Jaadui Duniya - 1 in Hindi Adventure Stories by Ram Make books and stories PDF | जादुई दुनियां - 1

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जादुई दुनियां - 1




एक बड़ी सी आलीशान बिल्डिंग के कांफ्रेंस रूम के अंदर कुछ लोग बैठे हुए थे। उनके ड्रेसिंग सेंस को देखकर कोई भी कह सकता है कि वो कपड़े इतने महंगे है , की कोई आम बिजनेसमैन तो उन्हें अफोर्ड नही कर सकता। 
उन्ही में से एक आदमी अपनी मुट्ठी भींचते हुए बोला, "हमे कार्तिक की कंपनी को जल्द से जल्द अपने नाम कराना होगा , जिस तरह से वो कम्पनी आगे ग्रो कर रही है उससे वो दिन दूर नहीं जब हमारे बिज़नेस को लोग पूछेंगे भी नहीं |" 
तभी उन्हीं लोगों में से एक काफी मोटे आदमी ने अपने मुंह से सिगार का धुआं बाहर निकलते हुए कहा, "अगर कार्तिक हमारे रास्ते से हट जाए तो हमारा काम बहुत ही आसान हो सकता है।" 
तभी दूसरे आदमी ने कहा, "लेकिन उसकी बीवी और बच्चे उनका क्या ?, अगर कार्तिक मर गया तब भी उसकी कंपनी उसके बीवी और  बच्चों को मिल जाएगी , और हमें कोई फायदा नहीं होगा।" 
तभी सिगार पीते हुए उस आदमी ने कहा, "अगर हमें उसकी कंपनी को टेकओवर करना है तो हमें उसे एक हादसे में मरवाना होगा , बाकी इंतेजाम मैंने पहले ही कर रखा है।" 
यह सुनकर सब लोगों की आँखें चमक उठी  और वह सिगार पीने वाला आदमी एक खतरनाक शैतानी हंसी - हँसने लगा। 
शहर में एक आलीशान हवेली के भीतर, सुबह के 7 बजते ही एक रूम में अलार्म की आवाज आयी। 
आवाज सुनते ही वीर ने अपनी आंखें खोली। फिर उसने एक बार अलार्म क्लॉक की तरफ अपनी नींद भरी आंखों से देखा और पास ही तकिये को अपने छोटे हाथो से  उठाकर अलार्म क्लॉक पर जोर से दे मारा, क्लॉक गिरकर टूट गयी और अलार्म के बंद होते ही वो फिर वापस से सो गया। 
कुछ देर बाद, एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति, वीर के रूम में आया। जिसकी उम्र लगभग 40 - 45 वर्ष की रही होगी, उनके काले बालों में से कुछ सफ़ेद बाल भी झांक रहे थे। वो थे मिस्टर कार्तिक जो की वीर के पिता थे। 
वो वीर को अभी भी सोया देख पहले तो उसे प्यार से देखते रहते, फिर वो वीर को जगाते हुए बोले , “Happy birthday my prince." My little hero "
अपने अपने पापा की आवाज सुन, वो मुस्कुराकर उठा और आधी नींद में बोला, “थैंक यू  डैड " 
तभी वीर के पिता वीर से थोड़ा गुस्सा दिखते हुए बोले, "आज तुम्हारा बर्थडे है और तुम अभी तक सो रहे हो, स्कूल के लिए लेट होना है क्या? जाओ जाकर जल्दी से रेडी हो जाओ।" 
अपने पिता की बात सुनकर कुछ देर बाद वीर तैयार होकर नाश्ता करने के लिए नीचे आ गया। डाइनिंग रूम में उसके पिता और छोटी बहन कृतिका पहले से ही बैठे थे। 
तभी वीर के पिता वीर को सीढियो के पास खड़ा देखकर बोले, "अरे बेटा आ जाओ कुछ खा लो।" 
तब वीर अपने dad की बात सुनकर मुंह  बनाते हुए बोला, "मेरा gift कहाँ है dad।" 
तब वीर के पिता उससे बोले, "शाम को तुम स्कूल से आकर रेडी रहना , तुम्हारे लिये surprise है।" 
सरप्राइज का नाम सुनते ही वीर के मन में तो जैसे लड्डू फूटने लगे और इसी खुशी में वीर अपने पिता से पूछा, "surprise , कैसा surprise dad।" 
