Hero - 4 in Hindi Spiritual Stories by Ram Make books and stories PDF | Hero - 4

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Hero - 4

लेकिन जतिन जैसे ही कमरे से बाहर निकलता है । अरुण जतिन से पूछता है। "जतिन महागुरु तुमसे क्या कह रहे थे। " फिर जतिन कहता है महागुरु ने कहा है। जो उन्होंने कहा है वह किसी को भी मत बताना। इस बात पर अरुण कहता है। "ठीक है" फिर तीनों शक्ति स्तंभ की तरफ जाना शुरू कर देते हैं। जो कि एक 7 फीट लंबा और 4 फीट चौड़ा खंभा था। जो ऊपर से गोलाई में था। यह एकदम शिवलिंग की तरह लग रहा था


। लेकिन उसके नीचे शिवलिंग के जैसा कुछ भी नहीं था। वह एक स्तंभ की तरह जमीन में गड़ा हुआ था। फिर अरुण और विनय परीक्षा की एक लाइन में लगते हैं जिसमें कम से कम 20 इंसान खड़े थे। तभी अरुण जतिन से कहता है। "जतिन आ जाओ लाइन में लग जाओ" लेकिन जतिन लाइन के साइड में से आगे चला जाता है। जिससे वहां पर खड़े हुए इंसान जतिन पर चिल्लाने लग जाते हैं। और कहते हैं। "ए लाइन मे चल तेरे बाप की जगह नहीं है। " वहां का शोर शराबा सुनते हुए स्तंभ के साथ मैं खड़ा हुआ पुजारी कहता है। "क्या हुआ सभी शांत हो जाओ। ।

" फिर भीड़ में से एक इंसान कहता है यह लड़का लाइन से नहीं आ रहा है। तभी का पुजारी जतिन से पूछता है। "तुम लाइन क्यों तोड़ रहे हो" पुजारी की बात सुनकर जतिन कुछ नहीं कहता बस अपनी जेब से एक सिक्का निकालता और पुजारी को दिखा देता है पुजारी उसी के को देखते हुए कहता है। "इसे महागुरु ने भेजा है"  "पूरी परीक्षा में पहले ही पास हो चुका है।" अब किसी और को कोई आपत्ति है। पुजारी की बात सुनकर कोई भी कुछ नहीं कहता हैं। तभी पुजारी जतिन को कहता हैं। "आओ और शक्ति स्तंब पर अपना हाथ रखो फिर जतिन शक्ति स्तंभ के पास जाता है और अपना हाथ शक्ति स्तंभ के ऊपर रख देता है जिससे वहां के सभी लोग और पुजारी तक भी हैरान रह जाते हैं। 

जतिन के शक्ति स्तंभ पर हाथ लगाते ही शक्ति स्तंभ पंच तत्वों की शक्तियों को छोड़कर बैंगनी रंग की रोशनी में चमकने लग जाता है।  वह रोशनी इतनी तेज होती है कि उससे पूरा काल मंदिर ढक जाता है। उस रोशनी के फैलने के कारण वहां के सभी पुजारियों का ध्यान शक्ति स्तंभ की तरफ आकर्षित हो जाता है जिससे सभी पुजारी शक्ति स्तंभ के पास पहुंच जाते हैं फिर शक्ति स्तंभ के पास पहले से ही खड़ा हुआ पुजारी गुस्से में चिल्लाता है। और जतिन से कहता है "तुमने शक्ति स्तंभ के साथ क्या किया अपना हाथ शक्ति स्तंब से हटाओ मूर्ख।" इतना सुनते ही जतिन जल्दी से अपना हाथ शक्ति स्तंब से हटा लेता है। जतिन के हाथ हटाने के बावजूद भी शक्ति स्तंब से वह बैंगनी रंग की रोशनी अभी भी चमक रही थी। जिसे देखते हुए सभी पुजारी 


