्रकाश अंकल एक गहरी सांस लेते हुए उसे जवाब देते है । ।

। । फिर वीर प्रकाश अंकल से बोलता है , " अंकल मुझे लगता है कि अब मुझे चलना चाहिए, माँ घर पर परेशान हो रही होंगी " । ।



। । प्रकाश अंकल भी वीर को जाने के लिए कह देते हैं । । घर पहुंच कर वीर सीधे अपने कमरे में चला जाता है। । 

। । bed पर लेटे हुए वीर आज प्रकाश अंकल की बताई हुई बातें ही सोच रहा था और अपनी elemental powers को जगाने का सोचकर वीर थोड़ी देर बाद अपने bed से उठता है और खाना खाने के बाद अपने रूम में ध्यान लगने की कोशिश करता है, लेकिन आज दिन भर की भाग दौड़ की थकान के कारण वह meditate नही कर पा रहा था, इसीलिए वह आराम करने के लिए अपने बीएड पर सो जाता है । ।

। । 1 घंटे बाद, वीर की आंखे खुलती है । ।

। । कई बार हम किसी भी नई बात को जानकर ठीक से सो भी नही पाते है , यही अभी वीर के साथ भी हो रहा था । । आखिर वीर भी इतना सब जानकर ऐसे कैसे आराम से सो सकता था । । इसीलिए वह एक बार फिर अपने कमरे में ही ध्यान लगाने लगता है । । लेकिन उसे एक बार फिर से ध्यान लगते वक़्त वही परेशानी आने लगती है , इसीलिए वह हवेली की छत पर जाकर बैठ जाता है । । वहाँ रात की ठंडी हवाएं उसके चेहरे पर पड़ रही थी, उस ताज़ी हवा और शांत वातावरण में वीर को एक अलग ही सुकून महसूस हो रहा था । । आज से पहले वीर कभी भी रात के समय इस तरह बाहर नहीं निकला था और अगर निकला भी था तक कभी इस environment पर ध्यान ही नही फ़िया था । ।

। । वीर तब वहाँ पर अपने दोनो पैरों को मोड़कर बैठ जाता है और ध्यान लगाना शुरू कर देता है । । कुछ देर बाद वीर के गले मे पहना हुआ पैंडेंट vibrate करने लगता है । । यह वही पैंडेंट था जो वीर के पापा आखिरी बार वीर के birthday के लिए gift के लिए लेकर आए थे । । वीर भी उस पैंडेंट को अपने पिता की आखिरी निशानी के तौर पर तभी से पहने हुए था । । वह पैंडेंट दिखने में सफेद रंग का और बहुत ही सुंदर था , अगर कोई उसे ध्यान से ना देखे तो वह तो उसके लिए कोई मामूली सा पैंडेंट ही लगता । लेकिन अगर कोई उसे ड़याँ से देखे तो उसकी design कुछ ज्यादा ही अजीब थी । । 

। । जब वीर को अपने गले में पैंडेंट हिलते हुए महसूस होता है । । तब वह अपनी आंखों खोलकर अपने पैंडेंट की तरफ देखता है । । और सोचता है, " अब इसे क्या हो गया और ये ऐसे अपने आप कैसे हिल सकता है " । । 

। । वीर के अपने ध्यान से बाहर आकर उस पैंडेंट के तरफ देखते ही वो पैंडेंट भी हिलना कम कर देता है । ।

। । अब जब वीर उस पैंडेंट की तरफ देखता है , तब वह पाता है कि वह पेंडेंट वाइब्रेंट नहीं कर रहा था । । तब वीर यह सोचता है कि उसे कोई भ्रम हुआ होगा इसीलिए वह ध्यान लगाना आगे जारी रखता है । ।

। ।थोड़ी देर बाद वीर के गले में उस पेंडेंट में से एक सफेद रोशनी बहुत तेजी से निकलना शुरू हो जाती है, वह सफ़ेद रोशनी वीर के आसपास किसी चंद्रमा के प्रकाश की तरह बिखर जाती है और फिर थोड़ी देर बाद वह आपस में मिलकर वीर के अंदर जाकर समा जाती है । ।

। ।वीर को भी अपने अंदर ताजगी का एहसास होता है लेकिन वह इस बात पर ध्यान नहीं देता है । ।