वीर की खुशी देखकर कार्तिक वीर से बोले, "अगर में तुम्हे पहले ही बता दूँगा, तो यह surprise थोड़ी रह जाएगा।" 
"पर dad मुझे कुछ तो बताइए" वीर ने curious होकर कार्तिक से पूछा। 
"नहीं, तुम बस इतना जान लो कि तुम इस surprise को हमेशा याद रखोगे।" कार्तिक ने कहा | 
"पर dad" वीर की बात को बीच में ही काटते हुए वीर के पिता उससे बोले, "पर ,वर कुछ नहीं, चलो अब नाश्ता कर लो।" 
नाश्ता करने के बाद कार्तिक ने  वीर और उसकी छोटी बहन कृतिका को city school छोड़ दिया और फिर वो वह से अपने ऑफिस की तरफ निकल गए। 
वीर के डैड कार्तिक के पास 3 minerals की फैक्ट्री थी। जहाँ से वो बहुत ही महंगे minerals को निकालते थे। वो minerals world के सबसे कीमती minerals में आते थे। वीर के पिता कार्तिक की फैक्टरी से जो output निकलता था वो बेस्ट था। 
उनकी फैक्ट्री के मिनरल्स की डिमांड हमेशा ही मार्केट में बनी रहती थी।  बड़ी फैक्टरियों में वो कच्चा माल सप्लाई करते थे। बस कुछ सालों में ही उनकी कंपनी के ग्रुप ने आसमान की बुलंदियों को छूना शुरू कर दिया था। जिस तरह से उनकी companies तरक्की करती गई , उसी के साथ - साथ उनके दुश्मन भी बढ़ते चले गए। 
यहीं वीर पढ़ने में बहुत तेज था, एग्जाम में हर बार फर्स्ट आना तो जैसे उसके लिए ख़ास बात नहीं थी । वीर class में भी सब टीचर्स का फेवरेट स्टूडेंट बन गया था। उसका एक बेस्ट फ्रेंड था अनुराग। 
आज वीर जैसे ही school में एंटर हुआ, अनुराग उसे बाहर ही मिल गया। अनुराग को देख कर वीर की आंखों में एक चमक सी आ गयी। 
अनुराग ने वीर के गले लगते हुए कहा, "हैप्पी बर्थडे  मेरे भाई।" 
" थैंक यू भाई " जवाब देते हुए वीर ने कहा। 
तभी अनुराग ने वीर से कहा " बता party कब है?" 
वीर जवाब देते हुए अनुराग से बोला, " आज शाम 6 बजे मेरे घर पर है पार्टी।" 
तभी अनुराग वीर की टांग खींचते हुए अपना मुह बनाते हुए बोला, "तो तू मुझे. अपने best friend को अपनी birthday party में invite नहीं करेगा?" 
तब वीर ने भी अनुराग की टांग खींचते हुए ही बोला, "तुझे बुलाने की जरूरत ही कहाँ पड़ती है , स्कूल के बाद जब तक तो तू मेरे घर पर ही रहता है, और कोई तुझे कुछ कहे, तो पढ़ाई का बहना बना कर मेरे रूम में ही वीडियो गेम्स खेलता रहता है।" 
अनुराग ने थोड़ा अजीब महसूस किया और अनुराग की शक्ल को देख कर वीर हँसने लगा । अभी दोनों बात कर ही रहे थे कि तभी bell लगने की आवाज आयी और दोनों क्लास में चले गए। 
शाम हो गयी थी और कार्तिक अपने बेटे वीर के बर्थडे पर टाइम से पहुँचने के लिए निकल गए थे । अभी वह रास्ते में ही थे की तभी कार की steering fail हो गई और उनकी कार सामने तेज रफ्तार से आते हुए truck में जा घुसी। एक पल में ही कार्तिक की आँखों के सामने अपने पूरे परिवार की हंसती खेलती तस्वीरें घूमने लगी कार्तिक को वह वादा भी याद आया, जो उसने अपने बेटे वीर के birthday के लिए आज surprise देने को कहा था। उन्हें क्या पता था कि यह सरप्राइज वीर के लिए इतना बुरा होने वाला था तभी उनकी car, ट्रक से टकराकर 4 से 5 बार पलटते हुए रोड से नीचे गिर गई। 
तो क्या होगा कहानी में आगे ,क्या कार्तिक ज़िंदा पहुँच पाएंगे अपने बेटे वीर की बर्थडे पार्टी में ? 