चिंतित हो जाते हैं। और जतिन की तरफ गुस्से की नजर से देखने लगते जाते हैं। 
फिर शक्ति स्तंभ के पास खड़ा हुआ पुजारी सभी पुजारियों से कहता है। "इसको काल मंदिर से बाहर मत जाने देना।" उस पुजारी के इतना कहते ही सभी पुजारी जतिन को चारों तरफ से घेर लेते हैं। फिर शक्ति स्तंभ के पास खड़ा हुआ पुजारी गुस्से से कहता है। "सभी अपनी - अपनी शक्तियों को बुलाओ।" इतना कहते ही सभी पुजारी अपनी अपनी शक्तियों को एकत्रित करने लग गए। तभी सभी को एक आवाज सुनाई देती है। "रुक जाओ" वहां पर मौजूद हर इंसान जब उस आवाज की तरफ देखता है। तो वह अपना सर झुका लेता है। क्योंकि यह आवाज स्वयं महागुरु की थी। जो हवा में उड़ रहे थे।


फिर महागुरु उड़ते हुए शक्ति स्तंभ के पास जाते हैं। और फिर नीचे उतरते हैं। फिर महागुरु शक्ति स्तंब के पास खड़े हुए पुजारी से पूछते हैं। "क्या हुआ" तभी वह पुजारी कहता है। "महागुरु इस लड़के ने जैसे ही शक्ति स्तंभ के ऊपर अपना हाथ रखा शक्ति स्तंभ बैंगनी रोशनी से चमकने लग गया जब हमने इसको हाथ हटाने के लिए कहा तो इसके हाथ हटाने के बावजूद भी शक्ति स्तंभ में बैंगनी रोशनी से चमक रहा है। जो कि आप देख सकते हैं।" तभी महागुरु अपने चारों तरफ देखते और पुजारी की तरफ देखते हुए कहते हैं। "तुमने शक्ति स्तंभ के विकास में बाधा डाली इसके लिए तुम्हें सजा जरूर मिलेगी।" तभी वह पुजारी महागुरु के बोले हुए शब्दों को सुनकर हैरान रह जाता है। और चौकते हुए महागुरु से पूछता है। "शक्ति स्तंभ का विकास" इसके उत्तर में महागुरु कहते हैं। "हां शक्ति स्तंभ का विकास" फिर वहां पर खड़े हुए सभी व्यक्ति महागुरु की तरफ देखते हैं। ताकि महागुरु उन सब को यह बताएं कि शक्ति स्तंभ का विकास आखिर है क्या। महागुर


उन सबके मन में चल रहे प्रश्न को समझ जाते हैं और कहते हैं। "आज तक शक्ति स्तंभ ने ऐसी प्रक्रिया एक ही बार दी है। और वह 400 साल पहले दी थी। आज 400 सालों के बाद शक्ति स्तंब दोबारा से ऐसी प्रतिक्रिया दे रहा है। और 400 साल पहले शक्ति स्तंब में जिसके हाथ लगाने से ऐसी प्रक्रिया दी थी। वह आगे चलकर कॉल मंदिर का रक्षक बना था। जिसका नाम था। शिवांश" शिवांश का नाम सुनकर सभी पुजारी चौक जाते हैं। लेकिन जो नए पुजारी थे उन्हें शिवांश के बारे में कुछ भी नहीं पता था। फिर महागुरु कहते हैं। "काल मंदिर के रक्षक यानी शिवांश इस लड़के के परदादा थे। " पुजारियों को यह पता चला कि शिवांश जतिन के परदादा थे। तो जितने भी पुराने पुजारी थे। वे सभी घुटनों के बल बैठकर जतिन के सामने सर झुका लेते हैं। पुराने पुजारियों को ऐसा करते हुए देखकर नये पुजारी भी जतिन के सामने सिर झुका