। ।कुछ देर बाद वीर का पेंडेंट पिछली बार की ही तरह चमकना शुरू कर देता है , लेकिन इस बार वह सफेद नहीं बल्कि पर्पल रंग में चमकना शुरू कर देता है । ।उस पेंडेंट के आस पास बिजली के कुछ स्पार्क्स भी दिखाई दे रहे थे। ।

। ।असल मे वह स्पार्क्स सिर्फ पैंडेंट ही नही बल्कि वीर के भी आस पास दिखाई दे रहे थे । । फिर वह सब पहले की  ही तरह एक दूसरे मे मिलकर वीर के अंदर जाकर समा जाते हैं । । वीर भी अपने अंदर एक अजीब सी ताकत को महसूस कर पा रहा था कुछ देर बाद वीर अपनी आंखें खोलता है  । ।



 
। । वह lightening के स्पार्क्स सिर्फ पैंडेंट ही नही बल्कि वीर के भी आस पास दिखाई दे रहे थे । । फिर वह सब पहले की  ही तरह एक दूसरे मे मिलकर वीर के अंदर जाकर समा जाते हैं । । वीर भी अपने अंदर एक अजीब सी ताकत को महसूस कर पा रहा था , कुछ देर बाद वीर अपनी आंखें खोलता है , और फिर दिन भर की थकान के कारण अपने कमरे में जाकर सो जाता है । । 
। । अगले दिन,  वीर सुबह - सुबह ही अपने घर के garage में अपने पिता की उसी car को ठीक करने की कोशिश करने लगता है जिसे वो और उसके पिता मिलकर बनाया करते थे । ।
। । दरसल , वीर जब कभी भी खुश होता या उदास होता या फिर जब कभी भी उसे उसके पिता कार्तिक की याद आती थी तब - तब वह इस garage में आकर वह अपने पिता की इस कार को ठीक करने लगता था । । वह जब भी इस कार के आस पास होता था तब उसे ऐसा लगता था । । जैसे की उसके पिता उसके साथ ही हो । ।
। । आज भी वीर वहाँ पर कल प्रकाश अंकल की बताई बातों के कारण ही था । । वीर के पिता कार्तिक के जाने के बाद वीर और उसके परिवार ने बहुत सी परेशानियों का सामना किया था और अब प्रकाश अंकल की बात सुनकर वीर को लगने लगा था कि, वह उन सभी परेशानियों को हल कर सकता है। ।
। । वीर अपने पिता की car पर हाथ फेरते हुए कहता है ,     " पापा में आपसे वादा करता हूँ कि बहुत जल्द मैं , माँ और कृतिका की सभी परेशानियों को दूर कर दूंगा और वो जल्द ही पहले जैसी खुशहाल जिंदगी जिएंगे । । 
। । वीर एक गहरी सांस लेता है और आगे कहता है, "वैसे प्रकाश अंकल का बताया तरीका ख़तरनाक है , कोई नही जानता कि mutant zone में कौन सा खतरा कहाँ पर मिल जाए , पर मुझे पता है कि आप हमेशा मेरे साथ ही रहोगे " । ।
। । इतना कहकर वीर खाना खाने के बाद फिर से प्रकाश अंकल की लैब में चला जाता हैं । । 
। । वीर जैसे ही वहां पहुंचता है तब प्रकाश अंकल वीर को देखकर कहते हैं , " वीर बेटा तुम आ गए....! "। ।
। । तब वीर प्रकाश अंकल की बात सुनकर कहता है , " कैसे नहीं आता अंकल वैसे भी हमारे पास समय कहां है " । । 
। । तब प्रकाश अंकल वीर की बात सुनकर वीर से कहते हैं, " ठीक है ,तो फिर चलो एक बार फिर से कोशिश करते हैं "। ।
। ।वीर प्रकाश अंकल की बात सुनकर वह अपना सर हॉ में हिलाता है और प्रकाश अंकल के पीछे पीछे फिर से उसी कमरे में चला जाता है । वहां पहुंचकर वीर अपने पैरों को मोड़कर एक बार फिर से वही जमीन पर बैठ जाता है । ।
। । लेकिन इससे पहले कि वह ध्यान लगाने के लिए अपनी आंखें बंद करता । ईससे पहले ही प्रकाश अंकल वीर से कहते हैं, "रुको वीर इस तरह से तो तुम अपनी elemental powers को नहीं जगा पाओगे " । ।