किन लोगों से है वीर के पिता की जान को खतरा ?




        जब यह बात वीर की माँ, शारदा, को पता चला। तब उनकी तो जैसे पूरी दुनिया ही खत्म हो गई, उनका तो जैसे रो - रो कर बुरा हाल हो गया हो गया था पुरे घर मे जहां हर तरफ शोरगुल हुआ करता था, आज वहां एक अजीब सी खामोशी पूरे घर में फैल गई थी। 
      
दरअसल शाम को कार्तिक अपने बेटे वीर के बर्थडे के लिए गिफ्ट लेकर जा रहे थे, की तभी उन्होंने notice किया उनकी कार के ब्रेक में कुछ तो दिक्कत थी। उन्होंने जब break लगाया, तो उन्हें पता चला कि उनकी कार के break fail हो चुके थे। 
लेकिन अब इस बात के लिये बहुत ही ज्यादा देर हो चुकी थी। क्योंकि कार पहले ही हाईवे पर बहुत ज्यादा speed में थी। इस बात का पता चलते ही कार्तिक panic होना शुरू हो गए, क्योंकि गाड़ी रनिंग हाईवे पर थी।और इसी घबराहट के चलते कार का बैलेंस बिगड़ने लगा और वो रोड पर इधर उधर जाने लगी कार्तिक की पूरी कोशशों के बाद भी उनकी कार बाकी गाड़ियों से बचते हुए आगे बढ़ती ही चली जा रही थी। 
तभी कार की steering fail हो गई और उनकी कार सामने से आते हुए truck में जा घुसी। तभी उनकी कार , ट्रक से टकराकर 4 से 5 बार पलटते हुए रोड से नीचे गिर गई। 
Truck driver ने थोड़ा आगे ले जाकर अपने ट्रक को रोका और किसी को फ़ोन मिलाकर बोला, "काम हो गया है साहेब" फ़ोन के दूसरी तरफ से किसी के हँसने की आवाज आयी। 
वहीं हादसे के कुछ दिन बाद, पुलिस एक्सीडेंट स्पॉट से कार्तिक का सामान उनके परिवार को लौटाने के लिए आते है उस समान में वीर की माँ के लिए एक साड़ी, छोटी बहन के लिए एक अच्छी से ड्रेस और वीर के लिए एक छोटी कार और एक पेंडेंट था| उस कार पर अब भी कुछ खून की बूंदे थी।, जो कि सूख चुकी थी। उन सुखी हुई खून की बूंदों को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वो accident अब भी वीर की आंखों के सामने ही हो रहा हो वीर की आंखे उन्हें देख कर नम हो गई थी। 
वहीं जब वीर ने उस पेंडेंट को देखा, तब वह पेंडेंट दिखने में तो काफी ज्यादा खूबसूरत था पर अगर कोई उसे ध्यान से देखे तो उस pendent की डिजाइन देखने में कुछ ज्यादा ही अजीब थी। 
उस दिन के बाद से वीर की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई, हसता खेलता वीर कुछ मायूस सा रहने लगा। 
इसी तरह से 8 साल बीत गए वीर अब 18 साल का हो चुका था। उसने जब हाई स्कूल ज्वाइन किया था, तब उसके मार्क्स तो कम थे। पर उसकी माँ के principle से request करने पर वहां उसे एडमिशन देने के लिए तैयार हो गए वीर भी अब थोड़ा जिम्मेदार हो गया था वीर के पिता की death के बाद कुछ companies ने उनकी सभी companies को takeover कर लिया था अब वीर की फॅमिली कर्ज में डूब सी गई है हर आए दिन पैसे मांगने के लिए कोई न कोई उनके घर चला आता था। 