लेते हैं। जिससे शक्तियां प्राप्त करने आए हुए लोग सभी चौक जाते हैं। 
तभी शक्ति स्तंभ के पास खड़ा हुआ पुजारी चलकर जतिन के पास आता है। और फ़िर जतिन से क्षमा मांगते हुए कहता है। "मुझे क्षमा करें मुझे नहीं पता था। कि आप महागुरु शिवांश के वंशज हो अगर मुझे यह पहले पता होता तो मैं आपके साथ ऐसा व्यवहार करने की सोचता भी नहीं। " तभी महागुरु जतिन से कहते हैं। "जतिन जाओ अपना कार्य पूर्ण करो और शक्ति स्तंभ के ऊपर अपना हाथ पूर्ण रखो" महागुरु की बात सुनकर जतिन हां में गर्दन हिलाता है। और शक्ति स्तंभ की ओर चलने लगता है। शक्ति स्तंभ के पास पहुंचने के बाद जतिन पीछे मुड़कर सभी पुजारियों को देखता है। और अपना हाथ दोबारा से शक्ति स्तंभ के ऊपर रख देता है। जिससे शक्ति स्तंभ पहले से कई गुना ज्यादा तेज बैंगनी रोशनी में चमकने लगता है। कुछ देर बाद वह बैंगनी रोशनी हल्की पड़ने लग गई और वह फ़िर बिल्कुल ही गायब हो गई उस रोशनी के गायब होने के बाद महागुरु कहते हैं। "अपना हाथ हटाओ जतिन" महागुरु की बात सुनकर जतिन अपना हाथ हटाता है। हाथ हटाने के बाद पूरा काल मंदिर हिलने लग जाता है। जिससे बाकी के पुजारी डर जाते हैं। और महागुरु से पूछते हैं


। "महागुरु यह क्या हो रहा है। " महागुरु कुछ कहते हैं। उससे पहले शक्ति स्तंभ के चारों ओर की धरती फट गई। इस धरती के नीचे से 24 फुट ऊंचा शिवलिंग निकलता है। पूरा शिवलिंग निकलने के बाद वहां पर सब कुछ शांत हो गया था। यह देखकर महागुरु के चेहरे पर एक लंबी चौड़ी मुस्कान आ गई और वह कहते हैं। "शक्ति स्तंभ पूर्णता विकसित हो गया अब यह शक्ति स्तंभ नहीं है अब यह महा शिवलिंग है। " फिर वहां पर शक्तियां प्राप्त करने आए हुए लोग महागुरु से पूछते है। "महागुरु तो हम शक्तियां कहां से प्राप्त करेंगे। " तभी महागुरु कहते हैं। "शक्ति कुंड से" महागुरु की बात सुनकर शक्ति स्तंभ के पास खड़ा हुआ पुजारी आता है। और महागुरु से पूछता है। "महागुरु क्या हमारा शक्ति कुंड को खोलना उचित रहेगा" इसके उत्तर में महागुरु कहते हैं। "यही सबसे उचित समय है।


" फिर वह पुजारी शक्ति कुंड को खोल देता है। और कहता है। "जो भी व्यक्ति परीक्षा में पास होगा उसे शक्ति कुंड में जाना है। और बाहर आ जाना है। बस तुम्हें तुम्हारी शक्तियां मिल जाएंगी। और शक्ति कुंड की शक्तियां छिपी हुई शक्ति होती हैं। जिससे किसी को यह भी नहीं पता चलेगा कि तुम्हें किस तत्व की शक्ति मिली है। और वह शक्ति पहले से ही विकसित शक्ति होंगी। " जिसे सुनकर सभी लोग खुश हो जाते हैं। और पुजारी दोबारा से कहता है। "मेरी बात अभी खत्म नहीं हुई है


।" पुजारी की इस बात को सुनकर सभी लोग शांत हो जाते हैं। और पुजारी की आगे की बात सुनना जारी करते हैं। फिर पुजारी कहता है। "और जो व्यक्ति अपनी शक्तियों को विकसित करने आया है वह भी शक्ति कुंड के जरिए अपनी शक्तियों को विकसित करेगा जिसके लिए तुम्हें परीक्षा की कोई आवश्यकता नहीं है। अगर तुम शक्तियों को विकसित करने के लायक हो तो शक्ति कुंड तुम्हारी शक्तियों को विकसित कर देगा। अन्यथा वह तुम्हें ऐसे ही छोड़ देगा।" जिससे शक्तियों को विकसित करने आए हुए लोग खुश और चिंतित हो जाते हैं। फिर जतिन भी शक्ति कुंड की तरफ चलना शुरू कर देता है। तभी महागुरु जतिन को रोकते हुए पूछते हैं। "कहां जा रहे हो" जिस के उत्तर में जतिन कहता है। "शक्ति कुंड में अपनी शक्तियों को विकसित करने। " फिर महागुरु कहते हैं। "जिस व्यक्ति ने शक्ति स्तंभ को पूर्णता विकसित कर दिया हो उसको शक्ति कुंड क्या विकसित करेगा। 