। । फिर अपना सर खुजाते हुए वीर प्रकाश अंकल से पूछता है , "तो फिर अंकल में क्या करूं " । ।
। । तब प्रकाश अंकल वीर को जवाब देते हुए कहते हैं, " मेरी बात ध्यान से सुनो वीर तुम्हें अपने सभी चक्रों को एक जगह पर फोकस करना होगा " । ।
। । " चक्रों को " वीर अपना सर खुजाते हुए पूछता है। ।
। । वीर का मुंह देख कर प्रकाश अंकल एक गहरी सांस लेते हैं और वीर से कहते हैं , " हां वीर चक्रों को" । ।
। । "पर कैसे चक्र अंकल....? " वीर प्रकाश अंकल की बात सुनकर उनसे पुछता है । ।
  । । प्रकाश अंकल वीर को जवाब देते हुए कहते है , "हमारे पुराणों में कहा गया है कि प्रत्येक मनुष्य में सात चक्र होते हैं" । ।
। । क्या कहा कल आपने सात चक्र वीर प्रकाशन कल की बात सुनकर उत्सुकता वश पूछता है तब प्रकाश अंकल वीर को जवाब देते हुए कहते हैं हां साथ हमारे पुराणों में कहा गया है पहला हमारी कमर और नाभि के नीचे होता है जिसे हम मूलाधार चक्र कहते है, यह हमारी जिंदगी को दर्शाता है।  वही दूसरा चक्र हमारी नाभि पर होता है ,जिसे स्वाधिस्ठान चक्र कहा जाता है , यही से हमारे शरीर की सारी व्यवस्था या कहे तो हमारा पूरा शरीर नियमानुसार चलता है । ।
। । तभी वीर प्रकाश अंकल से पुछता है , " अंकल बाकी के पाँच चक्र कहा होते है "। । 
। । तब प्रकाश अंकल वीर से कहते हैं , " बताता हूं वीर पहले सांस तो लेने दो "।। 
। । उसके बाद प्रकाश अंकल एक गहरी सांस लेते हैं और अपनी बात को आगे जारी रखते हुए कहते हैं , "हमारे शरीर में तीसरा चक्र मणिपुर चक्र होता है , जो कि हमारी नाभि से ऊपर और छाती के नीचे की तरफ होता है। यह हमारे शरीर में बुद्धि का प्रतीक होता है ,
वही हमारी छाती के बीचो-बीच अनाहत चक्र मौजूद होता है जो हमारे शरीर में प्यार को दर्शाता है।।  वही पांचवा चक्र विशुद्धि चक्र होता है जो कि हमारे गले में विद्यमान होता है , जो कि हमारे शरीर में ताकत का प्रतीक माना जाता है।
वही छठ चक्र आज्ञा चक्र होता है जो हमारी दोनों आंखों की भोहों  के बीच में होता है जो की इमैजिनेशन मतलब कल्पना का प्रतीक होता है, वही सातवाँ और सबसे जरूरी चक्र सहस्त्रार चक्र होता है,  जो की हमारे मस्तिष्क में होता है जो कि हमारे शरीर मे समझ और इक्षा का प्रतीक होता है "। ।
। । वीर प्रकाश अंकल की बात सुनकर उनसे कहता है, " लेकिन अंकल इन सब बातों का मेरी elemental powers से क्या मतलब" । ।
। । वीर के सवाल सुनकर प्रकाश अंकल वीर को जवाब देते हुए बोलते है, " मतलब है वीर, मतलब है..... क्यूकी यही वो चक्र है जिन पर तुम्हे ध्यान लगाना है । यही चक्र तुम्हे के तुम्हारे पिता की ही तरह एलिमेंट्स को कंट्रोल करने में मदद करेंगे " । ।
। । "एक मिनेट अंकल, अभी आपने क्या कहा ...... मेरे पिता की ही तरह " वीर confusion में प्रकाश अंकल से पूछता है । ।
। । वीर की बात सुनकर प्रकाश अंकल के चहरे का सारा रंग बदलने सा लगता है, ऐसा लगता है जैसे उन्होंने बहुत बड़ी गलती कर दी हो और जैसे यह बात उन्हें वीर के सामने नहीं करनी चाहिए थी