अब घर के नाम पर सिर्फ उनकी हवेली ही बची हुई है उनकी सारी property जो उनके पास थी। वो उन्हें बेचनी पड़ी, लेकिन अब भी उन पर काफी कर्ज बाकी था आए दिन लोग वीर की family को पैसो के लिए परेशान करते थे। उनकी बात सुनकर वीर को गुस्सा तो बहुत आता था, क्योंकि ये वो ही लोग थे। जिनकी मदद उसके पिता ने उनके मुश्किल वक्त में की थी। और आज वो ही लोग उसकी family को परेशान कर रहे थे। लेकिन वीर कुछ कर भी तो नही सकता था। 
इधर वीर के रूम में, रूम की हालत देख कर कोई भी कह सकता है, कि world war 2 यहीं लड़ा गया था रूम के अंदर किसी के भी आने पर सख्त मनाही थी। इसलिए रूम में चारों तरफ गंदगी फैली हुई है रूम की साफ सफाई किए तो जैसे सालो बीत चुके है लेकिन इन सब मे एक बात अजीब थी।, वो यह कि room में गंदगी होने के बाद भी वहां पर किसी भी तरह की बदबू नहीं आ रही थी। यह शायद इसीलिए था क्योंकि वीर को भी अपने पिता की तरह ही गंदगी पसंद नही थी। और जो गंदगी उसके room में थी, वह रूम के सामान के इधर उधर गिरे होने के कारण थी। वहां कुछ भी ऐसी चीज नही थी जो बदबू फैला सके। 
एक दिन सुबह के  8 बजते ही वीर की माँ वीर को आवाज लगाते हुए बोली, "वीर बेटा आज तो जल्दी उठ जा, आज तेरा रिजल्ट आने वाला है"। 
अपनी माँ की आवाज सुनकर वीर ने अपनी आँखें खोली और टाइम देखा कि 8 बज रहे है, तब वीर ने जवाब दिया "अभी तो 8 ही बज रहे है माँ, सोने दो ना" यह कहकर वीर फिर से सो गया। 
थोड़ी देर की नींद लेने के बाद वीर अचानक से ही अपनी आंखें खोलता है । और जब वह घड़ी की तरफ देखता है । तब 9 बजने में सिर्फ पन्द्रह मिनट ही बचे थे। 
यह देखकर वह बड़बड़ाता है, "आज फिर में late हो जाऊँगा" । इतना कहकर वीर बिजली की तेजी से अपने बिस्तर से निकलकर बाथरूम की तरफ भागा । 
       आज अपनी माँ की आवाज सुनकर वीर ने अपनी आँखें खोली और time देखा कि 8 बज रहे थे। तब वीर ने जवाब दिया, "अभी तो 8 ही बज रहे है। माँ , सोने दो ना" ये कहकर वीर फिर से सो गया।थोड़ी देर की नींद लेने के बाद वीर ने अचानक से ही अपनी आंखें खोली फिर जब उसने घड़ी की तरफ देखा तो अभी 9 बजने में सिर्फ 15 minute ही बचे हुए थे।ये देखकर वो बड़बड़ाते हुए बोला, "आज फिर में late हो जाऊँगा" इतना कहकर वीर बिजली की तेजी के साथ अपने बिस्तर से निकलकर bathroom की तरफ भागा।वीर के रूम से सामान इधर उधर करने कि आवाजे बाहर तक आ रही थी ये सुनकर कृतिका, हँसते हुए अपनी माँ से बोली, "माँ लगता है। कि भैया आज फिर से late हो जाएंगे।"कृतिका की बात सुनकर उसकी माँ ने घड़ी की तरफ देखा और कृतिका से कहा, " तेरा भाई में सिर्फ एक ही तो काबिलियत है।, जल्दी तैयार होने की , वो उसमे पीछे नही रहेगा।"अभी उन्होंने अपनी बात खत्म भी नहीं कि थी की तभी वीर के कमरे का दरवाजा खुला और वीर अपने जूते पहनते हुए बाहर की तरफ भागा और बस 2 minute में नास्ता खत्म करके खड़ा हो गया, अभी 9 बजने में 8 minute बाकी थे वीर की speed देख कर तो उसकी माँ और छोटी बहन दोनों की ही आंखे खुली की खुली रह गई इससे पहले की वो दोनों कुछ समझ पाते , उससे पहले ही वीर तुरन्त school के लिए निकल गया।