Run Or Hide? - 1 in Hindi Thriller by silent script books and stories PDF | Run Or Hide? - 1

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Run Or Hide? - 1

‎शहर की सबसे पॉश कॉलोनी 'गोल्डन हाइट्स' के आखिरी छोर पर खड़ा वह महलनुमा बंगला आज किसी कब्रिस्तान की तरह खामोश था। बाहर से देखने पर वह आलीशान घर खुशहाली की मिसाल लगता था, लेकिन उन ऊंची दीवारों के पीछे एक दिन से एक चीख दबी हुई थी। शहर के मशहूर बिजनेसमैन मिस्टर रोनी का 18 साल का इकलौता बेटा,  लापता था।
‎घर के अंदर का माहौल भारी था। रोनी, जो कभी अपनी बुलंद आवाज़ के लिए जाने जाते थे, आज सोफे के कोने में सिमटे बैठे थे। उनके चेहरे पर थकान साफ दिख रही थी। हर आहट पर उनका दिल धक से रह जाता, इस उम्मीद में कि शायद उसके बेटे की खबर आए 
‎तभी, सन्नाटे को चीरती हुई घर की घंटी बजी— टिंग-टिंग!
‎रोनी झटके से खड़े हुए।
‎लड़खड़ाते कदमों से उन्होंने जाकर दरवाज़ा खोला। बाहर सिक्योरिटी गार्ड खड़ा था, जिसके पैरों के पास एक अजीब सा, काफी बड़ा लकड़ी का बॉक्स रखा था।
‎"सर, यह पार्सल आया है," गार्ड ने घबराते हुए कहा।
‎रोनी ने उस पार्सल को देखा। वह इतना बड़ा था कि उसमें एक पूरा इंसान समा सके। "पार्सल? हमने तो कुछ नहीं मँगवाया," रोनी ने थके हुए स्वर में कहा। उनका मन किसी अनहोनी की आशंका से कांप उठा, लेकिन फिर भी एक धुंधली सी उम्मीद में उन्होंने कांपते हाथों से उस बॉक्स की सील तोड़ी।
‎जैसे ही बॉक्स का ढक्कन खुला, रोनी के गले से आवाज़ निकलना बंद हो गई। उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई और आँखों के सामने अंधेरा छा गया। उस बॉक्स के अंदर उनके 18 साल के बेटे की बेजान लाश पड़ी थी।
‎रोनी का कलेजा मुँह को आ गया। वह बिना एक शब्द बोले, पत्थर की मूर्ति की तरह वहीं फर्श पर ढेर हो गए।
‎कुछ ही देर बाद, सन्नाटे को चीरती हुई पुलिस की सायरन की आवाज़ सुनाई दी। एक काली जीप बंगले के सामने रुकी और उसमें से उतरा इंस्पेक्टर नैतिक वह इस केस की जांच के लिए विशेष रूप से हेडक्वार्टर से भेजा गया था।
‎नैतिक ने कमरे में कदम रखा जहाँ लाश रखी थी। उसने अपनी टोपी उतारी और गहरी सांस ली। अपनी आँखों को फैलाकर उसने लाश का बारीकी से मुआयना करना शुरू किया। बच्चे के गले पर एक अजीब सी खरोंच का निशान था, जो किसी आम चोट जैसा नहीं लग रहा था।
‎तभी  नैतिक की नज़र उसकी मुट्ठी पर पड़ी, जो कसकर भिंची हुई थी। बड़ी सावधानी से उसने उंगलियों को खोला। अंदर  एक कागज़ का टुकड़ा था। नैतिक ने उसे खोलकर पढ़ा, जिस पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था:
‎"राउंड 1 खत्म... खेल अब शुरू हुआ है!"





25 साल पहले :
‎स्कूल की घंटी बजी,
‎जिसकी गूँज गलियारों में फैल गई। शोर-शराबे के बीच, 19 साल का विक्रम अपनी क्लास की तरफ बढ़ रहा था। उसका 6 फुट का लंबा-चौड़ा शरीर उसके लिए वरदान नहीं, बल्कि एक मुसीबत बन गया था। क्लास का दरवाज़ा उसके कद के हिसाब से छोटा था। उसे अंदर दाखिल होने के लिए काफी झुकना पड़ा, और उसी वक्त वह नज़ारा दिखा जिसने उसके स्वाभिमान को पहली चोट पहुँचाई।
‎दरवाज़े के पास खड़े रोनी ने अपने बगल में खड़े दोस्त को कोहनी मारी और विक्रम की ओर इशारा करते हुए ठहाका लगाया। "देख, देख... फिर से झुक कर आ रहा है ऊंट !