वीर की बात सुनकर प्रकाश अंकल के चहरे का सारा रंग बदलने सा लगता है, ऐसा लगता है जैसे उन्होंने बहुत बड़ी गलती कर दी हो और जैसे यह बात उन्हें वीर के सामने नहीं करनी चाहिए थी । ।

। । तभी वीर प्रकाश अंकल पर दबाव बनाते हुए पूछता है , " बताइए ना अंकल, मेरे पापा की तरफ से आप का क्या मतलब है .. ? " । ।

। । तब प्रकाश अंकल थोड़ा हिचकीचाते हुए कहते हैं, "  वीर दरअसल तुम्हारे पिता भी Mutant Zone में मिशन पर ही काम किया करते थे , वह बहुत ही ताकतवर योद्दा हुआ करते थे elements को controll करना तो उनके बाए हाथ का खेल हुआ करता था " । ।

। ।अपने चेहरे पर एक खुशी की चमक लाते हुए प्रकाश अंकल एक गहरी सांस लेते है जैसे वह अपनी किसी बहुत ही पुरानी और अच्छी यादों के बारे में याद कर रहे हो । उस समय वीर प्रकाश अंकल के चहरे पर आई हल्की सी मुस्कान को देख कर बड़े आराम से यह बात सकता था कि उस बारे में सोच कर वह कितने खुश है । ।

। । वीर प्रकाश अंकल की सोच में खलल डालते हुए उनसे पुछता है , " अंकल अपने बताया कि dad कई elements को बड़ी आसानी से controll कर लेते थे......! तो उन्होंने को सा element जगाया था"। ।

। । प्रकाश अंकल वीर की बात सुनकर अपनी यादों से बाहर आते हुए कहते है , " वीर तुम्हारे पीते कई elements को काबू ने करना जानते थे । और उन्होंने तो कई mutated beasts को अकेले ही अपने दम पर खत्म किया था, उन्होंनेजब अपना पहला element जगाया था वह एक नही बल्कि दो एलिमेंट्स थे " । ।

। । प्रकाश अंकल की बात सुनकर वीर उत्सुकता में पुछता है , " दो elements अंकल , पर वो को से थे" । ।

। । वीर की बात सुनकर प्रकाश अंकल वीर को जवाब देते हुए बोलते है , " जो element कार्तिक ने जगाए थे उनमे से पहला था wind element और दूसरा था lightening element" । ।

। । इतना कहकर प्रकाश अंकल वीर के चहरे के बदलते भाव देखते है और फिर गहरी सांस लेते हुए आगे कहते है , "वीर अगर तुम भी अपने पिता कार्तिक की ही तरह ताकतवर बनना चाहते हो तो फिर तुम्हे भी मेहनत करनी होगी"। ।

। । वीर प्रकाश अंकल की बात सुनकर उनसे बोलता है , " अंकल में भी अपने डैड की ही तरह बनना चाहता हूँ"। ।

। । "अपने पिता के जैसा....! लेकिन उनसे और भी ज्यादा बेहतर क्यों नही" प्रकाश अंकल वीर को बीच मे ही टोकते हुए कहते है । ।

।। वीर प्रकाश अंकल की बात सुनकर सोच में पड़ जाता है। ।

। । प्रकाश अंकल वीर के चेहरे की के बदलते हुए expressions को देखते हुए कहते हैं , " वीर जिंदगी में कुछ भी हो हमें हमारे लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमेशा हमार 100% देना चाहिए, यही कारण है कि तुम तुम्हारे पिता के जाने से पहले क्लास में टॉप करते थे लेकिन उनके जाने के बाद तुम्हारा ध्यान तुम्हारे लक्ष्य से भटक कर दूसरी चीजों पर चला गया जिससे तुम्हारे marks भी गिरते चले गए और तुम फिर topper से एक कमजोर स्टूडेंट बनकर रह गए । । मेरी एक बात को हमेशा याद रखना वीर यह दुनिया तुम्हें सफल होने से रोकेगी लेकिन अगर तुम तुम्हारी कोशिश को जारी रखते हो तो 1 दिन तुम तुम्हारे लक्ष्य को प्राप्त जरूर कर लोगे । यह दुनिया का नियम है कि, लोग सफल लोगों के पीछे घूमते हैं , लेकिन वह दूसरे लोग जो सफल होने की कोशिश करते हैं, उन्हें लगातार पीछे की तरफ खींचते रहते हैं और उन्हें उल्टी सीधी बातें बताकर उनका आत्मविश्वास भी कम करते रहते हैं । दुनिया बहुत ही खुदगर्ज हो चुकी है इसीलिए आजकल सभी लोग सफल लोगों की सफलता को ही देखते हैं लेकिन उन्होंने सफल होने से पहले जो जो मुसीबतें और असफलताएं उठाई हैं उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं और उनकी सफलता को भी वह किस्मत का tag दे देते हैं"। ।