school पहुंचते ही वीर ने देखा कि class का time तो पहले ही हो चुका था, और किसी भी वक़्त class के लिए bell लग सकती थी। तब वीर मन ही मन बड़बड़ाते हुए बोला, "अरे यार आज फिर से लेट हो जाऊंगा" अभी उसने इतना कहा ही था कि तभी उसे bell लगाने की आवाज आयी। आवाज को सुनते वीर अपनी पूरी ताकत लगाकर किसी jet की तरह भागते हुए class में पहुंच गया।वीर जब class में पहुंचा, तो उसने देखा कि अब तक sharma sir class में नही आए थे। तब वो रोज की तरह ही अपनी last bench पर जाकर बैठ गया। कुछ देर बाद क्लास में एक लड़की enter हुई वीर तो उसे देखता ही रह गया उस लड़की का नाम विनीता था। वीर आज decide करके ही आया था कि वो आज विनीता को propose करके ही रहेगा।अपने मन मे ये ही खयाल लेकर वो first bench की तरफ गया और विनीता के सामने घुटनो के बल बैठकर उसके सामने एक rose आगे कर दिया। ये देख कर सभी students ने चिल्लाना शुरू कर दिया। वीर अभी कुछ बोलने ही वाला था की तभी विनीता जो अब तक shocked खड़ी थी। उसने भी veer को देख कर हँसना शुरू कर दिया।वीर को लगा कि शायद उसके propose करने की वजह से विनीता हस रही थी , लेकिन तभी पीछे से आवाज आयी, "ऐ मजनू के भतीजे जा जाकर अपनी जगह पर बैठ जा, पता नही आज कल के बच्चों को हो क्या गया है? दूध के दांत टूटे नही और चले है। आशिक़ी लड़ाने।"ये आवाज सुनकर वीर हक्का - बक्का रह गया वो तुरंत पलट कर देखा तो पीछे sharma sir खड़े हुए थे।sharma sir को देखते ही वीर तुरंत अपना मुंह नीचे करके अपनी last bench पर जेक बैठ गया।उसके बाद sharma sir अपनी seat पर बैठते हुए बोले, "okay students आपकी exam का result मेरे हाथ में है और हर बार की तरह इस बार भी class में पीछे से top किया है... वीर रन्धावा ने। जो सिर्फ english में ही पास हो पाया है। वो भी boundary line पर।"sharma sir की बात सुनकर सभी बच्चे हंसने लगे, वीर को तो ऐसा लग रहा था ,कि मानो विनीता ही सबसे ज्यादा हंस रही थी सभी बच्चों में उसकी हंसी की आवाज ही गूंज रही थी विनीता को देखकर वीर के दिमाग में एक ही गाना आ रहा था, "ठुकरा के मेरा प्यार मेरा इन्तेक़ाम देखेगी।"तब वीर अपने आप से वादा करते हुए बोला, "विनीता खुराना एक दिन तुम मुझे ठुकराने के लिए जरूर पछताओगी और ये फिर रंधावा का वादा है।"बड़े लोगों ने ठीक ही कहा है, " उम्र जितनी कम हो, दिमाग भी उतना ही कम होता है, और जो दिमाग होता है, जवानी के जोश में वो भी काम करना बंद कर दिया।"इस वक़्त वीर की सबसे बड़ी problem अपनी marksheet पर अपनी माँ के sign करवाने की थी।शाम को घर पहुंचकर वीर ने देखा कि उसकी मां के kitchen में से अभी बाहर ही आ रही थी। तब वीर ने सोचा कि, "यही सही मौका है, sign करवाने का।"