" फिर जतिन पूछता है। "मैं अपनी शक्तियों को कैसे विकसित करूं महागुरु" जतिन की बात सुनकर महागुरु कहते हैं। "तुम्हारी शक्तियों को काल मंदिर का मुख्य शिवलिंग यानी की काल शिवलिंग ही तुम्हारे शक्तियों को विकसित कर सकता है। वह काल शिवलिंग काल से परे है। याने कि उसमे स्वयं महाकाल का रूद्र अवतार विराजता हैं।" फिर जतिन महागुरु से पूछता है। "काल शिवलिंग कहां है।" फिर महागुरु कहते हैं। "आओ मेरे पीछे" यह सुनकर जतिन महागुरु के पीछे चलने लग जाता है। फिर वहां गुरु जतिन को मंदिर के बिल्कुल बीचो-बीच लेकर आते हैं। जहां पर कालचक्र बना हुआ होता है। फिर महागुरु जतिन से कहते हैं। "जतिन तुम्हें इस कालचक्र के बीचो बीच अपना हाथ रखना है" फिर जतिन हाँ मे सिर हिलाता है। और कालचक्र के बीचोबीच अपना हाथ रखने के लिए आगे बढ़ाता है। 


जैसे ही जतिन कालचक्र के बीचो बीच अपना हाथ रखता है। जतिन को एक जोर का झटका लगता है। जिससे जतिन का पूरा शरीर अकड़ जाता है। लेकिन उसका हाथ कालचक्र से दूर नहीं हो पाता फिर जतिन को लगता है। कि उसकी सारी हड्डियां टूट रही है और मांस फट रहा है। फिर कालचक्र के ऊपर हवा में एक शिवलिंग प्रकट होता है। शिवलिंग के प्रकट होते के साथ सब कुछ रुक जाता है। चिड़िया हवा में उड़ते उड़ते हवा में रुक जाती हैं। पेड़ों के पत्ते नीचे गिरते गिरते रुक जाते हैं। समुद्र की लहरें रुक जाती हैं। हवा रुक जाती है। और जलती हुई अग्नि तक भी रुक जाती है। शिवलिंग में से सफेद रोशनी जतिन के सिर के जरिए पूरे शरीर में फैल जाती है। जिससे जतिन को लगता है। कि उसका दोबारा से जन्म हो गया है।

एक अलग तरह की उर्जा जतिन को अपने अंदर महसूस हो रही थी। फिर वह शिवलिंग वहा से गायब हो जाता है। शिवलिंग के गायब होते के साथ पूरा संसार दोबारा से चलना शुरू हो जाता है। जतिन कालचक्र पर से अपना हाथ हटाता है। और महागुरु से जाने की आज्ञा लेता है। लेकिन महागुरु जतिन को रोक देते हैं। और कहते हैं। "मुझे तुमसे कुछ कहना है"
आखिर महागुरु जतिन को क्या कहना चाहते है।

फ़िर जतिन महागुरु से पूछता है। "महागुरु आप मुझसे क्या कहना चाहते हो।" तभी महागुरु कहते हैं। "जतिन मैं तुम्हें बस इस बात से अवगत कराना चाहता हूं कि तुम्हारे पास पूरे 5 तत्वों की शक्ति है। और इतिहास से लेकर आज तक सिर्फ 5 लोगों के पास ही पांचो तत्वों की शक्ति है। और उनमें से एक तुम्हारे परदादा थे। जो की चौथे नंबर पर आते हैं। तुम्हें अपनी शक्तियों पर काबू पाना होगा वरना तुम्हारी शक्तियाँ तुम्हारे साथ - साथ समस्त संसार का विनाश कर सकती हैं। और तुम्हें स्वयं कॉल शिवलिंग ने काल मंदिर के रक्षक के रूप में चुना है। जिससे भविष्य में कॉल मंदिर पर होने वाले सभी हमलों से तुम्हें कॉल मंदिर के रक्षा करनी होगी। चाहे इसके लिए तुम्हें अपनी जान ही क्यों न देनी पड़े। अगर तुम्हारे दुश्मन तुमसे ज्यादा ताकतवर है तो तुम अपने पांचो तत्वों की शक्ति को मिला सकते हो। जिससे तुम्हारी शक्तियों में वृद्धि होगी।