। । प्रकाश अंकल अपनी बात में थोड़ा रुकते हैं और गहरी सांस लेते हुए आगे कहते हैं, " वीर चलो यह सब बातें तो तुम आगे एक न एक दिन जान ही जाओगे लेकिन अभी तुम ध्यान लगाने की कोशिश करो यही तुम्हारे लिए ठीक होगा"।

। । वीर के मन में कई सवाल थे , लेकिन वह प्रकाश अंकल की बात सुनकर उन सभी सवालों को किनारे करते हुए ध्यान लगाने के लिए अपने पैरों को मोड़ता है और वही जमीन पर ध्यान लगाने के लिए बैठ जाता है प्रकाश अंकल भी कल की ही तरह है वहीं पास में जाकर बैठ जाते हैं । ।

। । कुछ देर बाद वीर के शरीर के आसपास हवा की गति तेज होने लगती है और वह धीरे-धीरे वीर के आसपास घूमने लगती है, उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे हवा वीर के आसपास नाच रही हो, वीर के कपड़े हवा में फड़फड़ाना शुरू कर देते हैं। लेकिन प्रकाश अंकल वीर को देख कर थोड़े खुश हो रहे थे। उन्हें ऐसा लगने लगा था कि वीर ने अपनी elemental को जगा लिया है और  वीर ने जो एलिमेंट जगाया था वह wind एलिमेंट था । लेकिन तभी प्रकाश अंकल कुछ ऐसा दिखते है जिससे उनकी आंखें खुली की खुली रह जाती है प्रकाश अंकल देखते हैं कि जहां अभी वीर के आसपास विंड एलिमेंट घूम रहा था वही हम उसके साथ में कुछ स्पार्क्स होने लगे थे वह स्पार्क्स lightening element के थे , जो आधे पर्पल रंग में चमक रहे थे तो वही आधे सफेद रंग में । ।

। । तकरीबन आधे घंटे बाद वीर अपनी आंखे खोलता है और वीर देखता है कि प्रकाश अंकल उसके सामने ही बैठे हुए उसे एकटक देखे जा रहे हैं  । ।

। । तब वीर प्रकाश अंकल से पूछता है, "  अंकल क्या हुआ....?। ।

। ।तब प्रकाशन कर जवाब देते हुए कहते हैं, " वीर बेटा congratulations  तुम तुम्हारी elemental powers को जगाने में सफल हो गए हो " । ।

। । तब वीर खुश होते हुए प्रकाश अंकल से पूछता है  , "तो अंकल जल्दी बताइए ना मैंने कौन से element को जगाया है " । ।

। । फिर प्रकाश अंकल वीर को बताते हुए कहते हैं , "wind element और lightening element " । ।

। ।तब वीर खुश होते हुए बोलता है , "क्या कहा आपने wind और lightening यह तो वही elements है ना जो मेरे dad ने पहली बार में जगाए थे  " । ।

। । तब प्रकाश अंकल अपना सर हां मिलाते हुए कहते हैं , " हां वीर यह वही एलिमेंट्स है, लेकिन मुझे यह समझ नहीं आ रहा कि तुम्हारे लाइटनिंग एलिमेंट्स के स्पार्क्स में दो तरह के रंग क्यों है । ।

