barish Wali mulakat in Hindi Love Stories by Rajesh Maltii books and stories PDF | बारिश वाली मुलाक़ात

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बारिश वाली मुलाक़ात

दिल्ली की एक ठंडी शाम थी। आसमान में काले बादल छाए हुए थे और हल्की-हल्की बारिश शुरू हो चुकी थी। सड़कों पर लोगों की भीड़ कम हो गई थी, लेकिन उसी भीड़ में एक लड़की छतरी लिए धीरे-धीरे चल रही थी—उसका नाम था आराध्या।

आराध्या एक शांत स्वभाव की लड़की थी, जिसे किताबों और बारिश से बहुत प्यार था। उस दिन वह अपने ऑफिस से घर लौट रही थी, लेकिन बारिश ने जैसे उसके कदम रोक लिए थे। वह पास के एक छोटे से कैफे में चली गई, जहां हल्की रोशनी और सुकून भरा माहौल था।

कैफे के अंदर एक कोने में बैठा एक लड़का गिटार बजा रहा था। उसकी धुन इतनी मधुर थी कि आराध्या अनजाने में वहीं रुक गई। लड़के का नाम आदित्य था—एक फ्रीलांस म्यूज़िशियन, जो अपनी दुनिया में खोया रहता था।

आराध्या ने कॉफी ऑर्डर की और उसी के पास वाली टेबल पर बैठ गई। आदित्य की नजर अचानक उस पर पड़ी। उसकी आंखों में एक अजीब सी गहराई थी, जैसे वो किसी कहानी को समझने की कोशिश कर रहा हो।

“तुम्हें ये धुन पसंद आई?” आदित्य ने मुस्कुराते हुए पूछा।

आराध्या थोड़ा चौंकी, फिर हल्की मुस्कान के साथ बोली, “हाँ, बहुत… ऐसा लगा जैसे बारिश भी इसे सुनकर थम जाए।”

आदित्य ने गिटार बजाना बंद किया और कहा, “शायद इसलिए क्योंकि ये धुन मैंने पहली बार किसी खास के लिए बजाई है।”

आराध्या ने उसकी बात पर कुछ नहीं कहा, लेकिन उसके दिल की धड़कन थोड़ी तेज हो गई।

दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। छोटी-छोटी बातों से लेकर सपनों तक—जैसे समय रुक गया हो। बाहर बारिश तेज हो गई थी, लेकिन कैफे के अंदर एक अलग ही दुनिया बस गई थी।

“तुम्हें बारिश क्यों पसंद है?” आदित्य ने पूछा।

आराध्या ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा, “क्योंकि ये हर दर्द को धो देती है… और नई शुरुआत का एहसास देती है।”

आदित्य ने धीरे से कहा, “तो क्या मैं तुम्हारी नई शुरुआत बन सकता हूँ?”

आराध्या ने उसकी तरफ देखा। उसकी आंखों में सच्चाई थी, कोई बनावट नहीं। उसने धीरे से कहा, “शायद… अगर ये बारिश हमेशा ऐसे ही चलती रहे।”

उस दिन के बाद दोनों की मुलाकातें बढ़ने लगीं। कभी कैफे में, कभी पार्क में, तो कभी बस फोन पर घंटों बातें। आदित्य की धुनें अब सिर्फ आराध्या के लिए होती थीं, और आराध्या की मुस्कान अब सिर्फ आदित्य के लिए।

लेकिन हर कहानी में एक मोड़ आता है।

एक दिन आदित्य ने बताया कि उसे एक बड़े म्यूज़िक प्रोजेक्ट के लिए मुंबई जाना होगा। ये उसका सपना था, लेकिन इसका मतलब था आराध्या से दूर जाना।

“मैं नहीं चाहता कि तुम जाओ,” आराध्या ने धीमे से कहा।

आदित्य ने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा, “मैं भी नहीं चाहता… लेकिन अगर मैं गया नहीं, तो शायद खुद से नजरें नहीं मिला पाऊंगा।”

कुछ पल की खामोशी के बाद आराध्या ने मुस्कुराकर कहा, “जाओ… अपने सपनों को पूरा करो। मैं इंतजार करूंगी।”

आदित्य ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा, “वादा है, मैं लौटकर आऊंगा… तुम्हारे लिए।”

समय बीतता गया। कॉल्स कम हो गईं, मैसेजेस छोटे हो गए। दूरी ने जैसे उनके रिश्ते को परखना शुरू कर दिया।

एक साल बाद, उसी बारिश वाली शाम, आराध्या फिर उसी कैफे में बैठी थी। उसकी आंखों में हल्की उदासी थी, लेकिन उम्मीद अभी भी जिंदा थी।

तभी दरवाजा खुला। वही गिटार, वही मुस्कान… आदित्य।

आराध्या की आंखों में आंसू आ गए। “तुम… सच में आ गए?”

आदित्य ने पास आकर कहा, “मैंने कहा था ना, लौटकर आऊंगा… तुम्हारे लिए।”

उसने गिटार उठाया और वही धुन बजाने लगा, जो पहली बार बजाई थी।

इस बार, बारिश भी जैसे उस धुन के साथ थम गई।

आदित्य ने गिटार रखते हुए कहा, “अब कहीं नहीं जाऊंगा… क्योंकि मेरा असली सपना तो यहीं है।”

आराध्या ने मुस्कुराते हुए उसे गले लगा लिया।

बारिश अब भी हो रही थी, लेकिन इस बार वो सिर्फ मौसम नहीं थी—वो दो दिलों की कहानी थी, जो हर मुश्किल के बाद भी एक हो गए।

समाप्त ❤️