तुम्हारी अभी की शक्ति के हिसाब से तुम stage 1 के level-3 के बंदे को आसानी से मार सकते हो जितना जल्दी हो सके उतनी जल्दी तुम्हें level-2 पर पहुंचो। तुम्हें level-1 पर मारना बहुत आसान है। level 2 पर पहुंचने के बाद तुम अपनी शक्तियों का आसानी से ट्रिगर कर सकते हो।" फिर जतिन महागुरु से कहता है। "महागुरु मेरा भी एक सवाल है।" फिर महागुरु जतिन से कहते हैं। "बताओ क्या सवाल है।" फिर जतिन अपना सवाल पूछता है कि "element stone से अपनी शक्ति को कैसे बड़ाए।" तभी महागुरु कहते हैं। "अभी तुम्हें उन्हें पाने के लिए बहुत समय है।" तभी जतिन कहता है। "महागुरु मेरे पास एक earth stone है


।।" जतिन की बात सुनकर महागुरु हैरान रह जाते हैं और कहते हैं। "मुझे वह earth stone दिखाओ।" फिर जतिन अपने ऊपर वाली जेब में से अर्थस्टोन को निकालते हुए महागुरु को दिखाता है। earth stone को देखते हुए महागुरु कहते हैं यह वैसे सबसे low rank का earth stone है।  लेकिन इसकी रक्षा magical leaf deer कर रहा था। जो की एक stage 2 के level 3 का magical beast था बिना अपनी शक्तियों के विकसित करें तुमने उसे कैसे हराया।  महागुरु की बात सुनकर जतिन कहता है। "मेरे पास एक कवच है जो कि बहुत मजबूत है।" जतिन की बात सुनकर महागुरु कहते हैं। "क्या तुम उस कवच को मुझे एक बार दिखा सकते हो।"  इस पर जतिन अपनी गर्दन को हां मिलाता है। और अपनी घड़ी के ऊपर दो बार tap करता है। जिससे जतिन के शरीर पर दोबारा से वह कवच दिखाई देने लगता है। जतिन के कवच को देखते हुए महागुरु जतिन से पूछते हैं।।।।। "क्या मैं तुम्हें एक बार मार सकता हूं।" जिसका जतिन "हाँ" मे उत्तर देता है। फिर महागुरु अपनी मुट्ठी भीचते हैं। उस मुट्ठी पर हरी आग जल रही होती है। जो कि wind flame होती है।  फिर महागुरु जतिन के कवच पर एक मुक्का मारता है। जिस पर दो धातुओं के टकराने की आवाज आती है और जतिन दो कदम पीछे चला जाता है।  लेकिन जतिन के कवच पर किसी भी तरह का कोई निशान ना देखकर महागुरु कहते हैं। अति उत्तम फिर महागुरु जतिन से पूछते हैं। तुम्हारा यह कवच किस धातु का बना हुआ है। इसके उत्तर में जतिन कहता है। "मेरा यह कवच वाइब्रेनियम से बना हुआ है और इस वाइब्रेनियम के ऊपर मैंने डायमंड की कोटिंग कर रखी है। जिससे ये किसी भी तरह की शक्ति को या तो रिफ्लेक्ट कर देता है या आपने अंदर absorb करके मेरे कवच को charge कर देता है जिससे मेरे कवच की शक्ति बढ़ जाती है। इसी वजह से मेरा अगला हमला और भी ज्यादा ताकतवर होता है।" जतिन की बात सुनकर महागुरु कहते हैं। "तुम्हारा दिमाग अभी किस लेवल पर चल रहा है क्या तुम मुझे बता सकते हो।" इसका उत्तर देते हुए जतिन कहता है।।।।