वीर खुश होते हुए बोलता है , "क्या कहा आपने wind और lightening यह तो वही elements है ना जो मेरे dad ने पहली बार में जगाए थे  " । ।
। । तब प्रकाश अंकल अपना सर हां मिलाते हुए कहते हैं , " हां वीर यह वही एलिमेंट्स है, लेकिन मुझे यह समझ नहीं आ रहा कि तुम्हारे लाइटनिंग एलिमेंट्स के स्पार्क्स में दो तरह के रंग क्यों है । ।
। । वीर प्रकाश अंकल से पूछता है , " दो रंग......! आप कहना क्या चाहते हैं अंकल..? । ।
।  ।तब प्रकाश अंकल जवाब देते हुए कहते हैं कि, " तुम्हारे पापा की लाइटनिंग कर रंग पर्पल हुआ करता था और वह बहुत ही खतरनाक हुआ करती थी, लेकिन तुम्हारी लाइटनिंग में सफेद रंग भी है । खैर वह सब छोड़ो अब तुम्हें रोजाना ध्यान लगाकर तुम्हारे एलिमेंट्स पर कंट्रोल को और मजबूत करना होगा तभी तुम mutant zone में survive कर पाओगे "।। अपनी बात में थोड़ा रुक कर प्रकाश अंकल एक गहरी सांस लेते हुए कहते हैं । ।
। । फिर वीर भी उनसे थोड़ी देर तक इधर-उधर की बातें करता है और फिर वह वहां से अपने घर की तरफ निकल जाता है । ।
। । घर पहुंच कर वीर प्रकाश अंकल के बताए अनुसार maditate करने लगता है । वीर जब अपने कमरे में ध्यान लगा रहा था , तब एक बार फिर ध्यान लगाते वक्त उसके आसपास की हवा तेज हो जाती है और उसी हवा के साथ-साथ लाइटनिंग के स्पार्क्स फिर से आवाज करने लगते हैं । । उस वक्त वीर देखने में किसी भगवान की तरह लग रहा था  जो कि शांति से वहां पर बैठे हुए हो । ।
 