और वो अपनी मां के पास पहुंच गया और बोला, "मां इस paper पर sign कर दो।"उस document को देखकर वीर की मां ने पूछा, " ये क्या है?"तब वीर जल्दी से अपने दिमाग के घोड़े दौड़ाते हुए बोला, " मां वो हमारे maths teacher है ना, sharma जी उनको उनको भूलने की बीमारी गो गई हैं।"तब उसकी मां हैरान हो कर बोली, "क्या बात कर रहे हो बेटा?"अपनी मां कि बात को बीच में ही काटते हुए वीर बोला, "हां मां वो तो अब हर बात भूल जाते है।""जैसे???" वीर की मां ने पूछा तो वीर ने कहा, " जैसे कल तो वो अपनी पेंट पहन कर आना ही भूल गए थे,।""अच्छा फिर बेटा" वीर की मां ने पूछा।तब वीर ने जवाब दिया, "फिर क्या principle ने उन्हें वापस भेज दिया और हम सब को ये letter दिया और कहा की सभी अपने parents के signature करवा के लाए ताकि sharma sir का treatment किसी अच्छे hospital में करवा सके और तब तक हमारी classes दूसरे teacher लेंगे।" वीर की बातें उसकी माँ खूब समझ रही थी। पर वो उसे अपने तरीके से समझाना चाहती थी।वीर की चिकनी चुपड़ी बातों में आकर वीर की माँ ने sign कर दिए और वीर अपने कमरे की तरफ जाते हुए उस paper को लहराते हुए सोच रहा था, "चलो sign तो हो गए।"अगले दिन वीर के घर के सामने एक car में वीर के आवारा दोस्त बैठे थे। उन्होंने अपनी car का horn बजाई। उनकी आवाज सुनकर वीर जल्दी से तैयार होकर अपने रूम से बाहर आ गया।बाहर आते ही वीर की मां वीर को रोते हुए बोली, "बेटा सुन"और फिर वो वीर के हाथ में कुछ पैसे देते हुए बोली, "बेटा मैं जानती हूं कि तुझे तेरे पापा के जाने का दुख है, लेकिन इस तरह से तू अपनी जिंदगी खराब मत करये पैसे रख और supplimentry exam देकर आ जाना। मैं जानती हूं कि तू exam में fail हो गया है।"अपनी मां की ये बात सुनकर तो वीर भी हक्का बक्का रह गया और फिर अपनी माँ से बोला, " आपको कैसे पता?"तब उसकी मां जवाब देते हुए बोली, " बेटा मैं तेरी मां हूँ तेरे दिमाग में कब और क्या आता है। सब जानती हूं, चल अब जा, तेरे वो आवारा दोस्त बाहर तेरा wait कर रहे हैं।"अपनी मां की बात सुनकर वीर ने अपनी मां को गले लगा लिया और फिर जल्दी से नीचे अपने दोस्तों के पास चला गया।रात को, जब वीर को उसके दोस्तों से उसे उसके घर छोड़ने के लिए आये, तो उन्होंने देखा कि घर के बाहर 4 mercedes cars खड़ी थी और लोगों की भी भीड़ लगी हुई है। वीर की मां वहां खड़ी रो रही थी और अपनी मां को गले से लगाए उसकी बहन भी डरी सहमी सी खड़ी थी। अपने दोस्तों के सामने ये सब होता देख वीर embarrass होने लगा।ये सब होता देख वो बड़बड़ाता हुआ बोला, "इन लोगों की इतनी हिम्मत, जो ये लोग फिर आ गए।