। "लेवल 3" जिसे सुनकर महागुरु कुछ नहीं कहते जतिन महागुरु से पूछता है। "क्या हुआ क्या किसी प्रकार की कोई दिक्कत है" तभी महागुरु कहते हैं। "नहीं बस ऐसे ही पूछ रहा था।" जतिन महागुरु से पूछता है। "महागुरु इस अर्थस्टोन की मदद से मैं अपनी शक्तियों को कैसे बढ़ाओ।" फिर महागुरु जतिन से कहते हैं। "तुम्हारे पास जिस भी तत्व का एलिमेंट स्टोन उसे तुम्हें अपनी हथेली में रखना है और अपने उस तत्व के ऊपर ध्यान लगाना है। इस प्रकार वह एलिमेंट तुम्हारे शरीर के अंदर अपनी उर्जा भेजता रहेगा जिससे तुम्हारी शक्तियां बढ़ेंगी और यह जब अपनी पूरी ऊर्जा को तुम्हारे शरीर में भेज देगा। तो यह भी तुम्हारे शरीर में मिल जाएगा और तुम्हारे खून के साथ यह पूरे शरीर में यात्रा करता रहेगा।"  फिर जतिन महागुरु से जाने की आज्ञा लेता है। जिस पर महागुरु कहते हैं। "अकेले ही जाओगे अपने साथियों को लेकर नहीं जाओगे क्या?" जिस पर जतिन कहता ।।।


है। "नहीं मैं उन्हीं के पास जा रहा हूं।" अभी जिस पर महागुरु कहते हैं। "जब सभी का परीक्षण खत्म हो जाएगा तो ही तुम यहां से जा सकते हो।" जिसपे जतिन पूछता है। "ऐसा क्यों?" फिर महागुरु कहते हैं। "क्योंकि यह काल मंदिर का नियम है।" जिस पर जतिन गर्दन हिलाता है और पूछता है। "क्या मैं अपने साथियों के पास भी नहीं जा सकता।" जतिन के सवाल पर महागुरु मुस्कुराते हैं और कहते हैं। "तुम वहा जा सकते हो" जतिन विनय और अरुण के पास जाता है। जतिन जब शक्ति कुंड के पास पहुंचता है। तो विनय से पूछता है। "विनय क्या तुमने अपनी शक्तियों को विकसित कर लिया" जिस पर विनय हाँ मे गर्दन हिलता है। फ़िर जतिन शक्ति कुंड की तरफ देखता है। जिसपे अगला नंबर अरुण का था। जो व्यक्ति शक्ति कुंड में गया हुआ था। उसके बाहर निकलने के बाद पुजारी कहता है। 


"अरुण शक्ति कुंड में जाओ" अरुण पुजारी की आवाज सुनता है। तो वह शक्ति कुंड में प्रवेश करता है। तभी उस पुजारी की दृष्टि जतिन पर पड़ती है। जतिन को देखकर पुजारी थोड़ा डर जाता है। उसे डर इस बात का था कि कहीं जतिन शक्ति कुंड में प्रवेश न कर जाए। फिर वह पुजारी जतिन के पास आता है। और जतिन से पूछता है। आप यहां पर क्या करने आए हैं। इसके उत्तर में जतिन कहता है। "कुछ नहीं मैं बस यहां पर अपने दोस्त को लेने आया हूं।" जिससे पुजारी पूछता है कि "आपका मित्र कौन सा है।" जिस पर जतिन कहता है। "जो शक्ति कुंड में है।" वह मेरा प्रिय मित्र है जिस पर पुजारी कहता है। "मुझे याद रहेगा" फिर पुजारी शक्ति कुंड के पास जाकर खड़ा हो जाता है। पुजारी के इस तरह के व्यवहार को देखकर विनय उस पर हंसने लगता है। तभी जतिन विनय से पूछता है। "क्यों हंस रहे हो?" इस पर विनय कहता है। "कुछ नहीं बस ऐसे ही" फ़िर जतिन कहता है। "बेवजह तो पागल हंसते हैं।" फिर अरुण शक्ति कुंड में से निकल कर उन दोनों के पास आता है जिस पर जतिन पूछता है। "किस तत्व की शक्ति मिली?