। ।वीर को ध्यान लगाते हुए शाम हो जाती है और फिर वीर उठकर खाना खाकर फिर आराम करने के लिए चला जाता है । ।
। ।अगले दिन सुबह वीर आराम से अपने बिस्तर पर सोया हुआ था। । फिर से उसके कमरे में 8:00 बजे अलार्म बजती है, लेकिन अपनी आदत के अनुसार वीर पास ही पड़ा तकिया उठाता है और उस घड़ी पर जोर से देकर मारता है। । तकिए के घड़ी से लगते हैं वह जमीन पर गिर कर टूट जाती है और अलार्म भी बंद हो जाता है । ।
। ।वीर फिर से करवट लेकर सो जाता है , जब 9:00 बजने वाले थे तब उसकी मां वीर को उठाते हुए कहती है, " वीर... बेटा वीर .... उठ जा स्कूल नहीं जाना है क्या.....? कि आज भी लेट होगा " । ।
। ।तब वीर अपनी मां की बात सुनकर करवट बदलते हुए अपनी मां से कहता है , " मां सोने दो ना.... अभी तो 8:00 ही बजे हैं" । ।
। ।वीर की बात सुनकर वीर की मां शारदा को समझ नहीं आता कि वह react कैसे करें । तब वह वीर से कहती है , "है भगवान...! इतना बड़ा हो गया है, अब तो सुधर जा .... 8:00 नहीं 9:00 बजने वाले हैं"। ।
। । इतना सुनते ही वीर की आंखें अचानक से बड़ी हो जाती है, " क्या कहा 9:00 बजने वाले हैं"। ।वीर चौकते हुए बोलता है और अपने बेड से उठने लगता है
। । वीर की मां शारदा उसे जवाब देते हुए कहते हैं , "हां 9:00 बजने वाले हैं और तुझे स्कूल नहीं जाना है क्या . .. ?। ।
। । लेकिन अपनी मां की बात सुनने के लिए वीर वहाँ था ही नहीं , वीर तो पहले ही तैयार होने के लिए बाथरूम की तरफ भाग चुका चुका था । ।
। । वीर अपनी आदत के अनुसार 15 मिनट में तैयार होकर खाना खाने के लिए आ जाता है। हमेशा की ही तरह उसकी बहन फिर वीर की रफ्तार को देख कर चौक जाती है, लेकिन वीर भी उसे नजरअंदाज करते हुए खाना खाकर सीधा स्कूल के लिए निकल जाता है । ।
। ।वीर को भी स्कूल गए हुए अब कई दिन हो गए थे, वीर अपने घर की प्रॉब्लम्स को दूर करने के लिए प्रकाश अंकल के साथ म्युटट जोन की जानकारी लेते- लेते इतना व्यस्त हो गया था कि वह तो स्कूल के बारे में भूल ही गया था, कि उसे स्कूल भी जाना था । ।
। ।वीर जब स्कूल में पहुंचता है तो वह हर बार की ही तरह क्लास की आखिरी बेंच पर जाकर बैठ जाता है । ।
। ।वीर की ही तरह उसके बचपन का दोस्त अनुराग भी उसके पास आकर बैठ जाता है और वीर से कहता है , " क्या भाई..…..! बड़े दिनों बाद दर्शन दे रहे हो "। ।
। । वीर को समझ नहीं आता कि अनुराग कहना क्या चाहता है । इसीलिए वह उससे पूछता है , "अरे भाई.. तू कहना क्या चाहता है..?। ।
। ।तब अनुराग उसे जवाब देते हुए कहता है , "इतने दिनों से कहां था ..? स्कूल क्यों नहीं आ रहा था...? तुझे फोन किया तो तू फोन भी नहीं उठा रहा था " । ।
। । तब वीर उसे जवाब देते हुए कहता है , " नहीं बस कुछ काम था इसीलिए "। ।
। । " अच्छा है कि तू आज आ गया वरना शर्मा सर तो तुझे छोड़ते ही नहीं... आज उन्होंने मैथ का टेस्ट लेने के लिए बोला है " । ।
। । वीर टेस्ट का नाम सुनते खड़े होते हुए चिल्लाता है , "क्या कहा टेस्ट.........!!! "।। 
। । वीर को जवाब देते हुए अनुराग भी उससे कहता है , " हां आज शर्मा सर टेस्ट लेने वाले है। ।
। ।वीर क्लास में इतनी जोर से चिल्लाया था कि पूरी क्लास उसकी तरफ ही देखने लगी थी , तब वीर थोड़ा uncomfortable होते हुए बैठ जाता है और तुरंत मैथ्स की बुक निकालकर पढ़ई करने लगता है । ।
। । तब अनुराग कहता है , " रहने दे भाई .... अब कुछ नहीं हो सकता..! अब तो हम दोनों का फेल होना पक्का है । ।
। । वीर अनुराग की बात को बीच में काटते हुए कहता है, "दोनों का नहीं सिर्फ एक का ही फैल होना पक्का है "। ।
। ।अनुराग वीर की तरफ अपने चेहरे पर अजीब से भाव लाते हुए पूछता है, " दोनों का नहीं सिर्फ एक का....? मतलब "।  ।
। । तब वीर जवाब देते हुए कहता है, " तू तेरा देख मैं तो पास हो जाऊंगा हर बार की तरह " । ।
। । तब अनुराग कहता है , " लेकिन कैसे तुझे तो पता ही नहीं था कि टेस्ट कब है और तू तो हर बार पता होते हुए भी फेल होते होते बचता है वह भी सिर्फ कुछ नंबर से " । ।
। । वीर अनुराग से कहता है , " तू बस देखता जा " । ।
। ।दरअसल वीर को प्रकाश अंकल की कल की कही हुई बात याद आ जाती है , कि दुनिया तुम्हें तभी देखती है जब तुम सफल हो जाते हो और तुम्हारी सफलता की सराहना भी करती है । लेकिन सफल होने के लिए तुम जो परिश्रम करते हो , उसे कभी नहीं देखती और वीर यही बात सोच कर अब से अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने के बारे में सोच रहा था , जैसा वह अपने पिता के जाने से पहले किया करता था । इसीलिए वह अभी पढ़ रहा था ।वीर का दिमाग वैसे तो बहुत तेज था लेकिन वह जानबूझकर ही पढ़ने में ज्यादा ध्यान नहीं देता था । उसे यह सब पसंद नहीं था । उसके पिता के जाने के बाद वह अकेला सा रहने लगा था लेकिन अब वीर को पढ़ाई करने के कुछ कारण मिल गए थे , इसीलिए वह वही कर रहा था ।