समय अपनी गति से चलता रहा, पर राधा के घर की हवाएँ अभी भी भारी थीं। राधा के बेटे, 'आर्यन' के आने से घर में रौनक तो आई, पर साथ ही दूरियाँ भी बढ़ गईं। सूरज के चार पुराने बच्चे—जो अब किशोर (teenagers) हो रहे थे—उनके मन में यह बात घर कर गई थी कि अब इस घर में उनका हक कम हो गया है।
राधा का पूरा दिन छोटे आर्यन की देखभाल में बीतता। कभी उसकी मालिश, कभी उसे लोरी सुनाना, तो कभी उसकी छोटी-छोटी बीमारियों की चिंता। सूरज जब काम से आता, तो उसकी नज़रें सबसे पहले यह देखतीं कि उसके पुराने बच्चों का क्या हाल है। एक शाम, सूरज ने देखा कि बड़ा बेटा फटी हुई कमीज़ पहने बैठा है और राधा पास ही आर्यन को नए रेशमी झबले पहना रही है।
सूरज का गुस्सा फूट पड़ा। उसने बिना सोचे-समझे चिल्लाते हुए कहा, "मैंने पहले ही कहा था, सगा बच्चा होते ही तुम इन अनाथों को भूल जाओगी! यह भेदभाव कब तक चलेगा राधा?"
राधा की आँखों में आँसू भर आए। वह समझाना चाहती थी कि आर्यन अभी छोटा है, उसे नए कपड़ों और देखभाल की ज़्यादा ज़रूरत है, जबकि बड़े बच्चे अपना काम खुद कर सकते हैं। पर सूरज सुनने को तैयार नहीं था। इस झगड़े का असर बच्चों पर भी पड़ा। बड़े बच्चों ने आर्यन को 'छोटा दुश्मन' समझना शुरू कर दिया।
एक दिन, जब राधा रसोई में काम कर रही थी, उसने देखा कि उसकी सौतेली बेटी 'मीरा' चुपके से पालने के पास गई। राधा का दिल धक से रह गया, उसे लगा शायद मीरा आर्यन को नुकसान पहुँचाएगी। पर जो उसने देखा, उसने उसे सुन्न कर दिया। मीरा पालने के पास बैठकर धीरे से आर्यन की उंगली पकड़कर रो रही थी और फुसफुसा रही थी, "तू कितना खुशनसीब है छोटे, तेरी अपनी माँ तो तेरे पास है... हमें तो कोई सीने से लगाने वाला भी नहीं।"
राधा की ममता जाग उठी। उसे अहसास हुआ कि वह उन बच्चों को सिर्फ 'ज़िम्मेदारी' समझ रही थी, 'रिश्ता' नहीं। उसने मीरा को गले लगा लिया। उस पल उस घर की दीवारें भी जैसे भावुक हो उठीं। पुराने साये जो कभी डराते थे, अब धीरे-धीरे धुंधले पड़ने लगे थे, मानो पहली पत्नी की आत्मा अब शांत हो रही थी यह देखकर कि कोई उसकी जगह लेने नहीं, बल्कि उसके बच्चों को प्यार देने आई है।
लेकिन शांति ज़्यादा दिन नहीं टिकी। सूरज की ज़िद और समाज के तानों ने राधा को फिर से कटघरे में खड़ा कर दिया।
तभी एक ऐसी घटना घटी जिसने सब कुछ बदल दिया। आर्यन को तेज़ बुखार हुआ, और उसी वक्त सूरज घर पर नहीं था। राधा के पास दवा के पैसे नहीं थे क्योंकि सूरज सारी कमाई बड़े बच्चों की पढ़ाई के लिए अलग रख देता था। जब राधा बेबस होकर रो रही थी, तब वही सौतेले बच्चे अपनी गुल्लक लेकर उसके सामने खड़े हो गए।
पर क्या यह पैसे आर्यन को बचा पाएंगे? और जब सूरज लौटेगा, तो क्या वह राधा की ममता को पहचानेगा या फिर से उस पर 'सौतेला' होने का इल्ज़ाम लगाएगा?