" जतिन का सवाल सुनकर अरुण कहता है। "हवा" जिस पर जतिन कहता है। "मुझे तुमसे यही उम्मीद थी।" थोड़ी देर इंतजार करने के बाद सभी का परीक्षण खत्म हो जाता है। तभी महागुरु शक्ति कुंड के पास आकर कहते हैं। "सभी एकत्रित हो" महागुरु की बात सुनकर सभी एकत्रित हो जाते हैं। फिर महागुरु कहते हैं। "जैसे कि सभी को पता है हमारे काल मंदिर के पास चार रक्षक हैं। हमारे पांचवे रक्षक महागुरु शिवांश थे। लेकिन हमें आज तक उस स्थान का उम्मीदवार नहीं मिला था। जिस कारण हमारे पांचवे रक्षक की जगह अब तक खाली है। लेकिन आज उन्हीं के स्थान की कमी को पुरा उन्हीं के वंशज यानी जतिन पुरा करेगे। हां आप सब ने बिल्कुल सही सुना हमारे काल मंदिर का पांचवा रक्षक जतिन होगा। जतिन आगे आओ और शपथ ग्रहण करो।" तभी जतिन भीड़ से निकल कर आगे आता है। सभी जतिन की तरफ देख रहे होते हैं। उनकी नजरों को नजरअंदाज करते हुए जतिन सबके सामने खड़ा हो जाता है और अपना हाथ आगे कर अपने हाथ पर फायर फ्लेम बुलाकर कहता है। 



"मैं जतिन मेरे दादा शिवांश को साक्षी मानकर यह शपथ लेता हूं कि मैं अपनी आखिरी सांस तक इस काल मंदिर की रक्षा करूंगा।"



फिर महागुरु कहते हैं। "जतिन आज से काल सेना का नेतृत्व करेगा और ये काल सेना का सेनापति होगा मैं महागुरु आज से अभी से जतिन को काल रक्षक घोषित करता हूं।" तभी शक्ति कुंड के पास खड़ा हुआ पुजारी कहता है। "काल रक्षक जतिन की जय" फिर सभी जतिन की जय करने लग गए। 

काल रक्षक जतिन की जय 

काल रक्षक जतिन की जय

फिर महागुरु कहते हैं। "आज तुम सब में से कोई भी कहीं नहीं जाएगा सभी यही काल मंदिर में रहेंगे क्योंकि काल मंदिर के नये काल रक्षक के मिलने की खुशी में आज जश्न मनाया जाएगा।"

वहां पर मौजूद सभी लोग घुटनों के बल बैठकर महागुरु के आदेश का पालन करते हैं। फिर महागुरु कहते हैं। "तो फिर शाम को मिलते हैं।" इतना कहकर महागुरु चले जाते हैं। महागुरु के चले जाने के बाद वहां पर मौजूद सभी लोग आज की शाम का बेसब्री से इंतजार करने लगे थे। सभी लोग काल मंदिर के बगीचों में घूम रहे थे। तभी जतिन के पास विनय और अरुण आते हैं। और कहते हैं। "काल रक्षक" जतिन मुस्कुराते हुए कहता है


। "तुम्हारे लिए मैं तुम्हारा दोस्त और तुम्हारा दोस्त ही रहूंगा मुझे मेरे नाम से बुलाओ ना कि काल रक्षक के नाम से" फिर अरुण जतिन से कहता है। "जतिन तुमने कभी बताया नहीं तुम्हारे परदादा इतने महान इंसान थे।" अरुण की बात सुनकर जतिन कहता है। "खुद मुझे भी कुछ ही दिनों पहले पता चला कि मेरे परदादा जी इतने महान थे।" इतना कहकर जतिन हँसने लग जाता है। जतिन की बात सुनकर विनय और अरुण भी हँसने लग जाते हैं। शाम की तैयारी बड़ी जोर-शोर से चल रही थी।

फिर कुछ ही समय बाद शाम हो गई शाम के समय काल मंदिर का नजारा देखने में बहुत सुंदर लग रहा था। चारों तरफ अलग-अलग तरह की रोशनी चमक रही थी। जिससे काल मंदिर का नजारा एकदम स्वर्ग के जैसा लग रहा था। तभी महागुरु आते हैं और कहते हैं। "महोत्सव शुरू किया जाए" तभी शक्ति कुंड के पास खड़ा हुआ पुजारी आकर कहता है। "इस महोत्सव की शुरुआत क्यों ना जिसके लिए यह महोत्सव हो रहा है। उसी से की शक्तियों से  महोत्सव की शुरूआत की जाए।" उस पुजारी की बात सुनकर महागुरु का चेहरा बदल जाता है। जैसे ही महागुरु पुजारी को कुछ कहने के लिए अपना मुंह खोलता है। तभी वहां पर मौजूद सभी लोग कहने लग गए "हां हां सही कह रहे हो हां हां सही कह रहे हो।"