रात को, जब वीर के दोस्त उसे घर छोड़ने के लिए आते हैं, तब वह देखते हैं कि घर के बाहर 4 mercedes car खड़ी है और लोगों की भी भीड़ लगी हुई है। वही पास ही वीर की मां वहां खड़ी रो रही होती हैं और अपनी मां को गले लगाए उसकी बहन डरी सहमी सी खड़ी हैं ।अपने दोस्तों के सामने यह सब होता देख वीर embarrass होने लगता है। यह सब होता देख वह बड़बड़ाते हुए बोला, " इन लोगों की इतनी हिम्मत, यह लोग फिर आ गए "।वीर की बात सुनकर उसका एक मोटू  दोस्त उससे पूछने लगा, " कौन है यह लोग...? और तेरी मां और बहन को क्यों परेशान कर रहे हैं"।तब वीर अपने दांत पिसते हुए बोला, "यह वही लोग हैं, जिनके बिज़नस मेरे पापा ने डूबते डूबते बचाए थे और इनके बिजनेस को फिर से खड़ा किया था और आज यह लोग मेरे पापा की death के बाद उनकी company में हुए नुकसान के पैसे लेना चाहते हैं"।इतना कह कर वीर जल्दी से गाड़ी से उतरकर उन लोगों के पास पहुंच गया तब उन्ही लोगों में से एक, जिसका नाम टाइकून ठकराल था, वह वीर को देखकर बोला, "लो आ गया इनका निकम्मा बेटा, आओ आप की ही कमी थी। अब जल्दी से बताओ कि हमारे पैसे कब लौटाओगे"।वीर की मां अपने रुंधे गले से बोली, "कहां से लाऊंगी मैं इतने पैसे और वीर भी तो अभी इतना छोटा है"।तभी उन्ही लोगों के बिच में खड़ा वीर का मामा बोला, " यह हवेली है, ना बेच दो इसे और चुका दो पैसे "।वीर की मां बोली, "भाईसाहब ऐसे कैसे बेच दे, उनके गुजर जाने के बाद यह हवेली ही तो उनकी आखिरी निशानी है, हम इसे नहीं बेच सकते "।तभी ठकराल बीच में ही बोल पड़ा ," वो सब हम नहीं जानते हमें हमारे पैसे चाहिए, अगर नहीं दिए तो अगली बार हम पुलिस को लेकर आएंगे तब देखते हैं कि तुम लोग क्या बहाना बनाते हो"।ठकराल की बात सुनकर वीर से रहा नहीं गया और वह जवानी के जोश में बोल पड़ा," कितने रुपए चाहिए आप लोगों को मुझे और मेरी family को अकेला छोड़ने के लिए , मैं दूंगा आप लोगों के पैसे"।वीर के अंकल हंसते हुए बोले, "तुम्हारी मां तो इतने सालों में हमारा कर्ज चुका नहीं पाई और तुम कहते हो कि तुम हमारा कर्ज उतारोगे "।अपने अंकल की बात सुनकर वीर अपने दांत भींचते हुए बोला, "शर्म आनी चाहिए आप लोगों को, मेरे पापा ने आप और आपकी family के लिए क्या कुछ नहीं किया।  आपके डूबते हुए business को बचाया और आप उनके गुजर जाने के बाद उनकी family को परेशान कर रहे हो"।वीर की तीखी बातें सुनकर पास ही खड़ी वीर की aunty उससे बोली, "यह लाज शर्म की बात तुम ना ही करो तो अच्छा है अच्छा होगा, एक तो हमारे पैसे नहीं लौटा रहे हो और ऊपर से हमें ही blame कर रहे हो"।वीर झल्लाते हुए बोला, "कितने रुपए चाहिए आप लोगों को.. ..."  ।वीर के अंकल ने जवाब देते कहा , "6 crore...!"वीर ने भी जोश- जोश में कह दिया," हां ठीक है... 2 साल बाद आकर ले जाना आपने रुपए और तब तक मेरी family के आसपास भी नजर में आना"।वीर की बात सुनकर उसके अंकल बोले, "आज से ठीक 2 साल बाद हमारे पैसे तैयार रखना... नहीं तो अपनी हवेली को खाली करने के लिए तैयार रहना।"