मेरे विचार बड़े अजीब से है ना, न इनमें कोई तुक है न ताव यानि सारे विचार बास की तरह खोखले है।नहीं ऐसा तो नहीं हो सकता ऐसा होता तो मैं इन विचारों पे लिख ही नहीं पाता। हां शायद लिख लेता हु पर लिखावट में कहा मेल मिलाप,मिलाप का आप जानो मेल तो मेरे फोन में है।अब पक्का हो गया मेरे विचार भी बास की तरह खोखले है।
विचारों के इस महाभण्डार में सही ओर अच्छे मजबूत विचार चुनना ही बड़े विचार की बात है।हर एक इंसान के मस्तिष्क में विचार आते रहते है। हर तरह के विचार आते है, अच्छे से लेकर बुरे तक। जो एक सामान्य व्यक्ति के दिमाग में विचार आते वो प्रत्येक व्यक्ति के दिमाग आते है कोई उन पे अमल करता तो कोई व्यक्त।
पता है हम सब के एक विचार कॉमन होता है वो ये कि प्रत्येक व्यक्ति के दिमाग में विचार आना।अगर हमारी इस टेढ़ी मेढ़ी खोपड़ी में विचार हीं न आए तो हम जिंदा रे सकते पाएंगे। मैं भी ना फिर कौन विचार करेगा।हा मानता हु जिंदा रेने के लिए पंचतत्व होना आवश्यक है पर हम जिंदा है ये जानने के लिए विचारों का होना अति आवश्यक है।विचारों के बिना जिंदा तो रे सकते है पर जीवित नहीं रे सकते ।समझ नहीं आया ना इसके लिए भी विचार करना पड़ेगा।
मैने तो शुरू में ही बोला था मेरे विचार में ना कोई तुक है न ताव, बास की तरह खोखले है। वैसे कभी विचार किया है कि खोखले विचारों की भी एक परत होती है।जो बहुत मजबूत बनी होती है।तभी तो विचार खोखले होते है और खोखले विचारों की एक खासियत होती है कि वे बजते भी है ओर गूंजते भी है,पर कभी लगते नहीं है। अगर खोखले विचार लगने लग गए तो बड़ा गहरा घाव देते है।विचारों की एक लहर में कहा से कहा चले गए पता ही नहीं चला।
हर पल विचारों में रहना भी एक कला है,क्योंकि ज्यादा विचार भी जहर से भी ज्यादा घातक साबित होते है।लेकिन जो इस जहर को पी रहा वो मरेगा धीरे धीरे और जो जी रहा वो तरेगा। क्योंकि विचारों के तूफान के आगे भी टिक पाया है जो विचारों की सीमाओं को जानता हो।जो नहीं जानता वो देह से प्राण निकाल बैठता है पर विचारों को नहीं जी पता है।
विचार भी जरूरी है बिना विचार तो कुछ भी नहीं है क्योंकि इंसान के शरीर को हवा चलती है जब हवा बंद इंसान का शरीर लाश में बदल जाता है। जैसे इंसान के शरीर को शरीर बनाए रखने के लिए हवा जरूरी है वैसे ही इंसान को इंसान बनाए रखने के लिए विचार भी जरूरी है। मैं आज लिख पा रहा हु तो भी विचारों की वजह से और कुछ नया कर पा रहा हु तो भी विचारों की वजह से।विचार इंसान को इंसान रखने का आधार हैं चाहे वो बुरा बने या अच्छा।हा एक बात ओर कि इंसान को अच्छे बुरे दोनों विचार आते है पर जब भी वो बुरे विचारों पे अमल करता है तो उसे विचार एक बार रोकने का प्रयास जरूर करते।
- प्रमोद