adhura Tara in Hindi Love Stories by Rajesh Maltii books and stories PDF | अधूरे तार: रूहों का मौन संवाद

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अधूरे तार: रूहों का मौन संवाद

अधूरे तार: रूहों का मौन संवाद
नील नीले समंदर के किनारे बसे एक शोर शराबे वाले शहर की बीसवीं मंजिल पर खड़ी 'सहर' अपनी खिड़की से डूबते सूरज को देख रही थी। वहीं, यहाँ से ठीक दो हज़ार किलोमीटर दूर, बर्फ से ढके पहाड़ों की एक छोटी सी झोपड़ी के बाहर 'आर्यन' जलती हुई लकड़ियों के पास बैठा आसमान के उसी सूरज को ओझल होते देख रहा था। सूरज तो एक था, पर उनकी दुनिया के बीच का फासला इतना बड़ा था कि उसे तय करना किसी सपने जैसा लगता था।

वे कभी मिले नहीं थे। उनकी मुलाक़ात एक ऑनलाइन राइटिंग फोरम पर हुई थी, जहाँ सहर की कविताओं ने आर्यन के अकेलेपन को आवाज़ दी थी। धीरे-धीरे, शब्दों का यह मेल एक ऐसे अटूट बंधन में बदल गया जिसे 'प्यार' कहना भी शायद छोटा शब्द होता। उनके बीच न कोई वादा था, न कोई शर्त, बस एक बेपनाह तड़प थी जो हर रात उनके फोन की नीली रोशनी के ज़रिए एक-दूसरे तक पहुँचती थी।

आज सहर का मन बहुत व्याकुल था। उसने फोन उठाया और टाइप किया— "आर्यन, क्या कभी ऐसा दिन आएगा जब हम एक ही खिड़की से इस डूबते सूरज को देखेंगे? यहाँ की नमी और समंदर की खारापन अब मुझे काटने को दौड़ती है। मेरा मन करता है कि बस उड़कर तुम्हारे उन ठंडे पहाड़ों की गोद में आ जाऊं।"

आर्यन ने मैसेज पढ़ा और उसकी आँखों के कोने भीग गए। उसने जवाब दिया— "सहर, यहाँ की खामोशी अब खामोशी नहीं रही, यह तुम्हारा नाम पुकारती है। मैं जब भी रात को तारों को देखता हूँ, तो बस यही सोचता हूँ कि शायद तुम भी अभी इसी तारे को देख रही होगी। फासले जिस्मों के होते हैं सहर, हमारी रूहें तो हर पल साथ हैं।"

दोनों के पास साधन नहीं थे कि वे इतनी जल्दी मिल सकें। सहर अपने बीमार पिता की देखभाल और नौकरी की बेड़ियों में जकड़ी थी, और आर्यन पहाड़ के एक छोटे से स्कूल में बच्चों को पढ़ाकर मुश्किल से अपना गुजारा करता था। उनकी मोहब्बत किसी महँगे रेस्तरां या सिनेमा हॉल की मोहताज नहीं थी। उनकी डेट्स वीडियो कॉल पर होती थीं, जहाँ एक तरफ समंदर की लहरों का शोर होता और दूसरी तरफ पहाड़ी हवाओं की सरसराहट।

कभी-कभी तड़प इतनी बढ़ जाती कि सहर हफ़्तों तक ठीक से सो नहीं पाती। वह अपनी डायरी में आर्यन का चेहरा उकेरने की कोशिश करती, जबकि आर्यन ने अपने कमरे की दीवार पर सहर के शहर का एक नक्शा टाँग रखा था। वे अक्सर मज़ाक में कहते कि हम उस बिंदु पर मिलेंगे जहाँ समंदर पहाड़ से मिलता है, हालाँकि वे जानते थे कि ऐसा होना मुमकिन नहीं।
एक रात, सहर ने सिसकते हुए कहा, "आर्यन, मुझे डर लगता है। क्या हम बस इन मैसेजेस और कॉल तक ही सीमित रह जाएंगे? क्या मैं कभी तुम्हारे हाथ की गरमाहट महसूस नहीं कर पाऊँगी?"

आर्यन का गला रुंध गया, पर उसने खुद को संभाला। उसने कहा, "सहर, दुनिया में सबसे खूबसूरत चीज़ें आँखों से देखी नहीं जातीं, सिर्फ महसूस की जाती हैं। हमारा न मिलना ही हमारी मोहब्बत को पवित्र बनाए हुए है। हम मिल गए तो शायद यह तड़प खत्म हो जाए, और मैं इस तड़प को खोना नहीं चाहता क्योंकि यही मुझे तुम्हारे होने का अहसास दिलाती है।"

कहानी के उस मोड़ पर भी वे नहीं मिले। न कोई चमत्कार हुआ, न कोई ट्रेन उन्हें एक-दूसरे तक ले गई। सहर आज भी समंदर के पास है और आर्यन पहाड़ों में। पर हर रात, जब चाँद आसमान के बीचों-बीच आता है, दोनों अपनी-अपनी छतों पर खड़े होकर आँखें मूँद लेते हैं। उस पल में, हज़ारों मील की दूरी सिमट कर शून्य हो जाती है और वे एक-दूसरे की धड़कन को अपने भीतर महसूस करते हैं।

यह एक ऐसी दास्ताँ है जहाँ प्यार का मतलब 'पा लेना' नहीं, बल्कि एक-दूसरे के इंतज़ार में 'खुद को खो देना' था। उनका मिलना अधूरा था, पर उनका प्यार मुकम्मल से भी बढ़कर था।