उनकी बात सुनकर वीर अपनी मुट्ठी भींचते हुए बोला, "आप सब यहां से जा सकते हैं" वीर की बात सुनकर वीर के अंकल , आंटी और टाइकून ठकराल वहां से हंसते हुए चले जाते हैं।।जाते जाते एक बार वह हवेली की तरफ मुड़कर लालच भरी निगाहों से देखते है, आखिर 6 crore कोई छोटी रकम तो होती नहीं थी, जो कोई भी ऐसे ही कमा ले । कई लोग तो अपनी पूरी जिंदगी में भी इतने पैसे नहीं कमा पाते थे ।अब उन लोगों को पूरा भरोसा था कि, वह दिन दूर नहीं जब वह हवेली उनकी हो जाएगी।सब लोगों के जाने के बाद वीर भी अपनी मां और छोटी बहन कृतिका को लेकर हवेली में चला जाता है, हवेली में पहुंचकर कृतिका अपने कमरे में सोने के लिए चली जाती है और अभी वीर भी अपने कमरे में जा ही रहा था कि तभी वीर की मां वीर से पूछती है," तू इतने कम समय में इतने सारे रुपए से कहां से लाएगा "।तब वीर अपनी मां की टेंशन दूर करते हुए बोला, "तुम चिंता मत करो माँ ,मैं सब संभाल लूंगा । अब जाओ और अपने कमरे में जाकर सो जाओ good night" । वीर की मां  भी वीर को good night wish करके अपने रूम में चली जाती है। वीर भी वहां से अपने कमरे में चला जाता है।वीर सोने के लिए अपने bed पर लेट तो जाता है, पर वह भी जानता था कि आज उसने जोश जोश में आकर बहुत बड़ी गलती कर दी है, उसे अपनी बहन कृतिका के लिए बहुत बुरा लग रहा था, क्योंकि वह भी जानता था कि उसकी बहन ने इतने कम उम्र में ही बहुत कुछ बुरा देख लिया है।जब वीर उसकी उम्र का था तब उसके पापा उसके पास ही थे, तब उसके सारे शौक उसके पापा पूरा कर दिया करते थे । लेकिन उसकी बहन के लिए ऐसा कुछ भी नहीं था। उसने इस उम्र में ही जिंदगी का काफी अनुभव कर लिया था। जिससे अब वह अपनी उम्र के बच्चों से काफी समझदार हो गई थी जिस वजह से उसे अपने कई बार अपनी इच्छाओं से भी समझौता कर लेती थी। उसने खेलने कूदने की उम्र में काफी कुछ सह लिया था। बस यही सब सोचते हुए वीर को कब नींद आ जाती है, उसे पता भी नहीं चलता ।अगले दिन सुबह ... , वीर अभी भी सोया हुआ है और अपने सपनों की दुनिया में को enjoy कर रहा होता है की तभी वीर का मोबाइल फोन अचानक बज उठता है।अचानक अपने फोन के बजने से वीर चौक कर चिल्लाते हुए उठा, " मैंने कुछ नहीं किया - कुछ नहीं किया मैंने"।तभी उसकी नजर अपने ring होते हुए फोन पर पढ़ी, अभी -अभी उठने की वजह से वह ठीक से स्क्रीन पर आ रहे नाम को नहीं देखता है और call को recieve कर लेता है। वह एक video call थी, वीर के कॉल उठाते ही। अचानक एक इंसान की राक्षसों की तरह हस्ती हुई image सामने आ गई वीर तो उन्हें देखकर गिरते-गिरते बचा।  screen पर वीर के बचपन के दोस्त अनुराग के पिता प्रकाश मित्तल थे।आखिर क्यों बडबडा रहा था वीर अपने सपने में और कौन है प्रकाश मित्तल? 



( दोस्तो कैसी लग रही है । वीर की दिलचस्प कहानी बताना न भूले । और आगे की कहानी पढ़ने के लिए बने रहे हमारे साथ । )